विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
बल वह बाह्य कारक (खींचना या धकेलना) है जो किसी वस्तु की विराम अवस्था, गति की अवस्था, दिशा या आकार में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने का प्रयास करता है। - मात्रक: न्यूटन (N) या $\text{kg m s}^{-2}$।
गैलीलियो गैलीली और आइजक न्यूटन ने गति संबंधी विचारों का प्रतिपादन किया। - गति का प्रथम नियम: "प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है, जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे।" इसे जड़त्व का नियम (Law of Inertia) भी कहते हैं।
graph TD
A[जड़त्व के प्रकार] --> B[विराम का जड़त्व: जैसे बस के अचानक चलने पर यात्रियों का पीछे की ओर झुकना]
A --> C[गति का जड़त्व: जैसे चलती गाड़ी के अचानक रुकने पर यात्रियों का आगे झुकना]
A --> D[दिशा का जड़त्व: जैसे मोड़ पर मुड़ने समय गाड़ी के यात्रियों का बाहर की ओर झुकना]
गति का द्वितीय नियम बल और त्वरण के बीच मात्रात्मक संबंध स्थापित करता है। इसके लिए हमें संवेग को समझना होगा।
किसी वस्तु के द्रव्यमान ($m$) और उसके वेग ($v$) के गुणनफल को उसका संवेग कहते हैं। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग की दिशा में होती है। $$p = m \cdot v$$ - मात्रक: $\text{kg m s}^{-1}$ (किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड)।
"किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के समानुपाती होती है और बल की दिशा में होती है।"
मान लीजिए $m$ द्रव्यमान की वस्तु का प्रारंभिक वेग $u$ है और उस पर $F$ बल समय $t$ तक लगाने पर उसका वेग $v$ हो जाता है: - प्रारंभिक संवेग $p_1 = m u$ - अंतिम संवेग $p_2 = m v$ - संवेग में परिवर्तन की दर $\propto \frac{m(v - u)}{t}$ - चूँकि $a = \frac{v - u}{t}$, अतः: $$F \propto m \cdot a \quad \Rightarrow \quad F = k \cdot m \cdot a$$ SI मात्रकों में आनुपातिकता नियतांक $k = 1$ होता है, इसलिए: $$F = m \cdot a$$ (अर्थात, बल = द्रव्यमान $\times$ त्वरण)
1 न्यूटन (N) वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में $1\text{ m s}^{-2}$ का त्वरण उत्पन्न करता है।
"प्रत्येक क्रिया के समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" यह क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
graph LR
A[वस्तु A] -->|क्रिया बल F_AB| B[वस्तु B]
B -->|प्रतिक्रिया बल F_BA = -F_AB| A
"यदि दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो, तो उस निकाय का कुल संवेग संरक्षित (नियत) रहता है।"
मान लीजिए दो गेंदें A और B हैं जिनका द्रव्यमान क्रमशः $m_A$ और $m_B$ है और वे एक ही दिशा में क्रमशः $u_A$ और $u_B$ वेग से चल रही हैं ($u_A > u_B$)। आपस में टकराने के बाद उनका वेग क्रमशः $v_A$ और $v_B$ हो जाता है: $$\text{Initial Momentum} = m_A u_A + m_B u_B$$ $$\text{Final Momentum} = m_A v_A + m_B v_B$$ संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, टक्कर से पहले का कुल संवेग और टक्कर के बाद का कुल संवेग बराबर रहता है: $$m_A u_A + m_B u_B = m_A v_A + m_B v_B$$ (जब तक कि कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो)। - प्रतिक्षेप वेग (Recoil Velocity of Gun): जब बंदूक से गोली दागी जाती है, तो कुल संवेग शून्य बनाए रखने के लिए बंदूक पीछे हटती है। बंदूक का प्रतिक्षेप वेग: $$v_{gun} = -\frac{m_{bullet} \cdot v_{bullet}}{m_{gun}}$$ Here, negative sign indicates recoil direction is opposite to bullet direction.