विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
ब्रह्मांड का प्रत्येक पिंड प्रत्येक दूसरे पिंड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
graph LR
A[पिंड M] -->|F| B[पिंड m]
B -->|F| A
A ---|d| B
मान लीजिए दो पिंडों के द्रव्यमान $M$ और $m$ हैं तथा उनके बीच की दूरी $d$ है: $$F \propto M \cdot m \quad \text{and} \quad F \propto \frac{1}{d^2}$$ दोनों को मिलाने पर: $$F = G \frac{M \cdot m}{d^2}$$
यहाँ $G$ एक आनुपातिकता स्थिरांक है, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक (Universal Gravitational Constant) कहते हैं। - हेनरी कैवेन्डिश ने सर्वप्रथम $G$ का प्रयोगात्मक मान ज्ञात किया। - $G$ का मान: $6.673 \times 10^{-11} \text{ N m}^2 \text{ kg}^{-2}$। - $G$ का मान पूरे ब्रह्मांड में हर जगह स्थिर (constant) रहता है, यह बदलता नहीं है।
जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसमें उत्पन्न होने वाले त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण ($g$) कहते हैं। - मात्रक: $\text{m s}^{-2}$।
पृथ्वी की सतह पर स्थित $m$ द्रव्यमान की वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल: $$F = G \frac{M \cdot m}{R^2} \quad \text{and} \quad F = m \cdot g$$ दोनों की तुलना करने पर: $$g = \frac{G \cdot M}{R^2}$$ (जहाँ $M$ पृथ्वी का द्रव्यमान और $R$ पृथ्वी की त्रिज्या है।) - पृथ्वी की सतह पर $g$ का मान लगभग $9.8 \text{ m s}^{-2}$ होता है। - g और G में अंतर: - $G$ एक सार्वत्रिक स्थिरांक है (मान स्थिर रहता है)। - $g$ का मान विभिन्न स्थानों पर (ध्रुवों पर अधिक, भूमध्य रेखा पर कम, ऊंचाई या गहराई पर जाने पर) बदलता रहता है।
### चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार
चंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या पृथ्वी से बहुत कम है, जिसके कारण चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में कमजोर होता है। $$W_{\text{moon}} = \frac{1}{6} \times W_{\text{earth}}$$ (अर्थात, चंद्रमा पर वस्तु का भार = 1/6 $\times$ पृथ्वी पर उसका भार)
जब किसी वस्तु को किसी तरल (द्रव या गैस) में डुबोया जाता है, तो तरल द्वारा वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाया जाता है, जिसे उत्प्लावन बल (Buoyant Force) कहते हैं। इस परिघटना को उत्प्लावकता कहते हैं। - कोई वस्तु पानी में तैरती या डूबती क्यों है? - यदि वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम है, तो उत्प्लावन बल वस्तु के भार से अधिक होगा और वस्तु तैरेगी। - यदि वस्तु का घनत्व पानी से अधिक है, तो वस्तु डूब जाएगी (जैसे लोहे की कील का डूबना)।
"जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह ऊपर की ओर एक बल का अनुभव करती है, जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।" $$F_{\text{buoyant}} = W_{\text{fluid}}$$ (अर्थात, उत्प्लावन बल = वस्तु द्वारा विस्थापित तरल का भार)
graph TD
A[आर्कमीडीज का सिद्धांत] --> B[विस्थापित जल का भार = उत्प्लावन बल]
B --> C{क्या उत्प्लावन बल > वस्तु का भार?}
C -- हाँ --> D[वस्तु तैरेगी]
C -- नहीं --> E[वस्तु डूब जाएगी]
किसी पदार्थ का घनत्व उसके प्रति एकांक आयतन के द्रव्यमान को कहते हैं ($\text{Density} = \text{Mass} / \text{Volume}$)। $$\text{Relative Density} = \frac{\text{Density of Substance}}{\text{Density of Water}}$$ (अर्थात, आपेक्षिक घनत्व = किसी पदार्थ का घनत्व / पानी का घनत्व) - यह दो समान राशियों का अनुपात है, इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता।