विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
पृथ्वी पर जीवन के लिए वायु अनिवार्य है। वायु नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प का एक मिश्रण है।
वायुमंडल पृथ्वी को एक कंबल की तरह ढकता है। हवा ऊष्मा की कुचालक होती है। - यह दिन के समय पृथ्वी के तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है। - यह रात के समय ऊष्मा को बाहरी अंतरिक्ष में जाने की दर को कम करता है, जिससे औसत तापमान स्थिर रहता है। - शुक्र और मंगल ग्रह: वहाँ वायुमंडल में 95–97% कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) है, जिसके कारण वहाँ कोई जीवन नहीं है और अत्यधिक गर्म तापमान है।
दिन के समय स्थल (जमीन) का भाग जल (समुद्र) की तुलना में जल्दी गर्म होता है। स्थल के ऊपर की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे कम दाब का क्षेत्र बनता है। तब समुद्र की ठंडी हवा स्थल की ओर बहती है। इसे तटीय हवा (Sea breeze) कहते हैं। रात के समय इसका विपरीत होता है, हवा स्थल से समुद्र की ओर चलती है जिसे स्थलीय हवा (Land breeze) कहते हैं।
graph LR
A[दिन के समय: स्थल गर्म] --> B[स्थल पर निम्न दाब]
C[समुद्र ठंडा] -->|ठंडी हवा का प्रवाह| A
D[रात के समय: स्थल ठंडा] --> E[समुद्र गर्म]
D -->|हवा का प्रवाह| E
दिन के समय जलाशयों का पानी गर्म होकर जलवाष्प बनता है और हवा में ऊपर उठता है। जैसे-जैसे हवा ऊपर उठती है, यह फैलती है और ठंडी हो जाती है। हवा में मौजूद धूल के कणों के चारों ओर जलवाष्प संघनित होकर बादल बनाती है। जब पानी की बूँदें भारी हो जाती हैं, तो वे बारिश, बर्फ या ओलों के रूप में नीचे गिरती हैं।
जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) के जलने से सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड हवा में मुक्त होते हैं। ये गैसें वर्षा के जल में घुलकर अम्लीय वर्षा (Acid Rain) बनाती हैं। वायु प्रदूषण से फेफड़ों के रोग और कैंसर का खतरा बढ़ता है। हवा में निलंबित कणों की अधिकता से दृश्यता कम हो जाती है, जिसे धुंध (Smog) कहते हैं।
जल पृथ्वी की सतह के लगभग 75% भाग पर पाया जाता है। सजीवों की कोशिकाओं में होने वाली सभी कोशिकीय प्रक्रियाएं जलीय माध्यम में ही होती हैं।
जल में हानिकारक अवांछित पदार्थों (जैसे कीटनाशक, उर्वरक, सीवेज, उद्योगों का कचरा) का मिलना जल प्रदूषण कहलाता है। इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे जलीय जीवों की मृत्यु होने लगती है।
मृदा (मिट्टी) पृथ्वी की सबसे बाहरी परत है जिसमें पौधे उगते हैं।
मृदा का निर्माण पत्थरों के टूटने-फटने की लंबी प्रक्रिया से होता है, जिसे निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं: 1. सूर्य: दिन की गर्मी से पत्थर फैलते हैं और रात को सिकुड़ते हैं, जिससे उनमें दरारें पड़ जाती हैं। 2. पानी: दरारों में पानी जमा होने और जमने से दरारें चौड़ी हो जाती हैं। बहता पानी पत्थरों को आपस में घिसकर बारीक कणों में बदल देता है। 3. हवा: तेज़ हवाएं पत्थरों को आपस में टकराकर तोड़ती हैं। 4. सजीव (लाइकेन और मॉस): ये पत्थरों की सतह पर उगते हैं और कुछ रासायनिक पदार्थ छोड़ते हैं जो पत्थर को चूर्ण में बदल देते हैं।
जीवमंडल के जैविक (सजीव) और अजैविक (हवा, पानी, मिट्टी) घटकों के बीच पोषक तत्वों के निरंतर आदान-प्रदान को जैव-भू-रासायनिक चक्र कहते हैं।
graph TD
A[जैव-भू-रासायनिक चक्र] --> B[जल चक्र]
A --> C[नाइट्रोजन चक्र: 78% वायुमंडल]
A --> D[कार्बन चक्र: CO₂ संतुलन]
A --> E[ऑक्सीजन चक्र: 21% वायुमंडल]
वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन गैस है, लेकिन पौधे इसका सीधे उपयोग नहीं कर सकते। 1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation): - फलीदार पौधों (Leguminous plants) की जड़ों की ग्रंथियों में रहने वाले राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स में बदलते हैं। - बिजली चमकने (Lightning) के समय उच्च तापमान पर हवा की नाइट्रोजन ऑक्सीजन से क्रिया करके नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनाती है, जो वर्षा जल में घुलकर मिट्टी में आ जाते हैं। 2. अमोनीकरण (Ammonification): मृत जीवों के नाइट्रोजन युक्त पदार्थों का अमोनिया में बदलना। 3. नाइट्रीकरण (Nitrification): अमोनिया का नाइट्रेट्स में बदलना। 4. विनाइट्रीकरण (Denitrification): मिट्टी में मौजूद कुछ जीवाणु (जैसे स्यूडोमोनास) नाइट्रेट्स को वापस नाइट्रोजन गैस में बदल देते हैं जो वायुमंडल में चली जाती है।
कार्बन मूल रूप में हीरा और ग्रेफाइट में पाया जाता है। वायुमंडल में यह कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के रूप में होता है। - CO2 का स्थिरीकरण: - हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा $CO_2$ को ग्लूकोज में बदलते हैं। - समुद्री जंतु पानी में घुले कार्बोनेट से अपने कवच बनाते हैं। - CO2 का वायुमंडल में वापस जाना: - जंतुओं और पौधों द्वारा श्वसन (Respiration) क्रिया में। - ईंधन के दहन (Combustion) और मृत पदार्थों के अपघटन द्वारा।
वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड $CO_2$, मीथेन $CH_4$, जलवाष्प) पृथ्वी से वापस जाने वाली अवरक्त विकिरणों (infrared rays) को अवशोषित कर लेती हैं, जिससे पृथ्वी का वातावरण गर्म रहता है। इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं। - मानवीय गतिविधियों से $CO_2$ का स्तर बढ़ने के कारण वैश्विक औसत तापमान बढ़ रहा है, जिसे वैश्विक ऊष्मण (Global Warming) कहते हैं।
वायुमंडल के ऊपरी भाग (समतापमंडल / Stratosphere) में ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं वाला अणु ओजोन ($O_3$) पाया जाता है। - यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों (UV rays) को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है। - ओजोन परत का ह्रास: मानव निर्मित रसायन क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) (रेफ्रिजरेटर और अग्निशामक में प्रयुक्त) ओजोन अणुओं को नष्ट कर देते हैं, जिससे ओजोन परत पतली हो गई है (जैसे अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र)।