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परमाणु की संरचना — अध्ययन नोट्स

विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।

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1. अपरमाणुक कण (Subatomic Particles)

19वीं शताब्दी के अंत तक वैज्ञानिकों को पता चला कि परमाणु साधारण और अविभाज्य कण नहीं हैं, बल्कि इनमें कम से कम तीन अपरमाणुक कण विद्यमान होते हैं: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन।

कण प्रतीक आवेश द्रव्यमान खोजकर्ता
इलेक्ट्रॉन $e^-$ ऋणात्मक ($-1$) $9.1 \times 10^{-31}$ kg जे.जे. थॉमसन
प्रोटॉन $p^+$ धनात्मक ($+1$) $1.67 \times 10^{-27}$ kg ($1\text{ u}$) ई. गोल्डस्टीन
न्यूट्रॉन $n$ उदासीन ($0$) $1.67 \times 10^{-27}$ kg ($1\text{ u}$) जे. चैडविक

2. परमाणु के मॉडल (Models of the Atom)

थॉमसन का मॉडल (Thomson's Model)

थॉमसन ने परमाणु की संरचना क्रिसमस केक या तरबूज के मॉडल की तरह प्रस्तावित की। उनके अनुसार: - परमाणु एक धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन तरबूज के बीज की तरह धँसे होते हैं। - ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं, इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होता है।

रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल (Rutherford's Model)

अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी ($1000$ परमाणु मोटी) पर तेज़ गति से चल रहे अल्फा ($\alpha$) कणों (द्विआवेशित हीलियम आयन $He^{2+}$) की बौछार कराई।

graph TD
    A[अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग] --> B[अधिकांश अल्फा कण पन्नी से सीधे निकल गए: परमाणु का अधिकांश भाग खाली है]
    A --> C[कुछ कण छोटे कोणों से विक्षेपित हुए: धनावेशित भाग बहुत छोटे स्थान में है]
    A --> D[20,000 में से 1 कण वापस लौट आया: नाभिक का आयतन परमाणु की तुलना में नगण्य है]

रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल के मुख्य लक्षण: 1. परमाणु का केंद्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है। परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में होता है। 2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वर्तुलाकार मार्ग (orbits) में चक्कर लगाते हैं। 3. नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में बहुत छोटा होता है (नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से लगभग $10^5$ गुना छोटी होती है)।

रदरफोर्ड के मॉडल की कमी: वर्तुलाकार मार्ग में चक्रण करते हुए इलेक्ट्रॉन का स्थायी होना संभव नहीं है। त्वरित आवेशित कण ऊर्जा विकीर्ण करेगा, जिससे उसकी ऊर्जा कम होगी और अंततः वह नाभिक से टकरा जाएगा, जिससे परमाणु नष्ट हो जाना चाहिए। परंतु परमाणु स्थायी होते हैं।

नील्स बोर का मॉडल (Bohr's Model)

रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए नील्स बोर ने 1912 में निम्नलिखित अवधारणाएं प्रस्तुत कीं: 1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा (discrete orbit) कहते हैं। 2. जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता।

इन कक्षाओं (या कोशों) को ऊर्जा स्तर कहते हैं। इन्हें अक्षरों K, L, M, N... या संख्याओं n = 1, 2, 3, 4... द्वारा दर्शाया जाता है।

3. विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों का वितरण (Distribution of Electrons)

बोर और बरी ने कोशों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण के नियम प्रस्तुत किए:

  1. किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या सूत्र $2n^2$ द्वारा दी जाती है, जहाँ $n$ कोश की संख्या है:
  2. K कोश ($n=1$): $2(1)^2 = 2$ इलेक्ट्रॉन
  3. L कोश ($n=2$): $2(2)^2 = 8$ इलेक्ट्रॉन
  4. M कोश ($n=3$): $2(3)^2 = 18$ इलेक्ट्रॉन
  5. N कोश ($n=4$): $2(4)^2 = 32$ इलेक्ट्रॉन
  6. सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 हो सकती है।
  7. किसी परमाणु के बाहरी कोश में तब तक इलेक्ट्रॉन नहीं भरते जब तक कि उससे अंदर वाले कोश पूरी तरह नहीं भर जाते (कोश क्रमानुसार भरते हैं)।

4. संयोजकता (Valency)

परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) कहते हैं। उत्कृष्ट गैसों (जैसे हीलियम, नियॉन) के बाहरी कोश पूरी तरह भरे होते हैं (8 इलेक्ट्रॉन, हीलियम में 2), इसलिए उनकी रासायनिक क्रियाशीलता शून्य होती है और संयोजकता 0 होती है।

प्रत्येक तत्व के परमाणु अपने बाहरी कोश में अष्टक (octet) पूरा करने के लिए आपस में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी, ग्रहण या त्याग करते हैं। - संयोजकता ज्ञात करना: - यदि बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1, 2, 3, 4 है, तो संयोजकता क्रमशः 1, 2, 3, 4 होगी (त्यागना आसान है)। - यदि बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 5, 6, 7 है, तो संयोजकता (8 - बाहरी इलेक्ट्रॉन) होगी। जैसे नाइट्रोजन (बाहरी कोश = 5) की संयोजकता $8 - 5 = 3$ होगी (3 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना आसान है)।

5. परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या (Atomic and Mass Numbers)

परमाणु को दर्शाने का प्रारूप: $$\text{ }^{A}_{Z}\text{X}$$

6. समस्थानिक और समभारिक (Isotopes and Isobars)

समस्थानिक (Isotopes)

एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या ($Z$) समान होती है, लेकिन द्रव्यमान संख्या ($A$) भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं। - उदाहरण: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं — प्रोटियम ($^1_1H$), ड्यूटेरियम ($^2_1H$), और ट्रिटियम ($^3_1H$)। कार्बन के दो समस्थानिक हैं: $^{12}_6C$ और $^{14}_6C$। - रासायनिक गुण: समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं (क्योंकि उनकी इलेक्ट्रॉन संख्या समान है), लेकिन भौतिक गुण भिन्न होते हैं। - अनुप्रयोग: - यूरेनियम के समस्थानिक का उपयोग परमाणु भट्टी में ईंधन के रूप में होता है। - कोबाल्ट के समस्थानिक ($^{60}Co$) का उपयोग कैंसर के उपचार में होता है। - आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग घेंघा (goitre) रोग के इलाज में होता है।

समभारिक (Isobars)

विभिन्न तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या ($A$) समान होती है, लेकिन परमाणु संख्या ($Z$) भिन्न होती है, समभारिक कहलाते हैं। - उदाहरण: कैल्शियम ($^{40}{20}Ca$) और आर्गन ($^{40}{18}Ar$)। दोनों का कुल द्रव्यमान 40 u है, लेकिन परमाणु संख्या क्रमशः 20 और 18 है।

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