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स्वास्थ्य (Health) केवल रोगमुक्त होना नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार: "स्वास्थ्य किसी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कार्य करने की पूर्ण क्षमता की स्थिति है।"
स्वास्थ्य किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला नहीं है, यह उसके भौतिक और सामाजिक पर्यावरण पर निर्भर करता है। - भौतिक पर्यावरण: स्वच्छ पेयजल, कचरा प्रबंधन, सुरक्षित नालियां, और स्वच्छ हवा। - सामाजिक पर्यावरण: आपसी सामंजस्य, सामाजिक समानता और आर्थिक स्थिति (ताकि पौष्टिक भोजन खरीदा जा सके)। अतः, व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सामुदायिक स्वच्छता और सामाजिक समानता अनिवार्य है।
जब कोई रोग होता है, तो शरीर के एक या अनेक अंगों की कार्यप्रणाली ख़राब हो जाती है, जिससे कुछ लक्षण (symptoms) प्रकट होते हैं (जैसे सिरदर्द, बुखार, खाँसी, दस्त)।
graph TD
A[रोगों के प्रकार] --> B[संक्रामक: रोगाणुओं द्वारा / संचरणशील]
A --> C[असंक्रामक: आंतरिक कारणों से / गैर-संचरणशील]
B --> D[वायरस: जैसे एड्स, फ्लू]
B --> E[बैक्टीरिया: जैसे टीबी, टाइफाइड]
B --> F[प्रोटोजोआ: जैसे मलेरिया]
C --> G[हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर]
संसार में रोगों को फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों को श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
| रोगाणु श्रेणी | उत्पन्न होने वाले रोग | विशेषताएं |
|---|---|---|
| विषाणु (Virus) | सर्दी-जुकाम, इन्फ्लूएंजा, डेंगू, एड्स (AIDS), पोलियो, हेपेटाइटिस। | ये सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी हैं। एंटीबायोटिक्स इन पर बेअसर हैं। |
| जीवाणु (Bacteria) | टाइफाइड, हैजा, टीबी (तपेदिक), एंथ्रेक्स, मुहांसे। | ये एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं। एंटीबायोटिक्स इनकी कोशिका भित्ति बनने से रोकते हैं। |
| कवक (Fungi) | विभिन्न त्वचा रोग (दाद, खाज, खुजली)। | ये विषमपोषी यूकैरियोटिक जीव हैं। |
| प्रोटोजोआ (Protozoa) | मलेरिया (प्लास्मोडियम द्वारा), कालाजार (लीशमानिया द्वारा), निद्रालु व्याधि। | यूकैरियोटिक एककोशिकीय जीव। |
| कृमि (Worms) | फीताकृमि संक्रमण, फाइलेरिया (हाथीपाँव), पेट के कीड़े। | बहुकोशिकीय परजीवी जीव। |
एंटीबायोटिक्स वे दवाइयां हैं जो जीवाणुओं (bacteria) के जीवन चक्र में महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक मार्गों को रोकती हैं (जैसे पेनिसिलिन जीवाणु की कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया को रोकता है)। - विषाणु (Virus) के पास अपनी जैव-रासायनिक प्रणाली नहीं होती, वे हमारे शरीर की मशीनरी का उपयोग करते हैं, इसलिए एंटीबायोटिक्स विषाणु जनित रोगों (जैसे सर्दी-जुकाम) पर काम नहीं करतीं।
संक्रामक रोग रोगी से स्वस्थ व्यक्ति तक निम्नलिखित माध्यमों से फैलते हैं: - वायु द्वारा: खाँसने या छींकने पर हवा में निकले सूक्ष्म बूँदें (Droplet infection) स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती हैं। जैसे: सर्दी-जुकाम, टीबी, निमोनिया। - जल द्वारा: जब संक्रमित व्यक्ति का मल या कचरा पेयजल में मिल जाता है और उसे कोई अन्य व्यक्ति पीता है। जैसे: हैजा, हेपेटाइटिस (पीलिया)। - लैंगिक संपर्क द्वारा: कुछ रोग शारीरिक संबंधों के कारण फैलते हैं (जैसे सिफलिस, एड्स)। एड्स संक्रमित सूई, स्तनपान या संक्रमित रक्त चढ़ाने से भी फैलता है। - रोग वाहक (Vectors) द्वारा: वे जंतु जो रोगाणुओं को रोगी से स्वस्थ व्यक्ति तक पहुँचाते हैं। - मच्छर: मादा एनाफिलीज मच्छर मलेरिया फैलाती है; मादा एडीज मच्छर डेंगू फैलाती है।
graph LR
A[संक्रमित व्यक्ति] -->|वायु: छींकना| B(स्वस्थ व्यक्ति)
A -->|जल: दूषित जल| B
A -->|वाहक: मच्छर/मक्खी| B
A -->|शारीरिक संपर्क: सूई/लैंगिक| B
संक्रामक रोगों के उपचार के दो प्रमुख तरीके हैं:
"बचाव इलाज से बेहतर है।" संक्रामक रोगों से बचने के दो तरीके हैं:
टीकाकरण (Vaccination) हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को मूर्ख बनाने की एक विधि है। - इसमें शरीर में मृत या कमजोर रोगाणु (टीका/Vaccine) प्रवेश कराए जाते हैं। - हमारा प्रतिरक्षा तंत्र इन कमजोर रोगाणुओं से लड़कर उन्हें मार देता है और उनकी पहचान को स्मृति कोशिकाओं (Memory cells) में सुरक्षित रख लेता है। - जब भविष्य में असली शक्तिशाली रोगाणु हमला करता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र तुरंत अत्यधिक तीव्रता से हमला करके उसे नष्ट कर देता है। - एडवर्ड जेनर ने सर्वप्रथम चेचक (Smallpox) के टीके की खोज की थी। वर्तमान में पोलियो, टिटनेस, टीबी, हेपेटाइटिस आदि के टीके उपलब्ध हैं।