भारत एशिया का एक प्रमुख देश है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। भारत की स्थिति, आकार और इसके पड़ोसी देशों का ज्ञान भूगोल के अध्ययन की आधारशिला है। भारत का अक्षांशीय विस्तार लगभग 30° और देशांतरीय विस्तार भी लगभग 30° है। देश के मध्य से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है, जो भारत को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है। विश्व में क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत सातवां सबसे बड़ा देश है। इस अध्याय में हम भारत की स्थिति, विस्तार, आकार, भारतीय मानक समय, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की भूमिका तथा पड़ोसी देशों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
भारत पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। भारत का मुख्य भू-भाग 8°4' उत्तरी अक्षांश से 37°6' उत्तरी अक्षांश तक तथा 68°7' पूर्वी देशांतर से 97°25' पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है। भारत के दक्षिण में स्थित द्वीपसमूह कन्याकुमारी से भी दक्षिण में निकोबार और अंडमान द्वीप समूह हैं। भारत का दक्षिणी सिरा कन्याकुमारी (अब इंदिरा पॉइंट भी है, जो निकोबार में) को माना जाता है। कर्क रेखा (23°30' उत्तरी अक्षांश) भारत के मध्य में स्थित होने के कारण देश के उत्तरी भाग को शीतोष्ण क्षेत्र और दक्षिणी भाग को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में विभाजित करती है।
भारत का पूर्व-पश्चिम देशांतरीय विस्तार लगभग 30° है। गुजरात के द्वारका और अरुणाचल प्रदेश के अन्जॉ के बीच सूर्योदय का समय लगभग 2 घंटे भिन्न होता है। इस समय-अंतर को कम करने के लिए भारत ने 82°30' पूर्वी देशांतर (जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरती है) को अपना मानक देशांतर (Standard Meridian) बनाया। भारतीय मानक समय (IST) इसी देशांतर से निर्धारित होता है और यह ग्रीनविच माध्य समय (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
भारत का कुल क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है। विश्व के कुल भू-क्षेत्रफल का लगभग 2.4 प्रतिशत भाग भारत में है। भारत की स्थलीय सीमा लगभग 15,200 किलोमीटर है, जबकि तटीय सीमा मुख्य भू-भाग की 7,516.6 किलोमीटर है (द्वीपीय क्षेत्रों सहित)। भारत का क्षेत्रफल रूस, कनाडा, अमेरिका, चीन, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया के बाद विश्व में सातवां सबसे बड़ा है।
भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी, पश्चिमी तट पर अरब सागर तथा दक्षिणी सिरे पर हिंद महासागर स्थित है। भारत के दक्षिण-पश्चिम में मालदीव तथा दक्षिण-पूर्व में श्रीलंका स्थित हैं। श्रीलंका भारत से पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) तथा मन्नार की खाड़ी द्वारा अलग किया गया है।
भारत का भूगोलिक महत्व बहुत अधिक है। भारत हिंद महासागर के मध्य में स्थित होने के कारण अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों पर स्थित है। दक्कन प्रायद्वीप समुद्र में काफी दूर तक फैला हुआ है, जिससे भारत को पूर्वी और पश्चिमी दोनों देशों से व्यापार के लिए समीपता मिलती है। प्राचीन काल से ही भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बौद्धिक चिंतन का केंद्र रहा है।
भारत की स्थलीय सीमाओं के पार कई देश स्थित हैं। भारत के पड़ोसी देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:
इनके अतिरिक्त भारत के साथ जल-सीमाएं साझा करने वाले देशों में बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और इंडोनेशिया शामिल हैं। भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह इंडोनेशिया और थाईलैंड के समुद्री क्षेत्रों के निकट स्थित हैं।
भारत का समुद्री मार्गों पर स्थित होना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत लाभकारी रहा है। स्वेज नहर (1869 में खोली गई) ने भारत और यूरोप के बीच की समुद्री दूरी को काफी कम कर दिया, जिससे व्यापार तेज हुआ। पश्चिमी एशिया के तेल-उत्पादक देशों की समीपता ने भारत को ऊर्जा व्यापार में सुविधा दी। इसके अलावा भारत की स्थिति अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच भी मध्यमार्गी है। प्राचीन काल में भारत के व्यापारिक संबंध रोमन साम्राज्य और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़े थे, और आज भी भारत का व्यापार संसार के लगभग सभी देशों से जुड़ा है।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल क्षेत्रफल | लगभग 32.8 लाख वर्ग किमी |
| विश्व में क्षेत्रफल की रैंक | सातवां सबसे बड़ा |
| स्थलीय सीमा | लगभग 15,200 किमी |
| तटीय सीमा (द्वीपों सहित) | लगभग 7,516.6 किमी |
| अक्षांशीय विस्तार | 8°4' उ. से 37°6' उ. |
| देशांतरीय विस्तार | 68°7' पू. से 97°25' पू. |
| मानक देशांतर | 82°30' पूर्वी देशांतर |
| मानक समय | GMT + 5:30 |
| दिशा | पड़ोसी देश |
|---|---|
| उत्तर-पश्चिम | पाकिस्तान, अफगानिस्तान |
| उत्तर | चीन, नेपाल |
| उत्तर-पूर्व | भूटान |
| पूर्व | बांग्लादेश, म्यांमार |
| दक्षिण-पूर्व | श्रीलंका (पाक जलडमरूमध्य द्वारा अलग) |
| दक्षिण-पश्चिम | मालदीव |
| दिशा | जल निकाय |
|---|---|
| पूर्व | बंगाल की खाड़ी |
| पश्चिम | अरब सागर |
| दक्षिण | हिंद महासागर |
भारत की स्थिति और आकार इसकी भौगोलिक पहचान का आधार है। उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत का मध्य से कर्क रेखा गुजरना इसे उष्ण और शीतोष्ण क्षेत्रों में बांटता है। विशाल क्षेत्रफल, लंबी स्थलीय और तटीय सीमाएं तथा हिंद महासागर के मध्य होना भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं। मानक देशांतर और भारतीय मानक समय की व्यवस्था देश की समय-एकता सुनिश्चित करती है। यह अध्याय बाद के सभी भौगोलिक अध्यायों (भौतिक स्वरूप, जलवायु, अपवाह आदि) की नींव है, इसलिए इसे पूरी तरह समझना आवश्यक है।