भारत का भौतिक स्वरूप (Physical Features) विविधतापूर्ण और अत्यंत जटिल है। यहां बर्फ से ढके ऊंचे पर्वत, विशाल मैदान, प्राचीन पठार, शुष्क मरुस्थल, लंबे तटीय मैदान और द्वीप समूह पाए जाते हैं। भारत के इन भौतिक स्वरूपों का निर्माण करोड़ों वर्षों की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम है। प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) के सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी परत अनेक प्लेटों में विभाजित है, जिनकी गति के कारण पर्वतों और मैदानों का निर्माण होता है। भारत के प्रमुख भौतिक विभाजनों में हिमालय, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप समूह शामिल हैं। इस अध्याय में हम इन सभी विभाजनों की विशेषताओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
पृथ्वी की सबसे बाहरी परत (लिथोस्फियर) कई बड़ी और छोटी प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें पृथ्वी के मैग्मा पर तैरती रहती हैं और धीरे-धीरे गति करती हैं। करोड़ों वर्ष पहले सभी महाद्वीप एक विशाल महाद्वीप पैंजिया के रूप में थे। पैंजिया के टूटने से बने दक्षिणी महाद्वीपों के समूह को गोंडवाना लैंड कहते हैं। गोंडवाना लैंड के टुकड़े धीरे-धीरे अलग हुए और उनमें से भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ी। लगभग 5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट का यूरेशियन प्लेट (एशियाई) से टकराव हुआ। इस टकराव से उनके बीच स्थित समुद्री तल की परतों के मुड़ने के कारण हिमालय और तिब्बत के पठार का निर्माण हुआ। इसी प्रकार की प्रक्रियाओं से भारत के अन्य भौतिक स्वरूपों का निर्माण हुआ।
भूगर्भशास्त्रीय प्रमाण बताते हैं कि हिमालय का निर्माण तीन चरणों में हुआ। तेतीस (Tethys) नामक समुद्र के स्थान पर सबसे पहले हिमाद्रि (महान हिमालय) का निर्माण हुआ, फिर हिमाचल (लघु हिमालय) और अंत में शिवालिक (बाह्य हिमालय) का। ये तीनों श्रेणियां पूर्व से पश्चिम तक फैली हुई हैं।
हिमालय भारत की सबसे ऊंची और नई पर्वत श्रेणी है। यह उत्तर में भारत की प्राकृतिक सीमा बनाती है और इसे तीन समानांतर श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
यह हिमालय की सबसे उत्तरी और सबसे ऊंची श्रेणी है। इसकी औसत ऊंचाई 6,000 मीटर से अधिक है। इसमें विश्व की कुछ सबसे ऊंची चोटियां स्थित हैं, जैसे माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) और कंचनजंगा (8,586 मीटर)। इस श्रेणी के कई शिखर सदैव बर्फ से ढके रहते हैं और यहां अनेक हिमनद (Glaciers) पाए जाते हैं। काराकोरम श्रेणी भी हिमाद्रि का ही भाग है, जिसमें K2 (गॉडविन ऑस्टिन) शिखर स्थित है।
यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित श्रेणी है। इसकी ऊंचाई लगभग 3,700 से 4,500 मीटर तक होती है। इसके प्रमुख भागों में पीर पंजाल, धौलाधार और महाभारत श्रेणियां शामिल हैं। इस श्रेणी में कश्मीर घाटी, कुल्लू और कांगड़ा जैसी सुंदर घाटियां स्थित हैं।
यह हिमालय की सबसे दक्षिणी और सबसे नई श्रेणी है। इसकी ऊंचाई कम (900 से 1,100 मीटर) है। इसकी चौड़ाई 10 से 50 किलोमीटर तक होती है। इसमें नदियों द्वारा लाए गए कंकड़-पत्थरों के जमाव से बनी 'दून' और 'दुआर' नामक घाटियां पाई जाती हैं, जैसे देहरादून।
हिमालय को पश्चिम से पूर्व की ओर भी विभाजित किया जाता है: पंजाब हिमालय (सिंधु और सतलुज के बीच), कुमाऊं हिमालय (सतलुज और काली नदियों के बीच), नेपाल हिमालय (काली और तीस्ता के बीच) और असम हिमालय (तीस्ता और दिहांग के बीच)। इन हिमालयी क्षेत्रों से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी महान नदियां निकलती हैं।
हिमालय की दक्षिणी तलहटी के समानांतर विशाल उत्तरी मैदान फैला है। यह मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी (Alluvium) के निक्षेप से बना है। यह मैदान पूर्व में पंजाब से पश्चिम में असम तक लगभग 2,400 किलोमीटर तक फैला है। इसकी चौड़ाई लगभग 240 से 320 किलोमीटर है। यह मैदान अत्यंत उपजाऊ है और भारत का 'अन्न-भंडार' कहलाता है।
उत्तरी मैदान में जलोढ़ मिट्टी दो प्रकार की पाई जाती है: भांगर (Bhangar) जो पुरानी जलोढ़ मिट्टी है और नदियों के बाढ़ के मैदानों से ऊपर ऊंचे स्थानों पर पाई जाती है; तथा खादर (Khadar) जो नई जलोढ़ मिट्टी है और नदियों के किनारे प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा जमा होती है। खादर मिट्टी अधिक उपजाऊ होती है।
प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे पुराना भू-भाग है, जो गोंडवाना लैंड का अवशेष माना जाता है। यह पठार पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व में पूर्वी घाट तथा उत्तर में सतपुड़ा और विंध्य पर्वत श्रेणियों से घिरा है। इस पठार को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है: मध्य उच्च भूमि (Central Highlands) और दक्कन पठार (Deccan Plateau)।
यह नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित क्षेत्र है, जो अरावली पर्वत से पश्चिम में और छोटा नागपुर पठार से पूर्व में मिलती है। इसके पश्चिमी भाग में थार मरुस्थल का विस्तार है। अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रेणी है।
यह नर्मदा के दक्षिण में स्थित विशाल त्रिभुजाकार पठार है। इसकी पश्चिमी सीमा पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्वी सीमा पूर्वी घाट है। इन दोनों घाटों के बीच नदियों का पठार (ताप्ती, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी) है। दक्कन पठार का क्षेत्र काली मिट्टी (रेगुर) के लिए प्रसिद्ध है, जो कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। पश्चिमी घाट में स्थित अनाईमुडी (2,695 मीटर) प्रायद्वीपीय पठार की सबसे ऊंची चोटी है।
भारत का पश्चिमी भाग, विशेषकर राजस्थान, थार मरुस्थल के रूप में विस्तृत है। यहां वर्षा अत्यंत कम (150 मिमी से कम) होती है। इस क्षेत्र में बालू के टीलों का जमाव होता है और यहां बरसाती नदियां (जैसे लूनी) बहती हैं, जो अधिकांश समय सूखी रहती हैं। यह क्षेत्र अत्यंत शुष्क और गर्म है।
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर समुद्र के सहारे तटीय मैदान स्थित हैं। पश्चिमी तटीय मैदान अरब सागर के साथ गुजरात से केरल तक फैला है। इसे दक्षिण से उत्तर की ओर मालाबार तट (केरल), कन्नड़ तट (कर्नाटक), कोंकण तट (महाराष्ट्र) तथा कच्छ-काठियावाड़ तट (गुजरात) में विभाजित किया जाता है। पश्चिमी तटीय मैदान संकरा है। पूर्वी तटीय मैदान बंगाल की खाड़ी के साथ ओडिशा से तमिलनाडु तक फैला है। इसे उत्तरी सरकार (Northern Circars) और कोरोमंडल तट (Coromandel Coast) में विभाजित किया जाता है। पूर्वी तटीय मैदान चौड़ा है और यहां नदियों का डेल्टा विकसित हुआ है। भारत की सबसे बड़ी डेल्टा नदी गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा है। चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जो ओडिशा के तट पर स्थित है।
भारत के दो मुख्य द्वीप समूह हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है, जिसकी उत्पत्ति ज्वालामुखीय तथा विवर्तनिक क्रियाओं से हुई है। इस द्वीप समूह में बैरन द्वीप पर भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी स्थित है। लक्षद्वीप द्वीप समूह अरब सागर में स्थित है, जिसका निर्माण प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) से हुआ है। लक्षद्वीप में 36 द्वीप हैं। अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप दोनों ही भारत के केंद्र शासित प्रदेश हैं।
| भौतिक विभाजन | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|
| हिमालय पर्वतमाला | सबसे ऊंची नई श्रेणियां: हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक |
| उत्तरी मैदान | सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र की जलोढ़ मिट्टी, अन्न-भंडार |
| प्रायद्वीपीय पठार | सबसे पुराना भू-भाग, दक्कन पठार, पश्चिमी-पूर्वी घाट |
| भारतीय मरुस्थल | थार, अत्यंत कम वर्षा, बालू के टीले |
| तटीय मैदान | पश्चिमी-संकरा, पूर्वी-चौड़ा |
| द्वीप समूह | अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप |
| श्रेणी | ऊंचाई | मुख्य चोटियां/घाटियां |
|---|---|---|
| हिमाद्रि | 6,000 मीटर से अधिक | एवरेस्ट, कंचनजंगा, K2 |
| हिमाचल | 3,700-4,500 मीटर | पीर पंजाल, धौलाधार, कश्मीर घाटी |
| शिवालिक | 900-1,100 मीटर | दून, दुआर घाटियां |
| तट | क्षेत्र | खंड |
|---|---|---|
| पश्चिमी तट | अरब सागर | मालाबार, कन्नड़, कोंकण, कच्छ-काठियावाड़ |
| पूर्वी तट | बंगाल की खाड़ी | उत्तरी सरकार, कोरोमंडल तट |
भारत का भौतिक स्वरूप अत्यंत विविध है और इसकी प्रत्येक इकाई का अपना महत्व है। हिमालय भारत को उत्तर की ओर से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है और मानसून को रोककर वर्षा में योगदान देता है। उत्तरी मैदान देश का अन्न-भंडार है, जबकि प्रायद्वीपीय पठार खनिजों और प्राचीन भू-संरचना का खजाना है। तटीय मैदान व्यापार और मत्स्य पालन में सहायक हैं और द्वीप समूह भारत की समुद्री सीमा को विस्तार देते हैं। यह अध्याय जलवायु, अपवाह, वनस्पति तथा कृषि जैसे अन्य अध्यायों को समझने की नींव है, इसलिए भौतिक स्वरूपों का सही ज्ञान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।