जनसंख्या (Population) किसी देश की सबसे महत्वपूर्ण संपदा है, क्योंकि वही अंततः संसाधनों का उपयोग करके विकास करती है। जनसंख्या का अध्ययन केवल संख्याओं का नहीं, बल्कि उसकी संरचना, वितरण, वृद्धि, गुणवत्ता और उसके आर्थिक-सामाजिक प्रभावों का अध्ययन है। भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ (1.21 अरब) है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17.5 प्रतिशत है, जबकि भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.4 प्रतिशत है। इस अध्याय में हम जनसंख्या के आकार, वितरण, घनत्व, जन्म-मृत्यु दर, आयु संरचना, लिंग अनुपात, साक्षरता और जनसंख्या नीति का अध्ययन करेंगे।
भारत की जनसंख्या का आकार अत्यंत विशाल है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश की जनसंख्या 121 करोड़ है। जनसंख्या का वितरण असमान है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जिसकी जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का लगभग 16.5 प्रतिशत है। इसके बाद महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश का स्थान है। जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में भौगोलिक परिस्थितियां (जलवायु, उर्वर भूमि, जल की उपलब्धता), आर्थिक कारक (उद्योग, रोजगार), सामाजिक कारक (नगरीकरण, शिक्षा) तथा ऐतिहासिक कारक शामिल हैं। उदाहरण के लिए, मैदानी क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या घनी है, जबकि मरुस्थल और पर्वतीय क्षेत्रों में विरल।
जनसंख्या घनत्व का अर्थ है प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की संख्या। भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। विभिन्न राज्यों में घनत्व बहुत अलग-अलग है:
जनसंख्या की वृद्धि जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवासन (माइग्रेशन) पर निर्भर करती है। जन्म दर (Birth Rate) एक वर्ष में प्रति 1,000 लोगों पर जन्म लेने वाले जीवित शिशुओं की संख्या है। मृत्यु दर (Death Rate) प्रति 1,000 लोगों पर एक वर्ष में होने वाली मौतों की संख्या है। जन्म दर और मृत्यु दर के बीच के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि दर (Natural Growth Rate) कहते हैं। प्रवासन (Migration) के कारण जनसंख्या में स्थानीय स्तर पर परिवर्तन होता है - ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर प्रवासन से शहरी जनसंख्या बढ़ती है।
पिछले कुछ दशकों में भारत में मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, जबकि जन्म दर में धीरे-धीरे कमी हो रही है। इसी कारण जनसंख्या की वृद्धि दर अब भी अधिक है, हालांकि दशक-दर-दशक इसमें गिरावट आई है। 2001-2011 के दशक में भारत की दशकीय वृद्धि दर लगभग 17.64 प्रतिशत रही।
जनसंख्या को आयु के आधार पर तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:
किसी देश की आयु संरचना उसकी आर्थिक स्थिति का संकेत देती है। भारत में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात अधिक है, जो 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) का अवसर देता है।
लिंग अनुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का राष्ट्रीय लिंग अनुपात 940 है। केरल का लिंग अनुपात सबसे अधिक (1,084) है, जबकि हरियाणा का सबसे कम (879) है। (ध्यान दें: 2011 के आंकड़ों में दमन और दीव का लिंग अनुपात सबसे कम 618 था।) कम लिंग अनुपात लड़कियों के प्रति सामाजिक भेदभाव और लिंग-चयन का संकेत है।
साक्षरता किसी देश के मानव संसाधन की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेत है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर लगभग 73 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता लगभग 80.9 प्रतिशत और महिला साक्षरता लगभग 64.6 प्रतिशत है। केरल की साक्षरता दर सर्वाधिक (लगभग 94 प्रतिशत) है, जबकि बिहार की सबसे कम (लगभग 61.8 प्रतिशत) है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण भारत की जीवन प्रत्याशा (जीवन की औसत आयु) में वृद्धि हुई है। स्वतंत्रता के समय भारत में जीवन प्रत्याशा लगभग 32 वर्ष थी, जो अब लगभग 68-70 वर्ष तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य में सुधार से मृत्यु दर घटी है।
भारत में 10 से 19 वर्ष की आयु के लोगों को किशोर आबादी कहते हैं। यह देश की कुल जनसंख्या का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा है। किशोरों के लिए पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास की चुनौतियां बनी हुई हैं। किशोर आबादी देश का भविष्य है; इनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है। सरकार ने किशोरों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रम (जैसे राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम) चलाए हैं।
जनसंख्या स्वयं में एक संसाधन है - मानव संसाधन (Human Resource)। शिक्षित, स्वस्थ और कुशल जनसंख्या देश की उत्पादकता बढ़ाती है, जबकि बड़ी और शिक्षित नहीं जनसंख्या संसाधनों पर दबाव डालती है। जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (National Population Policy), 2000 लागू की, जिसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को रोकना, प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार और स्थिर जनसंख्या प्राप्त करना है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव से गरीबी, बेरोजगारी, पर्यावरण क्षरण और शहरी समस्याएं बढ़ती हैं। इसलिए जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर ध्यान देना आवश्यक है।
| आंकड़ा | मूल्य |
|---|---|
| कुल जनसंख्या | लगभग 121 करोड़ |
| विश्व जनसंख्या में भारत का हिस्सा | लगभग 17.5% |
| औसत जनसंख्या घनत्व | लगभग 382 व्यक्ति/वर्ग किमी |
| सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य | उत्तर प्रदेश (16.5%) |
| सर्वाधिक घनत्व वाला राज्य | बिहार (1,102) |
| सबसे कम घनत्व वाला राज्य | अरुणाचल प्रदेश (17) |
| राष्ट्रीय लिंग अनुपात | 940 |
| साक्षरता दर | लगभग 73% |
| आयु वर्ग | वर्ग का नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| 0-14 वर्ष | बच्चे | आश्रित जनसंख्या |
| 15-59 वर्ष | कार्यशील जनसंख्या | आर्थिक रूप से सक्रिय |
| 60 वर्ष से अधिक | वृद्ध जनसंख्या | आश्रित जनसंख्या |
| राज्य | विशेषता |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य |
| बिहार | सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व |
| अरुणाचल प्रदेश | सबसे कम जनसंख्या घनत्व |
| केरल | सर्वाधिक साक्षरता और उच्च लिंग अनुपात |
| हरियाणा | सबसे कम लिंग अनुपात |
जनसंख्या किसी देश की शक्ति और चुनौती दोनों है। भारत की विशाल जनसंख्या विश्व का 17.5 प्रतिशत भाग है, जो देश के संसाधनों पर दबाव डालती है, लेकिन सही शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल के साथ यह मानव संसाधन के रूप में विकास का आधार बन सकती है। जनसंख्या का असमान वितरण, उच्च घनत्व, कम लिंग अनुपात और साक्षरता में अंतर सुधार की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 और शिक्षा-स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से भारत संतुलित जनसंख्या और समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर है। यह अध्याय आर्थिक विकास, श्रम बाजार और सामाजिक नीति को समझने के लिए आधारभूत है।