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1. परिचय

निर्धनता (Poverty) विश्व की सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं में से एक है। सामान्य अर्थ में निर्धनता वह स्थिति है जब व्यक्ति अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) को पूरा करने में असमर्थ होता है। भारत में निर्धनता की व्यापकता चिंताजनक है, हालांकि स्वतंत्रता के बाद से इसमें लगातार कमी आई है। 2011-12 के आंकड़ों के अनुसार भारत की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या (लगभग 27 करोड़ लोग) गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करती है। इस अध्याय में हम निर्धनता की परिभाषा, गरीबी रेखा, निर्धनता के कारण, संवेदनशील समूह, राज्यों में निर्धनता का वितरण तथा निर्धनता उन्मूलन के उपायों का अध्ययन करेंगे।

2. निर्धनता क्या है?

निर्धनता केवल आय का अभाव नहीं है, बल्कि यह बहुआयामी समस्या है। निर्धनता में व्यक्ति को: - पर्याप्त भोजन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलतीं। - साफ पानी, स्वच्छता और आवास की कमी होती है। - शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित होते हैं। - सामाजिक सुरक्षा और गरिमा का अभाव होता है।

निर्धनता को मापने के दो मुख्य संकेतक हैं: आय (Income) और उपभोग (Consumption)। किसी व्यक्ति या परिवार की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जितनी न्यूनतम आय या उपभोग आवश्यक है, उसे गरीबी रेखा (Poverty Line) कहते हैं। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोग निर्धन माने जाते हैं।

3. भारत में गरीबी रेखा

भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय के आधार पर किया जाता है। 2011-12 के लिए भारत में गरीबी रेखा निर्धारित की गई: - ग्रामीण क्षेत्रों में: प्रति व्यक्ति प्रति माह लगभग 816 रुपये। - शहरी क्षेत्रों में: प्रति व्यक्ति प्रति माह लगभग 1,000 रुपये

यानी जो व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में 816 रुपये प्रति माह या शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये प्रति माह से कम उपभोग व्यय करता है, वह गरीबी रेखा से नीचे माना जाता है। इनमें भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य की न्यूनतम आवश्यकताएं शामिल मानी जाती हैं। (हालांकि, बाद में रंगराजन समिति आदि ने अलग अनुमान दिए हैं।)

गरीबों की संख्या

2011-12 में भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे था, जो लगभग 27 करोड़ लोग हैं। हालांकि यह अनुपात 1970-80 के दशक की तुलना में काफी कम है, फिर भी यह संख्या अत्यधिक है।

4. निर्धनता के लिए संवेदनशील समूह

कुछ सामाजिक समूह और श्रम श्रेणियां निर्धनता के प्रति अधिक संवेदनशील (vulnerable) होती हैं:

5. राज्यों में निर्धनता का वितरण

भारत के विभिन्न राज्यों में निर्धनता का स्तर अलग-अलग है। बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गरीबी का अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है। ये राज्य सामाजिक-आर्थिक विकास के मामले में पिछड़े हैं। इसके विपरीत पंजाब, हरियाणा, केरल जैसे राज्यों में गरीबी कम है। केरल में मानव विकास सूचकांक (शिक्षा, स्वास्थ्य) बेहतर होने के कारण गरीबी अपेक्षाकृत कम है। गरीबी के मामले में भारत की स्थिति की तुलना उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया के क्षेत्रों से की जाती है, जहां भी गरीबी बहुत अधिक है।

6. निर्धनता के कारण

भारत में निर्धनता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

7. निर्धनता उन्मूलन के उपाय

भारत सरकार ने निर्धनता उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं:

निर्धनता उन्मूलन के लिए आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर और सामाजिक न्याय सभी आवश्यक हैं। निर्धनता केवल आय बढ़ाने से ही नहीं, बल्कि लोगों की क्षमताओं के विकास से ही समाप्त हो सकती है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: गरीबी रेखा (2011-12)

क्षेत्र गरीबी रेखा (प्रति व्यक्ति प्रति माह)
ग्रामीण लगभग 816 रुपये
शहरी लगभग 1,000 रुपये

तालिका 2: निर्धनता के लिए संवेदनशील समूह

समूह कारण
अनुसूचित जाति/जनजाति सामाजिक भेदभाव, पिछड़ापन
ग्रामीण कृषि मजदूर कम और अनिश्चित मजदूरी
शहरी असंगठित मजदूर अस्थायी काम
महिला-मुखिया घर कम आय

तालिका 3: निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम

कार्यक्रम वर्ष विशेषता
मनरेगा 2005 100 दिन रोजगार गारंटी
अंत्योदय अन्न योजना 2000 अति-गरीबों को सस्ता अन्न
PDS - सस्ता राशन
जवाहर रोजगार योजना - रोजगार सृजन

माइंड मैप

graph TD A["निर्धनता: एक चुनौती"] --> B["परिभाषा: न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी न कर पाना"] A --> C["गरीबी रेखा"] C --> D["ग्रामीण: 816 रुपये, शहरी: 1,000 रुपये (2011-12)"] A --> E["गरीबों की संख्या: लगभग 22% (27 करोड़)"] A --> F["संवेदनशील समूह"] F --> G["SC/ST, कृषि मजदूर, असंगठित मजदूर"] A --> H["राज्यों में वितरण"] H --> I["बिहार, ओडिशा, MP, झारखंड में अधिक"] A --> J["कारण"] J --> K["बेरोजगारी, शिक्षा-कौशल की कमी, भूमिहीनता"] A --> L["उपाय"] L --> M["मनरेगा 2005, PDS, AAY, कौशल विकास"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

गरीबी रेखा (2011-12) ग्रामीण क्षेत्र 816 रुपये प्रति माह प्रति व्यक्ति शहरी क्षेत्र 1,000 रुपये प्रति माह प्रति व्यक्ति इससे कम उपभोग व्यय वाला व्यक्ति निर्धन माना जाता है 2011-12 में लगभग 22% जनसंख्या (लगभग 27 करोड़) गरीबी रेखा से नीचे Golden Rule गरीबी रेखा आय और उपभोग दोनों के आधार पर निर्धारित होती है।
निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम मनरेगा (2005) ग्रामीण परिवारों को 100 दिन रोजगार PDS राशन कार्ड से सस्ता खाद्यान्न अंत्योदय अन्न (2000) अति-गरीबों को बहुत सस्ता अन्न कौशल विकास युवाओं को रोजगार कौशल वृद्धावस्था पेंशन बुजुर्गों के लिए स्वर्ण नियम निर्धनता समाप्त करने के लिए आय बढ़ाने के साथ लोगों की क्षमताओं का विकास जरूरी है।

सामान्य गलतियाँ

  1. गरीबी रेखा के आंकड़े: 2011-12 में ग्रामीण गरीबी रेखा 816 रुपये और शहरी 1,000 रुपये है। इन्हें उलट लिखना गलत है।
  2. गरीबों की संख्या: 2011-12 में लगभग 22 प्रतिशत (27 करोड़) लोग गरीब हैं। यह अनुपात घटता जा रहा है; इसे 50 प्रतिशत न लिखें।
  3. मनरेगा का वर्ष और प्रावधान: मनरेगा 2005 में लागू हुआ और ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार देता है। इसे '200 दिन' या '2000' का वर्ष न लिखें।
  4. संवेदनशील समूह: अनुसूचित जाति/जनजाति, कृषि मजदूर और शहरी असंगठित मजदूर गरीबी के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। उन्हें 'सबसे समृद्ध' न कहें।
  5. राज्यों का वितरण: बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड में गरीबी अधिक है, जबकि पंजाब, केरल में कम। इन्हें उलट न लिखें।
  6. निर्धनता के कारण: निर्धनता केवल जनसंख्या घटाने से नहीं मिटती; बेरोजगारी, शिक्षा की कमी और भेदभाव भी प्रमुख कारण हैं।
  7. गरीबी रेखा का आधार: भारत में गरीबी रेखा प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय के आधार पर निर्धारित की जाती है, न कि केवल वार्षिक आय के आधार पर।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. परिभाषा से शुरू करें: निर्धनता की परिभाषा (न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी न कर पाना) से उत्तर शुरू करें।
  2. गरीबी रेखा के आंकड़े: 816 (ग्रामीण) और 1,000 (शहरी) रुपये याद रखें और उनके आधार (उपभोग व्यय) को स्पष्ट करें।
  3. कारण और समाधान: कारण और उन्मूलन के उपाय अलग-अलग शीर्षकों में लिखें।
  4. कार्यक्रमों की सूची: मनरेगा (2005, 100 दिन), PDS, अंत्योदय अन्न योजना (2000) आदि का उल्लेख करें।
  5. संवेदनशील समूह: SC/ST, कृषि मजदूर, असंगठित मजदूर, महिला-मुखिया परिवार - इनका विवरण लिखें।
  6. राज्यों की तुलना: अधिक और कम गरीबी वाले राज्यों की तुलना करके लिखें।
  7. वैश्विक परिप्रेक्ष्य: उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में गरीबी की स्थिति का उल्लेख करें।

निष्कर्ष

निर्धनता भारत और विश्व की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। यह केवल आय का अभाव नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का भी अभाव है। भारत में 2011-12 में लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे थी। गरीबी का सबसे अधिक बोझ अनुसूचित जाति/जनजाति, कृषि मजदूर और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर है। मनरेगा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अंत्योदय अन्न योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार गरीबी घटाने का प्रयास कर रही है। निर्धनता उन्मूलन के लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह अध्याय खाद्य सुरक्षा और विकास के अन्य पहलुओं को समझने का आधार है।