विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
बचपन में हम सभी ने चुंबक (Magnet) से खेला है। यह लोहे की चीजों को अपनी ओर खींच लेता है और दूसरे चुंबक को कभी खींचता है तो कभी दूर धकेलता है। लेकिन 19वीं सदी में वैज्ञानिकों ने एक हैरान कर देने वाली खोज की: चुंबकत्व और विद्युत (Electricity) वास्तव में एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इस अध्याय में हम प्राकृतिक चुंबकत्व और विद्युत से उत्पन्न होने वाले चुंबकत्व के बारे में जानेंगे।
1820 में डेनमार्क के वैज्ञानिक हंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड (H.C. Oersted) ने एक प्रयोग के दौरान देखा कि जब किसी तार से विद्युत धारा (Electric Current) प्रवाहित की जाती है, तो उसके पास रखी कंपास (दिक्सूचक) की सूई विक्षेपित (Deflect) हो जाती है। * निष्कर्ष: इस प्रयोग से यह सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा अपने चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसे ही विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव या 'विद्युतचुंबकत्व' कहते हैं।
सीधे तार के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए इस नियम का उपयोग किया जाता है: * यदि आप धारावाही तार को अपने दाहिने हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि आपका अंगूठा विद्युत धारा की दिशा में हो, तो आपकी मुड़ी हुई उंगलियों की दिशा चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को दर्शाएगी। (चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्तों - Concentric circles - के रूप में होती हैं)।
जब विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकती है, तो क्या कोई बाहरी चुंबकीय क्षेत्र किसी धारावाही तार पर बल लगा सकता है? * हाँ, जब किसी विद्युत धारा ले जाने वाले तार को किसी बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस तार पर एक यांत्रिक बल (Mechanical Force) लगता है, जिससे तार हिलने लगता है। * बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule) द्वारा ज्ञात की जाती है। * अनुप्रयोग (विद्युत मोटर): इसी सिद्धांत का उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर में किया जाता है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा (घूमने वाली ऊर्जा) में बदलती है। (उदा: पंखे, मिक्सर, वाशिंग मशीन)।
ओर्स्टेड की खोज के बाद, वैज्ञानिक माइकल फैराडे (Michael Faraday) ने सोचा कि यदि विद्युत से चुंबकत्व उत्पन्न हो सकता है, तो क्या चुंबकत्व से विद्युत उत्पन्न की जा सकती है? 1831 में फैराडे ने इसे सिद्ध कर दिया।
विद्युत जनित्र या डायनेमो (Dynamo) इसी विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। * यह यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) में बदलता है। जब जनरेटर की कुंडली को किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है, तो उसमें बिजली पैदा होती है। * पॉवर स्टेशनों (थर्मल, हाइड्रो, न्यूक्लियर) में बड़े-बड़े जनरेटर टर्बाइनों द्वारा घुमाए जाते हैं, जिनसे हमारे घरों तक बिजली पहुँचती है।
चुंबकत्व और विद्युत एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जहाँ प्राकृतिक चुंबक अपने ध्रुवों के माध्यम से एक निश्चित क्षेत्र में बल लगाते हैं, वहीं तारों में बहती हुई विद्युत धारा भी अपना चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (विद्युतचुंबकत्व)। इस सिद्धांत ने हमें विद्युतचुंबक और इलेक्ट्रिक मोटर (विद्युत से गति) जैसी मशीनें दीं। इसके ठीक विपरीत, माइकल फैराडे के 'विद्युतचुंबकीय प्रेरण' के सिद्धांत ने साबित किया कि चुंबक और तार की गति से बिजली पैदा की जा सकती है, जिससे इलेक्ट्रिक जनरेटर का आविष्कार हुआ और आज की आधुनिक दुनिया रोशन हुई।