विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
19वीं सदी के अंत तक वैज्ञानिकों को लगने लगा था कि भौतिकी के लगभग सभी नियम खोजे जा चुके हैं। न्यूटन के गति के नियम और मैक्सवेल के विद्युतचुंबकत्व के सिद्धांत सब कुछ समझा रहे थे। इसे 'शास्त्रीय भौतिकी' (Classical Physics) कहा गया। लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत में कुछ ऐसे प्रयोग हुए जिन्हें पुरानी भौतिकी नहीं समझा सकी। तब जन्म हुआ 'आधुनिक भौतिकी' का, जिसने ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इसमें मुख्य रूप से क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) और सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity) शामिल हैं।
सभी पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से बने हैं जिन्हें 'परमाणु' (Atom) कहते हैं। 20वीं सदी में वैज्ञानिकों ने खोजा कि परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि यह और भी छोटे 'उपपरमाण्विक' (Subatomic) कणों से मिलकर बना है। * प्रोटॉन (Proton): यह परमाणु के केंद्र (नाभिक) में होता है और इस पर धनात्मक (Positive) आवेश होता है। (खोजकर्ता: अर्नेस्ट रदरफोर्ड)। * न्यूट्रॉन (Neutron): यह भी नाभिक में होता है, लेकिन इस पर कोई आवेश नहीं होता (यह उदासीन होता है)। (खोजकर्ता: जेम्स चैडविक)। * इलेक्ट्रॉन (Electron): यह नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं (Orbits) में चक्कर लगाता है और इस पर ऋणात्मक (Negative) आवेश होता है। (खोजकर्ता: जे.जे. थॉमसन)।
नाभिक (Nucleus): परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान उसके केंद्र में केंद्रित होता है जिसे नाभिक कहते हैं। नाभिक का आकार पूरे परमाणु की तुलना में बहुत ही छोटा (लगभग 10,000 गुना छोटा) होता है।
कुछ तत्व (Elements) प्रकृति में अस्थिर (Unstable) होते हैं। स्थिर होने के प्रयास में, उनके नाभिक अपने आप टूटते रहते हैं और अदृश्य, उच्च-ऊर्जा वाली किरणें उत्सर्जित करते हैं। इस घटना को रेडियोधर्मिता कहते हैं। * खोजकर्ता: हेनरी बेकरेल (यूरेनियम में)। मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी ने बाद में रेडियम और पोलोनियम जैसे अन्य रेडियोधर्मी तत्वों की खोज की। * उत्सर्जित किरणें (Types of Rays): 1. अल्फा ($\alpha$) किरणें: ये धनावेशित कण (हीलियम के नाभिक) होते हैं। इनकी भेदन क्षमता (Penetrating power) बहुत कम होती है (कागज की शीट से रोकी जा सकती हैं)। 2. बीटा ($\beta$) किरणें: ये उच्च गति वाले इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित) होते हैं। इनकी भेदन क्षमता अल्फा से अधिक होती है। 3. गामा ($\gamma$) किरणें: ये विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं (इन पर कोई आवेश या द्रव्यमान नहीं होता)। इनकी ऊर्जा और भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है (इन्हें रोकने के लिए मोटी सीसे की दीवार चाहिए)।
रेडियोधर्मी पदार्थ का क्षय (Decay) एक यादृच्छिक (Random) प्रक्रिया है। अर्धायु वह समय है जिसमें किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की आधी मात्रा (परमाणुओं की संख्या) क्षयित होकर किसी अन्य तत्व में बदल जाती है। * उदाहरण: यदि किसी तत्व की अर्धायु 10 वर्ष है, तो 100 ग्राम पदार्थ 10 वर्ष बाद 50 ग्राम, और अगले 10 वर्ष बाद 25 ग्राम ही रह जाएगा। कार्बन-14 डेटिंग में इसी सिद्धांत का उपयोग कर पुराने जीवाश्मों की उम्र का पता लगाया जाता है।
परमाणु के नाभिक के अंदर प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों को बाँधकर रखने वाला बल बहुत शक्तिशाली होता है। जब नाभिक में कोई परिवर्तन होता है, तो विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। यह अल्बर्ट आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण $E = mc^2$ के अनुसार द्रव्यमान के ऊर्जा में बदलने से उत्पन्न होती है।
नाभिकीय ऊर्जा प्राप्त करने की दो मुख्य विधियाँ हैं: 1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission): जब एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) पर धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तो वह दो हल्के नाभिकों में टूट जाता है, और साथ ही भारी मात्रा में ऊर्जा और नए न्यूट्रॉन निकलते हैं। * उपयोग: परमाणु बम (अनियंत्रित विखंडन) और नाभिकीय रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए (नियंत्रित विखंडन)। 2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion): जब दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन) अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर जुड़कर एक भारी नाभिक (हीलियम) बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया में विखंडन से भी कई गुना अधिक ऊर्जा निकलती है। * सूर्य और तारों की ऊर्जा: सूर्य और अन्य तारों में अपार ऊर्जा इसी नाभिकीय संलयन प्रक्रिया से उत्पन्न हो रही है। हाइड्रोजन बम भी इसी सिद्धांत पर कार्य करता है।
जब कुछ धातुओं की सतह पर एक निश्चित आवृत्ति (Frequency) से अधिक का प्रकाश डाला जाता है, तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने लगते हैं। इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहते हैं। बाहर निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों को 'फोटोइलेक्ट्रॉन' कहते हैं।
LASER का पूरा नाम है: Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation (विकिरण के उद्दीपित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश का प्रवर्धन)।
आधुनिक भौतिकी ने हमें दिखाया कि वास्तविकता वैसी नहीं है जैसी वह हमारी आँखों को दिखाई देती है। परमाणु के अंदर झांकने पर हमें पता चला कि पदार्थ ज्यादातर खाली जगह है जिसके केंद्र में एक शक्तिशाली नाभिक है। रेडियोधर्मिता और नाभिकीय ऊर्जा ($E=mc^2$) ने हमें दिखाया कि द्रव्यमान वास्तव में जमी हुई ऊर्जा है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव ने सिद्ध किया कि प्रकाश केवल तरंग नहीं, बल्कि कणों (फोटॉन) से भी बना है। इन खोजों ने न केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को खोला, बल्कि लेजर, परमाणु ऊर्जा, और आज के अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव भी रखी।