विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
यदि आप किसी शांत तालाब में पत्थर फेंकते हैं, तो आप देखते हैं कि पानी की सतह पर लहरें (तरंगें) बाहर की ओर फैलने लगती हैं। यदि आप एक पेंडुलम (लटकता हुआ लोलक) को हिलाते हैं, तो वह लगातार इधर-उधर झूलता रहता है। भौतिकी में इन घटनाओं को 'तरंग' और 'दोलन' के रूप में पढ़ा जाता है। ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए प्रकृति इन दोनों का व्यापक उपयोग करती है।
जब कोई वस्तु अपनी एक निश्चित मध्यमान स्थिति (Mean Position) के इधर-उधर या आगे-पीछे बार-बार गति करती है, तो उसे दोलन या कंपन गति कहते हैं। * उदाहरण: दीवार घड़ी का पेंडुलम, झूले की गति, गिटार के तार का कंपन।
यह दोलन गति का सबसे सरल और महत्वपूर्ण रूप है। * शर्त: सरल आवर्त गति में, वस्तु पर लगने वाला प्रत्यानयन बल (Restoring Force, जो उसे वापस बीच में लाना चाहता है) हमेशा वस्तु के विस्थापन (Displacement) के अनुक्रमानुपाती होता है और इसकी दिशा हमेशा मध्यमान स्थिति की ओर होती है। $$ F \propto -x $$ (यहाँ माइनस चिह्न दर्शाता है कि बल विस्थापन के विपरीत दिशा में है)। * उदाहरण: एक स्प्रिंग से लटके हुए द्रव्यमान का ऊपर-नीचे होना।
सरल लोलक (Simple Pendulum) का आवर्तकाल: एक धागे से बंधे छोटे गोले (Bob) को सरल लोलक कहते हैं। इसके आवर्तकाल ($T$) का सूत्र है: $$ T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}} $$ (जहाँ $L$ धागे की प्रभावी लंबाई है और $g$ गुरुत्वीय त्वरण है)। * विशेषता: सूत्र से स्पष्ट है कि पेंडुलम का आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान (Mass) पर निर्भर नहीं करता है। यह केवल लंबाई और गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है।
तरंग किसी माध्यम में उत्पन्न वह विक्षोभ (Disturbance) है जो माध्यम के कणों के अपने स्थान से हटे बिना ही, ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है। (तालाब में पत्थर फेंकने पर पानी आगे नहीं बढ़ता, केवल ऊर्जा लहरों के रूप में आगे बढ़ती है)।
तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: 1. यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves): जिन्हें आगे बढ़ने के लिए भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। (जैसे: ध्वनि तरंगें, जल तरंगें)। 2. विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves): जिन्हें किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, ये निर्वात में भी यात्रा कर सकती हैं। (जैसे: प्रकाश तरंगें, रेडियो तरंगें, एक्स-रे)।
माध्यम के कणों के कंपन की दिशा के आधार पर यांत्रिक तरंगें दो प्रकार की होती हैं:
प्रत्येक वस्तु की कंपन करने की अपनी एक प्राकृतिक आवृत्ति (Natural frequency) होती है। * परिभाषा: जब किसी वस्तु पर कोई बाहरी आवर्ती बल (Periodic force) लगाया जाता है, और उस बाहरी बल की आवृत्ति वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, तो वस्तु का आयाम (Amplitude) बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस घटना को अनुनाद कहते हैं। * उदाहरण 1 (झूला): यदि आप किसी को झूला झुला रहे हैं और ठीक उसी समय धक्का देते हैं जब झूला पीछे आता है (समान आवृत्ति), तो झूला बहुत ऊँचा (अधिक आयाम) जाने लगता है। * उदाहरण 2 (पुल): जब सैनिक किसी पुल से गुजरते हैं, तो उन्हें 'कदम-ताल' (March) तोड़ने के लिए कहा जाता है। यदि उनके कदमों की आवृत्ति पुल की प्राकृतिक आवृत्ति से मेल खा जाए, तो अनुनाद के कारण पुल में भयंकर कंपन उत्पन्न हो सकता है और वह टूट सकता है।
दोलन (जैसे पेंडुलम) ऊर्जा के एक ही स्थान पर कंपन करने की प्रक्रिया है, जबकि तरंग वह तंत्र है जो इस कंपन (ऊर्जा) को लंबी दूरियों तक पहुँचाता है। यदि कंपन आगे बढ़ने की दिशा के लंबवत हो, तो अनुप्रस्थ लहरें (जैसे पानी की लहरें) बनती हैं, और यदि कंपन उसी दिशा में हो, तो अनुदैर्ध्य तरंगें (जैसे ध्वनि) बनती हैं। तरंगों के समीकरण ($v=f\lambda$) से हम इनकी चाल, लंबाई और आवृत्ति को समझते हैं। इसके अलावा, अनुनाद हमें यह बताता है कि कैसे छोटी सी ऊर्जा सही समय (आवृत्ति) पर दी जाए, तो वह विनाशकारी कंपन या मधुर संगीत पैदा कर सकती है।