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इलेक्ट्रॉनिक्स — अध्ययन नोट्स

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इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics)

आज हम जिस डिजिटल युग में जी रहे हैं—जहाँ स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टीवी, और इंटरनेट हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं—वह सब 'इलेक्ट्रॉनिक्स' की देन है। इलेक्ट्रॉनिक्स भौतिकी की वह शाखा है जो निर्वात, गैसों या विशेष रूप से अर्धचालकों (Semiconductors) में इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह और उनके नियंत्रण का अध्ययन करती है। यह साधारण विद्युत (Electricity) से इस मायने में अलग है कि विद्युत में हम केवल ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने (जैसे पंखा चलाना) पर ध्यान देते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स में हम इलेक्ट्रॉनों का उपयोग सूचना (Information) को प्रोसेस करने, सहेजने और भेजने के लिए करते हैं।

1. चालक, कुचालक और अर्धचालक

विद्युत प्रवाह के आधार पर पदार्थों को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जाता है: 1. चालक (Conductors): वे पदार्थ जिनमें इलेक्ट्रॉन आसानी से प्रवाहित हो सकते हैं। (उदा: तांबा, एल्युमिनियम, चांदी)। इनका प्रतिरोध बहुत कम होता है। 2. कुचालक (Insulators): वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉनों को बिल्कुल प्रवाहित नहीं होने देते। (उदा: रबर, प्लास्टिक, लकड़ी)। इनका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। 3. अर्धचालक (Semiconductors): ये ऐसे विशेष पदार्थ हैं जिनकी चालकता, चालकों और कुचालकों के बीच होती है। साधारण तापमान पर ये कुचालक की तरह व्यवहार करते हैं, लेकिन तापमान बढ़ने या कुछ अशुद्धियाँ (Impurities) मिलाने पर ये चालक बन जाते हैं। * मुख्य उदाहरण: सिलिकॉन (Silicon - Si) और जर्मेनियम (Germanium - Ge)। * पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, जिसे अक्सर "सिलिकॉन वैली" के नाम से भी जोड़ा जाता है, इन्हीं अर्धचालकों पर टिकी है।

2. डोपिंग और P-N प्रकार के अर्धचालक

शुद्ध सिलिकॉन बहुत अच्छा चालक नहीं है। इसे उपयोगी बनाने के लिए इसमें बहुत थोड़ी मात्रा में अन्य तत्वों की अशुद्धि मिलाई जाती है। इस प्रक्रिया को डोपिंग (Doping) कहते हैं।

डोपिंग के आधार पर अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं: 1. N-प्रकार (N-type): जब सिलिकॉन में फॉस्फोरस जैसा तत्व मिलाया जाता है, तो इसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन (Negative charge carriers) आ जाते हैं। इसलिए इसे N-type कहते हैं। 2. P-प्रकार (P-type): जब सिलिकॉन में बोरॉन जैसा तत्व मिलाया जाता है, तो इसमें इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है। इस खाली जगह को 'होल' (Hole) कहते हैं, जो धनात्मक (Positive) आवेश की तरह व्यवहार करता है। इसलिए इसे P-type कहते हैं।

3. P-N जंक्शन डायोड (P-N Junction Diode)

जब एक P-प्रकार और एक N-प्रकार के अर्धचालक को विशेष तरीके से जोड़ा जाता है, तो उसे P-N जंक्शन कहते हैं। इस युक्ति को डायोड (Diode) कहा जाता है। * कार्य: डायोड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह विद्युत धारा को केवल एक ही दिशा में बहने देता है (P से N की ओर)। यदि बैटरी को उल्टा लगा दिया जाए, तो यह धारा को रोक देता है। * अनुप्रयोग (दिष्टकारी / Rectifier): चूँकि डायोड धारा को एक ही दिशा में बहने देता है, इसका सबसे महत्वपूर्ण उपयोग प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में बदलने के लिए किया जाता है। हमारे मोबाइल चार्जर में यही डायोड लगे होते हैं जो घर की AC बिजली को मोबाइल बैटरी के लिए DC में बदलते हैं।

LED (Light Emitting Diode)

यह एक विशेष प्रकार का P-N जंक्शन डायोड है। जब इसमें से धारा प्रवाहित होती है, तो इसके अंदर इलेक्ट्रॉन और होल के मिलने से ऊर्जा प्रकाश (Light) के रूप में बाहर निकलती है। आज के समय में बल्ब और ट्यूबलाइट की जगह LED ने ले ली है क्योंकि ये बहुत कम बिजली खर्च करते हैं।

4. ट्रांजिस्टर (Transistor)

1947 में ट्रांजिस्टर के आविष्कार को 20वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जाता है। इससे पहले कंप्यूटर बहुत बड़े (कमरे के आकार के) होते थे क्योंकि उनमें वैक्यूम ट्यूब्स का इस्तेमाल होता था। ट्रांजिस्टर ने उन्हें बहुत छोटा और शक्तिशाली बना दिया।

5. इंटीग्रेटेड सर्किट (IC - Integrated Circuit)

शुरुआत में रेडियो या टीवी बनाने के लिए अलग-अलग डायोड, ट्रांजिस्टर और प्रतिरोधकों को तारों से जोड़ना पड़ता था। 1958 में जैक किल्बी (Jack Kilby) ने एक कमाल का विचार दिया। उन्होंने सिलिकॉन के एक ही छोटे से टुकड़े (चिप) पर लाखों ट्रांजिस्टर, डायोड और प्रतिरोधक एक साथ बना दिए। * इस छोटी सी चिप को ही IC (Integrated Circuit) या माइक्रोचिप कहते हैं। * महत्व: IC के कारण ही आज हमारे स्मार्टफोन इतने पतले, हल्के, सस्ते और शक्तिशाली हो पाए हैं। कंप्यूटर का CPU (माइक्रोप्रोसेसर) वास्तव में एक बहुत ही जटिल IC है जिसमें अरबों ट्रांजिस्टर लगे होते हैं।

सारांश (Summary)

इलेक्ट्रॉनिक्स ने सिलिकॉन जैसे अर्धचालकों (Semiconductors) की खोज से दुनिया बदल दी। डोपिंग के माध्यम से हम P-type (होल) और N-type (इलेक्ट्रॉन) पदार्थ बनाते हैं। इन्हें जोड़कर 'डायोड' बनता है जो AC को DC में बदलता है, और 'ट्रांजिस्टर' बनता है जो सिग्नल को बढ़ाता है या कंप्यूटर के लिए सुपर-फास्ट स्विच का काम करता है। जब लाखों ट्रांजिस्टरों को सिलिकॉन के एक छोटे से टुकड़े पर एक साथ छाप दिया जाता है, तो वह 'IC या माइक्रोचिप' बन जाती है, जो आज के सभी आधुनिक गैजेट्स—मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी—का दिमाग है।

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