विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
पिछले अध्याय में हमने गति का वर्णन (चाल, वेग, त्वरण) किया था, लेकिन हमने यह नहीं जाना कि गति का कारण क्या है। किसी वस्तु की गति क्यों बदलती है? इसका उत्तर 'बल' (Force) है। महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन ने बल और गति के बीच संबंधों को स्पष्ट करने के लिए तीन मूलभूत नियम दिए, जिन्हें 'न्यूटन के गति के नियम' कहा जाता है।
बल वह बाहरी धक्का (Push) या खिंचाव (Pull) है जो किसी वस्तु की विरामावस्था या एकसमान गति की अवस्था को बदल देता है या बदलने का प्रयास करता है। * प्रभाव: बल किसी वस्तु की चाल बदल सकता है, उसकी दिशा बदल सकता है, या उसके आकार (Shape/Size) में परिवर्तन कर सकता है। * संतुलित बल (Balanced Forces): यदि किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो, तो उन्हें संतुलित बल कहते हैं। ये बल वस्तु की गति की अवस्था को नहीं बदल सकते। * असंतुलित बल (Unbalanced Forces): यदि किसी वस्तु पर लगने वाले बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो उन्हें असंतुलित बल कहते हैं। केवल असंतुलित बल ही किसी वस्तु की गति या दिशा में परिवर्तन कर सकते हैं।
नियम: प्रत्येक वस्तु अपनी विरामावस्था या एक सीधी रेखा में एकसमान गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है, जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे।
इस नियम को 'जड़त्व का नियम' (Law of Inertia) भी कहा जाता है, जिसे सबसे पहले गैलीलियो ने प्रतिपादित किया था।
जड़त्व किसी भी वस्तु का वह प्राकृतिक गुण है जिसके कारण वह अपनी विरामावस्था या गति की अवस्था में होने वाले किसी भी परिवर्तन का विरोध करती है। * द्रव्यमान और जड़त्व: किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके जड़त्व की माप है। जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होगा, उसका जड़त्व भी अधिक होगा (उदा: एक खाली डिब्बे को खिसकाना आसान है, लेकिन उसी आकार के लोहे के भारी डिब्बे को खिसकाना कठिन है)।
जड़त्व के प्रकार और उदाहरण: 1. विराम का जड़त्व (Inertia of Rest): वस्तु अपनी रुकी हुई अवस्था में ही रहना चाहती है। * उदाहरण: बस के अचानक चलने पर यात्रियों का पीछे की ओर गिरना। बस आगे बढ़ती है, लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा जड़त्व के कारण वहीं रहना चाहता है। * उदाहरण: पेड़ की शाखा को जोर से हिलाने पर फलों और पत्तों का गिरना। 2. गति का जड़त्व (Inertia of Motion): वस्तु अपनी गति की अवस्था में ही रहना चाहती है। * उदाहरण: चलती बस के अचानक रुकने पर यात्रियों का आगे की ओर गिरना। * उदाहरण: चलती ट्रेन से बाहर कूदने पर व्यक्ति का आगे की ओर गिर जाना। 3. दिशा का जड़त्व (Inertia of Direction): वस्तु अपनी गति की दिशा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। * उदाहरण: जब कार तेज गति से किसी मोड़ पर मुड़ती है, तो अंदर बैठे यात्री बाहर की ओर झुक जाते हैं।
न्यूटन के द्वितीय नियम को समझने के लिए संवेग को समझना आवश्यक है। किसी भी गतिमान वस्तु का प्रभाव उसके द्रव्यमान और वेग दोनों पर निर्भर करता है (उदा: एक धीमी गति से आती हुई भारी ट्रक और एक तेज गति से आती हुई हल्की गोली दोनों घातक हो सकती हैं)।
नियम: किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के अनुक्रमानुपाती (directly proportional) होती है, और यह परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया जाता है।
गणितीय रूप में: माना किसी $m$ द्रव्यमान की वस्तु का प्रारंभिक वेग $u$ है। उस पर $t$ समय तक $F$ बल लगाने से उसका वेग $v$ हो जाता है। प्रारंभिक संवेग = $mu$ अंतिम संवेग = $mv$ संवेग में परिवर्तन की दर = $\frac{mv - mu}{t} = m\frac{(v - u)}{t}$ चूँकि $\frac{v - u}{t} = a$ (त्वरण)
अतः, द्वितीय नियम के अनुसार: $$ F \propto ma $$ $$ F = k \cdot ma $$ SI प्रणाली में $k=1$ होता है, इसलिए: $$ F = ma $$ (बल = द्रव्यमान × त्वरण)
दैनिक जीवन में उदाहरण: क्रिकेट का खिलाड़ी तेजी से आती हुई गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को पीछे की ओर खींचता है। ऐसा करने से वह गेंद के वेग को शून्य करने में लगने वाले समय ($t$) को बढ़ा देता है। समय बढ़ने से संवेग में परिवर्तन की दर (और परिणामस्वरूप हाथों पर लगने वाला बल) कम हो जाती है, जिससे हाथों में चोट नहीं लगती।
नियम: प्रत्येक क्रिया के समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। (To every action, there is an equal and opposite reaction.)
दैनिक जीवन में उदाहरण: 1. चलना (Walking): जब हम चलते हैं, तो हम अपने पैरों से जमीन को पीछे की ओर धकेलते हैं (क्रिया)। जमीन हमारे पैरों पर उतना ही बल आगे की ओर लगाती है (प्रतिक्रिया), जिससे हम आगे बढ़ते हैं। 2. बंदूक से गोली चलना (Recoil of a Gun): जब बंदूक से गोली दागी जाती है, तो बारूद के फटने से गोली पर आगे की ओर बहुत अधिक बल (क्रिया) लगता है। गोली भी बंदूक पर उतना ही बल पीछे की ओर (प्रतिक्रिया) लगाती है, जिससे चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का (Recoil) लगता है। 3. रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट से पीछे की ओर तेजी से गैसें निकलती हैं (क्रिया)। ये गैसें रॉकेट पर ऊपर की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती हैं, जिससे रॉकेट अंतरिक्ष में जाता है।
न्यूटन के द्वितीय और तृतीय नियम से संवेग संरक्षण का नियम प्राप्त होता है।
नियम: यदि किसी निकाय (System) पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो, तो उस निकाय का कुल संवेग स्थिर (संरक्षित) रहता है।
यह नियम भौतिकी के सबसे महत्वपूर्ण और सार्वभौमिक नियमों में से एक है, जिसका उपयोग रॉकेट की गति से लेकर उपपरमाण्विक कणों के टकराव तक को समझने के लिए किया जाता है।
न्यूटन के तीन नियम शास्त्रीय भौतिकी (Classical Physics) का आधार हैं। प्रथम नियम हमें जड़त्व (Inertia) की अवधारणा देता है, जो बताता है कि वस्तुएँ बल के बिना अपनी स्थिति क्यों नहीं बदलतीं। द्वितीय नियम बल की मात्रात्मक परिभाषा ($F=ma$) देता है, जो संवेग में परिवर्तन की दर पर आधारित है। तृतीय नियम क्रिया-प्रतिक्रिया की प्रकृति को समझाता है, जो बताता है कि बल हमेशा जोड़े में आते हैं। अंततः, संवेग संरक्षण का नियम यह सुनिश्चित करता है कि बिना बाहरी हस्तक्षेप के, ब्रह्मांड में गति की कुल मात्रा हमेशा स्थिर रहती है।