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आम बोलचाल की भाषा में 'कार्य' (Work) शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है—जैसे पढ़ना, सोचना, या कंप्यूटर पर काम करना। लेकिन भौतिकी (Physics) में कार्य की एक बहुत ही विशिष्ट और तकनीकी परिभाषा है। भौतिकी में कार्य तभी माना जाता है जब बल लगाने से वस्तु में विस्थापन (Displacement) हो। इसी प्रकार, कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा और कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।
भौतिकी के अनुसार, कार्य तब संपन्न हुआ माना जाता है जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाए और वह वस्तु बल की दिशा में विस्थापित हो जाए। यदि आप दीवार को धकेलने में बहुत थक जाते हैं लेकिन दीवार अपनी जगह से नहीं हिलती, तो भौतिकी के अनुसार आपने शून्य (Zero) कार्य किया है।
कार्य के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं: 1. वस्तु पर कोई बल ($F$) लगना चाहिए। 2. वस्तु विस्थापित ($s$) होनी चाहिए।
कार्य एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। यद्यपि यह दो सदिश राशियों (बल और विस्थापन) का गुणनफल है, फिर भी इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।
किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता (Capacity to do work) को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं। * जिस वस्तु में ऊर्जा होती है, वह कार्य कर सकती है। कार्य करते समय वस्तु की ऊर्जा खर्च होती है। * ऊर्जा भी एक अदिश राशि है। * ऊर्जा का मात्रक वही होता है जो कार्य का होता है, अर्थात् जूल (J)।
ऊर्जा कई रूपों में पाई जाती है: यांत्रिक ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा आदि। हम यहाँ मुख्य रूप से यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) पर ध्यान देंगे, जो दो प्रकार की होती है:
किसी वस्तु में उसकी गति (Motion) के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं। * बहती हुई हवा, बहता पानी, चलती हुई गोली, दौड़ता हुआ व्यक्ति—इन सभी में गतिज ऊर्जा होती है। * सूत्र: यदि $m$ द्रव्यमान की वस्तु $v$ वेग से चल रही हो, तो: $$ K.E. = \frac{1}{2} m v^2 $$ * इससे स्पष्ट है कि वेग के दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।
किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति (Position) या आकार (Configuration) के कारण जो ऊर्जा संचित होती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। * गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy): जब हम किसी वस्तु को जमीन से ऊपर उठाते हैं, तो हम गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कार्य करते हैं। यह कार्य वस्तु में ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। * सूत्र: यदि $m$ द्रव्यमान की वस्तु को जमीन से $h$ ऊँचाई तक उठाया जाए, तो: $$ P.E. = mgh $$ (जहाँ $g$ गुरुत्वीय त्वरण है) * प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy): खींचे हुए धनुष की डोरी, दबी हुई स्प्रिंग या चाबी भरे खिलौने में संचित ऊर्जा।
नियम: ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है; इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। ब्रह्मांड की कुल ऊर्जा हमेशा स्थिर (Constant) रहती है।
दैनिक जीवन में, यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि कोई कार्य कितनी जल्दी या कितनी देरी से किया गया है। * परिभाषा: कार्य करने की दर (Rate of doing work) या ऊर्जा रूपांतरण की दर को शक्ति कहते हैं। $$ शक्ति (P) = \frac{कार्य (W)}{समय (t)} $$ * प्रकृति: शक्ति एक अदिश राशि है। * मात्रक: इसका SI मात्रक वाट (Watt - W) है, जो जेम्स वाट के नाम पर रखा गया है। * 1 वाट = 1 जूल / 1 सेकंड ($1\ W = 1\ J/s$) * बड़े मात्रक: 1 किलोवाट (kW) = 1000 W; 1 मेगावाट (MW) = $10^6$ W * अश्व शक्ति (Horse Power - H.P.): यह शक्ति का एक पुराना लेकिन अभी भी लोकप्रिय मात्रक है (विशेषकर मोटर्स और इंजन के लिए)। * $1\ H.P. = 746\ Watt$
घरों और उद्योगों में प्रयुक्त बड़ी मात्रा में ऊर्जा को 'जूल' में मापना सुविधाजनक नहीं है। इसलिए हम 'किलोवाट-घंटा' (kWh) का उपयोग करते हैं, जिसे सामान्यतः यूनिट (Unit) कहा जाता है। * 1 kWh वह ऊर्जा है जो 1 kW (1000 W) शक्ति वाले उपकरण द्वारा 1 घंटे में उपयोग की जाती है। * $1\ kWh = 1000\ W \times 3600\ s = 3.6 \times 10^6\ Joule$
भौतिकी में कार्य तब होता है जब बल विस्थापन उत्पन्न करता है। कार्य करने की यह क्षमता ही ऊर्जा कहलाती है, जो गति (गतिज ऊर्जा) या स्थिति (स्थितिज ऊर्जा) के रूप में हो सकती है। ऊर्जा को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता, यह केवल अपना रूप बदलती है (ऊर्जा संरक्षण)। अंत में, हम किसी मशीन की श्रेष्ठता इस बात से मापते हैं कि वह कितनी तेजी से यह कार्य कर सकती है, जिसे हम शक्ति (Power) कहते हैं और वाट में मापते हैं।