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क्या आपने कभी सोचा है कि पेड़ से टूटा हुआ सेब हमेशा नीचे ही क्यों गिरता है? पृथ्वी सूर्य के चारों ओर और चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर क्यों घूमता है? ब्रह्मांड की इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही अदृश्य बल कार्य कर रहा है—गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force)। भौतिकी में गुरुत्वाकर्षण सबसे बुनियादी और सार्वभौमिक बलों में से एक है।
सर आइजैक न्यूटन ने यह निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्मांड में प्रत्येक पिंड (Object) हर दूसरे पिंड को एक बल से अपनी ओर आकर्षित करता है। इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम: ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों (Masses) के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती (directly proportional) और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होता है। यह बल दोनों पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
गणितीय रूप: मान लीजिए $m_1$ और $m_2$ द्रव्यमान वाले दो पिंड एक-दूसरे से $r$ दूरी पर स्थित हैं, तो उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल ($F$) होगा: $$ F \propto \frac{m_1 \times m_2}{r^2} $$ $$ F = G \frac{m_1 \times m_2}{r^2} $$
यह नियम कई घटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है: 1. वह बल जो हमें पृथ्वी से बाँधे रखता है। 2. पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति। 3. सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति। 4. चंद्रमा तथा सूर्य के कारण समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा (Tides)।
यद्यपि 'गुरुत्वाकर्षण' ब्रह्मांड के किन्हीं भी दो पिंडों के बीच के आकर्षण को दर्शाता है, 'गुरुत्व' (Gravity) विशेष रूप से पृथ्वी (या किसी अन्य ग्रह/उपग्रह) द्वारा किसी वस्तु पर लगाए गए आकर्षण बल को कहते हैं।
जब भी कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तो पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण उसके वेग में लगातार परिवर्तन (वृद्धि) होता है। वेग में इस परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाले त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण ($g$) कहते हैं।
आम भाषा में हम अक्सर 'द्रव्यमान' और 'भार' को एक ही मान लेते हैं, लेकिन भौतिकी में ये दोनों बिल्कुल अलग हैं।
चंद्रमा पर भार: चंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या पृथ्वी की तुलना में कम है, इसलिए वहाँ गुरुत्वीय त्वरण ($g$) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का लगभग $1/6$ वाँ भाग होता है। इसलिए, किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार उसके पृथ्वी पर भार का $1/6$ होगा। (यदि पृथ्वी पर आपका भार $600\ N$ है, तो चंद्रमा पर यह केवल $100\ N$ होगा)।
जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में नीचे गिरती है, तो उसे 'मुक्त पतन' (Free Fall) कहते हैं। मुक्त पतन में: * गिरते समय वस्तु की गति की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं होता। * पृथ्वी के आकर्षण के कारण वेग के परिमाण में निरंतर वृद्धि होती है, अर्थात् वस्तु $9.8\ m/s^2$ के त्वरण ($g$) से गिरती है।
यदि हम किसी पत्थर को ऊपर फेंकते हैं, तो वह गुरुत्वाकर्षण के कारण वापस नीचे आ जाता है। यदि हम इसे और अधिक बल से फेंकें, तो यह और अधिक ऊँचाई तक जाएगा। पलायन वेग वह न्यूनतम प्रारंभिक वेग है जिससे किसी वस्तु को पृथ्वी (या किसी ग्रह) की सतह से ऊपर की ओर फेंकने पर, वह उस ग्रह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर अंतरिक्ष में चली जाती है और कभी वापस नहीं लौटती। * पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान लगभग $11.2\ km/s$ (किलोमीटर प्रति सेकंड) है।
गुरुत्वाकर्षण वह अदृश्य धागा है जो संपूर्ण ब्रह्मांड को एक साथ बाँधे रखता है। न्यूटन का सार्वत्रिक नियम हमें बताता है कि द्रव्यमान वाली हर वस्तु दूसरी वस्तु को आकर्षित करती है। पृथ्वी का यही आकर्षण बल गुरुत्व ($g$) कहलाता है, जो हमारे भार का कारण है। यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारा द्रव्यमान हर जगह समान रहता है, लेकिन हमारा भार गुरुत्वाकर्षण के अनुसार बदलता रहता है। गुरुत्वाकर्षण के इन्हीं सिद्धांतों का उपयोग करके आज हम उपग्रहों (Satellites) को अंतरिक्ष में भेजते हैं और ग्रहों की चाल को समझते हैं।