विस्तृत सिद्धांत, सूत्र, आरेख और स्मृति सहायक।
क्या आपने कभी सोचा है कि ऊंट रेगिस्तान की रेत पर आसानी से कैसे चल लेता है, जबकि हमारे पैर धँस जाते हैं? या सुई का सिरा इतना नुकीला क्यों बनाया जाता है? इन सभी सवालों का जवाब 'दाब' (Pressure) में छिपा है। इसके अलावा, जब हम किसी वस्तु को पानी में डुबोते हैं, तो वह हल्की क्यों महसूस होती है? यह तरल पदार्थों के गुणों से संबंधित है।
किसी वस्तु की सतह के लंबवत (Perpendicular) लगने वाले कुल बल को प्रणोद कहते हैं। * चूँकि यह एक प्रकार का बल ही है, इसलिए इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है। * यह एक सदिश राशि है।
प्रति एकांक क्षेत्रफल (Unit Area) पर लगने वाले प्रणोद (या लंबवत बल) को दाब कहते हैं। * सूत्र: $$ दाब (P) = \frac{प्रणोद\ (लंबवत\ बल,\ F)}{क्षेत्रफल\ (A)} $$ * मात्रक: इसका SI मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर ($N/m^2$) है। वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) के सम्मान में इसे पास्कल (Pa) भी कहा जाता है। ($1\ Pa = 1\ N/m^2$) * दाब एक अदिश (Scalar) राशि है। यद्यपि बल एक सदिश राशि है, लेकिन दाब किसी बिंदु पर सभी दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है, इसलिए इसकी कोई एक निश्चित दिशा नहीं होती।
दाब के सूत्र का दैनिक जीवन में प्रभाव ($P \propto \frac{1}{A}$): * क्षेत्रफल कम होने पर दाब बढ़ता है: कील या सुई का सिरा बहुत नुकीला (कम क्षेत्रफल) बनाया जाता है, ताकि कम बल लगाने पर भी वह बहुत अधिक दाब उत्पन्न कर सके और आसानी से लकड़ी या कपड़े में घुस सके। * क्षेत्रफल बढ़ने पर दाब घटता है: स्कूल बैग की पट्टियाँ चौड़ी बनाई जाती हैं, ताकि बैग का भार (बल) कंधों के एक बड़े क्षेत्रफल पर फैले और कंधों पर कम दाब पड़े, जिससे दर्द न हो। इसी प्रकार ऊंट के पैर चौड़े होते हैं, जिससे वे रेत पर कम दाब डालते हैं और धँसते नहीं हैं।
वे पदार्थ जो बह सकते हैं, तरल (Fluids) कहलाते हैं। सभी द्रव (Liquids) और गैसें (Gases) तरल हैं। जिस प्रकार ठोस वस्तुएं अपने भार के कारण जिस सतह पर रखी जाती हैं उस पर दाब डालती हैं, उसी प्रकार तरल पदार्थ भी अपने भार के कारण उस बर्तन की दीवारों और तली पर दाब डालते हैं जिसमें वे रखे जाते हैं।
फ्रांसीसी वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल ने तरल पदार्थों के दाब के संबंध में एक महत्वपूर्ण नियम दिया। नियम: एक बंद बर्तन में रखे गए किसी स्थिर तरल (Liquid at rest) के किसी एक भाग पर जब कोई बाहरी दाब डाला जाता है, तो वह दाब तरल के अंदर सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित (Transmit) हो जाता है।
जब आप पानी में प्लास्टिक की खाली बोतल डुबोने की कोशिश करते हैं, तो आपको एक ऊपर की ओर धक्का महसूस होता है। बोतल को छोड़ते ही वह तुरंत सतह पर आ जाती है। * परिभाषा: जब किसी वस्तु को किसी तरल (द्रव या गैस) में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो तरल उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावन बल (Buoyant Force) या उत्क्षेप (Upthrust) कहते हैं, और तरल के इस गुण को उत्प्लावकता (Buoyancy) कहते हैं। * उत्प्लावन बल का परिमाण तरल के घनत्व (Density) पर निर्भर करता है। समुद्र के पानी का घनत्व नदी के पानी से अधिक होता है, इसलिए समुद्र के पानी में तैरना आसान होता है (उत्प्लावन बल अधिक होता है)।
वस्तुओं का तैरना या डूबना: * यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से अधिक है, तो वस्तु डूब जाएगी (उदा: लोहे की कील)। * यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से कम है, तो वस्तु तैरेगी (उदा: कॉर्क या लकड़ी)। * (दूसरे शब्दों में: यदि वस्तु का भार उत्प्लावन बल से अधिक है, तो वह डूबेगी।)
उत्प्लावन बल का परिमाण कितना होता है, इसकी सटीक गणना यूनानी वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने की थी। सिद्धांत: जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह ऊपर की ओर एक बल (उत्प्लावन बल) का अनुभव करती है, जो वस्तु द्वारा विस्थापित (Displaced) किए गए तरल के भार के बराबर होता है।
$$ उत्प्लावन\ बल = वस्तु\ द्वारा\ विस्थापित\ तरल\ का\ भार $$
यही कारण है कि जब हम किसी वस्तु को पानी में तौलते हैं, तो वह अपने वास्तविक भार से हल्की प्रतीत होती है (आभासी भार में कमी = उत्प्लावन बल)।
आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुप्रयोग: 1. जलयानों (Ships) और पनडुब्बियों (Submarines) की डिजाइन बनाने में। (लोहे का जहाज इसलिए नहीं डूबता क्योंकि उसका आकार ऐसा बनाया जाता है कि वह अपने भार से अधिक पानी विस्थापित कर दे)। 2. लैक्टोमीटर (Lactometer): दूध की शुद्धता मापने का यंत्र इसी सिद्धांत पर कार्य करता है। 3. हाइड्रोमीटर (Hydrometer): द्रवों का घनत्व मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
घनत्व (Density): किसी पदार्थ के एकांक आयतन (Unit Volume) के द्रव्यमान को उसका घनत्व कहते हैं। $$ घनत्व = \frac{द्रव्यमान}{आयतन} $$ ($d = m/V$)
आपेक्षिक घनत्व (Relative Density): किसी पदार्थ के घनत्व और पानी के घनत्व के अनुपात को उस पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व कहते हैं। $$ आपेक्षिक\ घनत्व = \frac{पदार्थ\ का\ घनत्व}{पानी\ का\ घनत्व} $$
दाब हमें बताता है कि बल कितने क्षेत्रफल पर वितरित है; इसीलिए नुकीली चीजें आसानी से चुभती हैं और चौड़े पट्टे भार सहने में मदद करते हैं। तरल पदार्थों में, पास्कल का नियम हमें छोटी सी शक्ति से भारी वजन (हाइड्रोलिक सिस्टम) उठाने की अनुमति देता है। जब हम किसी वस्तु को पानी में डालते हैं, तो उत्प्लावकता उसे ऊपर की ओर धकेलती है। आर्किमिडीज का सिद्धांत स्पष्ट करता है कि यह ऊपर की ओर लगने वाला बल हटाए गए पानी के भार के बराबर होता है, जो बड़े लोहे के जहाजों के समुद्र में तैरने का रहस्य उजागर करता है। अंत में, घनत्व यह तय करता है कि कोई वस्तु तरल में तैरेगी या डूब जाएगी।