17.2 कोशिकांग Notes

17.2 कोशिकांग

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.2 कोशिकांग विषय-वस्तु: माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, गॉल्जी

1. परिचय

कोशिका के साइटोप्लाज्म में अनेक सूक्ष्म रचनाएँ उपस्थित होती हैं, जो विशिष्ट कार्य करती हैं। इन रचनाओं को कोशिकांग (Cell Organelles) कहते हैं। कोशिकांगों की तुलना किसी कारखाने के विभिन्न विभागों से की जा सकती है, जहाँ प्रत्येक विभाग अपना विशेष कार्य करता है। कुछ कोशिकांग झिल्ली से घिरे होते हैं जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी सम्मिश्र, अंतर्द्रव्यी जालिका, लाइसोसोम, जबकि कुछ बिना झिल्ली के होते हैं जैसे राइबोसोम और सेंट्रीओल। यूकैरियोटिक कोशिकाओं में ये सभी सुव्यवस्थित कोशिकांग पाए जाते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में केवल राइबोसोम जैसे सरल घटक होते हैं।

कोशिकांगों का अध्ययन कोशिका विज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि जीवन की हर क्रिया किसी न किसी कोशिकांग से संबंधित होती है। ऊर्जा उत्पादन माइटोकॉन्ड्रिया से, प्रोटीन संश्लेषण राइबोसोम से, स्राव का पैकेजिंग गॉल्जी सम्मिश्र से, अपशिष्ट का विघटन लाइसोसोम से तथा पदार्थों का परिवहन अंतर्द्रव्यी जालिका से होता है। परीक्षा की दृष्टि से प्रत्येक कोशिकांग की खोजकर्ता, संरचना और कार्य को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।

कोशिकांगों को दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जाता है। पहली श्रेणी में वे कोशिकांग हैं जो झिल्लीयुक्त होते हैं और दूसरी में झिल्ली रहित होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया, प्लास्टिड और अंतर्द्रव्यी जालिका में कोशिकांगों की अपनी कला होती है, जबकि राइबोसोम तथा सेंट्रीओल बिना कला के पाए जाते हैं। यह अंतर यूकैरियोटिक तथा प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के वर्गीकरण में भी सहायक होता है। निम्नलिखित अनुभागों में मुख्य कोशिकांगों की विस्तृत जानकारी दी गई है।

2. माइटोकॉन्ड्रिया

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'पावरहाउस' या 'ऊर्जा केंद्र' कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका के लिए ATP के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करता है। 'माइटोकॉन्ड्रिया' शब्द का अर्थ होता है 'सूत्रकणिका' (चूर्णी धागा)। इसकी खोज कॉलिकर ने की, जबकि इसका नाम बेंडा ने रखा। माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या कोशिका के प्रकार और क्रियाशीलता पर निर्भर करती है; उदाहरण के लिए यकृत और पेशी की कोशिकाओं में ये अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

संरचना:

कार्य:

  1. माइटोकॉन्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन के क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला की क्रियाएँ होती हैं, जिनसे ATP का निर्माण होता है।
  2. यह अर्धस्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग है, क्योंकि इसमें अपना DNA तथा राइबोसोम होते हैं।
  3. माइटोकॉन्ड्रिया स्वयं विभाजित होकर नए माइटोकॉन्ड्रिया का निर्माण करता है।
  4. यह कैल्शियम आयनों का संचय करता है तथा कोशिका मृत्यु (एपोप्टोसिस) में भी भूमिका निभाता है।

3. राइबोसोम

राइबोसोम को प्रोटीन संश्लेषण का स्थल कहा जाता है। इनकी खोज जॉर्ज पालाडे ने सूक्ष्मदर्शी के द्वारा की थी। राइबोसोम छोटे, दानेदार एवं झिल्ली रहित कोशिकांग हैं, जो RNA और प्रोटीन से मिलकर बने होते हैं। ये कोशिका के साइटोप्लाज्म में स्वतंत्र अवस्था में या अंतर्द्रव्यी जालिका की सतह पर चिपके हुए पाए जाते हैं। जो राइबोसोम जालिका से चिपके होते हैं, उन्हें 'चिपके राइबोसोम' तथा स्वतंत्र राइबोसोम को 'स्वतंत्र राइबोसोम' कहते हैं।

राइबोसोम के कार्य:

  1. राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण का स्थल है, जहाँ mRNA के कूट अनुवाद कर प्रोटीन बनाए जाते हैं।
  2. स्वतंत्र राइबोसोम कोशिका के अंदर उपयोग होने वाले प्रोटीन बनाते हैं, जबकि चिपके राइबोसोम निर्यात होने वाले प्रोटीन बनाते हैं।
  3. राइबोसोम को 'प्रोटीन कारखाना' भी कहा जाता है।

4. गॉल्जी सम्मिश्र और अन्य झिल्लीयुक्त कोशिकांग

गॉल्जी सम्मिश्र की खोज कैमिलो गॉल्जी ने 1898 में तंत्रिका कोशिका में की थी। इसे 'कोशिका का डाकघर' या 'पैकेजिंग प्लांट' भी कहा जाता है। यह समतल, थैली जैसी झिल्लीयुक्त रचनाओं का समूह है, जिन्हें सिस्टर्ना कहते हैं। सिस्टर्ना के दो फलक होते हैं, निर्माण फलक (cis face) तथा परिपक्व फलक (trans face)।

अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum): इसकी खोज पोर्टर ने की थी। यह झिल्लियों का एक जाल है, जो नाभिकीय झिल्ली से साइटोप्लाज्म तक फैला होता है। इसके दो प्रकार हैं:

  1. कर्णदार अंतर्द्रव्यी जालिका (SER): राइबोसोम रहित, लिपिड संश्लेषण करती है।
  2. खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER): राइबोसोम सहित, प्रोटीन संश्लेषण करती है।

लाइसोसोम: इसकी खोज डी डूव ने की थी। यह झिल्लीयुक्त थैली है जिसमें पाचक एंजाइम होते हैं। यह कोशिका के अपशिष्ट पदार्थों तथा पुराने कोशिकांगों को पचा देता है, इसीलिए इसे 'आत्मघाती थैली' कहा जाता है।

रिक्तिकाएँ (Vacuoles): पादप कोशिकाओं में बड़ी रिक्तिकाएँ होती हैं, जो जल एवं अपशिष्ट पदार्थ संचित करती हैं। जंतु कोशिकाओं में छोटी रिक्तिकाएँ पाई जाती हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मुख्य कोशिकांग, खोजकर्ता और कार्य

कोशिकांग खोजकर्ता मुख्य कार्य
माइटोकॉन्ड्रिया कॉलिकर कोशिका का पावरहाउस, ATP उत्पादन
राइबोसोम पालाडे प्रोटीन संश्लेषण
गॉल्जी सम्मिश्र कैमिलो गॉल्जी प्रोटीन-लिपिड का पैकेजिंग, डाकघर
अंतर्द्रव्यी जालिका पोर्टर प्रोटीन और लिपिड का संश्लेषण
लाइसोसोम डी डूव अपशिष्ट का पाचन, आत्मघाती थैली

तालिका 2: झिल्लीयुक्त और झिल्ली रहित कोशिकांग

झिल्लीयुक्त कोशिकांग झिल्ली रहित कोशिकांग
माइटोकॉन्ड्रिया राइबोसोम
गॉल्जी सम्मिश्र सेंट्रीओल
अंतर्द्रव्यी जालिका बेसल कण
लाइसोसोम सूक्ष्मनलिकाएँ
रिक्तिकाएँ केन्द्रक रंध्र नहीं

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[17.2 कोशिकांग] --> B[माइटोकॉन्ड्रिया]
    A --> C[राइबोसोम]
    A --> D[गॉल्जी सम्मिश्र]
    A --> E[अंतर्द्रव्यी जालिका]
    A --> F[लाइसोसोम]
    B --> B1[पावरहाउस]
    B --> B2[ATP उत्पादन]
    B --> B3[दोहरी झिल्ली क्राइस्टी]
    C --> C1[प्रोटीन संश्लेषण]
    C --> C2[70S 80S]
    D --> D1[डाकघर]
    D --> D2[सिस्टर्ना]
    E --> E1[SER लिपिड]
    E --> E2[RER प्रोटीन]
    F --> F1[आत्मघाती थैली]
    F --> F2[पाचक एंजाइम]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

माइटोकॉन्ड्रिया का चित्र बाहरी झिल्ली मैट्रिक्स क्राइस्टी स्वर्ण नियम माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का पावरहाउस है क्योंकि यह ATP बनाता है।

गॉल्जी सम्मिश्र और उसके फलक गॉल्जी सम्मिश्र सिस्टर्ना की थैलियाँ निर्माण फलक परिपक्व फलक स्वर्ण नियम गॉल्जी सम्मिश्र को कोशिका का डाकघर और पैकेजिंग प्लांट याद रखें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. राइबोसोम और गॉल्जी सम्मिश्र को झिल्लीयुक्त कोशिकांग समझ लिया जाता है, जबकि राइबोसोम झिल्ली रहित होता है।
  2. माइटोकॉन्ड्रिया की खोज के नाम में भ्रम होता है; खोजकर्ता कॉलिकर है जबकि नाम बेंडा ने दिया।
  3. विद्यार्थी 70S और 80S राइबोसोम को गलत कोशिकाओं से जोड़ देते हैं; 70S प्रोकैरियोट में और 80S यूकैरियोट में होता है।
  4. लाइसोसोम को पाचन करने वाला अंग समझा जाता है परंतु इसका पाचन केवल कोशिका के अंदर ही होता है, इसीलिए इसे आत्मघाती थैली कहा जाता है।
  5. SER और RER के कार्यों को उल्टा याद कर लिया जाता है; RER प्रोटीन तथा SER लिपिड का संश्लेषण करता है।
  6. गॉल्जी सम्मिश्र केवल स्राव में भाग लेता है, यह समझ गलत है; यह प्रोटीन-लिपिड के संशोधन, पैकेजिंग और कोशिका भित्ति निर्माण में भी सहायक है।
  7. कई बार विद्यार्थी यह भूल जाते हैं कि माइटोकॉन्ड्रिया अर्धस्वायत्त है क्योंकि इसमें अपना DNA और राइबोसोम होते हैं।
  8. रिक्तिका को केवल जंतु कोशिका का भाग मान लिया जाता है, जबकि बड़ी रिक्तिका पादप कोशिका की विशेषता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक कोशिकांग के साथ उसका प्रचलित नाम याद रखें: माइटोकॉन्ड्रिया-पावरहाउस, गॉल्जी-डाकघर, लाइसोसोम-आत्मघाती थैली, राइबोसोम-प्रोटीन कारखाना।
  2. खोजकर्ता और नामकरण को अलग-अलग याद रखें, जैसे माइटोकॉन्ड्रिया की खोज कॉलिकर और नामकरण बेंडा ने किया।
  3. 70S (प्रोकैरियोट) और 80S (यूकैरियोट) का संबंध वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में बहुत पूछा जाता है, इसे दृढ़ता से याद रखें।
  4. क्राइस्टी, मैट्रिक्स, सिस्टर्ना जैसे तकनीकी शब्दों के अर्थ समझ कर याद करें, क्योंकि ये सीधे प्रश्न बनते हैं।
  5. अर्धस्वायत्त कोशिकांग के प्रश्न में उत्तर हमेशा माइटोकॉन्ड्रिया और प्लास्टिड होगा।
  6. लाइसोसोम के खोजकर्ता डी डूव को अन्य खोजकर्ताओं से अलग याद रखें।
  7. झिल्लीयुक्त और झिल्ली रहित कोशिकांगों की सूची बनाकर एक नज़र में पुनरावृत्ति करें।
  8. गॉल्जी सम्मिश्र के cis और trans फलक की स्थिति को आरेख से जोड़कर याद रखें।

10. निष्कर्ष

कोशिकांगों का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि कोशिका एक सुव्यवस्थित जैविक कारखाना है, जहाँ हर घटक अपना विशिष्ट कार्य करता है। माइटोकॉन्ड्रिया से ऊर्जा, राइबोसोम से प्रोटीन, गॉल्जी सम्मिश्र से पैकेजिंग और लाइसोसोम से पाचन-विनाश की प्रक्रियाएँ मिलकर कोशिका के जीवन को बनाए रखती हैं। परीक्षा में इन कोशिकांगों के नाम, खोजकर्ता, संरचना और कार्य से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं, अतः इन्हें तालिका तथा आरेख के सहारे क्रमबद्ध रूप से याद रखना ही सफलता की कुंजी है।