विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ) अध्याय: 17.5 जंतु ऊतक विषय-वस्तु: उपकला, पेशी, तंत्रिका ऊतक
जंतुओं के शरीर में अनेक प्रकार की कोशिकाएँ मिलकर विशिष्ट कार्य करने वाले ऊतक बनाती हैं। जंतु ऊतकों की कोशिकाएँ मुख्य रूप से तीन भ्रूणीय स्तरों- एक्टोडर्म, मेसोडर्म और एंडोडर्म से विकसित होती हैं। जंतु ऊतक चार मुख्य प्रकार के होते हैं: उपकला ऊतक, पेशी ऊतक, तंत्रिका ऊतक और संयोजी ऊतक। प्रत्येक ऊतक शरीर का विशेष कार्य संपन्न करता है और शरीर की रचना में भिन्न-भिन्न स्थानों पर पाया जाता है।
पादप ऊतकों की तुलना में जंतु ऊतक अधिक विभेदित और विशिष्ट होते हैं। जंतु ऊतकों की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती, जो पादप कोशिका से प्रमुख भिन्नता है। उपकला ऊतक शरीर की सतह और गुहाओं की परत बनाता है, पेशी ऊतक गति कराता है, तंत्रिका ऊतक संदेशों का संचालन करता है तथा संयोजी ऊतक शरीर के अंगों को जोड़ता और सहारा देता है।
परीक्षा की दृष्टि से जंतु ऊतकों के प्रकार, उनके स्थान तथा कार्य बहुत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से पेशी ऊतक के तीनों प्रकार (ऐच्छिक, अनैच्छिक, हृदय), तंत्रिका कोशिका की संरचना, रक्त को अस्थि तथा उपकला के विभिन्न प्रकार से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी का क्रमबद्ध अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह तथा आंतरिक गुहाओं और अंगों की परत बनाता है। इसकी कोशिकाएँ घनी होती हैं तथा अंतरकोशिकीय स्थान नहीं होता। यह ऊतक रक्त वाहिकाओं से रहित होता है और इसके नीचे संयोजी ऊतक होता है। उपकला ऊतक का मुख्य कार्य सुरक्षा, अवशोषण, स्राव और स्पर्श ग्रहण करना है।
उपकला ऊतक के प्रकार:
पेशी ऊतक संकुचन और प्रसार करके गति उत्पन्न करता है। इसकी कोशिकाओं को पेशी तंतु या मांसपेशी फाइबर कहते हैं। पेशी ऊतक तीन प्रकार के होते हैं:
1. ऐच्छिक (रेखित) पेशी: ये पेशियाँ हमारी इच्छा पर कार्य करती हैं, इसलिए ऐच्छिक कहलाती हैं। इनमें तंतुओं पर धारियाँ (रेखाएँ) होती हैं, इसलिए इन्हें रेखित पेशी भी कहते हैं। ये हाथ, पैर, जीभ आदि में पाई जाती हैं। इनके तंतु बेलनाकार, बहुकेन्द्रकीय तथा लंबे होते हैं। इनमें थकान होती है।
2. अनैच्छिक (अरेखित) पेशी: ये पेशियाँ हमारी इच्छा पर निर्भर नहीं होतीं, इसलिए अनैच्छिक कहलाती हैं। इनमें धारियाँ नहीं होतीं, इसलिए इन्हें अरेखित पेशी या चिकनी पेशी भी कहते हैं। ये आमाशय, आंत, रक्त वाहिकाओं की दीवार, श्वसन नली आदि में पाई जाती हैं। इनकी कोशिकाएँ धुरी के आकार की, एककेन्द्रकीय तथा छोटी होती हैं।
3. हृदय (कार्डियक) पेशी: यह केवल हृदय की दीवार में पाई जाती है। इसमें धारियाँ होती हैं, परंतु यह अनैच्छिक होती है। इसकी कोशिकाएँ शाखाओं वाली, एककेन्द्रकीय तथा विशेष संधि अंतर्कलन पट्टिका (Intercalated Disc) से जुड़ी होती हैं। हृदय पेशी पूरे जीवन बिना थके धड़कती रहती है।
तंत्रिका ऊतक: तंत्रिका ऊतक संदेशों (आवेगों) का संचालन करता है। इसकी मूल इकाई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) है। न्यूरॉन की खोज सैंटियागो रामन वाई काजल ने की थी। न्यूरॉन के भाग हैं:
तंत्रिका कोशिकाएँ मस्तिष्क, मेरु रज्जु और तंत्रिकाओं में पाई जाती हैं।
संयोजी ऊतक: यह शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ता है और उन्हें सहारा देता है। इसकी कोशिकाएँ एक-दूसरे से दूर रहती हैं तथा बीच में अंतरकोशिकीय पदार्थ (मैट्रिक्स) होता है। संयोजी ऊतक के प्रकार हैं:
अस्थि का कार्य: यह शरीर को सहारा देती है और कैल्शियम-फॉस्फोरस संग्रहित करती है। अस्थि का निर्माण कोशिकाएँ ऑस्टियोब्लास्ट तथा अस्थि कोशिकाएँ ऑस्टियोसाइट कहलाती हैं।
| पेशी | नियंत्रण | धारियाँ | स्थान | केन्द्रक |
|---|---|---|---|---|
| ऐच्छिक (रेखित) | ऐच्छिक | उपस्थित | हाथ-पैर, जीभ | बहुकेन्द्रकीय |
| अनैच्छिक (अरेखित) | अनैच्छिक | अनुपस्थित | आमाशय, आंत | एककेन्द्रकीय |
| हृदय (कार्डियक) | अनैच्छिक | उपस्थित | हृदय की दीवार | एककेन्द्रकीय |
| संयोजी ऊतक | विशेषता | कार्य |
|---|---|---|
| रक्त | तरल | परिवहन |
| अस्थि | कठोर | सहारा, कैल्शियम संचय |
| उपास्थि | लचीला | जोड़ों में लचीलापन |
| टेंडन | घना | पेशी को अस्थि से जोड़ना |
| लिगामेंट | घना | अस्थि को अस्थि से जोड़ना |
flowchart TD
A[17.5 जंतु ऊतक] --> B[उपकला]
A --> C[पेशी]
A --> D[तंत्रिका]
A --> E[संयोजी]
B --> B1[शल्की]
B --> B2[स्तंभाकार]
B --> B3[पक्ष्माभी]
C --> C1[ऐच्छिक]
C --> C2[अनैच्छिक]
C --> C3[हृदय]
D --> D1[न्यूरॉन]
E --> E1[रक्त]
E --> E2[अस्थि]
E --> E3[उपास्थि]
जंतु ऊतक शरीर की जटिल संरचना और कार्यों का आधार हैं। उपकला ऊतक सुरक्षा और स्राव, पेशी ऊतक गति, तंत्रिका ऊतक संदेश संचालन तथा संयोजी ऊतक जोड़ने व सहारा देने का कार्य करते हैं। इन चारों ऊतकों के प्रकार, स्थान और कार्य की स्पष्ट समझ परीक्षा में बहुत उपयोगी सिद्ध होती है। पेशी ऊतक की धारियों तथा नियंत्रण के आधार पर वर्गीकरण और संयोजी ऊतक के विभिन्न रूपों का ज्ञान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार आते हैं।