18.1 तंत्रिका तंत्र Notes

18.1 तंत्रिका तंत्र

विषय: रेलवे ग्रुप D – जीव विज्ञान (नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता) अध्याय: 18.1 तंत्रिका तंत्र विषय-वस्तु: न्यूरॉन, तंत्रिका तंत्र

1. परिचय

जीवों के शरीर में अनगिनत क्रियाएँ एक साथ चलती रहती हैं, जैसे श्वसन, पाचन, हृदय की धड़कन और चलना-दौड़ना। इन सभी क्रियाओं को नियंत्रित और समन्वित करने के लिए जीवों में एक विशेष व्यवस्था होती है, जिसे नियंत्रण एवं समन्वय कहते हैं। मनुष्य तथा अन्य बहुकोशिकीय जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र (हार्मोन) मिलकर करते हैं। तंत्रिका तंत्र विद्युत-रासायनिक आवेगों द्वारा तीव्र गति से संदेश पहुँचाता है, जबकि हार्मोन रक्त द्वारा धीरे-धीरे कार्य करते हैं। यह अध्याय तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई न्यूरॉन तथा तंत्रिका तंत्र की सम्पूर्ण संरचना पर केन्द्रित है।

तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) है। न्यूरॉन ही उद्दीपनों (जैसे प्रकाश, ध्वनि, स्पर्श) को ग्रहण करके उन्हें तंत्रिका आवेग के रूप में स्थानांतरित करता है। शरीर के बाहर या भीतर होने वाले परिवर्तनों को उद्दीपन कहते हैं, और इन उद्दीपनों के प्रति जीवों की प्रतिक्रिया को अनुक्रिया कहते हैं। जैसे गरम तवे पर हाथ पड़ते ही हाथ खींच लेना — यहाँ ऊष्मा उद्दीपन है और हाथ खींचना अनुक्रिया है। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र शरीर के सभी अंगों को आपस में जोड़कर उनका नियंत्रण करता है।

मानव तंत्रिका तंत्र को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है — केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु) तथा परिधीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलने वाली सभी तंत्रिकाएँ)। परिधीय तंत्रिका तंत्र में संवेदी तथा चालक तंत्रिकाएँ होती हैं, जो उद्दीपनों को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाती हैं और उसके आदेशों को शरीर के अंगों तक पहुँचाती हैं। आगे के अनुच्छेदों में न्यूरॉन की संरचना, उसके प्रकार तथा तंत्रिका आवेग के संचरण को विस्तार से समझा जाएगा।

2. न्यूरॉन की संरचना

न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई है। यह विद्युत-रासायनिक संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में सक्षम है। न्यूरॉन के मुख्य तीन भाग होते हैं:

कई न्यूरॉनों के एक्सॉन के चारों ओर माइलिन आवरण (myelin sheath) पाया जाता है, जो एक सफेद वसायुक्त पदार्थ से बना होता है। यह आवरण आवेग के संचरण को तीव्र बनाता है तथा तंतु की रक्षा करता है। माइलिन आवरण में समय-समय पर छोटे-छोटे अंतराल होते हैं, जिन्हें रैनविए की ग्रंथियाँ (Nodes of Ranvier) कहते हैं। आवेग इन ग्रंथियों से कूद-कूद कर (saltatory conduction) चलता है, जिससे चालन अधिक तेज़ होता है। एक्सॉन के अंत में शाखाएँ होती हैं, जिनके अंतिम सिरे पर सिनैप्टिक पुटिकाएँ पाई जाती हैं, जिनमें रासायनिक संदेशवाहक पदार्थ न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटाइलकोलीन) संग्रहित रहते हैं।

न्यूरॉन की संरचना को याद रखने हेतु एक सरल उपमा दी जा सकती है — कोशिका काय एक कारखाने जैसा है, डेन्ड्राइट माल पहुँचाने वाले प्रवेश द्वार हैं, और एक्सॉन माल को बाहर भेजने वाली लंबी सड़क है। उदाहरण के लिए:

  1. स्पर्श होते ही त्वचा के संवेदी न्यूरॉन के डेन्ड्राइट उद्दीपन ग्रहण करते हैं।
  2. आवेग कोशिका काय से होकर एक्सॉन में प्रवेश करता है।
  3. एक्सॉन के अंत में न्यूरोट्रांसमीटर निकलता है, जो अगली कोशिका को उत्तेजित करता है।

3. न्यूरॉन के प्रकार और तंत्रिका तंत्र के भाग

न्यूरॉन कार्य के आधार पर तीन प्रकार के होते हैं:

मानव तंत्रिका तंत्र के प्रमुख भाग निम्न हैं:

तंत्रिका तंत्र की समन्वय शक्ति का अनुमान इस बात से लगता है कि एक साधारण क्रिया जैसे गेंद को पकड़ने में दर्जनों मांसपेशियाँ और सैकड़ों न्यूरॉन एक साथ सक्रिय होते हैं। न्यूरॉन पुनर्जनन नहीं करते अर्थात क्षतिग्रस्त न्यूरॉन पुनः नहीं बनते, इसलिए इनकी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। मेरुरज्जु शरीर की पीठ में कशेरुकाओं के भीतर सुरक्षित रहती है और 31 जोड़ी मेरू तंत्रिकाएँ देती है।

4. तंत्रिका आवेग और सिनैप्स

न्यूरॉन के भीतर संचारित होने वाले संकेत को तंत्रिका आवेग कहते हैं। यह आवेग वास्तव में विद्युत-रासायनिक परिवर्तन है। विश्राम अवस्था में न्यूरॉन की कोशिका का बाहरी सिरा धनावेशित (Na⁺ अधिक) तथा भीतरी सिरा ऋणावेशित (K⁺ अधिक) रहता है, इसे विश्राम विभव कहते हैं। जब उद्दीपन आता है तो Na⁺ आयन अंदर प्रवेश करते हैं, आवेश की स्थिति पलट जाती है, इस अवस्था को क्रिया विभव या विध्रुवण कहते हैं। इसके तुरंत बाद कोशिका पुनः अपनी विश्राम अवस्था में लौट आती है। इसी प्रकार आवेग एक सिरे से दूसरे सिरे तक चलता रहता है।

दो न्यूरॉनों के बीच के अत्यंत सूक्ष्म संधि स्थल को सिनैप्स कहते हैं। सिनैप्स पर आवेग सीधे नहीं जाता, बल्कि एक्सॉन अंतक से न्यूरोट्रांसमीटर रसायन निकलकर अगले न्यूरॉन के डेन्ड्राइट पर मौजूद ग्राहकों (receptors) से जुड़ता है और नया आवेग उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए:

  1. एक्सॉन अंतक की सिनैप्टिक पुटिकाओं से एसिटाइलकोलीन निकलता है।
  2. यह अगली कोशिका के झिल्ली पर बंधता है और आवेग पैदा करता है।
  3. इसके बाद यह रसायन एंजाइम द्वारा नष्ट कर दिया जाता है ताकि आवेग एक दिशा में ही चले।

इस प्रकार सिनैप्स यह सुनिश्चित करता है कि आवेग केवल एक दिशा में चले। यही कारण है कि संदेश संवेदी पथ से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक और चालक पथ से अंगों तक सुव्यवस्थित रूप से पहुँचता है। तंत्रिका तंत्र की इसी विद्युत-रासायनिक कार्यप्रणाली के कारण मनुष्य बहुत तेज़ी से परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया कर पाता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: न्यूरॉन के भाग और कार्य

न्यूरॉन का भाग मुख्य कार्य
डेन्ड्राइट उद्दीपन ग्रहण करके आवेग को कोशिका काय की ओर लाना
कोशिका काय पोषण, चयापचय एवं नाइसल कणिकाओं का स्थान
एक्सॉन आवेग को दूर तक ले जाना
माइलिन आवरण आवेग चालन को तीव्र करना, तंतु की रक्षा करना
रैनविए की ग्रंथियाँ कूदकर चालन (saltatory) में सहायक
एक्सॉन अंतक न्यूरोट्रांसमीटर स्रावित करना

तालिका 2: न्यूरॉन के प्रकार

न्यूरॉन प्रकार दिशा उदाहरण कार्य
संवेदी न्यूरॉन इंद्रिय से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की ओर स्पर्श, गंध, प्रकाश का संचरण
चालक न्यूरॉन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से अंगों की ओर मांसपेशियों की संकुचन गति
सहचारी न्यूरॉन दोनों के बीच मस्तिष्क-मेरुरज्जु में संदेश संयोजन

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[18.1 तंत्रिका तंत्र] --> B[न्यूरॉन]
    A --> C[तंत्रिका तंत्र के भाग]
    A --> D[आवेग और सिनैप्स]
    B --> B1[डेन्ड्राइट]
    B --> B2[कोशिका काय]
    B --> B3[एक्सॉन]
    B --> B4[माइलिन आवरण]
    C --> C1[केंद्रीय तंत्रिका तंत्र]
    C --> C2[परिधीय तंत्रिका तंत्र]
    C1 --> C11[मस्तिष्क]
    C1 --> C12[मेरुरज्जु]
    C2 --> C21[संवेदी न्यूरॉन]
    C2 --> C22[चालक न्यूरॉन]
    D --> D1[विश्राम विभव]
    D --> D2[क्रिया विभव]
    D --> D3[न्यूरोट्रांसमीटर]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

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<text x="400" y="40" text-anchor="middle" font-size="26" font-weight="bold" fill="#1a237e">न्यूरॉन की संरचना</text>
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<text x="330" y="296" text-anchor="middle" font-size="16" fill="#000">कोशिका काय</text>
<text x="330" y="318" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">(केन्द्रक)</text>
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<text x="515" y="282" text-anchor="middle" font-size="15" fill="#000">एक्सॉन</text>
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<text x="680" y="215" text-anchor="middle" font-size="14" fill="#000">एक्सॉन अंतक</text>
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<text x="120" y="180" text-anchor="middle" font-size="15" fill="#000">डेन्ड्राइट</text>
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<text x="515" y="188" text-anchor="middle" font-size="13" fill="#555">माइलिन आवरण</text>
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<text x="70" y="566" font-size="15" fill="#000">स्वर्ण नियम: न्यूरॉन में आवेग डेन्ड्राइट से एक्सॉन की ओर एक ही दिशा में चलता है।</text>
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<text x="400" y="40" text-anchor="middle" font-size="26" font-weight="bold" fill="#1a237e">तंत्रिका तंत्र के भाग</text>
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<text x="400" y="111" text-anchor="middle" font-size="17" fill="#000">मानव तंत्रिका तंत्र</text>
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<text x="200" y="201" text-anchor="middle" font-size="16" fill="#000">केंद्रीय तंत्रिका तंत्र</text>
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<text x="600" y="201" text-anchor="middle" font-size="16" fill="#000">परिधीय तंत्रिका तंत्र</text>
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<text x="310" y="287" text-anchor="middle" font-size="15" fill="#000">मेरुरज्जु</text>
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<text x="70" y="566" font-size="15" fill="#000">स्वर्ण नियम: संदेश संवेदी तंत्रिकाओं से केंद्र तक और चालक तंत्रिकाओं से अंगों तक पहुँचता है।</text>
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8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: डेन्ड्राइट और एक्सॉन की दिशा को उलट देना; ध्यान रखें आवेग डेन्ड्राइट से कोशिका काय होते हुए एक्सॉन की ओर जाता है।
  2. गलती: माइलिन आवरण को न्यूरॉन का भाग नहीं मानना; यह वास्तव में सहायक कोशिकाओं द्वारा बना आवरण है।
  3. गलती: सहचारी न्यूरॉन को परिधीय तंत्रिका तंत्र में रखना; ये अधिकांशतः केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पाए जाते हैं।
  4. गलती: रैनविए की ग्रंथियों को माइलिन आवरण का हिस्सा समझना; ये आवरण में बने अंतराल हैं।
  5. गलती: सिनैप्स पर आवेग सीधे (विद्युतीय) पार होने की कल्पना करना; यह न्यूरोट्रांसमीटर रसायन द्वारा ही पार होता है।
  6. गलती: स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को अलग तंत्रिका तंत्र मानना; यह परिधीय तंत्रिका तंत्र का ही भाग है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. न्यूरॉन के तीन भागों को क्रमबद्ध रूप से याद करें — डेन्ड्राइट, कोशिका काय, एक्सॉन।
  2. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में केवल मस्तिष्क और मेरुरज्जु को ही शामिल करें।
  3. तीन प्रकार के न्यूरॉन का कार्य एवं दिशा अवश्य याद रखें।
  4. माइलिन आवरण का कार्य आवेग को तीव्र करना याद रखें; मल्टीपल स्क्लेरोसिस में यही आवरण क्षतिग्रस्त होता है।
  5. न्यूरोट्रांसमीटर का उदाहरण एसिटाइलकोलीन रटें, यह बार-बार पूछा जाता है।
  6. विश्राम विभव में बाहर धनावेश तथा अंदर ऋणावेश याद रखें, परीक्षा में दिशा-धारणा पूछी जाती है।

10. निष्कर्ष

तंत्रिका तंत्र जीवों के नियंत्रण एवं समन्वय का प्रमुख आधार है, जिसकी मूल इकाई न्यूरॉन उद्दीपनों को ग्रहण कर आवेग के रूप में संचारित करती है। डेन्ड्राइट, कोशिका काय और एक्सॉन से बनी न्यूरॉन की संरचना तथा माइलिन आवरण, सिनैप्स और न्यूरोट्रांसमीटर की कार्यप्रणाली को समझना इस अध्याय का केन्द्र बिंदु है। केंद्रीय तथा परिधीय तंत्रिका तंत्र का विभाजन, न्यूरॉन के प्रकार और आवेग संचरण की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझ लेने पर प्रतिवर्त क्रिया, मस्तिष्क के भाग और समन्वय जैसे अगले अध्याय आसानी से सीखे जा सकते हैं।