20.2 मध्यकालीन भारत Notes

20.2 मध्यकालीन भारत

विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (इतिहास और संस्कृति) अध्याय: 20.2 मध्यकालीन भारत विषय-वस्तु: दिल्ली सल्तनत, मुगल, भक्ति आंदोलन

1. परिचय

मध्यकालीन भारत का कालखंड लगभग आठवीं शताब्दी से लेकर अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक माना जाता है। यह वह युग है जिसमें दिल्ली सल्तनत, खिलजी और तुगलक जैसे राजवंशों का उदय हुआ, तुर्क और अफगान शासकों ने भारत पर शासन किया और बाद में मुगल साम्राज्य ने पूरे भारत को एक केंद्रीय सत्ता के अधीन किया। इसी काल में भक्ति आंदोलन, सूफी आंदोलन और धार्मिक-सांस्कृतिक समन्वय का विकास हुआ जिसने भारतीय समाज के चरित्र को गहरे रूप से प्रभावित किया।

रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में मध्यकालीन इतिहास से प्रतिवर्ष दो से चार प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें मुख्यतः सुल्तानों के नाम, उनके कार्यकाल की तिथियाँ, मुगल बादशाहों की उपलब्धियाँ, प्रसिद्ध स्थापत्य स्मारक, भक्ति संतों की रचनाएँ और शासन से जुड़ी संस्थाएँ शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए- तुगलकाबाद की स्थापना किसने की, दीन-ए-इलाही किसने चलाया, या सूरदास किस भक्ति धारा से जुड़े थे।

इस अध्याय में हम तीन मुख्य विषयों का गहन अध्ययन करेंगे- दिल्ली सल्तनत (1206 से 1526 तक), मुगल साम्राज्य (1526 से 1707 तक) और भक्ति आंदोलन (पंद्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी)। तिथियों और नामों की सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, साथ ही अंत में तालिकाएँ और माइंड मैप द्वारा त्वरित दोहराव की सुविधा दी जाएगी।

2. दिल्ली सल्तनत

दिल्ली सल्तनत की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में की थी। ऐबक ने लाहौर से राज करना शुरू किया और बाद में दिल्ली को राजधानी बनाया। उसे 'लाख बख्श' की उपाधि मिली थी क्योंकि वह उदार दान देता था। उसके द्वारा बनवाया गया कुतुबमीनार का कार्य उसके उत्तराधिकारियों ने पूरा किया। गुलाम वंश के महान शासक बलबन ने 'सिजदा' और 'पाबोस' की प्रथा शुरू की और राज्य को 'नियाजत' कहा। खिलजी वंश के संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी थे, परंतु सबसे महान शासक अलाउद्दीन खिलजी थे जिन्होंने बाजार नियंत्रण, मूल्य नियंत्रण, दीवान-ए-रियासत और दीवान-ए-मुस्तखराज जैसी व्यवस्थाएँ स्थापित कीं।

तुगलक वंश के संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक थे और उन्हें 'मुहम्मद बिन तुगलक' का उत्तराधिकारी समझा जाता है। मुहम्मद बिन तुगलक को उसके प्रयोगों (तांबे की मुद्रा, दौलताबाद में राजधानी स्थानांतरण) के लिए जाना जाता है। फिरोज शाह तुगलक ने कर व्यवस्था में सुधार किया और 'हौज-ए-खास' तथा 'कोटला फिरोजशाह' बनवाया। सैय्यद वंश (खिज्र खां) के बाद लोदी वंश आया, जिसका अंतिम शासक इब्राहिम लोदी था जो 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर से पराजित हुआ। इसके साथ ही दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ। सल्तनत काल में 'इक्ता' पद्धति प्रचलित थी और 'अमीर', 'मुक्ती', 'खुत' जैसे पद शासन व्यवस्था में थे।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश- गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी। - अलाउद्दीन खिलजी को 'दक्षिण भारत का विजेता' कहा जाता है क्योंकि उसके सेनापति मलिक काफूर ने दक्षिण पर आक्रमण किए। - अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में देवगिरि, वारंगल और मदुरै के राज्य प्रभावित हुए। - 'दीवान-ए-अर्ज' सेना विभाग, 'दीवान-ए-इंशा' पत्राचार विभाग और 'दीवान-ए-वजारत' वित्त विभाग था। - मुहम्मद बिन तुगलक ने 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना की। - इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था और उसने 'रिहला' नामक यात्रा विवरण लिखा। - अमीर तैमूर ने 1398 में दिल्ली पर आक्रमण किया था।

3. मुगल साम्राज्य

मुगल साम्राज्य की स्थापना 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी को पराजित करने के बाद हुई। बाबर की आत्मकथा 'बाबरनामा' तुर्की भाषा में लिखी गई है। हुमायूं को दो बार राज्य से बाहर जाना पड़ा और शेरशाह सूरी ने 1540 में उसे पराजित किया। शेरशाह सूरी ने 'दाद-दही' (न्याय) प्रणाली, डाक व्यवस्था और ग्रांड ट्रंक रोड (सड़क-ए-आजम) का निर्माण कराया। हुमायूं ने 1555 में पुनः दिल्ली की सत्ता प्राप्त की परंतु अगले वर्ष उसकी मृत्यु हो गई। अकबर ने 1556 में पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू को पराजित किया और 13 वर्ष की आयु में गद्दी संभाली।

अकबर को सबसे महान मुगल शासक माना जाता है। उसने 1582 में दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना की, 1575 में इबादतखाना बनवाया और 1579 में महजर नामक घोषणा जारी की। उसकी मनसबदारी व्यवस्था ने प्रशासन को सुव्यवस्थित किया। जहांगीर को सलिम नाम से जाना जाता था, उसने 'सिलसिला-ए-आदिल' (न्याय की श्रृंखला) लगवाई और नूरजहां के प्रभाव में रहा। शाहजहां के काल में ताजमहल, लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण हुआ और यह काल मुगल वास्तुकला का स्वर्ण युग था। औरंगजेब ने 1659 में शाहजहां को कैद कर सत्ता संभाली, दक्षिण भारत में विजय अभियान चलाए और 1707 में उसकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का तीव्र पतन शुरू हुआ।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - बाबर ने 1526 पानीपत, 1527 खानवा (राणा सांगा) और 1528 चंदेरी की लड़ाई जीती। - अकबर के नवरत्नों में टोडरमल (राजस्व), बीरबल (परामर्शदाता), तानसेन (संगीत), मानसिंह (सेनापति) शामिल थे। - अकबर ने 1582 में 'दीन-ए-इलाही' और 1584 में 'इलाही संवत' शुरू किया। - 'फतहपुर सीकरी' में बुलंद दरवाजा अकबर ने 1602 में बनवाया। - शाहजहां ने आगरा में ताजमहल 1632-1653 के बीच बनवाया, जो मुमताज महल की याद में था। - औरंगजेब के शासन में गुरु तेग बहादुर को 1675 में दिल्ली में शहीद किया गया। - 'आइन-ए-अकबरी' अबुल फजल द्वारा लिखा गया था।

4. भक्ति आंदोलन

भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत से आलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों से हुई। बारहवीं शताब्दी में रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया। मध्ययुगीन भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में रामानंद, कबीर, नानक देव, चैतन्य महाप्रभु, सूरदास, मीराबाई, तुलसीदास, रैदास और गुरु नानक जी शामिल हैं। कबीरदास का प्रमुख सिद्धांत 'निर्गुण भक्ति' और 'राम' को निराकार परमात्मा मानना था। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की नींव रखी और 'जपुजी साहिब' की रचना की।

चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में संकीर्तन की परंपरा को बढ़ावा दिया और कृष्ण भक्ति (गौड़ीय) का प्रचार किया। सूरदास 'अष्टछाप' कवियों में प्रमुख थे और उन्होंने 'सूरसागर' में बाल कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। मीराबाई कृष्ण भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' की रचना अवधी भाषा में की। रामानंद ने दक्षिण से उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन पहुंचाया और वाराणसी को केंद्र बनाया। महाराष्ट्र में संत ज्ञानेश्वर ने 'ज्ञानेश्वरी' लिखी, संत तुकाराम ने अभंग लिखे और नामदेव ने भक्ति का प्रचार किया। इन सभी आंदोलनों का उद्देश्य धार्मिक समानता, जाति-भेद का विरोध और सरल भाषा में ईश्वर की उपासना था।

त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - कबीरदास के दोहे 'साखी', 'सबद' और 'रमैनी' में संग्रहित हैं। - गुरु नानक जी का जन्म 1469 में तलवंडी (ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। - सिखों के पाँच क- कंघा, कड़ा, केश, कच्छा और कृपाण। - रामानुजाचार्य के पूर्व शंकराचार्य ने अद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया था। - 'बीजक' कबीर के दोहों का संग्रह है और 'दादू दयाल' राजस्थान के संत थे। - निर्गुण भक्ति के संत- कबीर, नानक, दादू; सगुण भक्ति के संत- सूरदास, मीरा, तुलसी। - श्रीमद्भागवत गीता के भक्ति पक्ष से प्रभावित होकर भक्ति आंदोलन विकसित हुआ।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

वंश संस्थापक महान शासक महत्वपूर्ण तथ्य
गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक बलबन कुतुबमीनार, सिजदा-पाबोस
खिलजी जलालुद्दीन खिलजी अलाउद्दीन खिलजी बाजार नियंत्रण, मूल्य नियंत्रण
तुगलक गयासुद्दीन तुगलक मुहम्मद बिन तुगलक दौलताबाद प्रयोग, दीवान-ए-कोही
सैय्यद खिज्र खां मुबारक शाह दिल्ली सल्तनत का दुर्बल काल
लोदी बहलोल लोदी सिकंदर लोदी अंतिम शासक इब्राहिम लोदी

तालिका 2

मुगल बादशाह काल प्रमुख उपलब्धि स्मारक/ग्रंथ
बाबर 1526-1530 पानीपत प्रथम युद्ध बाबरनामा
हुमायूं 1530-1556 1555 में पुनः सत्ता दीनपनाह
अकबर 1556-1605 दीन-ए-इलाही, मनसबदारी बुलंद दरवाजा
जहांगीर 1605-1627 न्याय की जंजीर जहांगीरनामा
शाहजहां 1628-1658 ताजमहल, लाल किला शाहजहांनामा
औरंगजेब 1658-1707 दक्षिण विजय फतवा-ए-आलमगीरी

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[मध्यकालीन भारत] --> B[दिल्ली सल्तनत]
    A --> C[मुगल साम्राज्य]
    A --> D[भक्ति आंदोलन]
    B --> B1[गुलाम वंश]
    B --> B2[खिलजी वंश]
    B --> B3[तुगलक वंश]
    B --> B4[लोदी वंश]
    C --> C1[बाबर]
    C --> C2[अकबर]
    C --> C3[शाहजहां]
    C --> C4[औरंगजेब]
    D --> D1[कबीर और नानक]
    D --> D2[सूरदास और मीरा]
    D --> D3[तुलसीदास और रैदास]
    B1 --> E1[कुतुबमीनार]
    C2 --> E2[दीन-ए-इलाही]
    C3 --> E3[ताजमहल]
    D1 --> E4[निर्गुण भक्ति]
    D2 --> E5[सगुण भक्ति]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश गुलाम वंश (1206-1290) - कुतुबुद्दीन ऐबक खिलजी वंश (1290-1320) - अलाउद्दीन खिलजी तुगलक वंश (1320-1414) - मुहम्मद बिन तुगलक सैय्यद वंश (1414-1451) - खिज्र खां लोदी वंश (1451-1526) - इब्राहिम लोदी 1526 पानीपत प्रथम युद्ध - बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी की पराजय स्वर्ण नियम वंशों का कालक्रम 1206 से 1526 तक इसी क्रम में याद रखें: गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद, लोदी।

मुगल बादशाहों का क्रम बाबर 1526-1530 हुमायूं 1530-1556 अकबर 1556-1605 जहांगीर 1605-1627 शाहजहां 1628-1658 औरंगजेब 1658-1707 शेरशाह सूरी 1540-1545 में अंतराल के शासक थे औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य का पतन शुरू स्वर्ण नियम मुगल बादशाहों का क्रम याद रखें: बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब। तिथियों के साथ शाहजहां को ताजमहल से जोड़कर स्मरण करें। औरंगजेब की मृत्यु 1707 को मुगल पतन का प्रारंभ मानें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. अलाउद्दीन खिलजी को खिलजी वंश का संस्थापक समझ लिया जाता है, जबकि संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी थे।
  2. कुतुबमीनार का निर्माण ऐबक ने शुरू किया था, पर इसे अक्सर पूरा करने का श्रेय भी ऐबक को दे दिया जाता है, जबकि इसका शीर्ष स्तर इल्तुतमिश ने पूरा किया।
  3. मुहम्मद बिन तुगलक के तांबे की मुद्रा और दौलताबाद प्रयोग को अक्सर फिरोज शाह तुगलक के साथ जोड़ दिया जाता है।
  4. शेरशाह सूरी को मुगल बादशाह समझने की गलती होती है, जबकि वह सूरी वंश का अफगान शासक था।
  5. पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) को द्वितीय युद्ध (1556) से भ्रमित कर दिया जाता है; द्वितीय युद्ध में अकबर ने हेमू को हराया।
  6. 'दीन-ए-इलाही' अकबर का धर्म था, इसे कभी-कभी जहांगीर से जोड़ दिया जाता है।
  7. कबीर को सगुण भक्ति का संत मान लिया जाता है, जबकि वह निर्गुण भक्ति के प्रमुख संत थे।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. वंशों की तिथि-सीमाएँ (1206, 1290, 1320, 1414, 1451, 1526) कंठस्थ करें और उन्हें एक कहानी की तरह जोड़ें।
  2. हर सुल्तान का एक स्मारक या व्यवस्था के साथ संबंध बनाएं, जैसे अलाउद्दीन-बाजार नियंत्रण, मुहम्मद तुगलक-तांबे की मुद्रा।
  3. मुगल बादशाहों की तिथियों को 30-30 वर्ष के अंतराल से याद करें, जैसे 1526-1530, 1530-1556, 1556-1605।
  4. भक्ति संतों को निर्गुण और सगुण भक्ति में बांटकर सूची बनाएं।
  5. अकबर की नवरत्न सूची और उनके कार्य क्षेत्र को जोड़कर याद रखें।
  6. प्रत्येक युद्ध (पानीपत I, खानवा, पानीपत II) के युद्ध-वर्ष और विरोधी शासक की जोड़ी बनाएं।
  7. पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों में पूछे गए स्मारक-शासक जोड़ों का अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

मध्यकालीन भारत रेलवे ग्रुप D की सामान्य जागरूकता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश, मुगल साम्राज्य के छह प्रमुख बादशाह और भक्ति आंदोलन के संतों की रचनाएँ परीक्षा के मुख्य प्रश्न-क्षेत्र हैं। इन तथ्यों को तालिका, माइंड मैप और समयरेखा के माध्यम से व्यवस्थित रूप से दोहराने से आप न केवल तिथियाँ बल्कि उनका सांस्कृतिक संदर्भ भी स्मरण रख सकते हैं। नियमित अभ्यास से इस अध्याय के प्रश्न निश्चित रूप से पूर्ण अंक दिलाएंगे और मध्यकालीन सांस्कृतिक विरासत की समझ आपको प्रतियोगी परीक्षा में आगे भी लाभ देगी।