विषय: रेलवे ग्रुप D – सामान्य जागरूकता (इतिहास और संस्कृति) अध्याय: 20.4 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन विषय-वस्तु: 1857, कांग्रेस, गांधी युग
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास का वह गौरवशाली काल है जिसमें देश ने विदेशी शासन से मुक्ति के लिए दशकों तक संघर्ष किया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 में आजादी की प्राप्ति तक यह आंदोलन विभिन्न चरणों से गुजरा। पहले चरण में सैन्य और राजनीतिक विद्रोह हुए, फिर 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद राजनीतिक संगठनों का युग शुरू हुआ और अंत में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग, सविनय अवज्ञा और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के जरिए जन-आंदोलन चले।
रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में स्वतंत्रता आंदोलन से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य विषय हैं- कांग्रेस की स्थापना (1885, डब्ल्यू.सी. बनर्जी), सुरेंद्रनाथ बनर्जी और लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं के विचार, गांधीजी के आंदोलन (चंपारण 1917, खिलाफत-असहयोग 1920, दांडी मार्च 1930, भारत छोड़ो 1942), नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी और 1942 से 1947 तक की महत्वपूर्ण घटनाएँ। इनसे जुड़ी तिथियाँ और नाम परीक्षा का मुख्य आधार हैं।
इस अध्याय में हम तीन मुख्य भागों का अध्ययन करेंगे- 1857 का विद्रोह और प्रारंभिक राजनीतिक आंदोलन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और नरम-गरम दल, तथा गांधी युग के प्रमुख आंदोलन। साथ ही क्रांतिकारी आंदोलन और विभाजन तक की घटनाओं की चर्चा तालिकाओं और माइंड मैप के माध्यम से की जाएगी।
1857 का विद्रोह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है, हालांकि विन्सेंट स्मिथ जैसे कुछ इतिहासकार इसे केवल सिपाही विद्रोह कहते हैं। विद्रोह की शुरुआत मेरठ (10 मई 1857) से हुई। चर्बी लगे कारतूस (एनफील्ड राइफल) की अफवाह इसका तात्कालिक कारण था। विद्रोह के प्रमुख केंद्र दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झांसी, ग्वालियर और अर्रा थे। दिल्ली में बहादुर शाह जफर, कानपुर में नाना साहेब, लखनऊ में बेगम हजरत महल, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, ग्वालियर में तात्या टोपे और बिहार में कुंवर सिंह ने नेतृत्व किया। अंग्रेजों ने इसे कठोरता से दबाया और 1858 में कंपनी शासन समाप्त कर भारत को क्राउन के अधीन कर लिया।
1857 के बाद राजनीतिक जागृति आई और विभिन्न संगठन बने। दादाभाई नौरोजी ने 1866 में 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन', सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने 1876 में 'इंडियन एसोसिएशन' (कलकत्ता) की स्थापना की। 1883 में सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने 'कलकत्ता का नेशनल कॉन्फ्रेंस' बुलाया। इन प्रयासों की परिणति 28 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के रूप में हुई। ए.ओ. ह्यूम (सेवानिवृत्त आईसीएस अधिकारी) इसके प्रेरक थे और प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी बने। कांग्रेस का उद्देश्य शिक्षित भारतीयों को एक मंच देना और ब्रिटिश सरकार के समक्ष मांग रखना था।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - 1885 में कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन बंबई में हुआ; अध्यक्ष- डब्ल्यू.सी. बनर्जी। - 1888 में अध्यक्ष बने जॉर्ज यूल, 1890 में हेनरी कॉटन; कांग्रेस में पहले विदेशी भी अध्यक्ष बनते थे। - 1905 में बंगाल का विभाजन लॉर्ड कर्जन ने किया, जिसके विरोध में स्वदेशी आंदोलन चला। - बंगाल विभाजन रद्द 1911 में लॉर्ड हार्डिंग के काल में हुआ। - 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' का प्रथम अधिवेशन 28-31 दिसंबर 1885 को आयोजित हुआ। - सुरेंद्रनाथ बनर्जी को 'सुरेंद्रनाथ बनर्जी' नाम से अधिक जाना जाता है। - रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान 17 जून 1858 को ग्वालियर में हुआ।
कांग्रेस के प्रारंभिक चरण में 'नरम दल' (मॉडरेट्स) के नेताओं का प्रभाव था, जिनमें दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और मदन मोहन मालवीय शामिल थे। इनकी मांगें प्रार्थनाएँ, याचिकाएँ और प्रतिनिधि मंडल भेजने तक सीमित थीं, इसलिए इन्हें 'प्रार्थना, प्रस्ताव और प्रतिनिधि' वाला दल कहा जाता था। दादाभाई नौरोजी ने 1867 में 'धन-निकासी सिद्धांत' (ड्रेन थ्योरी) प्रतिपादित किया और वह 1892 में ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सदस्य बने।
1907 में कांग्रेस का विभाजन हुआ जब 'गरम दल' के नेताओं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल और लाला लाजपत राय (लाल-बाल-पाल) ने नरम दल से मतभेद किया। तिलक ने 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा दिया और 'गणेश उत्सव' तथा 'शिवाजी उत्सव' शुरू किए। 1916 में लखनऊ समझौते में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने एक साथ आंदोलन करने पर सहमति जताई। इसी वर्ष होमरूल लीग आंदोलन तिलक और ऐनी बेसेंट द्वारा चलाया गया। गोपाल कृष्ण गोखले गांधीजी के राजनीतिक गुरु थे।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - नरम दल के नेता- दादाभाई, गोखले, फिरोजशाह मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी। - गरम दल के नेता- तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष। - 'पंजाब केसरी' कहलाए- लाला लाजपत राय; 'बंगाल केसरी' बिपिन चंद्र पाल। - 'लोकमान्य' की उपाधि तिलक को मिली। - सूरत अधिवेशन 1907 में विभाजन हुआ। - 'इंडियन ओपिनियन' पत्रिका गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में निकाली। - 1919 में रौलेट एक्ट के विरुद्ध पहला जन आंदोलन हुआ।
गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। 1917 में उन्होंने चंपारण (बिहार) में नील की खेती के विरुद्ध पहला सत्याग्रह किया, 1918 में खेड़ा (गुजरात) में कर-माफी का आंदोलन चलाया और अहमदाबाद में मिल मजदूरों के हित में आंदोलन किया। 1919 में रौलेट एक्ट के विरुद्ध देशव्यापी हड़ताल हुई और जालियांवाला बाग नरसंहार (13 अप्रैल 1919) हुआ जिसमें जनरल डायर ने अमृतसर में निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलवाईं। 1920 में गांधीजी ने खिलाफत और असहयोग आंदोलन शुरू किया, जो 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद वापस ले लिया गया। 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार में लाला लाजपत राय 'लाठी चार्ज' में घायल होकर शहीद हुए।
1930 में गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत 12 मार्च को साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की और नमक कानून तोड़ा। 1931 में गांधी-इरविन समझौते के बाद दूसरा गोलमेज सम्मेलन हुआ। 1932 में पूना पैक्ट गांधीजी और अंबेडकर के बीच हुआ। 1942 में गांधीजी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' चलाया और 'करो या मरो' का नारा दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और 'जय हिंद' का नारा दिया। 1946 में कैबिनेट मिशन और 1947 में माउंटबेटन योजना के तहत 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और 1947 के ही वर्ष विभाजन हुआ।
त्वरित तथ्य (क्विक फैक्ट्स): - जालियांवाला बाग 13 अप्रैल 1919, अमृतसर। - असहयोग आंदोलन 1920-22; चौरी-चौरा 4 फरवरी 1922। - साइमन कमीशन 1928, 'गो बैक साइमन' नारा। - दांडी मार्च 12 मार्च-6 अप्रैल 1930; 78 सत्याग्रही साथी। - 'भारत छोड़ो आंदोलन' 8 अगस्त 1942, करो या मरो। - कैबिनेट मिशन 1946; माउंटबेटन योजना 3 जून 1947। - 1947 में भारत विभाजन, राधाकृष्णन नहीं बल्कि जिन्ना पाकिस्तान के गवर्नर-जनरल बने।
| आंदोलन | वर्ष | नेता | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1857 विद्रोह | 1857 | विभिन्न नेता | मेरठ से शुरू |
| कांग्रेस स्थापना | 1885 | डब्ल्यू.सी. बनर्जी | बंबई |
| बंगाल विभाजन | 1905 | लॉर्ड कर्जन | स्वदेशी आंदोलन |
| होमरूल लीग | 1916 | तिलक, ऐनी बेसेंट | स्वराज की मांग |
| असहयोग आंदोलन | 1920 | गांधीजी | खिलाफत के साथ |
| सविनय अवज्ञा | 1930 | गांधीजी | दांडी मार्च |
| भारत छोड़ो | 1942 | गांधीजी | करो या मरो |
| घटना | वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| रौलेट एक्ट | 1919 | प्रथम जन आंदोलन का कारण |
| जालियांवाला बाग | 1919 | नरसंहार, विरोध तेज |
| चौरी-चौरा | 1922 | असहयोग वापसी |
| साइमन कमीशन | 1928 | बहिष्कार आंदोलन |
| पूना पैक्ट | 1932 | गांधी-अंबेडकर समझौता |
| कैबिनेट मिशन | 1946 | संविधान सभा की नींव |
| विभाजन | 1947 | पाकिस्तान का निर्माण |
flowchart TD
A[स्वतंत्रता आंदोलन] --> B[1857 विद्रोह]
A --> C[कांग्रेस 1885]
A --> D[गांधी युग]
A --> E[क्रांतिकारी आंदोलन]
B --> B1[मेरठ 10 मई 1857]
B --> B2[झांसी की रानी]
B --> B3[बहादुर शाह जफर]
C --> C1[नरम दल]
C --> C2[गरम दल]
C --> C3[विभाजन 1907]
D --> D1[चंपारण 1917]
D --> D2[असहयोग 1920]
D --> D3[दांडी मार्च 1930]
D --> D4[भारत छोड़ो 1942]
E --> E1[भगत सिंह]
E --> E2[चंद्रशेखर आजाद]
E --> E3[आजाद हिंद फौज]
D4 --> F1[स्वतंत्रता 1947]
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन रेलवे ग्रुप D की सामान्य जागरूकता का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। 1857 के विद्रोह, कांग्रेस की स्थापना, नरम-गरम दल के संघर्ष और गांधी युग के आंदोलनों की तिथियाँ, नाम और नारे परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं। इन्हें तालिका, समयरेखा और माइंड मैप के माध्यम से व्यवस्थित करने से अंतिम समय में दोहराव आसान हो जाता है। आंदोलनों के क्रम और उनके परिणामों को समझकर आप इस अध्याय से आने वाले प्रश्नों में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही राष्ट्रीय गौरव का अनुभव भी कर सकते हैं।