विषय: रेलवे ग्रुप D – गणित (ज्यामिति और क्षेत्रमिति) अध्याय: 4.2 त्रिभुज विषय-वस्तु: त्रिभुज के गुण, प्रकार, कोण और भुजाएँ
त्रिभुज वह बंद समतल आकृति है जो तीन रेखाखंडों से बनती है और जिसमें तीन भुजाएँ तथा तीन कोण होते हैं। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में त्रिभुज से क्षेत्रफल, कोण योग, प्रकार पहचान और भुजा-कोण संबंध पर प्रश्न पूछे जाते हैं। त्रिभुज ज्यामिति का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है, क्योंकि बहुभुज और वृत्त के कई प्रश्न अंततः त्रिभुज में विभाजित करके हल किए जाते हैं। इस अध्याय में त्रिभुज के गुण, प्रकार तथा कोण और भुजाओं के आपसी संबंधों का अध्ययन हल किए गए उदाहरणों के साथ किया जाएगा।
त्रिभुज की तीनों भुजाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु शीर्ष कहलाते हैं और इन्हें बड़े अक्षरों A, B, C आदि से दर्शाया जाता है। त्रिभुज के आंतरिक भाग में बने कोण अंत: कोण कहलाते हैं, जिनके माप का योग सदैव 180 डिग्री होता है। प्रत्येक शीर्ष पर बाहर की ओर बना कोण बाह्य कोण कहलाता है, जो उस शीर्ष पर बने दो अंत: कोणों के योग के बराबर होता है। त्रिभुज की ऊँचाई किसी शीर्ष से सम्मुख भुजा पर खींचा गया लंब है तथा क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए आधार और ऊँचाई की आवश्यकता होती है।
त्रिभुज का परिमाप तीनों भुजाओं की लंबाई का योग होता है, जबकि क्षेत्रफल आधार और ऊँचाई के गुणनफल का आधा होता है। परीक्षा में समकोण त्रिभुज, समबाहु त्रिभुज और समद्विबाहु त्रिभुज के विशेष सूत्र बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। समबाहु त्रिभुज के लिए ऊँचाई का सूत्र भुजा के वर्गमूल तीन गुना तथा भाग दो होता है। इन मूलभूत सूत्रों के साथ-साथ कोणों और भुजाओं के बीच के संबंधों को भी अच्छी तरह समझना चाहिए।
त्रिभुज के कुछ मौलिक गुण होते हैं जो प्रत्येक त्रिभुज पर लागू होते हैं। इन्हें बिना प्रमाण के भी परीक्षा में उपयोग करने से अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
त्रिभुज के तीनों अंत: कोणों का योग सदैव 180 डिग्री होता है। यदि दो कोण ज्ञात हों, तो तीसरा कोण घटाकर सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
त्रिभुज के किसी भुजा को बढ़ाने पर बाहर बनने वाला बाह्य कोण उसके विपरीत दोनों अंत: कोणों के योग के बराबर होता है। साथ ही बाह्य कोण और उसका आसन्न अंत: कोण रैखिक युग्म बनाते हैं, अतः उनका योग 180 डिग्री होता है।
त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग सदैव तीसरी भुजा से बड़ा होता है और दो भुजाओं का अंतर तीसरी भुजा से छोटा होता है। यह गुण यह जाँचने में सहायक है कि दी गई तीन लंबाइयाँ त्रिभुज बना सकती हैं या नहीं।
त्रिभुज का क्षेत्रफल आधार तथा ऊँचाई के गुणनफल का आधा होता है। यदि तीनों भुजाएँ ज्ञात हों, तो हीरोन सूत्र द्वारा भी क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है, जिसमें अर्धपरिमाप का प्रयोग होता है।
उदाहरण 1: एक त्रिभुज के दो कोण 45 डिग्री और 65 डिग्री हैं। तीसरा कोण ज्ञात कीजिए। हल: कोण योग गुण के अनुसार तीनों कोणों का योग 180 डिग्री होता है। अतः तीसरा कोण = 180 - (45 + 65) = 180 - 110 = 70 डिग्री।
उदाहरण 2: एक त्रिभुज का बाह्य कोण 120 डिग्री है और उसके अंत: कोण 4x तथा 2x हैं। x का मान ज्ञात कीजिए। हल: बाह्य कोण विपरीत अंत: कोणों के योग के बराबर होता है। अतः 4x + 2x = 120 → 6x = 120 → x = 20 डिग्री।
त्रिभुजों को भुजाओं की लंबाई तथा कोणों के माप दोनों आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है।
समबाहु त्रिभुज में तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं और इसके तीनों कोण 60-60-60 डिग्री के होते हैं। समद्विबाहु त्रिभुज में दो भुजाएँ बराबर होती हैं और बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं। विषमबाहु त्रिभुज में तीनों भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की होती हैं।
न्यूनकोण त्रिभुज में तीनों कोण 90 डिग्री से छोटे होते हैं। समकोण त्रिभुज में एक कोण ठीक 90 डिग्री का होता है, जिसके सम्मुख वाली भुजा सबसे लंबी होती है और कर्ण कहलाती है। अधिककोण त्रिभुज में एक कोण 90 डिग्री से बड़ा होता है।
समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय लागू होता है, जिसके अनुसार कर्ण का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है। समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई भुजा गुणा वर्गमूल तीन भाग दो होती है तथा इसका क्षेत्रफल भुजा वर्ग गुणा वर्गमूल तीन भाग चार होता है। ये सूत्र परीक्षा में समय बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण 3: एक समद्विबाहु त्रिभुज का शीर्ष कोण 40 डिग्री है। प्रत्येक आधार कोण ज्ञात कीजिए। हल: समद्विबाहु त्रिभुज में आधार कोण बराबर होते हैं। माना प्रत्येक आधार कोण x डिग्री है। अतः x + x + 40 = 180 → 2x = 140 → x = 70 डिग्री। प्रत्येक आधार कोण 70 डिग्री होगा।
उदाहरण 4: एक समबाहु त्रिभुज की भुजा 10 सेमी है। इसकी ऊँचाई ज्ञात कीजिए। हल: समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई = भुजा गुणा वर्गमूल तीन भाग दो = 10 गुणा 1.732 भाग दो = 8.66 सेमी।
त्रिभुज में कोणों और भुजाओं के बीच निश्चित संबंध होते हैं, जिन्हें समझना प्रश्न हल करने के लिए आवश्यक है।
त्रिभुज में बड़ी भुजा के सम्मुख बड़ा कोण होता है और छोटी भुजा के सम्मुख छोटा कोण होता है। यदि दो भुजाएँ बराबर हैं, तो उनके सम्मुख कोण भी बराबर होते हैं।
शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य बिंदु से मिलाने वाली रेखा माध्यिका कहलाती है। तीनों माध्यिकाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं, जो केन्द्रक कहलाता है और प्रत्येक माध्यिका को 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है।
किसी भुजा के मध्य बिंदु पर खींचा गया लंबवत रेखाखंड लंब समद्विभाजक कहलाता है। तीनों लंब समद्विभाजकों का प्रतिच्छेदन बिंदु परिकेन्द्र कहलाता है, जिससे तीनों शीर्षों की दूरी समान होती है।
कोण समद्विभाजक कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। तीनों कोण समद्विभाजकों का प्रतिच्छेदन अंत:केन्द्र कहलाता है, जो त्रिभुज के अंदर बने वृत्त का केंद्र होता है।
उदाहरण 5: एक त्रिभुज की भुजाएँ 5 सेमी, 7 सेमी और 11 सेमी हैं। क्या यह त्रिभुज संभव है? हल: भुजा असमानता गुण के अनुसार दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा होना चाहिए। यहाँ 5 + 7 = 12 जो 11 से बड़ा है, 5 + 11 = 16 जो 7 से बड़ा है, 7 + 11 = 18 जो 5 से बड़ा है। अतः यह त्रिभुज संभव है।
उदाहरण 6: एक समकोण त्रिभुज के कर्ण की लंबाई 13 सेमी और एक भुजा 5 सेमी है। दूसरी भुजा ज्ञात कीजिए। हल: पाइथागोरस प्रमेय से, कर्ण वर्ग = भुजा वर्ग + भुजा वर्ग। माना दूसरी भुजा x है। 169 = 25 + x वर्ग → x वर्ग = 144 → x = 12 सेमी।
| प्रकार | परिभाषा | विशेष गुण |
|---|---|---|
| समबाहु | तीनों भुजाएँ बराबर | सभी कोण 60 डिग्री |
| समद्विबाहु | दो भुजाएँ बराबर | आधार कोण बराबर |
| विषमबाहु | सभी भुजाएँ अलग | कोई भुजा बराबर नहीं |
| समकोण | एक कोण 90 डिग्री | कर्ण सबसे लंबी भुजा |
| अधिककोण | एक कोण 90 से बड़ा | सबसे बड़ा कोण 90 से अधिक |
| आँकड़ा | सूत्र |
|---|---|
| क्षेत्रफल | आधार गुणा ऊँचाई भाग 2 |
| परिमाप | तीनों भुजाओं का योग |
| समबाहु का क्षेत्रफल | भुजा वर्ग गुणा वर्गमूल तीन भाग 4 |
| समबाहु की ऊँचाई | भुजा गुणा वर्गमूल तीन भाग 2 |
| पाइथागोरस | कर्ण वर्ग = भुजा वर्ग + भुजा वर्ग |
flowchart TD
A[त्रिभुज] --> B[गुण]
A --> C[प्रकार]
A --> D[कोण और भुजाएँ]
B --> B1[कोण योग 180 डिग्री]
B --> B2[बाह्य कोण गुण]
B --> B3[भुजा असमानता]
C --> C1[समबाहु]
C --> C2[समद्विबाहु]
C --> C3[विषमबाहु]
C --> C4[समकोण]
D --> D1[बड़ी भुजा का सम्मुख बड़ा कोण]
D --> D2[माध्यिका और केन्द्रक]
D --> D3[लंब समद्विभाजक]
त्रिभुज ज्यामिति का वह महत्वपूर्ण अध्याय है जो रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में प्रश्न देता है। कोण योग गुण, बाह्य कोण गुण, भुजा असमानता तथा प्रकारों के विशेष सूत्रों को समझने से अधिकांश प्रश्न कुछ ही चरणों में हल हो जाते हैं। पाइथागोरस प्रमेय को समकोण त्रिभुज के साथ जोड़कर अभ्यास करना विशेष लाभदायक है। इस अध्याय की मजबूत नींव चतुर्भुज, वृत्त और प्रमेय वाले आगे के अध्यायों को आसान बनाती है, इसलिए हल किए गए उदाहरणों का बार-बार अभ्यास करना चाहिए।