विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.8 विद्युतचुंबकीय प्रभाव विषय-वस्तु: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव विद्युत और चुंबकत्व के बीच गहरे संबंध को प्रदर्शित करता है। जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो चालक के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस खोज का श्रेय डेनिश वैज्ञानिक हंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड को जाता है, जिन्होंने सन् 1820 में देखा कि धारावाही चालक के पास रखी कम्पास सुई विक्षेपित हो जाती है। इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के आधार पर अनेक महत्वपूर्ण उपकरण बनाए गए हैं, जैसे विद्युत चुंबक, विद्युत घंटी, विद्युत मोटर, विद्युत जनित्र तथा ट्रांसफार्मर। विद्युत चुंबक का उपयोग क्रेन द्वारा भारी लोहे की वस्तुएँ उठाने, बिजली की घंटी और टेलीफोन में होता है। धारा के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा जानने के लिए दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम तथा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम उपयोग में आता है।
रेलवे ग्रुप D परीक्षा में विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। ऑर्स्टेड का प्रयोग, विद्युत चुंबक के गुण, सोलेनॉइड, दाएँ हाथ का नियम, फ्लेमिंग का नियम तथा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने वाले नियम परीक्षा में पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी बिंदुओं का विस्तार से अध्ययन किया गया है।
ऑर्स्टेड का प्रयोग: हंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने 1820 में दिखाया कि जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो पास रखी कम्पास सुई विक्षेपित हो जाती है, अर्थात धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहलाता है।
धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र की विशेषताएँ: - धारावाही सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय बल रेखाएँ संकेंद्रित वृत्तों के रूप में होती हैं। - चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता धारा बढ़ाने पर बढ़ती है। - चालक से दूरी बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र घटता है। - बल रेखाओं के केंद्र पर चालक स्थित होता है।
धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कारक: - चालक में प्रवाहित धारा की मात्रा। - चालक से बिंदु की दूरी। - चालक का आकार (सीधा, कुंडली, सोलेनॉइड)।
चुंबकीय क्षेत्र की दिशा जानने के नियम: - दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम: यदि दाएँ हाथ के अंगूठे को धारा की दिशा में रखा जाए तो मुड़ी हुई अंगुलियों की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है। - इस नियम को मैक्सवेल का दाएँ हाथ का नियम भी कहते हैं। - धारा की दिशा ऊपर की ओर हो तो बल रेखाओं की दिशा वामावर्त होती है।
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के उपयोग: - विद्युत चुंबक - विद्युत घंटी - विद्युत मोटर - विद्युत जनित्र - ट्रांसफार्मर
उदाहरण 1: ऑर्स्टेड का प्रयोग किसके संबंध में है? - हल: यह विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का प्रयोग है। - उत्तर: धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होना।
उदाहरण 2: धारावाही सीधे चालक के चारों ओर बल रेखाएँ किस आकार की होती हैं? - हल: बल रेखाएँ संकेंद्रित वृत्तों के रूप में होती हैं। - उत्तर: संकेंद्रित वृत्त।
विद्युत चुंबक की परिभाषा: जब किसी कुंडली के भीतर लोहे की छड़ (नर्म लोहे की क्रोड) रखी जाती है और कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो लोहे की छड़ चुंबक बन जाती है। ऐसे चुंबक को विद्युत चुंबक कहते हैं।
विद्युत चुंबक बनाने की विधि: - एक कुंडली (कुंडलित तार) लें और उसमें नर्म लोहे की छड़ रखें। - कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करें। - जब तक धारा प्रवाहित होती है तब तक लोहे की छड़ चुंबक रहती है। - धारा बंद करते ही चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
विद्युत चुंबक के गुण: - विद्युत चुंबक का चुंबकत्व अस्थायी होता है। - धारा की दिशा बदलने पर ध्रुव बदल जाते हैं। - धारा की मात्रा बढ़ाने पर चुंबकीय शक्ति बढ़ती है। - कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने पर चुंबकत्व बढ़ता है। - धारा बंद करने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। - नर्म लोहे की क्रोड उपयोग करने पर चुंबकत्व अस्थायी रहता है।
स्थायी चुंबक बनाने के लिए: इस्पात (स्टील) की छड़ का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इस्पात में चुंबकत्व लंबे समय तक बना रहता है।
विद्युत चुंबक के उपयोग: - भारी लोहे की वस्तुएँ उठाने वाली विद्युत क्रेन में। - विद्युत घंटी में। - टेलीफोन रिसीवर में। - विद्युत मोटर और जनित्र में। - रेलवे सिग्नलिंग और इलेक्ट्रिक मैग्नेटिक ब्रेक में।
उदाहरण 3: विद्युत चुंबक की क्रोड किस पदार्थ की बनाई जाती है? - हल: नर्म लोहे की क्रोड का उपयोग होता है। - उत्तर: नर्म लोहा।
उदाहरण 4: विद्युत चुंबक में धारा बंद करने पर चुंबकत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है? - हल: धारा बंद करते ही चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। - उत्तर: चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
सोलेनॉइड: जब किसी बेलनाकार नली के ऊपर विद्युतरोधी तार की कई फेरें लपेटी जाती हैं, तो वह संरचना सोलेनॉइड कहलाती है।
धारावाही सोलेनॉइड के गुण: - धारावाही सोलेनॉइड बार चुंबक की तरह व्यवहार करता है। - सोलेनॉइड का एक सिरा उत्तरी (N) और दूसरा दक्षिणी (S) ध्रुव बन जाता है। - सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र समान और प्रबल होता है। - कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र बढ़ता है। - धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र बढ़ता है। - सोलेनॉइड के भीतर नर्म लोहे की छड़ रखने पर वह विद्युत चुंबक बन जाता है।
सोलेनॉइड का उपयोग: - विद्युत चुंबक बनाने में। - विद्युत घंटी में। - रिले स्विच में। - क्रेन में लोहा उठाने के लिए।
धारावाही चालक पर बल: - चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। - बल की दिशा जानने के लिए फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम उपयोग होता है।
फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम: - बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएँ। - तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में हो। - मध्यमा धारा की दिशा में हो। - अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा दर्शाता है।
बल की मात्रा: - चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होने पर बल अधिक होता है। - धारा अधिक होने पर बल अधिक होता है। - चालक की लंबाई अधिक होने पर बल अधिक होता है।
उदाहरण 5: धारावाही सोलेनॉइड किसकी तरह व्यवहार करता है? - हल: सोलेनॉइड बार चुंबक की तरह व्यवहार करता है। - उत्तर: बार चुंबक।
उदाहरण 6: चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल की दिशा किस नियम से ज्ञात की जाती है? - हल: फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से। - उत्तर: फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम।
| उपकरण/युक्ति | चुंबकीय प्रभाव का उपयोग |
|---|---|
| विद्युत चुंबक | लोहा उठाना |
| विद्युत घंटी | विद्युत चुंबक द्वारा घंटी बजाना |
| विद्युत मोटर | चुंबकीय बल से घूर्णन |
| विद्युत जनित्र | यांत्रिक से विद्युत ऊर्जा |
| ट्रांसफार्मर | वोल्टता बदलना |
| नियम | उपयोग |
|---|---|
| दाएँ हाथ का अंगूठा नियम | धारावाही चालक के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा |
| फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम | चालक पर लगने वाले बल की दिशा |
| दाएँ हाथ का पेंच नियम | चुंबकीय क्षेत्र की दिशा |
| सोलेनॉइड का ध्रुव | धारा की दिशा से ध्रुव ज्ञात करना |
flowchart TD
A[13.8 विद्युतचुंबकीय प्रभाव] --> B[ऑर्स्टेड का प्रयोग]
A --> C[विद्युत चुंबक]
A --> D[सोलेनॉइड]
A --> E[नियम]
B --> B1[धारा से चुंबकीय क्षेत्र]
C --> C1[नर्म लोहे की क्रोड]
C --> C2[अस्थायी चुंबकत्व]
D --> D1[बार चुंबक जैसा]
E --> E1[दाएँ हाथ का नियम]
E --> E2[फ्लेमिंग का बायाँ नियम]
विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव विद्युत और चुंबकत्व को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटना है। इस अध्याय में ऑर्स्टेड के प्रयोग, धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत चुंबक, सोलेनॉइड तथा दिशा बताने वाले नियमों का विस्तार से अध्ययन किया गया। परीक्षा की दृष्टि से विद्युत चुंबक के गुण, नियमों की पहचान और उपकरणों के उपयोग पर आधारित प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह अध्याय विद्युत मोटर, जनित्र और विद्युतचुंबकीय प्रेरण को समझने की नींव रखता है, इसलिए नियमों को स्पष्ट रूप से समझकर रट लें।