विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश) अध्याय: 12.2 तापीय प्रसार विषय-वस्तु: प्रसार के प्रकार, अनुप्रयोग
जब किसी पिंड को ऊष्मा दी जाती है तो उसका तापमान बढ़ता है और उसके अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिसके कारण अणुओं के बीच की दूरी बढ़ जाती है। पिंड के आकार, क्षेत्रफल या आयतन में होने वाली इस वृद्धि को तापीय प्रसार (thermal expansion) कहते हैं। लगभग सभी पदार्थ गर्म करने पर प्रसारित होते हैं, हालाँकि ठोस, द्रव और गैसों में प्रसार की मात्रा अलग-अलग होती है। प्रसार ही वह कारण है जिसके कारण रेल की पटरियों के बीच जोड़ों में छोटा अंतराल रखा जाता है, पुलों के एक सिरे को स्वतंत्र रखा जाता है और विद्युत लाइन के तारों को ढीला लटकाया जाता है, ताकि गर्मियों में प्रसार के बावजूद वे टूटें नहीं।
तापीय प्रसार तीन प्रकार का होता है – रेखीय प्रसार, क्षेत्रीय प्रसार और आयतन प्रसार। रेखीय प्रसार में लंबाई बढ़ती है, क्षेत्रीय प्रसार में क्षेत्रफल बढ़ता है और आयतन प्रसार में पिंड का आयतन बढ़ता है। इन प्रसारों की माप प्रसार गुणांकों द्वारा की जाती है। रेखीय प्रसार गुणांक (α) से पता चलता है कि प्रति डिग्री तापमान वृद्धि पर इकाई लंबाई में कितनी लंबाई बढ़ती है। विभिन्न पदार्थों के प्रसार गुणांक अलग-अलग होते हैं; उदाहरण के लिए ताँबे का प्रसार लोहे से अधिक होता है, और इसी गुण के आधार पर द्वि-धातु पट्टिका (bimetallic strip) बनाई जाती है।
जल के प्रसार में एक विशेषता है – जल 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा होने पर सिकुड़ता है और 4 डिग्री सेल्सियस के बाद ठंडा होने पर फैलता है। इसलिए जल का अधिकतम घनत्व 4 डिग्री सेल्सियस पर होता है। इसी अनियमित प्रसार के कारण सर्दियों में सरोवर के जल की सतह पर बर्फ जम जाती है, जबकि नीचे का जल 4 डिग्री सेल्सियस पर बना रहता है और जलीय जीवों की रक्षा करता है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में प्रसार के प्रकार, प्रसार गुणांक और दैनिक जीवन में प्रसार के अनुप्रयोगों पर प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका इस अध्याय में विस्तार से अध्ययन किया जाएगा।
तापीय प्रसार के तीन मुख्य प्रकार होते हैं, जिनमें बढ़ने वाली विमा अलग-अलग होती है।
उदाहरण 1: 100 मीटर लंबी लोहे की छड़ का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस बढ़ाया जाता है। रेखीय प्रसार गुणांक 1.2 × 10⁻⁵ प्रति डिग्री सेल्सियस है। लंबाई में वृद्धि ज्ञात कीजिए। हल: वृद्धि = L₁ × α × Δt = 100 × 1.2 × 10⁻⁵ × 10 = 0.012 मीटर = 1.2 सेंटीमीटर। उदाहरण 2: यदि रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.5 × 10⁻⁵ हो, तो आयतन प्रसार गुणांक क्या होगा? हल: γ = 3α = 3 × 1.5 × 10⁻⁵ = 4.5 × 10⁻⁵ प्रति डिग्री सेल्सियस।
तापीय प्रसार के सिद्धांत को दैनिक जीवन और इंजीनियरिंग में विभिन्न स्थानों पर लागू किया जाता है।
उदाहरण 3: सर्दियों में विद्युत तार क्यों टूटते हैं? हल: सर्दियों में तापमान घटने से तार सिकुड़ते हैं; यदि तार अधिक कसकर खींचे गए हों तो सिकुड़न के कारण वे टूट जाते हैं, इसलिए तार ढीले रखे जाते हैं। उदाहरण 4: द्वि-धातु पट्टिका गर्म होने पर क्यों मुड़ती है? हल: ताँबे का प्रसार लोहे से अधिक होता है, इसलिए गर्म करने पर ताँबे की परत अधिक फैलती है और पट्टिका ताँबे की ओर नहीं बल्कि लोहे की ओर मुड़ती है।
जल का प्रसार अनियमित होता है, जिसका महत्व प्रकृति और जीवन दोनों में है।
उदाहरण 5: एक ताँबे के पाइप की लंबाई 50 मीटर है। तापमान में 20 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर उसकी लंबाई कितनी बढ़ेगी? (ताँबे का α = 1.7 × 10⁻⁵ प्रति डिग्री सेल्सियस) हल: वृद्धि = 50 × 1.7 × 10⁻⁵ × 20 = 0.017 मीटर = 1.7 सेंटीमीटर। उदाहरण 6: यदि किसी पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक 2 × 10⁻⁵ है, तो क्षेत्रीय प्रसार गुणांक क्या होगा? हल: β = 2α = 2 × 2 × 10⁻⁵ = 4 × 10⁻⁵ प्रति डिग्री सेल्सियस। उदाहरण 7: जल का अधिकतम घनत्व किस तापमान पर होता है? हल: 4 डिग्री सेल्सियस पर, क्योंकि इस तापमान पर जल का आयतन न्यूनतम होता है।
| प्रसार का प्रकार | बढ़ने वाली विमा | सूत्र | गुणांक |
|---|---|---|---|
| रेखीय प्रसार | लंबाई | L₂ = L₁(1 + αΔt) | α |
| क्षेत्रीय प्रसार | क्षेत्रफल | A₂ = A₁(1 + βΔt) | β = 2α |
| आयतन प्रसार | आयतन | V₂ = V₁(1 + γΔt) | γ = 3α |
| अनुप्रयोग | कारण |
|---|---|
| रेल पटरियों में अंतराल | प्रसार से बचाव |
| पुल का एक सिरा स्वतंत्र | प्रसार समायोजन |
| विद्युत तार ढीले | सिकुड़न से बचाव |
| द्वि-धातु पट्टिका | थर्मोस्टेट |
| जल का 4 डिग्री C पर अधिकतम घनत्व | अनियमित प्रसार |
flowchart TD
A[तापीय प्रसार] --> B[रेखीय प्रसार]
A --> C[क्षेत्रीय प्रसार]
A --> D[आयतन प्रसार]
B --> E[L₂ = L₁(1 + αΔt)]
C --> F[A₂ = A₁(1 + βΔt)]
D --> G[V₂ = V₁(1 + γΔt)]
A --> H[गुणांक संबंध]
H --> I[β = 2α]
H --> J[γ = 3α]
A --> K[अनुप्रयोग]
K --> L[रेल पटरी]
K --> M[पुल]
K --> N[द्वि-धातु पट्टिका]
A --> O[जल का अनियमित प्रसार]
O --> P[4 डिग्री C पर अधिकतम घनत्व]
तापीय प्रसार ऊष्मा देने पर पिंड की विमाओं में होने वाली वृद्धि है, जो रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन तीन रूपों में होती है, और इनके गुणांकों में α:β:γ = 1:2:3 का संबंध होता है। रेल पटरियों के अंतराल, पुल के स्वतंत्र सिरे और द्वि-धातु पट्टिका इसके व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। जल का अनियमित प्रसार और 4 डिग्री सेल्सियस पर अधिकतम घनत्व प्रकृति का महत्वपूर्ण नियम है जो जलीय जीवन की रक्षा करता है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में प्रसार के प्रकार, गुणांक संबंध और अनुप्रयोगों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय की समझ ऊष्मा संचरण के अध्याय को सीखने में भी सहायक होती है।