12.4 ध्वनि तरंगें Notes

12.4 ध्वनि तरंगें

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश) अध्याय: 12.4 ध्वनि तरंगें विषय-वस्तु: ध्वनि उत्पत्ति, अनुप्रस्थ-अनुदैर्घ्य तरंगें

1. परिचय

ध्वनि (sound) ऊर्जा का वह रूप है जो किसी कंपन करती हुई वस्तु के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है तो उसके आस-पास के वायु के कणों में संपीड़न और विरलन बनते हैं, जो तरंगों के रूप में आगे संचरित होते हैं। वीणा के तारों के बजने पर कंपन होता है, ड्रम को पीटने पर झिल्ली कंपन करती है, और मानव स्वर तंत्र (vocal cords) के कंपन से ही हम बोल पाते हैं। ध्वनि की उत्पत्ति के लिए कंपन करने वाला स्रोत अनिवार्य है; बिना कंपन के ध्वनि उत्पन्न नहीं हो सकती। ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है, क्योंकि इसके संचरण के लिए किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है।

ध्वनि को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती। यदि घंटी को निर्वात के गिलास में रखकर बजाया जाए तो वह दिखाई देगी परंतु उसकी ध्वनि नहीं सुनाई देगी, क्योंकि माध्यम न होने से ध्वनि आगे नहीं जा सकती। ध्वनि की गति ठोसों में सबसे अधिक, द्रवों में मध्यम और गैसों में सबसे कम होती है। वायु में ध्वनि की गति लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड होती है, जल में लगभग 1500 मीटर प्रति सेकंड और इस्पात में लगभग 5000 मीटर प्रति सेकंड से अधिक होती है।

ध्वनि तरंगें दो प्रकार की होती हैं – अनुप्रस्थ तरंगें और अनुदैर्घ्य तरंगें। अनुप्रस्थ तरंगों में कण कंपन की दिशा, तरंग की गति की दिशा के लंबवत होती है, जैसे लहरें। अनुदैर्घ्य तरंगों में कण तरंग की दिशा में ही आगे-पीछे कंपन करते हैं, और ध्वनि की तरंगें अनुदैर्घ्य होती हैं। अनुदैर्घ्य तरंग में संपीड़न (compression) और विरलन (rarefaction) बनते हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ध्वनि की उत्पत्ति, उसके संचरण, तरंगों के प्रकार और ध्वनि की गति से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. ध्वनि की उत्पत्ति और संचरण

ध्वनि की उत्पत्ति और संचरण के मूल सिद्धांतों को समझना आवश्यक है।

उदाहरण 1: घंटी को निर्वात वाले गिलास में बजाने पर वह दिखती है पर सुनाई नहीं देती, क्योंकि ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है। उदाहरण 2: ध्वनि वायु से जल में तेजी से क्यों चलती है? हल: क्योंकि द्रवों में कण आपस में अधिक निकट होते हैं, जिससे ऊर्जा का संचरण तेज होता है।

3. अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंगें

तरंगों को उनके कंपन की दिशा के आधार पर दो प्रकारों में बाँटा जाता है।

उदाहरण 3: ध्वनि किस प्रकार की तरंग है? हल: ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है, क्योंकि इसके कण तरंग की दिशा में ही कंपन करते हैं। उदाहरण 4: डोरी पर उत्पन्न लहर किस प्रकार की तरंग है? हल: डोरी पर लहर अनुप्रस्थ तरंग है, क्योंकि कण लंबवत कंपन करते हैं।

4. ध्वनि की गति और संख्यात्मक उदाहरण

ध्वनि की गति और तरंग से जुड़े संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।

उदाहरण 5: वायु में ध्वनि की गति 343 मी/से है और किसी स्वर की आवृत्ति 500 हर्ट्ज है। तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। हल: λ = v/f = 343/500 = 0.686 मीटर। उदाहरण 6: एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 1000 हर्ट्ज और तरंगदैर्ध्य 0.34 मीटर है। ध्वनि का वेग ज्ञात कीजिए। हल: v = f × λ = 1000 × 0.34 = 340 मी/से। उदाहरण 7: ध्वनि का वेग 340 मी/से हो और तरंगदैर्ध्य 1.7 मीटर हो, तो आवृत्ति ज्ञात कीजिए। हल: f = v/λ = 340/1.7 = 200 हर्ट्ज। उदाहरण 8: एक स्रोत 2 सेकंड में 600 कंपन करता है। आवृत्ति ज्ञात कीजिए। हल: आवृत्ति = कंपन/समय = 600/2 = 300 हर्ट्ज।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंगों की तुलना

विशेषता अनुप्रस्थ तरंग अनुदैर्घ्य तरंग
कंपन की दिशा लंबवत समानांतर
बनने वाले भाग शिखर, गर्त संपीड़न, विरलन
उदाहरण डोरी की लहर, प्रकाश ध्वनि

तालिका 2: विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की गति

माध्यम लगभग गति (मी/से)
वायु 343
जल 1500
काँच 4500
इस्पात 5000

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ध्वनि तरंगें] --> B[उत्पत्ति]
    B --> C[कंपन से]
    A --> D[संचरण]
    D --> E[माध्यम आवश्यक]
    D --> F[निर्वात में नहीं चलती]
    A --> G[तरंगों के प्रकार]
    G --> H[अनुप्रस्थ]
    G --> I[अनुदैर्घ्य]
    H --> J[शिखर गर्त]
    I --> K[संपीड़न विरलन]
    A --> L[सूत्र]
    L --> M[v = f × λ]
    A --> N[गति क्रम]
    N --> O[ठोस > द्रव > गैस]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

अनुप्रस्थ तरंग: शिखर और गर्त गर्त शिखर तरंगदैर्ध्य λ स्वर्ण नियम: अनुप्रस्थ तरंग में कण लंबवत कंपन करते हैं, शिखर और गर्त बनते हैं; v = f × λ। प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है, ध्वनि नहीं।

अनुदैर्घ्य तरंग: संपीड़न और विरलन संपीड़न संपीड़न संपीड़न विरलन विरलन कण निकट कण = संपीड़न, दूर कण = विरलन ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है, निर्वात में नहीं चलती स्वर्ण नियम: अनुदैर्घ्य तरंग में कण तरंग की दिशा में कंपन करते हैं, जिससे संपीड़न और विरलन बनते हैं। वायु में ध्वनि की गति लगभग 343 मी/से होती है। ध्वनि की गति का क्रम: ठोस > द्रव > गैस

8. सामान्य गलतियाँ

  1. ध्वनि को निर्वात में चलने योग्य मान लिया जाता है; ध्वनि को माध्यम की आवश्यकता होती है।
  2. ध्वनि को अनुप्रस्थ तरंग बता दिया जाता है; ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है।
  3. प्रकाश को अनुदैर्घ्य तरंग बताना गलत है; प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।
  4. ध्वनि की गति गैसों में सबसे अधिक होती है, यह भ्रांति है; ठोसों में सबसे अधिक होती है।
  5. v = f × λ में v को आवृत्ति से गुणा करके तरंगदैर्ध्य निकाल लेना गलत है; λ = v/f होता है।
  6. तरंग में माध्यम के कण आगे बढ़ते हैं, यह गलत है; केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है।
  7. आवृत्ति बढ़ाने पर तरंगदैर्ध्य भी बढ़ती है, यह गलत है; वेग स्थिर रहने पर तरंगदैर्ध्य घटती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. ध्वनि = अनुदैर्घ्य, प्रकाश = अनुप्रस्थ तरंग याद रखें।
  2. ध्वनि की गति का क्रम: ठोस > द्रव > गैस कंठस्थ रखें।
  3. v = f × λ सूत्र से तीनों राशियाँ निकालना सीखें।
  4. आवृत्ति = कंपन की संख्या ÷ समय के सूत्र का प्रयोग करें।
  5. निर्वात में ध्वनि नहीं चलती, परंतु प्रकाश चलता है, यह अंतर याद रखें।
  6. वायु में ध्वनि की गति 343 मी/से याद रखें, संख्यात्मक प्रश्नों में काम आती है।
  7. तरंगदैर्ध्य शिखर-से-शिखर दूरी होती है, इसे सही पहचानें।

10. निष्कर्ष

ध्वनि कंपन करने वाली वस्तु से उत्पन्न होती है और यांत्रिक तरंग के रूप में संचरित होती है, जिसके लिए माध्यम अनिवार्य है; निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है जिसमें संपीड़न और विरलन बनते हैं, जबकि डोरी की लहर और प्रकाश अनुप्रस्थ तरंगें हैं। ध्वनि की गति ठोसों में सबसे अधिक और गैसों में सबसे कम होती है। आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य और वेग का संबंध v = f × λ ध्वनि के संख्यात्मक प्रश्नों का आधार है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में ध्वनि की उत्पत्ति, संचरण, तरंगों के प्रकार और गति पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय की समझ से आवृत्ति-आयाम और ध्वनि के परावर्तन जैसे आगे के विषय सरल हो जाते हैं।