विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश) अध्याय: 12.6 ध्वनि का परावर्तन विषय-वस्तु: प्रतिध्वनि, सोनार
जिस प्रकार प्रकाश किसी चिकनी सतह से परावर्तित होता है, उसी प्रकार ध्वनि भी बड़ी और कठोर सतहों से टकराकर वापस लौटती है। ध्वनि के इस वापस लौटने को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं। जब कोई ध्वनि किसी बड़ी सतह जैसे पहाड़, भवन या पेड़ों की पंक्ति से टकराकर वापस आती है, तो उसकी प्रतिध्वनि (echo) सुनाई देती है। परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि के रूप में सुनने के लिए आवश्यक है कि ध्वनि के स्रोत और परावर्तक सतह के बीच न्यूनतम दूरी हो। किसी ध्वनि की प्रतिध्वनि सुनाई देने के लिए उसके मूल ध्वनि से कम से कम 0.1 सेकंड बाद वापस आना आवश्यक है, क्योंकि मानव कान की श्रवण स्मृति (persistence of hearing) लगभग 0.1 सेकंड की होती है।
प्रतिध्वनि के कारण न्यूनतम दूरी की गणना की जा सकती है। ध्वनि की गति लगभग 343 मी/से मानने पर, 0.1 सेकंड में ध्वनि 34.3 मीटर चलती है, और चूँकि ध्वनि को जाकर वापस आना होता है, इसलिए स्रोत और परावर्तक सतह के बीच न्यूनतम दूरी लगभग 17.15 मीटर होती है। अर्थात पहाड़ या दीवार कम से कम लगभग 17 मीटर दूर होनी चाहिए ताकि प्रतिध्वनि स्पष्ट सुनाई दे। यदि परावर्तक सतह बहुत पास होती है तो मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि मिल जाती हैं और प्रतिध्वनि नहीं बनती।
ध्वनि के परावर्तन का उपयोग कई उपकरणों में होता है। सोनार (SONAR) समुद्र की गहराई और डूबी वस्तुओं का पता लगाने के लिए पराश्रव्य ध्वनि के परावर्तन का प्रयोग करता है। मेगाफोन और लाउडस्पीकर में ध्वनि को एक दिशा में फैलाने के लिए परावर्तन का उपयोग होता है। स्तेथोस्कोप में ध्वनि शरीर के भीतर कई बार परावर्तित होकर डॉक्टर के कान तक पहुँचती है। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में प्रतिध्वनि, न्यूनतम दूरी की गणना और सोनार पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
प्रतिध्वनि की अवधारणा और उससे जुड़ी गणनाएँ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण 1: एक व्यक्ति 68 मीटर दूर पहाड़ के सामने ताली बजाता है। ध्वनि की गति 340 मी/से है। प्रतिध्वनि कितने समय बाद सुनाई देगी? हल: कुल दूरी = 2 × 68 = 136 मीटर; समय = 136/340 = 0.4 सेकंड। उदाहरण 2: प्रतिध्वनि सुनने के लिए स्रोत और सतह के बीच न्यूनतम दूरी ज्ञात कीजिए (गति = 343 मी/से)। हल: दूरी = (343 × 0.1)/2 = 17.15 मीटर।
ध्वनि का परावर्तन विज्ञान और व्यावहारिक जीवन में विभिन्न उपकरणों में उपयोगी है।
उदाहरण 3: सोनार से भेजी गई ध्वनि 2 सेकंड बाद वापस आती है। जल में ध्वनि की गति 1500 मी/से है। समुद्र की गहराई ज्ञात कीजिए। हल: गहराई = (1500 × 2)/2 = 1500 मीटर। उदाहरण 4: एक जहाज के नीचे से ध्वनि भेजने पर 3 सेकंड में वापस आती है (गति 1500 मी/से)। गहराई ज्ञात कीजिए। हल: गहराई = (1500 × 3)/2 = 2250 मीटर।
ध्वनि के बहुल परावर्तन के कारण कई स्थानों पर ध्वनि गूंजती है।
उदाहरण 5: एक व्यक्ति 85 मीटर दूर दीवार के सामने ताली बजाता है। ध्वनि की गति 340 मी/से है। प्रतिध्वनि कब सुनाई देगी? हल: समय = (2 × 85)/340 = 170/340 = 0.5 सेकंड। उदाहरण 6: यदि ध्वनि 0.6 सेकंड में वापस आती है (गति 340 मी/से), तो सतह की दूरी कितनी होगी? हल: दूरी = (340 × 0.6)/2 = 102 मीटर।
| राशि | मान |
|---|---|
| श्रवण स्मृति | 0.1 सेकंड |
| 0.1 सेकंड में ध्वनि की दूरी | 34.3 मीटर |
| प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी | 17.15 मीटर |
| वायु में ध्वनि की गति | 343 मी/से |
| उपकरण | कार्य |
|---|---|
| सोनार | समुद्र की गहराई ज्ञात करना |
| मेगाफोन | ध्वनि को एक दिशा में भेजना |
| स्तेथोस्कोप | शरीर की ध्वनि सुनना |
| अल्ट्रासाउंड | शरीर की तस्वीर बनाना |
flowchart TD
A[ध्वनि का परावर्तन] --> B[प्रतिध्वनि]
B --> C[0.1 सेकंड की स्मृति]
B --> D[न्यूनतम दूरी 17.15 मीटर]
A --> E[सोनार]
E --> F[पराश्रव्य ध्वनि]
E --> G[समुद्र की गहराई]
A --> H[उपयोग]
H --> I[मेगाफोन]
H --> J[स्तेथोस्कोप]
H --> K[अल्ट्रासाउंड]
A --> L[गणना]
L --> M[दूरी = गति × समय ÷ 2]
ध्वनि बड़ी कठोर सतहों से टकराकर परावर्तित होती है, और इसके परावर्तन के कारण प्रतिध्वनि बनती है, जिसके लिए परावर्तक सतह कम से कम लगभग 17 मीटर दूर होनी चाहिए क्योंकि मानव कान की श्रवण स्मृति 0.1 सेकंड होती है। सोनार पराश्रव्य ध्वनि के परावर्तन से समुद्र की गहराई और डूबी वस्तुओं का पता लगाता है। मेगाफोन, स्तेथोस्कोप और अल्ट्रासाउंड भी ध्वनि के परावर्तन पर आधारित हैं। रेलवे ग्रुप D परीक्षा में प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी, सोनार और ध्वनि परावर्तन के उपयोग पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय की समझ प्रकाश के परावर्तन जैसे आगे के विषयों की तैयारी में सहायक होती है।