विषय: रेलवे ग्रुप D – तर्कशक्ति (आँकड़े और गैर-मौखिक तर्क) अध्याय: 10.5 आकृति समानता विषय-वस्तु: आकृति समानता और भिन्नता
आकृति समानता (Figure Analogy) गैर-मौखिक तर्क का वह भाग है जिसमें आकृतियों के बीच का संबंध पहचानकर चौथी आकृति का चयन करना होता है। इसमें दो आकृतियों का एक जोड़ा दिया जाता है जो एक विशेष नियम से संबंधित होता है, और तीसरी आकृति के साथ उसी नियम का पालन करने वाली चौथी आकृति खोजनी होती है। रेलवे ग्रुप D की परीक्षा में ये प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, क्योंकि ये तर्क शक्ति और आकृति में होने वाले परिवर्तन को समझने की क्षमता का परीक्षण करते हैं।
इन प्रश्नों को हल करने की कुंजी पहले जोड़े में छिपे नियम को खोजना है। नियम आकृति के घूर्णन, दर्पण प्रतिबिंब, आकार में परिवर्तन, तत्वों की संख्या में वृद्धि या कमी, छायांकन, रंग, स्थिति या आंतरिक-बाह्य आकृति के संबंध से बन सकता है। जो नियम पहले जोड़े में लागू होता है, उसे ही तीसरी आकृति पर लागू करके उत्तर आकृति ज्ञात की जाती है।
इस अध्याय में हम समानता के नियमों, उनकी पहचान की विधि तथा चरण-दर-चरण हल किए गए उदाहरण सीखेंगे। नियमों को पहचानने का अभ्यास जितना अधिक होगा, प्रश्न उतने ही शीघ्र हल होंगे।
समानता के प्रश्नों में प्रयुक्त प्रमुख नियम निम्न हैं:
घूर्णन (Rotation): दूसरी आकृति, पहली आकृति का 90°, 180° या 270° घूर्णित रूप होती है। उदाहरण: ऊपर की ओर इशारा करता त्रिभुज दाईं ओर इशारा करने लगता है।
दर्पण प्रतिबिंब (Mirror Image): दूसरी आकृति, पहली की दर्पण प्रतिबिंब होती है। इसमें बाएँ-दाएँ परिवर्तित हो जाते हैं।
परिवर्तन (Transformation): आकृति का आकार बदल जाता है, जैसे वृत्त अंडाकार या वर्ग आयत में बदल जाता है।
तत्वों की संख्या: पहली से दूसरी में तत्व बढ़ते या घटते हैं। उदाहरण: एक बिंदु से दो बिंदु।
छायांकन: छायांकन जुड़ता है या हटता है, या छायांकन का क्षेत्र बढ़ता-घटता है।
स्थिति परिवर्तन: आंतरिक तत्व की स्थिति बदलती है, जैसे भीतर का वृत्त ऊपर से नीचे आ जाता है।
संयोजन या विभाजन: दो आकृतियाँ जुड़कर एक हो जाती हैं या एक आकृति दो में विभाजित होती है।
रंग और बाह्य-आंतरिक संबंध: बाह्य और आंतरिक आकृति के प्रकार में परिवर्तन होता है।
आकृति समानता हल करने के लिए चरणबद्ध विधि अपनाएँ:
महत्वपूर्ण बात: कभी-कभी एक ही प्रश्न में एक से अधिक परिवर्तन एक साथ होते हैं, जैसे घूर्णन के साथ छायांकन भी बदलना। ऐसे में दोनों परिवर्तनों को एक साथ लागू करना आवश्यक है।
उदाहरण 1: पहली आकृति वृत्त है और दूसरी वृत्त का घूर्णन, अर्थात समान वृत्त है; अगर तीसरी आकृति वर्ग है, तो चौथी कौन-सी होगी? हल: नियम - आकृति समान रहती है। अतः उत्तर वही वर्ग होगा (समान आकृति)।
उदाहरण 2: पहली आकृति में त्रिभुज है और दूसरी में त्रिभुज के भीतर छायांकन है; यदि तीसरी आकृति वर्ग है, तो चौथी कौन-सी होगी? हल: नियम - आकृति के भीतर छायांकन जुड़ना। अतः उत्तर वर्ग के भीतर छायांकन वाली आकृति होगी।
उदाहरण 3: पहली आकृति में ऊपर की ओर इशारा करता त्रिभुज है और दूसरी में दाईं ओर इशारा करता त्रिभुज है; यदि तीसरी आकृति में बाईं ओर इशारा करता वर्ग-तिर्यक है, तो चौथी कौन-सी होगी? हल: नियम - आकृति का 90° घड़ी की दिशा में घूर्णन। अतः उत्तर नीचे की ओर इशारा करती आकृति होगी।
उदाहरण 4: पहली आकृति में एक बिंदु है और दूसरी में दो बिंदु; यदि तीसरी आकृति में तीन बिंदु हैं, तो चौथी में कितने बिंदु होंगे? हल: नियम - बिंदुओं की संख्या में एक की वृद्धि। अतः चौथी आकृति में चार बिंदु होंगे।
उदाहरण 5: पहली आकृति में बड़ा वृत्त है और दूसरी में उसके भीतर छोटा वृत्त; यदि तीसरी आकृति में बड़ा त्रिभुज है, तो चौथी कौन-सी होगी? हल: नियम - बड़ी आकृति के भीतर उसी प्रकार की छोटी आकृति जुड़ना। अतः उत्तर बड़े त्रिभुज के भीतर छोटा त्रिभुज होगा।
उदाहरण 6: पहली आकृति क्षैतिज रेखा है और दूसरी ऊर्ध्वाधर रेखा; यदि तीसरी आकृति दाईं ओर झुकी रेखा है, तो चौथी कौन-सी होगी? हल: नियम - रेखा का 90° घूर्णन। अतः उत्तर बाईं ओर झुकी रेखा होगी।
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| घूर्णन | 90° या 180° घूर्णित आकृति |
| दर्पण प्रतिबिंब | बाएँ-दाएँ उलट |
| आकार परिवर्तन | वृत्त से अंडाकार |
| संख्या वृद्धि | एक बिंदु से दो बिंदु |
| छायांकन | बिना से छायांकित |
| स्थिति परिवर्तन | भीतरी तत्व का स्थान बदलना |
| संयोजन | उदाहरण |
|---|---|
| घूर्णन + छायांकन | घूमने के साथ भराव बदलना |
| प्रतिबिंब + आकार | उलटने के साथ बड़ा होना |
| संख्या + स्थिति | तत्व बढ़ना और हिलना |
| विभाजन + रंग | दो भागों में बँटना |
flowchart TD
A[10.5 आकृति समानता] --> B[पहला जोड़ा देखें]
A --> C[नियम खोजें]
B --> C
C --> D[घूर्णन]
C --> E[दर्पण प्रतिबिंब]
C --> F[संख्या परिवर्तन]
C --> G[छायांकन]
C --> H[आकार परिवर्तन]
D --> I[तीसरी आकृति पर लगाएँ]
E --> I
F --> I
G --> I
H --> I
I --> J[विकल्पों में उत्तर चुनें]
आकृति समानता में पहले जोड़े के नियम को सही ढंग से पहचानना ही सफलता की कुंजी है। घूर्णन, दर्पण प्रतिबिंब, संख्या, छायांकन और आकार जैसे नियमों का अभ्यास करके तथा उन्हें तीसरी आकृति पर सटीक रूप से लागू करके इन प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है। नियमित अभ्यास और सतर्कता से यह विषय परीक्षा में निश्चित अंक दिलाता है।