विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (प्राचीन भारतीय इतिहास) अध्याय: 11.4 जैन धर्म विषय-वस्तु: महावीर, जैन सिद्धांत, तीर्थंकर
जैन धर्म भारत का एक प्राचीन धर्म है, जो बौद्ध धर्म के समकालीन 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलन के रूप में उभरा। जैन धर्म के संस्थापक महावीर (वर्धमान) माने जाते हैं, परंतु जैन परंपरा के अनुसार यह धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसमें 24 तीर्थंकर हुए हैं। महावीर इस परंपरा के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर थे। जैन धर्म को 'जिन धर्म' या 'निग्रंथ धर्म' भी कहा जाता है, क्योंकि जिन का अर्थ है 'जीतने वाला' अर्थात जिसने इंद्रियों और कषायों को जीत लिया।
जैन धर्म वैदिक यज्ञ-कर्मकांडों, पशु-बलि तथा वर्ण-व्यवस्था के विरुद्ध उठा। इसके मूल में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत हैं। जैन दर्शन के अनुसार आत्मा अपने कर्मों के बंधन में बंधी रहती है, जिससे मुक्ति पाने के लिए त्रिरत्न (रत्नत्रय) का पालन करना आवश्यक है। जैन धर्म ने सामान्य जनता को सरल भाषा (प्राकृत) में उपदेश दिए, जिससे इसे व्यापक समर्थन मिला।
जैन धर्म के संरक्षकों में मगध के सम्राट बिंबिसार, अजातशत्रु तथा बाद में चंद्रगुप्त मौर्य का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। भद्रबाहु जैन धर्म के प्रसिद्ध आचार्य थे, जिन्होंने कल्पसूत्र की रचना की। RRB NTPC परीक्षा में महावीर के जीवन, तीर्थंकरों, पंच महाव्रत, त्रिरत्न तथा जैन धर्म के विभाजन (दिगंबर-श्वेतांबर) से संबंधित प्रश्न सामान्यतया पूछे जाते हैं।
महावीर का जन्म 599 ई.पू. में वैशाली के निकट कुंडग्राम (बिहार) में हुआ। इनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के प्रमुख थे तथा माता त्रिशला लिच्छवि राजकुमारी थीं। बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की आयु में इन्होंने घर त्यागकर संन्यास ले लिया, जिसे अभिनिष्क्रमण कहते हैं। इसके बाद 12 वर्षों तक कठोर तपस्या करने के बाद 42 वर्ष की आयु में ऋजुपालिका नदी के तट पर जंभिकग्राम के पास साल वृक्ष के नीचे इन्हें कैवल्य ज्ञान (केवल ज्ञान) प्राप्त हुआ।
महावीर के जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ क्रमबद्ध रूप से:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): महावीर को कैवल्य ज्ञान कहाँ प्राप्त हुआ? (1) सारनाथ (2) ऋजुपालिका नदी तट (3) बोधगया (4) पावापुरी। सही उत्तर (2) है। नमूना प्रश्न 2: महावीर का निर्वाण कहाँ हुआ? (1) कुंडग्राम (2) वैशाली (3) पावापुरी (4) राजगृह। सही उत्तर (3) है।
महावीर के प्रथम उपदेश के बारे में विद्वानों का मत है कि उन्होंने अपने धर्म का प्रचार अर्धमागधी (प्राकृत) भाषा में किया, ताकि आम लोग समझ सकें। इनके प्रमुख शिष्य (गणधर) 11 थे, जिनमें इंद्रभूति गौतम प्रथम गणधर थे। नमूना उदाहरण (numbered): (1) महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ था। (2) महावीर की माता त्रिशला थीं। (3) महावीर जैन परंपरा के 24वें तीर्थंकर थे। (4) बौद्ध ग्रंथों में महावीर को 'निगंठ नाथपुत्त' कहा गया है।
जैन धर्म का आधारभूत सिद्धांत त्रिरत्न (रत्नत्रय) है, जो मुक्ति के लिए तीन अनिवार्य रत्न बताता है:
जैन धर्म में पंच महाव्रत हैं, जिन्हें साधु-संन्यासियों के लिए अनिवार्य बनाया गया। ये व्रत हैं – (1) अहिंसा (किसी जीव को हानि न पहुँचाना), (2) सत्य (सच बोलना), (3) अस्तेय (चोरी न करना), (4) ब्रह्मचर्य (संयमित जीवन) तथा (5) अपरिग्रह (संपत्ति का मोह न रखना)। पार्श्वनाथ के समय केवल चार महाव्रत थे, महावीर ने ब्रह्मचर्य को पाँचवाँ व्रत जोड़ा।
जैन दर्शन की अन्य विशेषताएँ:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): जैन धर्म में मुक्ति का कौन-सा मार्ग है? (1) पंच महाव्रत (2) त्रिरत्न (3) अष्टांगिक मार्ग (4) भक्ति। सही उत्तर (2) त्रिरत्न है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) महावीर ने ब्रह्मचर्य को पाँचवाँ महाव्रत घोषित किया। (2) जैन धर्म में अहिंसा सर्वोच्च व्रत है। (3) अनेकांतवाद जैन दर्शन का सापेक्षतावादी सिद्धांत है। (4) जैन साहित्य का मुख्य ग्रंथ 'द्वादशांगी' (12 अंग) है।
जैन धर्म में 24 तीर्थंकर माने गए हैं। तीर्थंकर का अर्थ है 'तारने वाला' या 'धर्म-तीर्थ का प्रवर्तक'। इनमें प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ (आदिनाथ) हैं, जिन्हें वृषभदेव भी कहा जाता है। 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ हैं, जिनका प्रतीक चिह्न 'सर्प' है और 24वें तीर्थंकर महावीर हैं, जिनका प्रतीक चिह्न 'सिंह' है। 22वें तीर्थंकर अरिष्टनेमि थे। प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का प्रतीक 'वृषभ (बैल)' है।
जैन धर्म के विभाजन की प्रमुख घटना महत्वपूर्ण है:
नमूना प्रश्न (उदाहरण): जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर कौन थे? (1) पार्श्वनाथ (2) ऋषभनाथ (3) महावीर (4) अरिष्टनेमि। सही उत्तर (2) है। नमूना उदाहरण (numbered): (1) पार्श्वनाथ की माता वामादेवी तथा पिता अश्वसेन थे। (2) पार्श्वनाथ का प्रतीक चिह्न सर्प है। (3) चंद्रगुप्त मौर्य जैन धर्म का अनुयायी था और उसने भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में जीवन बिताया। (4) महावीर के बाद 11 गणधरों का उल्लेख जैन परंपरा में मिलता है।
| तीर्थंकर | क्रम | प्रतीक चिह्न |
|---|---|---|
| ऋषभनाथ (आदिनाथ) | प्रथम | वृषभ (बैल) |
| अजितनाथ | द्वितीय | हाथी |
| अरिष्टनेमि | 22वें | शंख |
| पार्श्वनाथ | 23वें | सर्प |
| महावीर | 24वें | सिंह |
| घटना | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 599 ई.पू., कुंडग्राम (वैशाली के पास) |
| माता-पिता | त्रिशला और सिद्धार्थ |
| गृहत्याग | 30 वर्ष की आयु (अभिनिष्क्रमण) |
| कैवल्य ज्ञान | 42 वर्ष की आयु, ऋजुपालिका नदी तट |
| निर्वाण | 527 ई.पू., पावापुरी (राजगृह के पास) |
flowchart TD
A[जैन धर्म] --> B[महावीर]
A --> C[जैन सिद्धांत]
A --> D[तीर्थंकर]
B --> E[जन्म कुंडग्राम 599 ई.पू.]
B --> F[कैवल्य ज्ञान 42 वर्ष]
B --> G[निर्वाण पावापुरी 527 ई.पू.]
C --> H[त्रिरत्न]
C --> I[पंच महाव्रत]
C --> J[अनेकांतवाद]
C --> K[स्याद्वाद]
D --> L[24 तीर्थंकर]
D --> M[प्रथम ऋषभनाथ]
D --> N[23वें पार्श्वनाथ]
D --> O[24वें महावीर]
A --> P[विभाजन: दिगंबर और श्वेतांबर]
जैन धर्म भारतीय संस्कृति का वह अमूल्य धरोहर है, जिसने अहिंसा, सत्य और संयम के माध्यम से समाज को नैतिक दिशा दी। महावीर के जीवन, त्रिरत्न, पंच महाव्रत तथा 24 तीर्थंकरों की परंपरा RRB NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय से प्रश्नों का समाधान करने हेतु महावीर के जीवन-क्रम, तीर्थंकरों के प्रतीकों तथा संप्रदायों के भेद को क्रमबद्ध रूप से याद रखना आवश्यक है। इन तथ्यों की पुनरावृत्ति से उम्मीदवार इस विषय में आसानी से पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।