विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय भूगोल)
अध्याय: 14.3 प्रायद्वीपीय पठार
विषय-वस्तु: पठार, पहाड़ियाँ
1. परिचय
प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग है, जो प्राचीन गोंडवाना महाद्वीप का अवशेष माना जाता है। यह पठार प्राचीन आग्नेय, क्रिस्टलीय तथा रूपांतरित शैलों से निर्मित है और लाखों वर्षों से प्राकृतिक कटाव एवं अपरदन के बावजूद स्थिर बना हुआ है। इसलिए इसे 'प्राचीन भू-खंड' भी कहा जाता है। यह पठार उत्तर में सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला, पूर्व में छोटानागपुर का पठार, पश्चिम में पश्चिमी घाट तथा दक्षिण में नीलगिरि की पहाड़ियों तक विस्तृत है। इस क्षेत्र को 'भारत का हृदय प्रदेश' भी कहा जाता है।
भौगोलिक दृष्टि से प्रायद्वीपीय पठार के मध्य से नर्मदा नदी बहती है, जो इसे दो मुख्य भागों में विभाजित करती है—उत्तर में मध्य उच्च भूमि (केंद्रीय उच्चभूमि) तथा दक्षिण में दक्कन का पठार। नर्मदा नदी के दोनों ओर विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाएँ स्थित हैं। इस पठार का उत्तरी-पश्चिमी भाग मालवा पठार के नाम से जाना जाता है, जबकि पूर्वी भाग में छोटानागपुर का पठार स्थित है, जो खनिज संपदा (कोयला, लौह-अयस्क, अभ्रक) से समृद्ध है। प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी एवं पूर्वी किनारों पर क्रमशः पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्वी घाट स्थित हैं।
प्रायद्वीपीय पठार के दक्षिणी भाग को दक्कन का पठार कहा जाता है, जिसका निर्माण मुख्यतः ज्वालामुखीय लावा (बेसाल्ट) के जमाव से हुआ है। इस लावा को 'दक्कन ट्रैप' कहा जाता है, जिससे यहाँ काली (रगड़) मिट्टी का निर्माण हुआ है, जो कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध है। पठार की पूर्वी एवं पश्चिमी तटीय पहाड़ियों के कारण नदियाँ मुख्यतः पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी जैसी प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर। RRB NTPC में इस अध्याय से पहाड़ियों, चोटियों और नदियों के प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
2. प्रायद्वीपीय पठार के मुख्य भाग
प्रायद्वीपीय पठार को निम्न प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है:
मध्य उच्च भूमि (केंद्रीय उच्चभूमि): यह नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है। इसमें मालवा पठार (मध्य प्रदेश), अरावली पर्वतमाला का पूर्वी भाग तथा बुंदेलखंड, बघेलखंड और छोटानागपुर का पठार शामिल हैं। यहाँ बेतवा, चंबल, सिंध जैसी नदियाँ बहती हैं।
दक्कन का पठार: यह नर्मदा के दक्षिण में स्थित विशाल त्रिभुजाकार पठार है, जो पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व में पूर्वी घाट तथा उत्तर में सतपुड़ा से घिरा है। इसकी ढलान पूर्व की ओर है, इसलिए अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं।
छोटानागपुर का पठार: झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विस्तृत; यह भारत का खनिज भंडार कहलाता है। यहाँ दामोदर, स्वर्णरेखा, सुबर्णरेखा जैसी नदियाँ तथा कोयला, लौह-अयस्क, अभ्रक के प्रचुर भंडार हैं।
मेघालय का पठार: यह उत्तर-पूर्वी भारत में स्थित है और इसमें गारो, खासी तथा जयंतिया पहाड़ियाँ शामिल हैं। यहाँ विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र मावसिनराम स्थित है।
पठार की प्रमुख पहाड़ियाँ निम्नलिखित हैं:
अरावली पर्वतमाला: विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला, राजस्थान से हरियाणा तक फैली; इसकी सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर (1,722 मीटर) माउंट आबू में स्थित है।
विंध्याचल पर्वतमाला: नर्मदा के उत्तर में स्थित, पश्चिम से पूर्व की ओर; यह नदी-प्रणाली का जल-विभाजक है। इसकी सबसे ऊँची चोटी सद्भावना शिखर है।
सतपुड़ा पर्वतमाला: नर्मदा के दक्षिण में, विंध्य के समानांतर; इसकी सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ (1,350 मीटर) है।
पश्चिमी घाट (सह्याद्रि): पूर्वी तट से लगभग 60 से 100 किमी की दूरी पर, महाराष्ट्र से तमिलनाडु तक; अधिक ऊँची, सतत तथा अवरोधक; यहाँ से होकर ताप्ती से कन्याकुमारी तक की यात्रा होती है।
पूर्वी घाट: ओडिशा से तमिलनाडु तक; सतत न होकर छिन्न-भिन्न (खंडित) हैं; ये महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी जैसी नदियों से कटी हुई हैं।
3. प्रमुख चोटियाँ और नीलगिरि क्षेत्र
प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख ऊँची चोटियाँ निम्नलिखित हैं:
आनाईमुडी (2,695 मीटर): यह पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी है तथा पूरे प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी है। यह केरल में अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है।
दोदाबेट्टा (2,637 मीटर): नीलगिरि पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी, तमिलनाडु में; उटी (ऊटी) यहीं स्थित है।
महेंद्रगिरि: पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी (ओडिशा)।
गुरु शिखर (1,722 मीटर): अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी, माउंट आबू (राजस्थान) में।
धूपगढ़ (1,350 मीटर): सतपुड़ा पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी (मध्य प्रदेश)।
सद्भावना शिखर: विंध्याचल की सबसे ऊँची चोटी (मध्य प्रदेश)।
नीलगिरि पहाड़ियाँ तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक तीन राज्यों के संगम पर स्थित हैं। यह पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के मिलन बिंदु पर स्थित है। यहाँ का प्रसिद्ध 'पालघाट गैप' (पालक्काड़ दर्रा) केरल को तमिलनाडु से जोड़ता है। नीलगिरि क्षेत्र की प्रमुख वस्तुएँ—चाय, कॉफी, नीलगिरि की जड़ी-बूटियाँ तथा राष्ट्रीय उद्यान 'मुडुमलाई' हैं। पश्चिमी घाट में स्थित प्रमुख दर्रे निम्न हैं:
थाल घाट: मुंबई-नाशिक मार्ग पर।
भोर घाट: मुंबई-पुणे मार्ग पर।
पालघाट (पालक्काड़) गैप: केरल-तमिलनाडु के बीच, सबसे कम ऊँचाई वाला दर्रा।
पश्चिमी घाट को विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया है। यहाँ जैव-विविधता अत्यधिक है तथा कई राष्ट्रीय उद्यान (पेरियार, नागरहोल, बांदीपुर) स्थित हैं। पश्चिमी घाट मानसूनी वर्षा को अवरोधित करके पश्चिमी तट पर अधिक वर्षा कराता है, जबकि पूर्वी भाग वर्षा-छाया (रेन शैडो) क्षेत्र बन जाता है।
4. नदियाँ, दर्रे और विशेष तथ्य
प्रायद्वीपीय पठार की नदियों का विभाजन उनके बहाव की दिशा के आधार पर किया जाता है:
पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (बंगाल की खाड़ी में मिलने वाली): महानदी, गोदावरी (दक्षिण की गंगा, 1,465 किमी), कृष्णा, कावेरी (दक्षिण की गंगा), पेन्नार, वैगई। ये नदियाँ चौड़े त्रिभुजाकार डेल्टा बनाती हैं।
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ (अरब सागर में मिलने वाली): नर्मदा (1,312 किमी), ताप्ती, माही, साबरमती, लूनी। ये नदियाँ घाटों से गुजरकर सीधे सागर में मिलती हैं और अपवाह (एस्टुअरी) बनाती हैं।
दर्रे की दृष्टि से पश्चिमी घाट में थाल घाट, भोर घाट रेल एवं सड़क संपर्क के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रायद्वीपीय पठार के विशेष तथ्य निम्न हैं:
दक्कन ट्रैप: बेसाल्ट चट्टानों का विशाल जमाव, जिससे काली मिट्टी बनी; महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक में विस्तृत।
भारत का प्राचीनतम भू-खंड: पठार गोंडवाना भूमि का अवशेष है।
अरावली: विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वतमाला।
छोटानागपुर पठार: भारत का 'रूर' क्षेत्र, खनिज संपदा से समृद्ध; दामोदर घाटी 'भारत का रूर' कहलाती है।
कावेरी का डेल्टा: भारत के सबसे उपजाऊ डेल्टा में से एक, 'दक्षिण भारत का अन्न भंडार'।
पश्चिमी घाट का 'स्वर्ण तट': पश्चिमी तट को अनेक बंदरगाहों (मुंबई, कोच्चि, मंगलुरु) के कारण महत्व प्राप्त है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
चोटी
पर्वतमाला
ऊँचाई (मीटर)
आनाईमुडी
पश्चिमी घाट (अन्नामलाई)
2,695
दोदाबेट्टा
नीलगिरि
2,637
महेंद्रगिरि
पूर्वी घाट
1,501
गुरु शिखर
अरावली
1,722
धूपगढ़
सतपुड़ा
1,350
तालिका 2
पर्वतमाला
स्थिति
विशेषता
अरावली
राजस्थान-हरियाणा
विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला
विंध्याचल
नर्मदा के उत्तर
नदी-प्रणाली का जल विभाजक
सतपुड़ा
नर्मदा के दक्षिण
विंध्य के समानांतर
पश्चिमी घाट
पश्चिमी तट के समानांतर
सतत, ऊँची, वर्षा-अवरोधक
पूर्वी घाट
पूर्वी तट के समानांतर
खंडित, नदियों से कटी
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[प्रायद्वीपीय पठार] --> B[मुख्य भाग]
B --> B1[मध्य उच्च भूमि]
B --> B2[दक्कन का पठार]
B --> B3[छोटानागपुर पठार]
B --> B4[मेघालय पठार]
A --> C[पर्वतमालाएँ]
C --> C1[अरावली]
C --> C2[विंध्याचल]
C --> C3[सतपुड़ा]
C --> C4[पश्चिमी घाट]
C --> C5[पूर्वी घाट]
A --> D[प्रमुख चोटियाँ]
D --> D1[आनाईमुडी 2695]
D --> D2[दोदाबेट्टा 2637]
D --> D3[गुरु शिखर 1722]
A --> E[नदियाँ]
E --> E1[पूर्ववाही गोदावरी]
E --> E2[पूर्ववाही कृष्णा]
E --> E3[पश्चिमवाही नर्मदा]
E --> E4[पश्चिमवाही ताप्ती]
A --> F[मिट्टी]
F --> F1[दक्कन ट्रैप से काली मिट्टी]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: आनाईमुडी को नीलगिरि की चोटी बताना। आनाईमुडी अन्नामलाई पहाड़ियों (केरल) में है; नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेट्टा है।
गलती: प्रायद्वीपीय पठार को युवा भू-भाग बताना। यह भारत का प्राचीनतम भू-खंड (गोंडवाना अवशेष) है।
गलती: नर्मदा को पूर्व की ओर बहने वाली नदी बताना। नर्मदा पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती है।
गलती: पश्चिमी घाट को खंडित और पूर्वी घाट को सतत बताना। यह विपरीत है—पश्चिमी घाट सतत है, पूर्वी घाट खंडित है।
गलती: धूपगढ़ को अरावली की चोटी बताना। धूपगढ़ सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी है; अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है।
गलती: अरावली को युवा पर्वतमाला बताना। अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
चोटियों को पर्वतमाला के साथ जोड़कर (आनाईमुडी-पश्चिमी घाट, गुरु शिखर-अरावली, धूपगढ़-सतपुड़ा) याद रखें।
'पूर्ववाही बनाम पश्चिमवाही' नदियों की सूची को अलग-अलग स्मरण करें; यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला विभाजन है।
दक्कन ट्रैप और काली मिट्टी के संबंध को कपास की खेती से जोड़कर याद रखें।
नीलगिरि को तीन राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) के संगम के रूप में याद रखें।
छोटानागपुर पठार को 'भारत का रूर' और दामोदर घाटी को खनिज क्षेत्र के रूप में याद रखें।
पश्चिमी घाट के दर्रे (थाल, भोर, पालघाट) को उनके मार्गों के साथ स्मरण रखें।
10. निष्कर्ष
प्रायद्वीपीय पठार भारत के भूगोल का सबसे प्राचीन और स्थिर भाग है, जो गोंडवाना भूमि के अवशेष के रूप में विशाल खनिज संपदा, काली मिट्टी, प्राचीन पर्वतमालाओं और महत्वपूर्ण नदियों का केंद्र है। अरावली से लेकर नीलगिरि तक फैली पर्वतमालाएँ, आनाईमुडी जैसी चोटियाँ तथा पूर्व-पश्चिम में बहने वाली नदियाँ परीक्षा के प्रश्नों का प्रमुख स्रोत हैं। इस अध्याय को मानचित्र के साथ पढ़ने से चोटियों, पहाड़ियों और नदियों का स्थानिक ज्ञान स्थायी रूप से बनता है। नियमित पुनरावृत्ति से NTPC परीक्षा में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।