विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास) अध्याय: 13.5 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विषय-वस्तु: स्थापना 1885, अधिवेशन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के सबसे पुराने और प्रमुख राजनीतिक संगठनों में से एक है। इसकी स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को बॉम्बे (मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई। कांग्रेस की स्थापना में मुख्य भूमिका सेवानिवृत्त आईसीएस अधिकारी ए.ओ. ह्यूम (एलन ऑक्टेवियन ह्यूम) ने निभाई, जो कांग्रेस के संस्थापक माने जाते हैं। प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और व्योमेश चंद्र बनर्जी (वोमेश चंद्र बनर्जी) पहले अध्यक्ष बने।
कांग्रेस की स्थापना के समय उद्देश्य थे – भारतीयों में राजनीतिक चेतना जगाना, सरकारी सुधारों की माँग करना, विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना और धीरे-धीरे स्वशासन की दिशा में काम करना। प्रारंभिक कांग्रेस के नेता मध्यमार्गी (नरम दल) थे, जो याचिका, प्रस्ताव और ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग के माध्यम से सुधार चाहते थे।
रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से कांग्रेस के स्थापना वर्ष, प्रथम अध्यक्ष, विभिन्न अधिवेशनों के स्थान, वर्ष और अध्यक्षों के नाम तथा 'पहला' वाले तथ्य पूछे जाते हैं। ये सभी तथ्य तिथि-आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें क्रमबद्ध रूप से याद रखना अत्यंत आवश्यक है।
स्थापना की पृष्ठभूमि: कांग्रेस की स्थापना से पहले भारतीय राष्ट्रीयता की भावना को विभिन्न संस्थाओं ने पोषित किया – 'लैंडहोल्डर्स सोसाइटी' (1838), 'ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन' (1851), 'बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन' (1867), 'पूना सार्वजनिक सभा' (1870) और 'इंडियन एसोसिएशन' (1876, सुरेंद्रनाथ बनर्जी)। इन संस्थाओं का सम्मेलन ही कांग्रेस बनी।
प्रारंभिक अधिवेशनों की झलक: 1. 1885 बॉम्बे – व्योमेश चंद्र बनर्जी (प्रथम अध्यक्ष) 2. 1886 कलकत्ता – दादाभाई नौरोजी (तीसरा अधिवेशन; प्रथम बार 'राष्ट्रीय' स्वरूप) 3. 1888 इलाहाबाद – जॉर्ज यूल (कांग्रेस का पहला अंग्रेज अध्यक्ष) 4. 1893 लाहौर – दादाभाई नौरोजी (दूसरी बार) 5. 1895 पूना – सुरेंद्रनाथ बनर्जी 6. 1896 कलकत्ता – रहीमतुल्ला एम. सयानी 7. 1899 लखनऊ – रमेश चंद्र दत्त 8. 1901 लाहौर – दादाभाई नौरोजी (तीसरी बार) – हालांकि कुछ विवरण भिन्न 9. 1902 अहमदाबाद – सुरेंद्रनाथ बनर्जी (दूसरी बार) 10. 1904 बॉम्बे – हेनरी कॉटन 11. 1905 बनारस – गोपाल कृष्ण गोखले (स्वदेशी आंदोलन का प्रस्ताव पारित) 12. 1906 कलकत्ता – दादाभाई नौरोजी (तृतीय बार; 'स्वराज्य' शब्द का पहली बार उल्लेख)
प्रारंभिक कांग्रेस की माँगें (1885-1905): सिविल सेवा परीक्षा में प्रतियोगी परीक्षा का विस्तार, विधान परिषदों में भारतीय सदस्यों की संख्या बढ़ाना, भारतीय बजट पर विचार, सेना पर भारतीय खर्च में कमी, और आर्थिक शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना। दादाभाई नौरोजी ने 'पूँजी निष्कासन' (Drain Theory) का प्रतिपादन किया।
नरम दल (मध्यमार्गी): दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, रमेश चंद्र दत्त। ये याचिका, विधेयकों की माँग और ब्रिटिश संसद के प्रति विश्वास की नीति अपनाते थे। इन्होंने 'तीन P' का सिद्धांत अपनाया – Petition (याचिका), Protest (विरोध), Prayer (प्रार्थना)।
गरम दल (उग्रवादी): लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष। इन्होंने बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा और जन आंदोलनों पर बल दिया। तिलक का नारा था – 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा'।
सूरत विभाजन (1907): 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में तिलक और अरविंद घोष ने अधिक कट्टर प्रस्तावों की माँग की। 1907 में सूरत अधिवेशन में गरम और नरम दलों में खुला मतभेद हुआ और कांग्रेस दो भागों में बँट गई। सूरत अधिवेशन की अध्यक्षता रासबिहारी घोष ने की।
लखनऊ समझौता (1916): कांग्रेस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ। इसके अंतर्गत मुसलमानों को प्रांतीय विधानमंडलों में पृथक निर्वाचन और प्रतिनिधित्व में रियायतें दी गईं। इससे हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने का प्रयास हुआ।
महत्वपूर्ण अधिवेशन (1916-1920): 1. 1916 लखनऊ – ए.सी. मजुमदार (कांग्रेस-लीग समझौता) 2. 1917 कलकत्ता – एनी बेसेंट (कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष) 3. 1918 बॉम्बे – सैयद हसन इमाम 4. 1918 दिल्ली – मदन मोहन मालवीय 5. 1919 अमृतसर – मोतीलाल नेहरू 6. 1920 नागपुर – गांधीजी (असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव; कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन)
गांधीजी के आने के बाद कांग्रेस का स्वरूप बदल गया – यह केवल बुद्धिजीवियों का संगठन नहीं रही, बल्कि जन आंदोलन का मंच बन गई। अधिवेशनों में जनसाधारण की भागीदारी बढ़ी और प्रमुख निर्णय राष्ट्रव्यापी आंदोलनों से जुड़े।
कांग्रेस से जुड़े 'प्रथम' तथ्य: 1. प्रथम अध्यक्ष – व्योमेश चंद्र बनर्जी (1885) 2. प्रथम महिला अध्यक्ष – एनी बेसेंट (1917) 3. प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष – सरोजिनी नायडू (1925) 4. प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष – जॉर्ज यूल (1888) 5. प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष – हाकिम अजमल खान (1921) 6. एकमात्र अधिवेशन जिसमें गांधीजी अध्यक्ष – बेलगाँव (1924) 7. कांग्रेस की स्थापना का अधिवेशन – बॉम्बे (1885)
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष |
|---|---|---|
| 1885 | बॉम्बे | व्योमेश चंद्र बनर्जी |
| 1886 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी |
| 1905 | बनारस | गोपाल कृष्ण गोखले |
| 1906 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी |
| 1907 | सूरत | रासबिहारी घोष |
| 1916 | लखनऊ | ए.सी. मजुमदार |
| 1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट |
| 1925 | कानपुर | सरोजिनी नायडू |
| 1929 | लाहौर | जवाहरलाल नेहरू |
| 1940 | रामगढ़ | मौलाना आज़ाद |
| तथ्य | व्यक्ति | वर्ष |
|---|---|---|
| प्रथम अध्यक्ष | व्योमेश चंद्र बनर्जी | 1885 |
| प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष | जॉर्ज यूल | 1888 |
| प्रथम महिला अध्यक्ष | एनी बेसेंट | 1917 |
| प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष | हाकिम अजमल खान | 1921 |
| प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष | सरोजिनी नायडू | 1925 |
| संस्थापक | ए.ओ. ह्यूम | 1885 |
flowchart TD
A[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस] --> B[स्थापना 1885 बॉम्बे]
A --> C[संस्थापक ए.ओ. ह्यूम]
A --> D[नरम दल]
A --> E[गरम दल]
A --> F[गांधी युग]
B --> B1[प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र]
D --> D1[नौरोजी गोखले बनर्जी]
D --> D2[याचिका प्रस्ताव नीति]
E --> E1[तिलक लाला बिपिन]
E --> E2[सूरत विभाजन 1907]
D --> G[लखनऊ समझौता 1916]
G --> H[फिर एकता]
F --> F1[बेलगाँव 1924 गांधी]
F --> F2[लाहौर 1929 पूर्ण स्वराज्य]
F --> F3[हरिपुरा 1938 सुभाष]
F --> F4[रामगढ़ 1940 आज़ाद]
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने भारतीय राजनीति को एक संगठित स्वरूप दिया। 1885 में बॉम्बे में प्रारंभ हुई यह संस्था धीरे-धीरे याचिका-आधारित संगठन से जन आंदोलन के महान मंच में बदल गई। नरम और गरम दलों के टकराव, 1907 के विभाजन और 1916 की पुनर्एकता ने कांग्रेस को परिपक्व किया, जबकि गांधीयुग में इसने पूर्ण स्वराज्य की ओर निर्णायक कदम बढ़ाए। कांग्रेस के अधिवेशनों के स्थान, वर्ष और अध्यक्षों की जानकारी परीक्षा में सीधे प्रश्न बनाती है, इसलिए इन्हें सटीक रूप से याद रखना चाहिए।