13.6 स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन Notes

13.6 स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास) अध्याय: 13.6 स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन विषय-वस्तु: 1905, स्वदेशी आंदोलन

1. परिचय

स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन 1905 से प्रारंभ हुआ, जब वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 20 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की, जो 16 अक्टूबर, 1905 को प्रभावी हुआ। कर्जन ने इसे 'प्रशासनिक सुविधा' बताया, पर भारतीयों ने इसे 'बाँटो और राज करो' की नीति माना। बंगाल को पूर्वी बंगाल (ढाका राजधानी) और पश्चिम बंगाल (कलकत्ता राजधानी) में बाँट दिया गया, जिससे बंगाली हिंदू-मुस्लिम समुदाय में फूट डालने की साजिश रची गई।

इस विभाजन के विरोध में भारतीय जनता ने स्वदेशी (देशी वस्तुओं का प्रयोग) और बहिष्कार (विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार) का कार्यक्रम अपनाया। यह आंदोलन बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में फैल गया और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का पहला बड़ा जन आंदोलन बना। इस आंदोलन ने गरम और नरम दलों के बीच भी विचारधारा का संघर्ष तेज किया।

इस अध्याय में हम बंगाल विभाजन के कारण, स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन की प्रकृति, इसके नेता, स्वदेशी आंदोलन के परिणाम और 1911 में विभाजन रद्द होने तक के घटनाक्रम का अध्ययन करेंगे। रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से तिथियाँ, नेता और आंदोलन से जुड़े प्रतीक पूछे जाते हैं।

2. बंगाल विभाजन और आंदोलन की शुरुआत

बंगाल विभाजन (16 अक्टूबर, 1905): लॉर्ड कर्जन ने बंगाल को दो भागों में विभाजित किया: 1. पश्चिम बंगाल – राजधानी कलकत्ता, जिसमें बिहार और उड़ीसा शामिल 2. पूर्वी बंगाल – राजधानी ढाका, जिसमें असम शामिल

आंदोलन का प्रारंभ: विभाजन की घोषणा के तुरंत बाद बंगाल में जबरदस्त विरोध हुआ। - 7 अगस्त, 1905: कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के प्रोत्साहन का संकल्प लिया गया। - विभाजन के दिन (16 अक्टूबर) को रक्षा बंधन (राखी) दिवस के रूप में मनाया गया – रवींद्रनाथ टैगोर ने विभाजन के विरोध में राखी बाँधने और 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' (बंगाल की मिट्टी, बंगाल का जल) गीत का उपयोग किया। - गीत, कविता, पत्रिकाएँ और प्रदर्शनों के माध्यम से आंदोलन व्यापक जन-आंदोलन बना। 'वंदे मातरम' (बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय) इस आंदोलन का मूल मंत्र बना।

गरम दल का योगदान: बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष और लाला लाजपत राय ने आंदोलन को जन-आधारित बनाया। अरविंद घोष ने कहा कि बहिष्कार केवल विदेशी वस्तुओं का नहीं, बल्कि विदेशी शासन का भी होना चाहिए। तिलक ने बॉम्बे से आंदोलन को जोड़ा और 'केसरी' व 'मराठा' पत्रों से आंदोलन का प्रचार किया।

3. स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन की प्रकृति और कार्यक्रम

स्वदेशी आंदोलन का कार्यक्रम: 1. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार: अंग्रेजी वस्त्र, नमक और अन्य विदेशी वस्तुओं का प्रयोग बंद करना। 2. स्वदेशी उत्पादन का प्रोत्साहन: देशी वस्त्रों, खादी, कपड़ा और उद्योगों को बढ़ावा देना। लोगों ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। 3. राष्ट्रीय शिक्षा: विदेशी विश्वविद्यालयों के बहिष्कार के साथ राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन चलाया गया। बंगाल में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' की स्थापना हुई (1906)। 4. आर्थिक स्वदेशी: बंगाल में स्वदेशी बैंक, स्वदेशी कंपनियाँ (जैसे स्वदेशी कपड़ा मिलें) स्थापित हुईं। 5. सामाजिक जागरण: अखिल भारतीय युवा और महिलाएँ इस आंदोलन में शामिल हुईं। सत्येन्द्र बोस, सुब्रह्मण्यम भारती जैसे व्यक्ति सक्रिय रहे।

आंदोलन की विशेषताएँ: - यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का पहला जन आंदोलन था, जिसमें आम जनता, महिलाएँ और युवा शामिल हुए। - बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में आंदोलन सबसे अधिक सक्रिय रहा। मद्रास में वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै ने स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी स्थापित की। - बाल गंगाधर तिलक ने आंदोलन को पूरे भारत तक पहुँचाया; बिपिन चंद्र पाल ने इसे 'सत्याग्रह' की तरह रचनात्मक संघर्ष बताया। - आंदोलन का मूल उद्देश्य केवल विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं, बल्कि स्वशासन (स्वराज्य) की माँग थी।

1905 बनारस अधिवेशन: गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में कांग्रेस ने स्वदेशी आंदोलन का औपचारिक समर्थन किया।

1906 कलकत्ता अधिवेशन: दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने चार लक्ष्य घोषित किए – स्वराज्य, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा।

व्यापकता एवं सीमाएँ: - आंदोलन ने बंगाली हिंदू मध्यवर्ग को तो प्रभावित किया, पर बंगाल के मुस्लिम समुदाय और किसानों तक गहराई से नहीं पहुँच सका। - विभाजन ने वास्तव में पूर्वी बंगाल में मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक नई मुस्लिम राजनीतिक चेतना को बढ़ावा दिया, जो बाद में मुस्लिम लीग (1906, ढाका स्थापना) के निर्माण का आधार बनी। - आंदोलन ने अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर नहीं किया, पर इसकी सशक्तता ने अंग्रेजों की नीति बदल दी।

4. आंदोलन का दमन और परिणाम

दमन के उपाय: अंग्रेजों ने आंदोलन को कुचलने के लिए प्रेस पर नियंत्रण (वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 का प्रयोग), बैठकों पर रोक और नेताओं की गिरफ्तारियाँ कीं। - अरविंद घोष और उनके भाई बरींद्र घोष पर 'अलीपुर बम कांड' (1908) में मुकदमा चला। अरविंद घोष को बरी कर दिया गया, बरींद्र को कारावास हुआ। - बाल गंगाधर तिलक को 'केसरी' में उग्र लेख लिखने के आरोप में 1908 में छह वर्ष के कारावास की सजा मिली (उन्हें मांडले भेजा गया)। - बिपिन चंद्र पाल को भी कारावास हुआ। अनेक क्रांतिकारी संगठन (युगांतर, अनुशीलन समिति) उभरे। - गवर्नर-जनरल मिंटो (लॉर्ड मिंटो, 1905-10) के काल में दमन जारी रहा, पर 1909 में मोर्ले-मिंटो सुधार (इंडियन काउंसिल एक्ट 1909) लागू किए गए, जिसमें मुसलमानों को पृथक निर्वाचन मिला।

विभाजन रद्द (1911): स्वदेशी आंदोलन के व्यापक प्रभाव के कारण 12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार में राजा जॉर्ज पंचम ने बंगाल विभाजन रद्द करने की घोषणा की। - बंगाल पुनः एक हुआ, पर बिहार और उड़ीसा को अलग प्रांत बना दिया गया। - साथ ही भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।

परिणाम: 1. राष्ट्रीय जागरण: स्वदेशी आंदोलन ने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना और आत्मविश्वास जगाया। 2. घरेलू उद्योगों को बढ़ावा: स्वदेशी मिलों, कारखानों और उद्यमों का विकास हुआ। 3. कांग्रेस में विभाजन: 1907 के सूरत अधिवेशन में गरम-नरम विभाजन आंदोलन की रणनीति पर ही हुआ। 4. मुस्लिम लीग का उदय: 1906 में ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग बनी। 5. क्रांतिकारी राष्ट्रवाद: असंतुष्ट युवाओं ने क्रांतिकारी आंदोलनों का मार्ग अपनाया। 6. आगे के आंदोलनों की नींव: बहिष्कार, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा के तरीके गांधीयुग में भी अपनाए गए।

प्रमुख व्यक्तित्व एवं योगदान: - लॉर्ड कर्जन – विभाजन का सूत्रधार - रवींद्रनाथ टैगोर – रक्षा बंधन दिवस, 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' - बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय – 'वंदे मातरम' (आनंदमठ) - तिलक, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष, लाला लाजपत राय – गरम दल के नेता - वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै – स्वदेशी स्टीम नेविगेशन - सुब्रह्मण्यम भारती – कवि एवं राष्ट्रवादी

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: बंगाल विभाजन से जुड़ी तिथियाँ

तिथि घटना
20 जुलाई 1905 बंगाल विभाजन की घोषणा
7 अगस्त 1905 कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी प्रस्ताव
16 अक्टूबर 1905 विभाजन प्रभावी; रक्षा बंधन दिवस
1906 ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना
12 दिसंबर 1911 दिल्ली दरबार में विभाजन रद्द, राजधानी दिल्ली

तालिका 2: स्वदेशी आंदोलन के प्रमुख तत्व

तत्व विवरण
बहिष्कार विदेशी वस्तुओं, विशेषकर वस्त्र एवं नमक का त्याग
स्वदेशी देशी उत्पादों का प्रोत्साहन, स्वदेशी उद्योग
राष्ट्रीय शिक्षा विदेशी विश्वविद्यालयों के बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद
स्वराज्य 1906 कलकत्ता अधिवेशन में लक्ष्य घोषित
प्रतीक रक्षा बंधन, वंदे मातरम, बांग्लार माटी बांग्लार जल

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन] --> B[बंगाल विभाजन 1905]
    A --> C[स्वदेशी आंदोलन]
    A --> D[बहिष्कार]
    A --> E[नेता]
    A --> F[परिणाम]
    B --> B1[कर्जन की घोषणा 20 जुलाई]
    B --> B2[16 अक्टूबर प्रभावी]
    C --> C1[रक्षा बंधन दिवस]
    C --> C2[स्वदेशी बैंक और उद्योग]
    D --> D1[विदेशी वस्त्र नमक बहिष्कार]
    E --> E1[तिलक बिपिन अरविंद]
    E --> E2[लाला लाजपत राय]
    F --> F1[विभाजन रद्द 1911]
    F --> F2[मुस्लिम लीग 1906]
    F --> F3[सूरत विभाजन 1907]
    F --> F4[राजधानी दिल्ली]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

बंगाल विभाजन से विभाजन रद्द तक 20 जुलाई 1905 कर्जन द्वारा घोषणा बाँटो और राज करो 16 अक्टूबर 1905 विभाजन प्रभावी रक्षा बंधन दिवस 1908 तिलक को 6 वर्ष कारावास 12 दिसंबर 1911 दिल्ली दरबार में जॉर्ज पंचम विभाजन रद्द, राजधानी दिल्ली परिणाम मुस्लिम लीग 1906, सूरत विभाजन 1907, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद स्वर्ण नियम: विभाजन 1905 में हुआ, विभाजन रद्द 1911 में; रक्षा बंदन दिवस रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ा।

स्वदेशी आंदोलन के स्तंभ स्वदेशी देशी उत्पादन एवं प्रयोग स्वदेशी मिलें एवं बैंक वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै बहिष्कार विदेशी वस्तुओं का त्याग वस्त्र, नमक, विश्वविद्यालय होली जलाने का प्रतीक राष्ट्रीय शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा परिषद 1906 देशी भाषा में शिक्षा आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय स्वराज्य 1906 कलकत्ता अधिवेशन दादाभाई नौरोजी स्वराज्य का संकल्प प्रतीक और मंत्र वंदे मातरम – बांग्लार माटी बांग्लार जल – रक्षा बंधन स्वर्ण नियम: वंदे मातरम गीत बंकिम चंद्र ने लिखा, रक्षा बंधन दिवस टैगोर के आह्वान पर मना।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. विभाजन का वर्ष: कई छात्र बंगाल विभाजन को 1905 की जगह 1906 या 1911 लिख देते हैं। 1905 में विभाजन, 1911 में रद्द – दोनों वर्ष साथ-साथ याद रखें।
  2. कर्जन बनाम मिंटो: विभाजन की घोषणा कर्जन ने की थी, मिंटो ने नहीं। मिंटो 1905 के बाद वायसराय बने और मोर्ले-मिंटो सुधार 1909 लागू किए।
  3. रक्षा बंधन दिवस: रक्षा बंधन दिवस 16 अक्टूबर 1905 को मनाया गया था; कई छात्र इसे 7 अगस्त से जोड़ देते हैं। 7 अगस्त को स्वदेशी प्रस्ताव पारित हुआ था।
  4. वंदे मातरम: 'वंदे मातरम' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का गीत है, रवींद्रनाथ टैगोर का नहीं। टैगोर 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' से जुड़े हैं।
  5. तिलक का कारावास: तिलक को 1908 में 6 वर्ष की सजा मिली थी; कुछ परीक्षार्थी इसे अलीपुर बम कांड के साथ जोड़ देते हैं, जो अरविंद घोष से संबंधित था।
  6. स्वराज्य शब्द: 'स्वराज्य' शब्द पहली बार 1906 कलकत्ता अधिवेशन में आया, स्वदेशी आंदोलन में नहीं। यह बाद में गांधीयुग की माँग बनी।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. बंगाल विभाजन की पूरी तिथि-श्रृंखला (20 जुलाई, 7 अगस्त, 16 अक्टूबर 1905; 12 दिसंबर 1911) एक साथ रटें।
  2. गरम दल के नेताओं (तिलक, पाल, अरविंद, लाला) के नाम और उनके अखबार (केसरी, मराठा) याद रखें।
  3. 'वंदे मातरम' और 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' के रचनाकारों को अलग-अलग याद करें।
  4. 1906 में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना और 1907 सूरत विभाजन को स्वदेशी आंदोलन के परिणाम के रूप में जोड़ें।
  5. मोर्ले-मिंटो सुधार (1909) में पृथक निर्वाचन के प्रावधान को याद रखें – यह बार-बार पूछा जाता है।
  6. स्वदेशी आंदोलन को 'प्रथम जन आंदोलन' के रूप में याद रखें, यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

10. निष्कर्ष

स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में उभरा, पर यह मात्र विरोध नहीं था – यह भारतीय जनता के आत्मनिर्भरता और स्वशासन की इच्छा की अभिव्यक्ति थी। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी उद्योगों का विकास और राष्ट्रीय शिक्षा के माध्यम से इस आंदोलन ने भारतीय समाज में नई चेतना जगाई। 1911 में विभाजन रद्द होना आंदोलन की प्रभावशीलता को सिद्ध करता है। यद्यपि आंदोलन के दौरान कांग्रेस में विभाजन (1907) और मुस्लिम लीग (1906) का उदय हुआ, पर इसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को गांधीयुग के लिए तैयार कर दिया। यह आंदोलन भारत के सामाजिक-आर्थिक पुनर्जागरण की दिशा में एक निर्णायक कदम था।