13.8 भारत छोड़ो आंदोलन Notes

13.8 भारत छोड़ो आंदोलन

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास) अध्याय: 13.8 भारत छोड़ो आंदोलन विषय-वस्तु: 1942, आंदोलन

1. परिचय

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) महात्मा गांधी के नेतृत्व में चला भारत का सबसे बड़ा और अंतिम राष्ट्रव्यापी आंदोलन था। इसकी शुरुआत 8 अगस्त, 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक में कांग्रेस की बैठक में प्रस्ताव पारित होने से हुई। इस आंदोलन में गांधीजी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का प्रसिद्ध नारा दिया। अगले दिन (9 अगस्त, 1942) की सुबह गांधीजी सहित कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

यह आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चला, जब ब्रिटेन भारतीयों को युद्ध में शामिल होने के लिए कह रहा था। गांधीजी का कहना था कि भारत को तुरंत स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, तभी भारत युद्ध में सार्थक सहयोग कर सकता है। क्रिप्स मिशन (मार्च 1942) की विफलता ने भी भारतीयों में असंतोष बढ़ा दिया था।

इस अध्याय में हम भारत छोड़ो आंदोलन के कारण, इसके प्रस्ताव, गांधीजी के विचार, जन आंदोलन के विभिन्न रूप, अंग्रेजों के दमन और आंदोलन के परिणामों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से तिथि, नारा, नेता और आंदोलन के केंद्रों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. भारत छोड़ो आंदोलन के कारण

क्रिप्स मिशन की विफलता (मार्च 1942): द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी सेनाएँ भारत की सीमाओं की ओर बढ़ रही थीं। ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने के लिए स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में एक मिशन भेजा। क्रिप्स मिशन का प्रस्ताव था – युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस और संविधान सभा के गठन का वादा, पर युद्ध के समय कोई वास्तविक सत्ता हस्तांतरण नहीं। भारतीय नेताओं ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे तुरंत स्वतंत्रता चाहते थे।

आंदोलन के अन्य कारण: 1. युद्ध का विरोध: गांधीजी और कांग्रेस अहिंसा के पक्षधर थे; उन्हें युद्ध में भारतीयों को नहीं भेजना था। 2. जापानी आक्रमण का भय: जापानी सेना म्यांमार तक पहुँच चुकी थी; अंग्रेज उन्हें रोकने में असमर्थ दिख रहे थे। 3. बढ़ती कीमतें और असंतोष: युद्ध के कारण खाद्यान्न की कमी, महँगाई और अकाल की स्थिति बनी। 4. 'अन्य देशों से प्रेरणा: सोवियत संघ में जर्मनी का आक्रमण, अमेरिका और चीन की स्वतंत्रता भावना ने भारतीयों को प्रेरित किया। 5. 'बंदी बनाओ या मारो' का संकल्प: गांधीजी ने कहा कि यदि भारत स्वतंत्र नहीं होगा तो ब्रिटिश शासन समाप्त करना ही होगा।

गांधीजी का संदेश: 8 अगस्त 1942 की रात को गांधीजी ने कहा – 'मेरा मंत्र है – करो या मरो। हम या तो भारत को स्वतंत्र कराएँगे या इस प्रयास में मर जाएँगे।' उन्होंने प्रत्येक भारतीय को अपने-अपने क्षेत्र में स्वयं का कार्यक्रम चलाने की स्वतंत्रता दी।

'भारत छोड़ो' प्रस्ताव (8 अगस्त, 1942): गोवालिया टैंक में आयोजित बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि ब्रिटिश शासन को भारत से हटना होगा, अन्यथा कांग्रेस व्यापक नागरिक अवज्ञा प्रारंभ करेगी। गांधीजी ने इसे 'एक खुला विद्रोह' बताया। इसी प्रस्ताव को 'भारत छोड़ो प्रस्ताव' कहा जाता है। इस अधिवेशन की अध्यक्षता अबुल कलाम आज़ाद ने की।

3. आंदोलन का प्रारंभ और दमन

9 अगस्त, 1942 – गिरफ्तारियाँ: प्रस्ताव के अगले दिन ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद और कांग्रेस कार्यसमिति के सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया – गांधीजी को पूना के आगा खान पैलेस में नजरबंद किया गया।

जनता का स्वतःस्फूर्त विद्रोह: नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देशभर में जनता ने स्वतःस्फूर्त रूप से विद्रोह किया। रेलवे लाइनें उखाड़ दी गईं, टेलीग्राफ के तार काटे गए, पुलिस थानों पर हमले हुए और सरकारी भवनों को जलाया गया। यह आंदोलन 'राष्ट्रीय विद्रोह' जैसा बन गया।

आंदोलन में भूमिका निभाने वाले: 1. अरुणा आसफ अली: गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद 9 अगस्त को बॉम्बे के गोवालिया टैंक में झंडा फहराया और आंदोलन का संचालन किया। उन्हें 'ग्रैंड ओल्ड लेडी' या 'आंदोलन की जोशीली महिला' कहा गया। 2. जयप्रकाश नारायण: आंदोलन के प्रमुख समाजवादी नेता, जिन्होंने भूमिगत रहकर आंदोलन चलाया। उनका नारा था – 'पूर्ण स्वतंत्रता और सामाजिक क्रांति'। 3. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, युसुफ मेहर अली – समाजवादी नेताओं ने भूमिगत गतिविधियों का नेतृत्व किया। 4. उषा मेहता, सुचेता कृपलानी जैसी महिलाएँ सक्रिय रहीं। 5. डॉ. राममनोहर लोहिया ने 'जनता की सरकार' के विचार को आगे बढ़ाया।

दमन की क्रूरता: अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर गोलीबारी की, हजारों लोगों को पकड़ा। अनुमान है कि सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया। जेलों में नेताओं को कठोर परिस्थितियों में रखा गया। गांधीजी ने जेल में ही 1943 में आमरण अनशन किया, जो 21 दिन तक चला।

कांग्रेस का कानूनी ढाँचा: आंदोलन के दौरान कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया। कांग्रेस के सभी अंग प्रतिबंधित किए गए। इसके बावजूद भूमिगत आंदोलन जारी रहा।

4. आंदोलन का अंत और परिणाम

आंदोलन का अंत: 1944 में गांधीजी को स्वास्थ्य कारणों से रिहा किया गया। 1945 तक अधिकांश नेता जेल से छूटकर बाहर आ गए। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति (1945) के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाए। इस प्रकार भारत छोड़ो आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष का अंतिम और सबसे बड़ा चरण पूरा किया।

आंदोलन के परिणाम: 1. स्वतंत्रता का निर्णायक संकेत: इस आंदोलन ने यह सिद्ध कर दिया कि ब्रिटिश शासन भारतीयों की इच्छा के विरुद्ध अधिक दिन नहीं टिक सकता। 2. युद्ध के बाद ब्रिटेन की बदली नीति: लेबर पार्टी की सरकार ने 1946 में कैबिनेट मिशन भेजा और स्वतंत्रता की प्रक्रिया शुरू की। 3. जन नेताओं का उदय: जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, अरुणा आसफ अली जैसे नेता उभरे। 4. समानांतर सरकारों का अनुभव: बलिया, मिदनापुर, सतारा और तमलुक की सरकारों ने जन-स्वशासन की क्षमता दिखाई। 5. कांग्रेस पर प्रतिबंध: कांग्रेस को अवैध घोषित किया गया, पर उसकी लोकप्रियता बढ़ती रही। 6. स्वतंत्रता की राह: 1945 के बाद सिमला सम्मेलन, 1946 के कैबिनेट मिशन और अंततः 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

आंदोलन की विशेषताएँ: - यह अंतिम एवं सबसे बड़ा जन आंदोलन था, जिसमें नेता बिना ही जनता ने संघर्ष किया। - इसमें समाजवादी नेताओं और युवाओं की भूमिका प्रमुख थी। - महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया – अरुणा आसफ अली, उषा मेहता, सुचेता कृपलानी। - यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ 'अंतिम जनविद्रोह' था, जिसके बाद अंग्रेजों को भारत छोड़ना ही पड़ा।

भारत छोड़ो आंदोलन और अन्य घटनाएँ (1942-45): 1. 1943 – बंगाल का महा अकाल (सैकड़ों-हजारों लोग भूख से मरे) 2. 1943 – सुभाष चंद्र बोस द्वारा आजाद हिंद सरकार एवं आईएनए का गठन 3. 1944 – गांधीजी की रिहाई, कस्तूरबा गांधी की मृत्यु (22 फरवरी 1944) आगा खान पैलेस में 4. 1945 – द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: भारत छोड़ो आंदोलन की प्रमुख तिथियाँ

तिथि घटना
मार्च 1942 क्रिप्स मिशन की विफलता
8 अगस्त 1942 गोवालिया टैंक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव
9 अगस्त 1942 गांधीजी सहित नेताओं की गिरफ्तारी
1943 गांधीजी का 21 दिवसीय अनशन
1944 गांधीजी की रिहाई, कस्तूरबा की मृत्यु
1945 विश्व युद्ध की समाप्ति

तालिका 2: आंदोलन के प्रमुख केंद्र एवं नेता

स्थान घटना/नेता
बॉम्बे (गोवालिया टैंक) प्रस्ताव पारित; अरुणा आसफ अली
बलिया (उ.प्र.) चित्तू पांडे, समानांतर सरकार
मिदनापुर (बंगाल) थानों पर हमले, जातीय सरकार
सतारा (महाराष्ट्र) प्रति सरकार
आगा खान पैलेस (पूना) गांधीजी की नजरबंदी

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[भारत छोड़ो आंदोलन 1942] --> B[कारण]
    A --> C[8 अगस्त 1942 प्रस्ताव]
    A --> D[9 अगस्त गिरफ्तारी]
    A --> E[जन विद्रोह]
    A --> F[परिणाम]
    B --> B1[क्रिप्स मिशन विफल]
    B --> B2[युद्ध विरोध]
    B --> B3[महँगाई अकाल]
    C --> C1[करो या मरो नारा]
    C --> C2[गोवालिया टैंक]
    D --> D1[नेताओं की गिरफ्तारी]
    D --> D2[आगा खान पैलेस]
    E --> E1[रेल टेलीग्राफ तोड़फोड़]
    E --> E2[समानांतर सरकारें]
    F --> F1[कांग्रेस पर प्रतिबंध]
    F --> F2[1945 के बाद स्वतंत्रता की राह]
    A --> G[अरुणा आसफ अली जयप्रकाश]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

भारत छोड़ो आंदोलन – घटनाक्रम मार्च 1942 क्रिप्स मिशन विफल 8 अगस्त 1942 गोवालिया टैंक प्रस्ताव 9 अगस्त 1942 नेताओं की गिरफ्तारी 1943 गांधीजी का 21 दिन अनशन 1944 गांधीजी की रिहाई 1945-47 स्वतंत्रता की दिशा में कदम स्वर्ण नियम: 8 अगस्त को प्रस्ताव, 9 अगस्त को गिरफ्तारी; 'करो या मरो' गांधीजी का मंत्र।

आंदोलन के प्रमुख नेता एवं केंद्र गांधीजी करो या मरो आगा खान पैलेस 21 दिन अनशन अरुणा आसफ अली झंडा फहराया गोवालिया टैंक भूमिगत संचालन जयप्रकाश समाजवादी नेता भूमिगत आंदोलन जन आंदोलन बलिया चित्तू पांडे समानांतर सरकार मिदनापुर थानों पर हमले जातीय सरकार सतारा प्रति सरकार सबसे सक्रिय नेता भूमिगत रहे राम मनोहर लोहिया, उषा मेहता, युसुफ मेहर अली, आचार्य नरेंद्र देव स्वर्ण नियम: सतारा की प्रति सरकार सबसे अधिक सक्रिय रही; अरुणा आसफ अली ने झंडा फहराया।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलत तिथि: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में हुआ, कुछ छात्र इसे 1940 या 1945 से जोड़ देते हैं। 8 अगस्त 1942 प्रस्ताव, 9 अगस्त 1942 गिरफ्तारी।
  2. गोवालिया टैंक बनाम टाउन हॉल: भारत छोड़ो प्रस्ताव बॉम्बे के गोवालिया टैंक में पारित हुआ था; कलकत्ता टाउन हॉल स्वदेशी प्रस्ताव (1905) से जुड़ा है।
  3. अरुणा आसफ अली: उन्होंने 9 अगस्त 1942 को झंडा फहराया था, गांधीजी ने नहीं। गांधीजी उस समय बंदी थे।
  4. 'करो या मरो' किसका नारा: यह नारा गांधीजी का है, सुभाष चंद्र बोस का 'तुम मुझे खून दो' से भिन्न है।
  5. आगा खान पैलेस: गांधीजी को आगा खान पैलेस (पूना) में नजरबंद किया गया था, जहाँ कस्तूरबा गांधी का निधन (22 फरवरी 1944) हुआ।
  6. कांग्रेस पर प्रतिबंध: आंदोलन के दौरान कांग्रेस को अवैध घोषित किया गया; इसे 'स्वतंत्रता के बाद' नहीं जोड़ें।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तिथियों की श्रृंखला रटें – क्रिप्स (मार्च 1942), प्रस्ताव (8 अगस्त), गिरफ्तारी (9 अगस्त), अनशन (1943), रिहाई (1944)।
  2. 'करो या मरो' और 'तुम मुझे खून दो' जैसे नारों के वक्ताओं को अलग-अलग याद करें।
  3. आंदोलन से जुड़े केंद्रों (बलिया, मिदनापुर, सतारा, तमलुक) और नेताओं की तालिका बनाएं।
  4. अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं की भूमिका याद रखें।
  5. क्रिप्स मिशन की विफलता को भारत छोड़ो आंदोलन के मुख्य कारण के रूप में समझें।
  6. बाद की घटनाओं (कैबिनेट मिशन 1946, माउंटबेटन प्लान 1947) को आंदोलन के परिणाम से जोड़ें।

10. निष्कर्ष

भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे निर्णायक अध्याय था। 8 अगस्त 1942 को गोवालिया टैंक में पारित प्रस्ताव और 'करो या मरो' का मंत्र जनता के हृदय में उतर गया। नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भी जनता ने स्वतःस्फूर्त रूप से रेल, टेलीग्राफ और सरकारी ढाँचे पर हमला किया और बलिया, मिदनापुर, सतारा जैसे स्थानों पर समानांतर सरकारें बनाईं। अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन ने सिद्ध कर दिया कि ब्रिटिश साम्राज्य भारत में अब टिक नहीं सकता, और यही आंदोलन 1947 की स्वतंत्रता की नींव बना।