15.6 प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद Notes

15.6 प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय राजव्यवस्था) अध्याय: 15.6 प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद विषय-वस्तु: अनुच्छेद 74-78

1. परिचय

प्रधानमंत्री भारतीय संसदीय शासन प्रणाली का केंद्र बिंदु है। संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद होगी। प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका का प्रमुख है, जबकि राष्ट्रपति केवल संवैधानिक प्रमुख। प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और वह प्रायः लोकसभा में बहुमत दल का नेता होता है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

मंत्रिपरिषद के गठन का प्रावधान अनुच्छेद 75 में है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। मंत्रियों का कार्यकाल राष्ट्रपति की प्रसन्नता पर निर्भर है (अनुच्छेद 75(2))। मंत्री के पद की अवधि के दौरान कोई मंत्री छह माह के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है, अन्यथा उसका मंत्री पद समाप्त हो जाता है। मंत्री दोनों सदनों में भाग ले सकते हैं, परंतु मतदान केवल उसी सदन में करते हैं जिसके वे सदस्य हैं।

रेलवे NTPC परीक्षा में प्रधानमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद का आकार, सामूहिक उत्तरदायित्व, अनुच्छेद 74-78 के प्रावधान तथा 91वें संशोधन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में अनुच्छेदों की संख्या और उनके विषय का सटीक ज्ञान आवश्यक है। मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के अंतर को भी स्पष्ट रूप से समझना चाहिए, क्योंकि यह प्रश्नों में बार-बार आता है।

2. प्रधानमंत्री की नियुक्ति, शक्तियाँ और कर्तव्य

नियुक्ति: - प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 75)। - संविधान में प्रधानमंत्री पद हेतु निश्चित योग्यताओं का कोई विस्तृत उल्लेख नहीं है; वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है। - यदि प्रधानमंत्री नियुक्ति के समय संसद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह माह के भीतर संसद का सदस्य बनना अनिवार्य है। - सामान्यतः राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को ही प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।

प्रधानमंत्री की शक्तियाँ और कर्तव्य: 1. मंत्रिपरिषद की अध्यक्षता करता है और मंत्रियों के विभागों का वितरण करता है। 2. राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी के रूप में कार्य करता है (अनुच्छेद 78)। 3. मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देता है (अनुच्छेद 78)। 4. यदि वह लोकसभा का सदस्य है तो लोकसभा का नेता होता है। 5. मंत्रियों का त्यागपत्र प्राप्त कर सकता है तथा मंत्रियों को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से कर सकता है। 6. राष्ट्रपति को नीति-निर्णयों की जानकारी देने का दायित्व उसका है। 7. प्रधानमंत्री का त्यागपत्र मंत्रिपरिषद के विघटन का कारण बनता है। 8. संसद में वह सरकार की नीतियों का प्रतिनिधित्व करता है तथा संसद को भंग करने की सिफारिश कर सकता है।

त्वरित तथ्य: 1. अनुच्छेद 74 में मंत्रिपरिषद का प्रावधान है, जिसमें प्रधानमंत्री प्रमुख है। 2. अनुच्छेद 75 में मंत्रियों की नियुक्ति और सामूहिक उत्तरदायित्व है। 3. अनुच्छेद 78 में प्रधानमंत्री के कर्तव्य वर्णित हैं। 4. 42वें संशोधन द्वारा राष्ट्रपति पर मंत्रिपरिषद की सलाह मानना अनिवार्य किया गया। 5. 44वें संशोधन द्वारा राष्ट्रपति सलाह को एक बार पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है, परंतु पुनः दी गई सलाह बाध्यकारी होती है।

3. मंत्रिपरिषद की संरचना और उत्तरदायित्व

मंत्रिपरिषद में तीन स्तर के मंत्री होते हैं: कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री तथा उपमंत्री। इनमें कैबिनेट मंत्री उच्चतम स्तर के होते हैं, जो नीति-निर्धारण में भाग लेते हैं। मंत्रिपरिषद (काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स) एक विस्तृत निकाय है, जबकि मंत्रिमंडल (कैबिनेट) इसका एक छोटा अंग है।

सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)): - मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। - यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित करती है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है। - अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है।

व्यक्तिगत उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(2)): - मंत्री राष्ट्रपति की प्रसन्नता तक अपने पद पर बने रहते हैं। - राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर किसी मंत्री को पद से हटा सकता है। - किसी मंत्री की पदावधि के लिए संसद की सदस्यता आवश्यक है।

मंत्रिपरिषद का आकार (91वाँ संशोधन, 2003): - अनुच्छेद 75(1क) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के कुल सदस्यों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। - 91वें संशोधन द्वारा दल-बदल विरोधी कानून में भी कठोरता लाई गई। - पद से हटाए जाने पर किसी मंत्री को मंत्रिमंडल में पुनः सम्मिलित नहीं किया जा सकता।

मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर: 1. मंत्रिपरिषद में सभी मंत्री (कैबिनेट, राज्य, उपमंत्री) शामिल हैं, जबकि मंत्रिमंडल में केवल कैबिनेट मंत्री। 2. मंत्रिमंडल छोटा निकाय है जो नीति निर्धारण करता है; मंत्रिपरिषद इससे बड़ा है। 3. मंत्रिमंडल की बैठकें अधिक महत्वपूर्ण होती हैं तथा वह गोपनीयता से कार्य करता है। 4. मंत्रिपरिषद का अस्तित्व संवैधानिक है, जबकि मंत्रिमंडल का अस्तित्व प्रचलन (कन्वेंशन) पर आधारित है।

त्वरित तथ्य: 1. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। 2. मंत्री छह माह के भीतर संसद का सदस्य बनना चाहिए। 3. 91वें संशोधन से मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा की 15 प्रतिशत तक सीमित किया गया। 4. अनुच्छेद 88 के तहत मंत्रियों को दोनों सदनों में बोलने का अधिकार है। 5. अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

4. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संबंध

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संबंध ब्रिटिश प्रणाली (सम्राट-प्रधानमंत्री) के समान है। राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख है, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालक। अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से करता है।

उदाहरण: 1. जब किसी प्रधानमंत्री की मृत्यु होती है, तो मंत्रिपरिषद भंग हो जाती है और नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति होती है। 2. राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को 44वें संशोधन के तहत एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं। 3. आपातकाल की घोषणा से पहले मंत्रिपरिषद की लिखित सिफारिश आवश्यक है। 4. मंत्रिपरिषद लोकसभा में बहुमत खोने पर त्यागपत्र देती है। 5. प्रधानमंत्री मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करता है तथा राष्ट्रपति को निर्णयों से अवगत कराता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: अनुच्छेद 74-78

अनुच्छेद विषय
74 मंत्रिपरिषद: सहायता और सलाह
75 मंत्रियों की नियुक्ति, उत्तरदायित्व
77 संघ सरकार के कार्यों का संचालन
78 प्रधानमंत्री के कर्तव्य
88 मंत्रियों का सदनों में भाग लेना

तालिका 2: मंत्री पदों की श्रेणियाँ

श्रेणी विवरण
कैबिनेट मंत्री नीति-निर्धारण, मंत्रिमंडल के सदस्य
राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार या सहायक
उपमंत्री वरिष्ठ मंत्रियों के सहायक

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद] --> B[अनुच्छेद 74]
    A --> C[अनुच्छेद 75]
    A --> D[अनुच्छेद 78]
    B --> B1[सहायता और सलाह]
    C --> C1[नियुक्ति]
    C --> C2[सामूहिक उत्तरदायित्व]
    C --> C3[व्यक्तिगत उत्तरदायित्व]
    D --> D1[राष्ट्रपति को सूचना]
    A --> E[91वाँ संशोधन 15 प्रतिशत]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मंत्रिपरिषद की संरचना प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल (कैबिनेट मंत्री) नीति-निर्धारण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार उपमंत्री सहायक 91वाँ संशोधन: कुल मंत्री लोकसभा के 15 प्रतिशत तक स्वर्ण नियम: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।

प्रधानमंत्री के प्रमुख कर्तव्य अनुच्छेद 78 मंत्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को राष्ट्रपति को परामर्श प्रस्तुत करना मंत्री की परामर्श पर राष्ट्रपति का निर्णय 42वाँ संशोधन: सलाह बाध्यकारी | 44वाँ संशोधन: एक बार पुनर्विचार स्वर्ण नियम: प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. मंत्रिपरिषद (काउंसिल) और मंत्रिमंडल (कैबिनेट) को एक ही मान लिया जाता है, जबकि मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का छोटा और नीति-निर्धारण करने वाला अंग है।
  2. मंत्रियों का कार्यकाल 'राष्ट्रपति की प्रसन्नता' पर निर्भर है (अनुच्छेद 75(2)), इसे लोकसभा के बहुमत से न जोड़ें।
  3. अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं।
  4. 91वें संशोधन को दल-बदल विरोधी कानून (52वाँ) से भ्रमित न करें; 91वाँ मंत्रिपरिषद के आकार से संबंधित है।
  5. मंत्रिपरिषद की सलाह 42वें संशोधन से बाध्यकारी हुई, 44वें से पुनर्विचार का अधिकार मिला; दोनों संशोधनों के प्रभाव को अलग-अलग समझें।
  6. प्रधानमंत्री पद हेतु न्यूनतम आयु का कोई विशेष प्रावधान संविधान में नहीं है; इसे सांसद की योग्यता (25/30 वर्ष) से जोड़ें।
  7. छह माह के भीतर संसद सदस्य न बनने पर मंत्री पद समाप्त होता है, इसे 'पद से त्यागपत्र' से न मिलाएं।
  8. मंत्रियों को दोनों सदनों में बोलने का अधिकार (अनुच्छेद 88) है, परंतु मतदान केवल अपने सदन में करते हैं।
  9. राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह लौटाने का अधिकार 44वें संशोधन से मिला, मूल संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
  10. प्रधानमंत्री की मृत्यु पर मंत्रिपरिषद भंग होती है, इसे 'मंत्रिमंडल भंग' से भ्रमित न करें।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. अनुच्छेद 74, 75, 77, 78, 88 के विषय रटें; इन पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
  2. मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल के अंतर की तालिका बनाएं।
  3. 42वें और 44वें संशोधन के प्रभाव को क्रमबद्ध याद करें।
  4. 91वें संशोधन का 15 प्रतिशत नियम रटें।
  5. अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया (केवल लोकसभा) पर ध्यान दें।
  6. छह माह के भीतर सांसद बनने के नियम को याद रखें।
  7. अनुच्छेद 352(3) के लिखित सिफारिश प्रावधान को आपातकाल से जोड़ें।
  8. प्रधानमंत्री के कर्तव्य (अनुच्छेद 78) की तीन श्रेणियाँ सूचीबद्ध करें।
  9. सामूहिक एवं व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के अनुच्छेद (75(2) और 75(3)) अलग-अलग रटें।
  10. मंत्रियों के बोलने-मतदान के अधिकार में अंतर स्पष्ट रखें।

10. निष्कर्ष

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद भारतीय संसदीय प्रणाली की धुरी है, जो अनुच्छेद 74 के अंतर्गत राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है तथा सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। अनुच्छेद 75, 77 और 78 के प्रावधानों, मंत्री पदों की श्रेणियों तथा 42वें, 44वें और 91वें संशोधनों के प्रभाव की सटीक समझ रेलवे NTPC परीक्षा में अच्छे अंक दिलाती है, अतः इस अध्याय का नियमित अध्ययन आवश्यक है।