विषय: रेलवे NTPC – गणित (त्रिकोणमिति और सांख्यिकी) अध्याय: 5.4 माध्य विषय-वस्तु: समांतर माध्य, भारित माध्य
सांख्यिकी (Statistics) गणित की वह शाखा है जो आँकड़ों के संग्रहण, व्यवस्थापन, विश्लेषण और व्याख्या से संबंधित है। आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मानों को 'केंद्रीय प्रवृत्ति की माप' कहा जाता है, जिनमें माध्य (Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode) प्रमुख हैं। इनमें से माध्य सबसे अधिक उपयोगी और सरल है, क्योंकि यह सभी आँकड़ों को ध्यान में रखता है। रेलवे NTPC की परीक्षा में सांख्यिकी से प्रतिवर्ष 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें माध्य पर आधारित प्रश्नों की संख्या सबसे अधिक होती है।
माध्य (Mean) को सामान्यतः 'औसत' (Average) के नाम से जाना जाता है। दैनिक जीवन में हम अक्सर कहते हैं कि 'कक्षा का औसत अंक 65 है' या 'टीम का औसत रन 180 है' – यही औसत गणितीय रूप से समांतर माध्य (Arithmetic Mean) कहलाता है। समांतर माध्य ज्ञात करने के लिए सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की संख्या से भाग दिया जाता है। यह सरल सूत्र परीक्षा में अधिकांश प्रश्नों को हल करने की कुंजी है।
इस अध्याय में हम समांतर माध्य की परिभाषा, अवर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, बारंबारता तालिका (वर्गीकृत आँकड़ों) का माध्य, भारित माध्य (Weighted Mean) और संयुक्त माध्य (Combined Mean) को विस्तार से समझेंगे। इन सभी सूत्रों का अभ्यास परीक्षा में आने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को शीघ्रता से हल करने में सहायक सिद्ध होगा। NTPC में प्रश्न सामान्यतः सीधे सूत्र पर आधारित होते हैं, इसलिए सूत्रों की सटीक समझ और तीव्र गणना क्षमता आवश्यक है।
यदि किसी आँकड़ों में n प्रेक्षण हैं, तो समांतर माध्य (x̄) निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है:
जब आँकड़े किसी क्रम या वर्गों में न हों, तो सभी मानों को जोड़कर संख्या से भाग दिया जाता है।
उदाहरण 1: पाँच विद्यार्थियों के अंक 45, 50, 55, 60, 65 हैं। औसत अंक ज्ञात कीजिए।
हल: - चरण 1: योग = 45 + 50 + 55 + 60 + 65 = 275 - चरण 2: संख्या = 5 - चरण 3: माध्य = 275 / 5 = 55 - उत्तर: 55
उदाहरण 2: 10 संख्याओं का माध्य 20 है। सभी संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
हल: - चरण 1: माध्य = योग / संख्या - चरण 2: 20 = योग / 10 - चरण 3: योग = 20 × 10 = 200 - उत्तर: 200
जब आँकड़ों में कुछ मान बार-बार आते हैं, तो उन्हें बारंबारता (Frequency) तालिका के रूप में रखा जाता है। इस स्थिति में माध्य का सूत्र होता है:
जहाँ xᵢ प्रत्येक प्रेक्षण और fᵢ उसकी बारंबारता है। Σfᵢ कुल बारंबारता (प्रेक्षणों की कुल संख्या) को दर्शाता है।
उदाहरण 3: निम्न बारंबारता तालिका का माध्य ज्ञात कीजिए – मान 10 (बारंबारता 2), मान 20 (बारंबारता 3), मान 30 (बारंबारता 5)।
हल: - चरण 1: Σ(fᵢ × xᵢ) = 10×2 + 20×3 + 30×5 = 20 + 60 + 150 = 230 - चरण 2: Σfᵢ = 2 + 3 + 5 = 10 - चरण 3: माध्य = 230 / 10 = 23 - उत्तर: 23
उदाहरण 4: एक कक्षा में 30 विद्यार्थियों के औसत अंक 60 हैं। यदि 5 विद्यार्थियों को 10 अतिरिक्त अंक जोड़ दिए जाएँ, तो नया औसत क्या होगा?
हल: - चरण 1: कुल अंक = 30 × 60 = 1800 - चरण 2: अतिरिक्त अंक = 5 × 10 = 50 - चरण 3: नया कुल = 1800 + 50 = 1850 - चरण 4: नया औसत = 1850 / 30 = 61.67 - उत्तर: 61.67
जब विभिन्न प्रेक्षणों का महत्व (भार/weight) अलग-अलग होता है, तो भारित माध्य का उपयोग होता है। सूत्र है:
जहाँ wᵢ प्रत्येक मान का भार है। उदाहरण के लिए, किसी परीक्षा में थ्योरी का 60% और प्रैक्टिकल का 40% भार होने पर भारित औसत इसी सूत्र से निकाला जाता है।
जब दो समूहों के माध्य दिए हों, तो दोनों को मिलाकर संयुक्त माध्य इस प्रकार ज्ञात किया जाता है:
उदाहरण 5: एक विद्यार्थी के पाँच विषयों के अंक (भार सहित) हैं – हिंदी 80 (भार 2), अंग्रेजी 70 (भार 1), गणित 90 (भार 3), विज्ञान 85 (भार 2), सामाजिक विज्ञान 75 (भार 2)। भारित माध्य ज्ञात कीजिए।
हल: - चरण 1: Σ(wᵢ × xᵢ) = 80×2 + 70×1 + 90×3 + 85×2 + 75×2 = 160 + 70 + 270 + 170 + 150 = 820 - चरण 2: Σwᵢ = 2 + 1 + 3 + 2 + 2 = 10 - चरण 3: भारित माध्य = 820 / 10 = 82 - उत्तर: 82
उदाहरण 6: कक्षा A के 40 विद्यार्थियों का औसत अंक 70 है और कक्षा B के 60 विद्यार्थियों का औसत अंक 80 है। दोनों कक्षाओं का संयुक्त औसत ज्ञात कीजिए।
हल: - चरण 1: कुल अंक A = 40 × 70 = 2800 - चरण 2: कुल अंक B = 60 × 80 = 4800 - चरण 3: कुल अंक = 2800 + 4800 = 7600 - चरण 4: कुल विद्यार्थी = 40 + 60 = 100 - चरण 5: संयुक्त माध्य = 7600 / 100 = 76 - उत्तर: 76
उदाहरण 7: 20 संख्याओं का औसत 30 है। यदि प्रत्येक संख्या में 5 जोड़ दिया जाए, तो नया औसत क्या होगा?
हल: - चरण 1: प्रत्येक संख्या में समान मान जोड़ने पर औसत में भी उतना ही जुड़ता है - चरण 2: नया औसत = 30 + 5 = 35 - उत्तर: 35
| माध्य का प्रकार | सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|
| समांतर माध्य (अवर्गीकृत) | x̄ = Σxᵢ / n | साधारण आँकड़ों के लिए |
| समांतर माध्य (बारंबारता) | x̄ = Σ(fᵢxᵢ) / Σfᵢ | दोहराव वाले आँकड़ों के लिए |
| भारित माध्य | x̄ = Σ(wᵢxᵢ) / Σwᵢ | भार भिन्न होने पर |
| संयुक्त माध्य | x̄ = (n₁x̄₁ + n₂x̄₂) / (n₁ + n₂) | दो समूहों के मिलाने पर |
| क्रिया | माध्य पर प्रभाव |
|---|---|
| प्रत्येक मान में k जोड़ना | नया माध्य = माध्य + k |
| प्रत्येक मान में से k घटाना | नया माध्य = माध्य − k |
| प्रत्येक मान को k से गुणा करना | नया माध्य = माध्य × k |
| प्रत्येक मान को k से भाग देना | नया माध्य = माध्य ÷ k |
| एक मान गलत पढ़ा जाना | सुधार: नया योग = पुराना योग − गलत + सही |
flowchart TD
A[5.4 माध्य] --> B[समांतर माध्य]
B --> C[सूत्र योग/संख्या]
B --> D[अवर्गीकृत आँकड़े]
A --> E[बारंबारता माध्य]
E --> F[सूत्र Σfx/Σf]
A --> G[भारित माध्य]
G --> H[सूत्र Σwx/Σw]
A --> I[संयुक्त माध्य]
I --> J[सूत्र n1x1+n2x2/n1+n2]
A --> K[माध्य के गुण]
K --> L[जोड़-घटाव-गुणा-भाग]
A --> M[व्यावहारिक प्रश्न]
M --> N[औसत, कुल योग, सुधार]
M --> O[गलत मान सुधार]
माध्य सांख्यिकी का सबसे महत्वपूर्ण और सरल केंद्रीय मान है, जो सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करता है। समांतर माध्य, बारंबारता माध्य, भारित माध्य और संयुक्त माध्य के सूत्रों को स्पष्ट रूप से कंठस्थ रखकर तथा 'योग, संख्या, माध्य' त्रिकोण को समझकर इस अध्याय के अधिकांश प्रश्नों को शीघ्रता से हल किया जा सकता है। माध्य के गुणों और गलत मान सुधार की विधियों का अभ्यास करके आप NTPC परीक्षा में सांख्यिकी के प्रश्नों में निश्चित अंक प्राप्त कर सकते हैं।