18.4 श्वसन तंत्र Notes

18.4 श्वसन तंत्र

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.4 श्वसन तंत्र विषय-वस्तु: श्वसन अंग

1. परिचय

श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें जीव वायुमंडल से ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल का निष्कासन करता है। श्वसन दो प्रकार का होता है—बाह्य श्वसन (कोशिकाओं में ऑक्सीजन का प्रवेश तथा CO2 का निष्कासन) और आंतरिक/कोशिकीय श्वसन (ऊतकों में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण)। श्वसन के दौरान ऊर्जा मुक्त होती है, इसलिए इसे 'जीवन की ज्वाला' भी कहा जाता है। श्वसन के बिना जीवन संभव नहीं है।

मानव श्वसन तंत्र में प्रमुख अंग हैं—नासिका (नाक), ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली, ब्रांकाई तथा फेफड़े। वायु नाक से होकर फेफड़ों तक पहुँचती है, जहाँ ऑक्सीजन का रक्त में प्रवेश और कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन होता है। RRB NTPC परीक्षा में श्वसन तंत्र से श्वसन अंगों के नाम, गैस विनिमय, फेफड़ों की संरचना तथा श्वसन संबंधी विकारों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

मानव श्वसन की सामान्य दर लगभग 12 से 16 बार प्रति मिनट होती है। श्वसन का नियंत्रण मस्तिष्क के श्वसन केंद्र (मेड्युला ऑब्लोंगेटा) द्वारा होता है। इस अध्याय में श्वसन तंत्र की संरचना, श्वसन की क्रियाविधि, गैस विनिमय तथा श्वसन संबंधी विकारों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

2. श्वसन तंत्र की संरचना और प्रमुख अंग

श्वसन तंत्र को दो भागों में बाँटा जा सकता है—ऊपरी श्वसन मार्ग (नासिका, ग्रसनी, स्वरयंत्र) तथा निचला श्वसन मार्ग (श्वासनली, ब्रांकाई, फेफड़े)।

वायु का मार्ग: नासिका → ग्रसनी → स्वरयंत्र → श्वासनली → ब्रांकाई → ब्रांकियोल → ऐल्वियोली। इस क्रम को याद रखना परीक्षा में अत्यंत सहायक है।

3. श्वसन की क्रियाविधि और गैस विनिमय

श्वसन की क्रिया दो चरणों में होती है—अंतःश्वसन (Inhalation) तथा निःश्वसन (Exhalation)।

गैस विनिमय (Gas Exchange): ऐल्वियोली में वायु और रक्त के बीच गैसों का आदान-प्रदान होता है। ऑक्सीजन ऐल्वियोली से रक्त में तथा कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से ऐल्वियोली में विसरण द्वारा जाती है। रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन द्वारा होता है, जिससे ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनता है।

श्वसन के प्रकार: - वायवीय श्वसन (Aerobic): ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण; उत्पाद CO2, जल तथा 36-38 ATP ऊर्जा। - अवायवीय श्वसन (Anaerobic): ऑक्सीजन के अभाव में होने वाला श्वसन; उत्पाद एथिल अल्कोहल व CO2 (खमीर) या लैक्टिक अम्ल (मांसपेशियाँ)। पेशियों में थकान लैक्टिक अम्ल के जमा होने से होती है।

श्वसन क्रिया के महत्वपूर्ण आयतन: - ज्वारीय आयतन (Tidal Volume): सामान्य श्वास में अंदर-बाहर होने वाली वायु, लगभग 500 मिली। - महत्वपूर्ण क्षमता (Vital Capacity): अधिकतम अंतःश्वसन के बाद अधिकतम निःश्वसन, लगभग 4.5 से 5.5 लीटर। - मृत स्थान (Dead Space): नाक, ग्रासनली जैसे मार्गों में रुकी वायु, लगभग 150 मिली, जो गैस विनिमय में भाग नहीं लेती।

श्वसन का रासायनिक समीकरण: ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा (ATP)। यह समीकरण NTPC में बार-बार पूछा जाता है।

4. श्वसन संबंधी विकार और स्वच्छ वायु का महत्व

श्वसन तंत्र के विभिन्न विकार निम्न हैं:

श्वसन की स्वच्छता: शुद्ध वायु में श्वसन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। धूम्रपान फेफड़ों के लिए सर्वाधिक हानिकारक है। प्रदूषित वायु अस्थमा तथा श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ाती है। BCG टीका तपेदिक से बचाता है। वायु प्रदूषण की समस्या के कारण स्वच्छ वायु आजकल सर्वाधिक चर्चित विषय है।

सामान्य श्वसन दर: वयस्क मानव में 12 से 16 प्रति मिनट; शिशुओं में अधिक। शारीरिक श्रम के समय श्वसन दर बढ़ जाती है। उच्च ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण श्वसन दर बढ़ती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

श्वसन अंग प्रमुख कार्य विशेषता
नासिका वायु को शुद्ध-नम करना बाल व श्लेष्मा
स्वरयंत्र ध्वनि उत्पादन वाक् तंत्र
श्वासनली वायु का मार्ग C-आकार के वलय
ब्रांकाई वायु का विभाजन दो शाखाएँ
फेफड़े गैस विनिमय ऐल्वियोली
डायाफ्राम श्वास की गति गुंबदाकार पेशी

तालिका 2

श्वसन विकार कारण/कारक प्रमुख लक्षण
अस्थमा एलर्जी, प्रदूषण घरघराहट, श्वास कष्ट
निमोनिया जीवाणु/विषाणु ऐल्वियोली में द्रव
तपेदिक जीवाणु (T.B.) लंबी खाँसी, बुखार
ब्रोंकाइटिस धूम्रपान कफ, खाँसी
एम्फिसीमा ऐल्वियोली क्षति साँस की तकलीफ

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[श्वसन तंत्र] --> B[प्रमुख अंग]
    B --> B1[नासिका]
    B --> B2[ग्रसनी]
    B --> B3[स्वरयंत्र]
    B --> B4[श्वासनली]
    B --> B5[ब्रांकाई]
    B --> B6[फेफड़े]
    A --> C[गैस विनिमय]
    C --> C1[ऐल्वियोली]
    C --> C2[ऑक्सीजन रक्त में]
    C --> C3[CO2 निष्कासन]
    A --> D[श्वसन प्रक्रिया]
    D --> D1[अंतःश्वसन]
    D --> D2[निःश्वसन]
    D --> D3[डायाफ्राम]
    A --> E[श्वसन के प्रकार]
    E --> E1[वायवीय 36-38 ATP]
    E --> E2[अवायवीय लैक्टिक अम्ल]
    A --> F[विकार]
    F --> F1[अस्थमा]
    F --> F2[निमोनिया]
    F --> F3[तपेदिक]
    F --> F4[ब्रोंकाइटिस]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मानव श्वसन तंत्र नासिका ग्रसनी स्वरयंत्र श्वासनली दायाँ फेफड़ा तीन खंड बायाँ फेफड़ा दो खंड ब्रांकाई स्वर्ण नियम वायु मार्ग क्रम नासिका से ऐल्वियोली तक याद रखें।

गैस विनिमय एवं श्वसन के प्रकार वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण उत्पाद CO2 + जल + 36-38 ATP उदाहरण मनुष्य, पादप अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन के अभाव में उत्पाद एथिल अल्कोहल + CO2 पेशियों में लैक्टिक अम्ल उदाहरण खमीर, पेशियाँ गैस विनिमय ऐल्वियोली में O2 रक्त में CO2 रक्त से ऐल्वियोली में स्वर्ण नियम ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन द्वारा होता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: श्वसन को केवल साँस लेना-छोड़ना मानना। श्वसन में गैस विनिमय तथा कोशिकीय ऑक्सीकरण दोनों शामिल हैं।
  2. गलती: बायाँ फेफड़ा तीन खंडों का बताना। दायाँ फेफड़ा तीन तथा बायाँ फेफड़ा दो खंडों का होता है।
  3. गलती: वायवीय श्वसन में 2 ATP ऊर्जा बताना। वायवीय में 36-38 ATP जबकि अवायवीय में 2 ATP बनती है।
  4. गलती: गैस विनिमय का स्थल ब्रांकाई बताना। गैस विनिमय ऐल्वियोली में होता है।
  5. गलती: श्वासनली में O-आकार के वलय बताना। इसमें C-आकार के उपास्थि वलय होते हैं।
  6. गलती: तपेदिक का टीका अस्थमा के लिए बताना। BCG टीका तपेदिक के लिए है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. वायु मार्ग का क्रम (नासिका→ग्रसनी→स्वरयंत्र→श्वासनली→ब्रांकाई→ब्रांकियोल→ऐल्वियोली) रटें; यह सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
  2. श्वसन के दोनों प्रकारों की ATP गणना (36-38 तथा 2) याद रखें।
  3. फेफड़ों की ऐल्वियोली, उनकी संख्या तथा गैस विनिमय को मिलाकर पढ़ें।
  4. श्वसन विकारों (अस्थमा, निमोनिया, तपेदिक, ब्रोंकाइटिस) के कारण एवं टीके स्मरण रखें।
  5. डायाफ्राम की भूमिका तथा श्वसन केंद्र (मेड्युला ऑब्लोंगेटा) को विशेष रूप से याद रखें।

10. निष्कर्ष

श्वसन तंत्र शरीर को ऑक्सीजन प्रदान कर ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करता है, इसलिए यह जीवन की आधारभूत आवश्यकता है। श्वसन अंगों का क्रम, ऐल्वियोली में गैस विनिमय, वायवीय-अवायवीय श्वसन के अंतर तथा श्वसन संबंधी विकार—ये NTPC परीक्षा के लिए आवश्यक बिंदु हैं। तालिकाओं एवं आरेखों के माध्यम से व्यवस्थित अध्ययन करने पर इस अध्याय के प्रश्न सरलता से हल हो जाते हैं। नियमित पुनरावृत्ति से श्वसन तंत्र के सभी तथ्य स्थायी रूप से स्मरण रहते हैं।