18.9 आनुवंशिकी और जनन Notes

18.9 आनुवंशिकी और जनन

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.9 आनुवंशिकी और जनन विषय-वस्तु: जनन, जीन

1. परिचय

आनुवंशिकी (Genetics) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवों की विशेषताओं के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण (वंशानुक्रम) का अध्ययन किया जाता है। आनुवंशिकी का जनक ग्रेगर मेंडल (Gregor Mendel) है, जिन्होंने मटर के पौधों पर प्रयोग करके वंशानुक्रम के नियम प्रतिपादित किए। आनुवंशिक पदार्थ DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) है, जो गुणसूत्रों में स्थित रहता है। DNA का छोटा कार्यात्मक खंड 'जीन' कहलाता है। जीन विशेषताओं के वाहक होते हैं।

जनन (Reproduction) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपनी नई पीढ़ी उत्पन्न करते हैं। जनन दो प्रकार का होता है—अलैंगिक जनन (जिसमें एक जनक भाग लेता है) तथा लैंगिक जनन (जिसमें दो जनक—नर व मादा—भाग लेते हैं)। जनन से प्रजाति का अस्तित्व तथा आनुवंशिक विभिन्नता बनी रहती है। RRB NTPC परीक्षा में आनुवंशिकी और जनन से मेंडल के नियम, DNA, जीन, गुणसूत्र, जनन के प्रकार तथा मानव जनन तंत्र पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

मानव में कुल 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम तथा 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (XX-स्त्री, XY-पुरुष) होता है। यह अध्याय आनुवंशिकी के मूल सिद्धांतों, जनन के प्रकार, कोशिका विभाजन तथा DNA की संरचना का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

2. आनुवंशिकी के मूल सिद्धांत और मेंडल के नियम

ग्रेगर मेंडल ने मटर (Pisum sativum) के पौधों पर प्रयोग करके वंशानुक्रम के तीन मुख्य नियम प्रतिपादित किए:

जीन तथा एलील: जीन की विभिन्न अवस्थाओं को एलील कहते हैं। समयुग्मजी (Homozygous—TT या tt) तथा विषमयुग्मजी (Heterozygous—Tt) अवस्थाएँ होती हैं। संतान में माता-पिता दोनों से गुणसूत्र प्राप्त होते हैं। बच्चे का लिंग पिता के शुक्राणु के X या Y गुणसूत्र पर निर्भर करता है।

DNA की संरचना: DNA का मॉडल वाटसन और क्रिक (1953) ने दिया, जिसे 'दोहरी कुंडलिनी' (Double Helix) कहते हैं। DNA चार क्षारकों से बना होता है—एडेनिन (A), थायमिन (T), ग्वानिन (G) तथा साइटोसिन (C)। A हमेशा T के साथ तथा G हमेशा C के साथ जुड़ता है। DNA में वंशानुगत सूचनाएँ संग्रहीत होती हैं। RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल) में थायमिन के स्थान पर यूरेसिल (U) होता है।

3. जनन के प्रकार

जनन दो प्रकार का होता है—अलैंगिक तथा लैंगिक।

अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें केवल एक जनक भाग लेता है; युग्मकों का निर्माण नहीं होता; संतानें जनक के समान होती हैं। प्रकार:

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): इसमें दो जनक भाग लेते हैं; नर युग्मक (शुक्राणु) तथा मादा युग्मक (अंडाणु) के निषेचन से युग्मनज (Zygote) बनता है। यह आनुवंशिक विभिन्नता लाता है। पादपों में परागण तथा निषेचन होता है; फूलों में पुंकेसर (नर) तथा स्त्रीकेसर (मादा) होते हैं।

मानव जनन तंत्र: पुरुष में शुक्राणु का निर्माण वृषण में तथा महिला में अंडाणु का निर्माण अंडाशय में होता है। निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है, जिससे युग्मनज बनता है। गर्भाशय (यूटेरस) में भ्रूण का विकास होता है। पुरुष में लिंग गुणसूत्र XY तथा महिला में XX होते हैं।

4. कोशिका विभाजन, गुणसूत्र और आनुवंशिक विकार

आनुवंशिकी का संबंध कोशिका विभाजन से गहरा है:

आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders): - डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome): 21वें गुणसूत्र की त्रिक (Trisomy 21) से; मानसिक विकास में कमी। - हीमोफीलिया (Haemophilia): रक्त का थक्का न जमना; X गुणसूत्र से जुड़ा विकार। - वर्णांधता (Colour Blindness): लाल-हरा रंग न पहचानना; X गुणसूत्र से जुड़ा। - सिकल सेल एनीमिया: लाल रक्त कणिकाओं का दरांती आकार; वंशानुगत। - थैलेसीमिया: हीमोग्लोबिन की कमी वाला वंशानुगत रक्त विकार।

जनन संबंधी विकार तथा स्वास्थ्य: संतुलित पोषण, स्वच्छता तथा जागरूकता से कई जनन विकारों से बचा जा सकता है। जेनेटिक काउंसलिंग तथा प्रसवपूर्व जाँच वंशानुगत रोगों की रोकथाम में सहायक हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

मेंडल का नियम F1/F2 परिणाम अनुपात
प्रभाविता केवल प्रभावी लक्षण F1 एकरूप
पृथक्करण लक्षण अलग-अलग 3:1
स्वतंत्र वर्गीकरण लक्षण स्वतंत्र 9:3:3:1

तालिका 2

जनन का प्रकार उदाहरण विशेषता
विखंडन अमीबा, जीवाणु दो भाग
मुकुलन हाइड्रा, यीस्ट कली बनना
खंडन स्पाइरोगाइरा टुकड़ों से
बीजाणु कवक बीजाणु से
वनस्पतिक आलू, गन्ना जड़-तना-पत्ती
लैंगिक मानव, पादप दो जनक

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[आनुवंशिकी और जनन] --> B[आनुवंशिकी]
    B --> B1[मेंडल के नियम]
    B --> B2[DNA दोहरी कुंडलिनी]
    B --> B3[जीन और एलील]
    B --> B4[गुणसूत्र 46]
    A --> C[जनन]
    C --> C1[अलैंगिक]
    C --> C2[लैंगिक]
    A --> D[अलैंगिक प्रकार]
    D --> D1[विखंडन]
    D --> D2[मुकुलन]
    D --> D3[खंडन]
    D --> D4[बीजाणु]
    A --> E[कोशिका विभाजन]
    E --> E1[समसूत्री 46]
    E --> E2[अर्धसूत्री 23]
    A --> F[विकार]
    F --> F1[डाउन सिंड्रोम]
    F --> F2[हीमोफीलिया]
    F --> F3[वर्णांधता]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मेंडल का प्रभाविता का नियम लंबा (TT) शुद्ध लंबा बौना (tt) शुद्ध बौना x F1 सभी लंबे (Tt) प्रभावी लक्षण प्रकट F2 में पृथक्करण लंबा बौना = 3:1 मेंडल के तीन नियम प्रभाविता, पृथक्करण, स्वतंत्र वर्गीकरण स्वर्ण नियम: F2 में प्रभावी-अप्रभावी का अनुपात 3:1 होता है।

DNA की संरचना और जनन DNA दोहरी कुंडलिनी वाटसन और क्रिक क्षारक A-T, G-C RNA में थायमिन के स्थान पर यूरेसिल (U) जनन के प्रकार अलैंगिक - एक जनक विखंडन, मुकुलन, खंडन लैंगिक - दो जनक निषेचन, युग्मनज मानव गुणसूत्र 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) पुरुष XY, महिला XX महत्वपूर्ण डाउन सिंड्रोम - 21वें गुणसूत्र की त्रिक स्वर्ण नियम: बच्चे का लिंग पिता के शुक्राणु से निर्धारित होता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: आनुवंशिकी का जनक चार्ल्स डार्विन बताना। आनुवंशिकी का जनक ग्रेगर मेंडल है।
  2. गलती: DNA में थायमिन के स्थान पर यूरेसिल होना बताना। RNA में यूरेसिल होता है, DNA में थायमिन।
  3. गलती: मानव में गुणसूत्रों की संख्या 48 बताना। मानव में 46 गुणसूत्र होते हैं; 48 चिम्पैंजी में।
  4. गलती: F2 में अनुपात 1:1 बताना। F2 में 3:1 तथा द्वि-संकर में 9:3:3:1 होता है।
  5. गलती: हीमोफीलिया को ऑटोसोम से जुड़ा रोग बताना। हीमोफीलिया X गुणसूत्र से जुड़ा विकार है।
  6. गलती: निषेचन का स्थल गर्भाशय बताना। निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. मेंडल के तीन नियमों तथा उनके अनुपातों (3:1, 9:3:3:1) को स्मरण रखें।
  2. DNA-क्षारक युग्म (A-T, G-C) तथा RNA-यूरेसिल का अंतर स्पष्ट रखें।
  3. अलैंगिक जनन के प्रकारों को उनके उदाहरणों (अमीबा-विखंडन, हाइड्रा-मुकुलन) के साथ याद करें।
  4. मानव गुणसूत्र (46), युग्मक (23) तथा लिंग निर्धारण (XY/XX) के तथ्य रटें।
  5. आनुवंशिक विकारों (डाउन सिंड्रोम, हीमोफीलिया, वर्णांधता) को उनके कारणों के साथ जोड़ें।

10. निष्कर्ष

आनुवंशिकी और जनन जीव विज्ञान के वे अध्याय हैं जो जीवन की निरंतरता तथा विशेषताओं के संचरण की व्याख्या करते हैं। मेंडल के नियम, DNA की संरचना, गुणसूत्र, जनन के प्रकार तथा आनुवंशिक विकार NTPC परीक्षा के महत्वपूर्ण विषय हैं। तालिकाओं, अनुपातों तथा उदाहरणों के समुचित अभ्यास से इस अध्याय के प्रश्न आसानी से हल होते हैं। नियमित पुनरावृत्ति से आनुवंशिकी और जनन के सभी तथ्य स्थायी रूप से स्मरण रहते हैं।