विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (रसायन विज्ञान) अध्याय: 17.2 परमाणु और अणु विषय-वस्तु: परमाणु, अणु
संपूर्ण ब्रह्मांड में जो कुछ भी है—चाहे वह पत्थर हो, जल हो, वायु हो या जीवित प्राणी—सब कुछ अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है। इन कणों को ही परमाणु (Atom) कहा जाता है। यूनानी दार्शनिक डेमोक्रिटस और भारतीय महर्षि कणाद ने सबसे पहले यह विचार व्यक्त किया था कि पदार्थ को बार-बार काटने पर अंततः एक ऐसा कण मिलेगा जिसे और नहीं काटा जा सकता, और उसी कण को परमाणु कहा गया। वास्तव में 'परमाणु' शब्द 'परम' और 'अणु' से बना है। हालाँकि आधुनिक विज्ञान में यह सिद्ध हो चुका है कि परमाणु को भी इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नामक तीन और छोटे कणों में विभाजित किया जा सकता है, फिर भी यह रसायन विज्ञान की सबसे छोटी मूल इकाई बना हुआ है।
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1808 ई.) रसायन विज्ञान की आधारशिला है। इसके प्रमुख प्रतिपादन हैं—प्रत्येक तत्व परमाणुओं से बना होता है; एक ही तत्व के सभी परमाणु समान होते हैं, परंतु विभिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न होते हैं; रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं, केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं; तथा यौगिक विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में संयोजन से बनते हैं। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि परमाणु को विभाजित करना संभव है, परंतु रासायनिक अभिक्रिया में यह अविभाज्य रहता है। इसीलिए डाल्टन का सिद्धांत आज भी रसायन विज्ञान का मूल आधार है।
परमाणु और अणु का अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है। परमाणु किसी तत्व की सबसे छोटी इकाई है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेती है, जबकि अणु (Molecule) एक तत्व के एक या अधिक परमाणुओं या विभिन्न तत्वों के दो या अधिक परमाणुओं का वह समूह है जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है। उदाहरण के लिए ऑक्सीजन का परमाणु O है जबकि वायु में पाया जाने वाला ऑक्सीजन का अणु O₂ है। RRB NTPC परीक्षा में परमाणु संरचना, इलेक्ट्रॉन वितरण, समस्थानिक-समभारिक तथा अणु-आयन से संबंधित प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं, इसलिए इस अध्याय की संकल्पनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
परमाणु तीन मुख्य उप-परमाणु कणों से बना होता है—इलेक्ट्रॉन (e⁻), प्रोटॉन (p⁺) और न्यूट्रॉन (n⁰)। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के केंद्र में स्थित नाभिक (Nucleus) में रहते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर तीव्र गति से चक्कर लगाते हैं।
परमाणु से संबंधित दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण राशियाँ हैं—परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z) और द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A)। परमाणु क्रमांक नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है; एक उदासीन परमाणु में यह इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होता है। द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या होती है। अतः न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या (A) - परमाणु क्रमांक (Z)।
कार्य उदाहरण: सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 और द्रव्यमान संख्या 23 है। इसके प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल—प्रोटॉन = परमाणु क्रमांक = 11; इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉन = 11 (उदासीन परमाणु); न्यूट्रॉन = 23 - 11 = 12। अतः Na में 11 प्रोटॉन, 11 इलेक्ट्रॉन और 12 न्यूट्रॉन होते हैं।
परमाणु के मॉडल का विकास क्रम में इस प्रकार है। थॉमसन का प्लम-पुडिंग मॉडल: परमाणु को धनात्मक आवेश का गोला माना, जिसमें इलेक्ट्रॉन फल के बीजों की तरह धँसे होते हैं। रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल: स्वर्ण-पन्नी प्रयोग से सिद्ध हुआ कि परमाणु अधिकतर खाली होता है, धनात्मक आवेश और द्रव्यमान एक छोटे से केंद्र (नाभिक) में केंद्रित होते हैं, तथा इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं। बोर का परमाणु मॉडल: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा स्तरों (कोशों) में चक्कर लगाते हैं। इन्हीं कोशों को K, L, M, N अक्षरों से दर्शाया जाता है। किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता 2n² सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ n कोश की संख्या है। अतः K कोश (n=1) में अधिकतम 2, L कोश (n=2) में अधिकतम 8, M कोश (n=3) में अधिकतम 18 तथा N कोश (n=4) में अधिकतम 32 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं। सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकते।
अणु किसी पदार्थ का वह सबसे छोटा कण है जो स्वतंत्र रूप से विद्यमान रह सकता है तथा उस पदार्थ के सभी गुण प्रदर्शित करता है। अणु एक ही तत्व के परमाणुओं से बने हो सकते हैं (जैसे O₂, H₂, N₂) या विभिन्न तत्वों के परमाणुओं से (जैसे H₂O, CO₂, NaCl)।
रासायनिक सूत्र (Chemical Formula) किसी अणु में उपस्थित तत्वों और उनके अनुपात को प्रतीकों में दर्शाता है। उदाहरण के लिए जल का सूत्र H₂O है, जिसका अर्थ है—प्रत्येक जल अणु में हाइड्रोजन के 2 और ऑक्सीजन का 1 परमाणु है। रासायनिक सूत्र का उप-स्क्रिप्ट (subscript) अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या दर्शाता है।
कार्य उदाहरण: 18 ग्राम जल (H₂O) में अणुओं की संख्या कितनी होगी? (परमाणु द्रव्यमान: H = 1, O = 16)
हल—जल का अणु द्रव्यमान = 2 × 1 + 16 = 18 u। अतः 18 ग्राम जल में 1 मोल जल अणु होते हैं। अवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) के अनुसार 1 मोल में 6.022 × 10²³ अणु होते हैं, अतः 18 ग्राम जल में 6.022 × 10²³ अणु होंगे।
समस्थानिकों के कुछ महत्वपूर्ण उपयोग भी हैं। यूरेनियम-235 का उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के रूप में होता है; कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर उपचार (रेडियोथेरेपी) में; कार्बन-14 का उपयोग पुरातात्विक वस्तुओं की आयु निर्धारण (रेडियोकार्बन डेटिंग) में तथा आयोडीन-131 का उपयोग थायरॉइड ग्रंथि की जाँच में होता है।
कार्य उदाहरण: कार्बन-14 का परमाणु क्रमांक 6 और द्रव्यमान संख्या 14 है। इसके न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल—न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या - परमाणु क्रमांक = 14 - 6 = 8। अतः कार्बन-14 में 8 न्यूट्रॉन होते हैं, जबकि कार्बन-12 में 6 न्यूट्रॉन होते हैं।
| कण | आवेश | द्रव्यमान | खोजकर्ता |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन (e⁻) | -1 | 9.1 × 10⁻³¹ किग्रा (≈ 1/1837 u) | जे.जे. थॉमसन |
| प्रोटॉन (p⁺) | +1 | 1.672 × 10⁻²⁷ किग्रा (≈ 1 u) | रदरफोर्ड |
| न्यूट्रॉन (n⁰) | 0 | 1.674 × 10⁻²⁷ किग्रा (≈ 1 u) | जेम्स चैडविक |
| परिघटना | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| समस्थानिक | परमाणु क्रमांक समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न | ⁶C¹² व ⁶C¹⁴ |
| समभारिक | द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु क्रमांक भिन्न | Ar-40 व Ca-40 |
| समन्यूट्रॉनिक | न्यूट्रॉन संख्या समान | C-14 व O-16 (दोनों में 8 न्यूट्रॉन) |
| कैटायन | धनात्मक आयन | Na⁺, Ca²⁺, NH₄⁺ |
| एनायन | ऋणात्मक आयन | Cl⁻, O²⁻, SO₄²⁻ |
flowchart TD
A[परमाणु और अणु] --> B[उप-परमाणु कण]
B --> B1[इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश]
B --> B2[प्रोटॉन धनात्मक आवेश]
B --> B3[न्यूट्रॉन आवेश रहित]
A --> C[परमाणु की संरचना]
C --> C1[नाभिक प्रोटॉन व न्यूट्रॉन]
C --> C2[इलेक्ट्रॉन कोश K L M N]
A --> D[महत्वपूर्ण राशियाँ]
D --> D1[परमाणु क्रमांक Z]
D --> D2[द्रव्यमान संख्या A]
D --> D3[न्यूट्रॉन A - Z]
A --> E[अणु और आयन]
E --> E1[परमाणुत्व O2 O3 P4 S8]
E --> E2[कैटायन और एनायन]
A --> F[समस्थानिक समभारिक समन्यूट्रॉनिक]
F --> F1[समस्थानिक कार्बन-12 14]
F --> F2[समभारिक आर्गन-40 कैल्शियम-40]
परमाणु और अणु रसायन विज्ञान की वे मूलभूत इकाइयाँ हैं जिनके ज्ञान के बिना तत्व, यौगिक, अभिक्रिया या आवर्त सारणी में से किसी को भी सही ढंग से नहीं समझा जा सकता। उप-परमाणु कणों के गुण, परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या का संबंध, कोशों में इलेक्ट्रॉन वितरण, अणु-आयन का स्वरूप तथा समस्थानिक, समभारिक, समन्यूट्रॉनिक का अंतर—ये सभी NTPC परीक्षा में बार-बार प्रश्न जन्म देते हैं। इन अवधारणाओं को सूत्रों और उदाहरणों के साथ समझकर तथा तालिकाओं से दोहराकर अभ्यर्थी न केवल इस अध्याय में बल्कि संपूर्ण रसायन विज्ञान में अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं। नियमित अभ्यास और पिछले वर्षों के प्रश्नों के हल से ये अंक आसानी से सुरक्षित किए जा सकते हैं।