17.6 धातु और अधातु Notes

17.6 धातु और अधातु

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (रसायन विज्ञान) अध्याय: 17.6 धातु और अधातु विषय-वस्तु: धातु, अधातु गुण

1. परिचय

आवर्त सारणी के तत्वों को उनके गुणों के आधार पर दो बड़े वर्गों में बाँटा गया है—धातु और अधातु। धातुएँ वे तत्व हैं जिनमें चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता होती है और जो ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं—जैसे सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, जस्ता। अधातुएँ इनके विपरीत गुण रखती हैं—जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन, सल्फर, फास्फोरस, क्लोरीन। इसके अलावा उपधातु (मेटलॉयड) भी होते हैं जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम, जो दोनों के मध्य के गुण दिखाते हैं। तत्वों की कुल संख्या में धातुओं की संख्या लगभग 90 से अधिक है, जो अधातुओं से कहीं अधिक है।

धातु-अधातु के अंतर का अध्ययन NTPC परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रश्न प्रायः भौतिक गुणों की तुलना, धातुओं की सक्रियता श्रेणी, धातुओं का निष्कर्षण, संक्षारण और जंग से बचाव तथा धातु-अधातु की अभिक्रियाओं पर आधारित होते हैं। धातुएँ अपने सबसे बाहरी कोश से इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बनाती हैं, जबकि अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाती हैं। यही इलेक्ट्रॉन अंतरण धातु-अधातु के बीच आयनिक बंध (Ionic Bond) का कारण है।

धातुओं का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है—ताँबा, कांस्य और लोहा युगों के नाम भी इन्हीं धातुओं से पड़े हैं। आज धातुओं का उपयोग भवन निर्माण (लोहा, एल्युमिनियम), विद्युत तार (ताँबा, एल्युमिनियम), गहने (सोना, चाँदी), बर्तन (एल्युमिनियम, स्टील) और उद्योगों में होता है। पारा कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाने वाली एकमात्र धातु है, जबकि गैलियम की गलनांक इतनी कम है कि हथेली पर पिघल जाती है। ग्रेफाइट कार्बन का अपररूप होते हुए भी विद्युत का चालन करता है।

2. धातुओं के गुण

धातुओं के भौतिक गुण—इनमें विशिष्ट धात्विक चमक होती है; ये आघातवर्धनीय (पीटकर पत्तर बनाने योग्य) और तन्य (खींचकर तार बनाने योग्य) होती हैं; ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं; ध्वनि उत्पन्न करती हैं (आशुध्वनिक); अधिकांश धातुओं का घनत्व उच्च और गलनांक उच्च होता है; तथा ये सामान्यतः ठोस होती हैं (पारा और गैलियम के अपवाद को छोड़कर)।

धातुओं के रासायनिक गुण—धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड (क्षारीय)। जैसे—4Na + O₂ → 2Na₂O; 2Mg + O₂ → 2MgO। धातु + जल → हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन। जैसे—2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂। धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन। जैसे—Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂। अधिक सक्रिय धातु, कम सक्रिय धातु को उसके लवण से विस्थापित करती है। जैसे—Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu।

कार्य उदाहरण: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu अभिक्रिया में कौन-सी धातु विस्थापित होती है और क्यों?

हल—ताँबा (Cu) विस्थापित होता है, क्योंकि लोहा (Fe) सक्रियता श्रेणी में ताँबे से ऊपर (अधिक सक्रिय) है। विलयन का नीला रंग FeSO₄ के कारण हरा हो जाता है।

3. अधातुएँ और धातु-अधातु की तुलना

अधातुएँ (Non-metals) में धात्विक चमक नहीं होती, ये भंगुर (भुरभुरी) होती हैं, तन्य और आघातवर्धनीय नहीं होतीं, ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं तथा कमरे के ताप पर ठोस, द्रव या गैस तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है। अधातुओं के रासायनिक गुण—अधातु + ऑक्सीजन → अधातु ऑक्साइड (अम्लीय)। जैसे—C + O₂ → CO₂; S + O₂ → SO₂। CO₂ जल में घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती है, इसलिए अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।

कार्य उदाहरण: पीतल और कांस्य की संघटन धातुएँ बताइए।

हल—पीतल ताँबा (Cu) और जस्ता (Zn) की मिश्र धातु है, जबकि कांस्य ताँबा (Cu) और टिन (Sn) की मिश्र धातु है।

4. धातुओं का निष्कर्षण और संक्षारण

प्रकृति में धातुएँ मुख्यतः अयस्कों (Ores) के रूप में पाई जाती हैं, जो धातु का अयस्क उस खनिज को कहते हैं जिससे धातु लाभप्रद रूप से निकाली जा सके। अयस्क से धातु निकालने की प्रक्रिया धातु विज्ञान (Metallurgy) कहलाती है। सक्रियता श्रेणी के अनुसार निष्कर्षण की विधि चुनी जाती है—उच्च सक्रिय धातुओं (K, Na, Ca, Mg, Al) का निष्कर्षण विद्युत अपघटन से; मध्यम सक्रिय धातुओं (Zn, Fe, Pb) का कार्बन द्वारा अपचयन (स्मेल्टिंग) से; तथा निम्न सक्रिय धातुओं (Cu, Hg, Ag, Au) का केवल भर्जन/गलन से होता है। जिंक के अयस्क—जिंक ब्लेंड (ZnS), कैलामाइन (ZnCO₃); लोहे के अयस्क—हेमेटाइट (Fe₂O₃), मैग्नेटाइट (Fe₃O₄); एल्युमिनियम का अयस्क—बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O); ताँबे के अयस्क—कॉपर पाइराइट्स (CuFeS₂), कप्राइट (Cu₂O)।

संक्षारण (Corrosion): धातु का उसके आसपास के वातावरण (जल, वायु, अम्ल) से रासायनिक अभिक्रिया करके क्षय होना। लोहे में जंग लगने को संक्षारण कहते हैं। जंग हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) है। जंग लगने के लिए लोहे के साथ जल और ऑक्सीजन दोनों आवश्यक हैं। ताँबे की सतह पर हरा कार्बोनेट (कॉपर कार्बोनेट) की परत बनती है, जिसे 'पटिना' कहते हैं; चाँदी की सतह काली (सिल्वर सल्फाइड) हो जाती है; एल्युमिनियम की सतह पर ऑक्साइड की पतली सुरक्षात्मक परत बनती है।

जंग से बचाव के उपाय—जस्तीकरण (लोहे पर जस्ते की परत, गैल्वेनाइजेशन), रंग/पेंट, तेल-ग्रीस, क्रोमियम परत (क्रोमियम चढ़ाना), टिन परत (टिनप्लेटिंग) तथा अनोदी धातु सुरक्षा (कैथोडिक सुरक्षा)। गैल्वेनाइज्ड लोहे का उपयोग छत की चादर और पानी की टंकियों में होता है। तेल रिफाइनरी में पेट्रोलियम का संक्षारण नियंत्रण बड़ी समस्या है।

कार्य उदाहरण: जिंक ब्लेंड से जिंक निकालने की विधि बताइए।

हल—जिंक ब्लेंड (ZnS) का पहले भर्जन (roasting) करके ZnO बनाया जाता है, फिर कार्बन (कोक) द्वारा अपचयन कर जिंक प्राप्त होता है—2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂; ZnO + C → Zn + CO।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

गुण धातु अधातु
चमक धात्विक चमक नहीं होती
आघातवर्धनीयता होती है नहीं होती
तन्यता होती है नहीं होती
चालकता सुचालक कुचालक
अवस्था प्रायः ठोस (पारा द्रव) ठोस, द्रव, गैस तीनों
ऑक्साइड की प्रकृति क्षारीय अम्लीय
आयन धनायन (e⁻ देते हैं) ऋणायन (e⁻ ग्रहण)
उदाहरण Fe, Cu, Au O, N, S, Cl

तालिका 2

मिश्र धातु घटक
पीतल ताँबा + जस्ता
कांस्य ताँबा + टिन
स्टील लोहा + कार्बन
सोल्डर सीसा + टिन
देवनार (जर्मन सिल्वर) ताँबा + जस्ता + निकल
ड्यूरालुमिन एल्युमिनियम + ताँबा + मैग्नीशियम

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[धातु और अधातु] --> B[धातु]
    B --> B1[भौतिक गुण चमक तन्यता चालकता]
    B --> B2[सक्रियता श्रेणी K Na Ca Mg]
    B --> B3[ऑक्साइड क्षारीय]
    A --> C[अधातु]
    C --> C1[भंगुर कुचालक]
    C --> C2[ऑक्साइड अम्लीय]
    C --> C3[ब्रोमीन द्रव अधातु]
    A --> D[उपधातु]
    D --> D1[सिलिकॉन जर्मेनियम]
    A --> E[मिश्र धातु]
    E --> E1[पीतल कांस्य स्टील]
    A --> F[निष्कर्षण]
    F --> F1[विद्युत अपघटन उच्च सक्रिय]
    F --> F2[कार्बन अपचयन मध्यम]
    A --> G[संक्षारण]
    G --> G1[जंग Fe2O3 xH2O]
    G --> G2[जस्तीकरण पेंट क्रोमियम]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

धातुओं की सक्रियता श्रेणी पोटैशियम K सबसे अधिक सक्रिय सोडियम Na जल से तेज अभिक्रिया कैल्शियम Ca मैग्नीशियम Mg एल्युमिनियम Al विद्युत अपघटन से निष्कर्षण जिंक Zn कार्बन अपचयन लोहा Fe सीसा Pb ताँबा Cu, चाँदी Ag, सोना Au कम सक्रिय उत्कृष्ट धातु स्मरणीय K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Hg Ag Au स्वर्ण नियम सक्रियता श्रेणी में ऊपर की धातु नीचे की धातु को विस्थापित करती है।

मिश्र धातुएँ और उनके घटक पीतल ताँबा + जस्ता कांस्य ताँबा + टिन स्टील लोहा + कार्बन सोल्डर सीसा + टिन देवनार ताँबा + जस्ता + निकल ड्यूरालुमिन एल्युमिनियम + ताँबा + मैग्नीशियम मिश्र धातु शुद्ध धातु से अधिक कठोर होती है जस्तीकरण से लोहे पर जस्ते की परत चढ़ती है स्वर्ण नियम पीतल में जस्ता और कांस्य में टिन होता है, यह क्रम कभी न भूलें।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: पीतल और कांस्य के घटक उलट लेना। पीतल में ताँबा + जस्ता, कांस्य में ताँबा + टिन होता है।
  2. गलती: पारे को अधातु बताना। पारा (Hg) कमरे के ताप पर द्रव अवस्था वाली धातु है, जबकि ब्रोमीन द्रव अधातु है।
  3. गलती: सोडियम-पोटैशियम को पानी में रखना बताना। इन्हें मिट्टी के तेल में डुबोकर रखा जाता है क्योंकि ये वायु और जल से तेजी से अभिक्रिया करते हैं।
  4. गलती: जंग के लिए केवल ऑक्सीजन आवश्यक मानना। जंग लगने के लिए जल और ऑक्सीजन दोनों आवश्यक हैं।
  5. गलती: सभी धातुओं का घनत्व अधिक और गलनांक उच्च मान लेना। पोटैशियम, सोडियम पानी पर तैरती हैं (घनत्व कम), गैलियम हथेली पर पिघल जाती है।
  6. गलती: अधातु के ऑक्साइड को क्षारीय बताना। अधातु ऑक्साइड (CO₂, SO₂) अम्लीय होते हैं, जबकि धातु ऑक्साइड (Na₂O, MgO) क्षारीय होते हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. सक्रियता श्रेणी का क्रम 'K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Hg Ag Au' रट लें; विस्थापन अभिक्रिया के प्रश्न इसी से हल होंगे।
  2. उत्कृष्ट धातुओं (Cu, Ag, Au) को याद रखें—ये वायु, जल या अम्ल से आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।
  3. धातु ऑक्साइड क्षारीय तथा अधातु ऑक्साइड अम्लीय—यह नियम परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
  4. जस्तीकरण (जस्ते की परत), टिनप्लेटिंग और क्रोमियम चढ़ाना—संक्षारण सुरक्षा की तीन विधियाँ याद रखें।
  5. लोहे के अयस्क (हेमेटाइट Fe₂O₃, मैग्नेटाइट Fe₃O₄), एल्युमिनियम का अयस्क (बॉक्साइट) और जिंक का अयस्क (जिंक ब्लेंड ZnS) स्मरण रखें।
  6. एकमात्र द्रव धातु पारा और एकमात्र द्रव अधातु ब्रोमीन—ये प्रश्न निश्चित रूप से आता है।

10. निष्कर्ष

धातु और अधातु का अध्ययन आवर्त सारणी की सबसे व्यावहारिक विषय-वस्तु है, जो औद्योगिक, कृषि और दैनिक जीवन के हर पहलू से जुड़ी है। धातुओं की चमक-तन्यता-चालकता, सक्रियता श्रेणी के आधार पर विस्थापन, अधातुओं के अम्लीय ऑक्साइड, मिश्र धातुओं के घटक तथा संक्षारण से बचाव—ये सभी बिंदु NTPC परीक्षा में प्रश्न जन्म देते हैं। सक्रियता श्रेणी और मिश्र धातुओं की सूची का नियमित अभ्यास तथा पिछले वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण करके अभ्यर्थी इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं। यह अध्याय आगे के कार्बन यौगिकों और दैनिक रसायनों के अध्यायों की नींव भी तैयार करता है।