17.7 कार्बन और उसके यौगिक Notes

17.7 कार्बन और उसके यौगिक

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (रसायन विज्ञान) अध्याय: 17.7 कार्बन और उसके यौगिक विषय-वस्तु: कार्बन, हाइड्रोकार्बन

1. परिचय

कार्बन रसायन विज्ञान का सबसे विशेष तत्व है। इसके यौगिकों की संख्या अन्य सभी तत्वों के यौगिकों के कुल योग से भी अधिक है। कार्बन से ही जीवन का आधार है—प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, डीएनए, विटामिन सभी कार्बनिक यौगिक हैं। कार्बन आवर्त सारणी के चौदहवें समूह और द्वितीय आवर्त में स्थित है, जिसका परमाणु क्रमांक 6 और परमाणु द्रव्यमान 12 है। इसके इलेक्ट्रॉन वितरण (2, 4) के कारण कार्बन चार संयोजकता (वैलेंसी 4) वाला तत्व है। कार्बन की चतुःसंयोजकता (Tetravalency) ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

कार्बन की दो सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं—कैटेनेशन और चतुःसंयोजकता। कैटेनेशन कार्बन की अपने ही परमाणुओं के साथ जुड़कर लंबी शृंखला, शाखित शृंखला या वलय बनाने की क्षमता है। कार्बन-कार्बन बंध प्रबल होते हैं, इसलिए ये लंबी शृंखलाएँ स्थिर रहती हैं। चतुःसंयोजकता के कारण कार्बन हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन आदि से चार बंध बनाकर हजारों यौगिक बनाता है। इसके अतिरिक्त कार्बन अपने यौगिकों में एकल, द्वि और त्रि बंध भी बनाता है।

कार्बन के यौगिकों के अध्ययन को कार्बनिक रसायन विज्ञान कहते हैं। प्रारंभ में केवल जीवों से प्राप्त पदार्थों को कार्बनिक माना जाता था, परंतु 1828 में वोहलर ने अकार्बनिक यौगिक (अमोनियम सायनेट) से कार्बनिक यौगिक यूरिया का संश्लेषण कर यह भ्रम दूर कर दिया। आज लाखों कार्बनिक यौगिक प्रयोगशाला में संश्लेषित किए जाते हैं। NTPC परीक्षा में कार्बन के अपररूप, हाइड्रोकार्बन, क्रियात्मक समूह, एथेनॉल-एथेनोइक अम्ल तथा साबुन-डिटर्जेंट से प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. कार्बन के अपररूप और उनके गुण

अपररूप (Allotropes) एक ही तत्व के भिन्न रूप हैं जिनकी भौतिक संरचना भिन्न होती है, परंतु रासायनिक गुण समान होते हैं। कार्बन के प्रमुख अपररूप हैं—हीरा (Diamond), ग्रेफाइट (Graphite) और फुलरीन (Fullerene)

कार्बन यौगिकों को दो वर्गों में बाँटा गया है—संतृप्त कार्बन यौगिक (केवल एकल बंध, जैसे मीथेन CH₄, एथेन C₂H₆) और असंतृप्त कार्बन यौगिक (द्वि या त्रि बंध, जैसे एथीन C₂H₄, एथाइन C₂H₂)। सामान्यतः कार्बन यौगिक अधिकांश अधातुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं क्योंकि कार्बन चार इलेक्ट्रॉन साझा करता है।

कार्य उदाहरण: हीरा और ग्रेफाइट के विद्युत चालकता के गुणों में अंतर बताइए।

हल—हीरे में सभी चार इलेक्ट्रॉन बंधों में बँधे होते हैं, अतः मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होता और यह कुचालक है। ग्रेफाइट की प्रत्येक परत में कार्बन का चौथा इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है, जिससे विद्युत का चालन होता है, इसलिए ग्रेफाइट सुचालक है।

3. हाइड्रोकार्बन और समजात श्रेणी

केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। हाइड्रोकार्बन तीन प्रकार के होते हैं—एल्केन (संतृप्त), एल्कीन (द्वि बंध) और एल्काइन (त्रि बंध)

समजात श्रेणी (Homologous Series) कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी है जिसमें प्रत्येक क्रमागत यौगिक पिछले से CH₂ समूह (अणु भार में 14 इकाई) से बड़ा होता है और सभी के क्रियात्मक समूह समान होते हैं। एल्केन की समजात श्रेणी—CH₄, C₂H₆, C₃H₈, C₄H₁₀। एल्कोहॉल की समजात श्रेणी—CH₃OH, C₂H₅OH, C₃H₇OH। समजात श्रेणी के यौगिकों के रासायनिक गुण समान और भौतिक गुण क्रमबद्ध रूप से बदलते हैं।

क्रियात्मक समूह (Functional Group) कार्बनिक यौगिक का वह भाग है जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है। प्रमुख क्रियात्मक समूह—एल्कोहॉल (-OH), एल्डिहाइड (-CHO), कीटोन (>C=O), कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH), ईथर (-O-), एस्टर (-COO-), एमीन (-NH₂), हैलाइड (-X)।

कार्य उदाहरण: प्रोपेन (C₃H₈) के बाद एल्केन समजात श्रेणी का अगला सदस्य क्या होगा?

हल—समजात श्रेणी में CH₂ जुड़ने से अगला सदस्य C₄H₁₀ (ब्यूटेन) होगा। इसी प्रकार एथेन (C₂H₆) का अगला सदस्य प्रोपेन (C₃H₈) है।

4. कार्बन यौगिकों के महत्वपूर्ण उपयोग

कार्य उदाहरण: मीथेन के दहन का संतुलित समीकरण लिखिए तथा अपूर्ण दहन में बनने वाली गैस बताइए।

हल—CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O। हवा की कमी में अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनती है, जो विषैली होती है। मीथेन को मार्श गैस भी कहते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

हाइड्रोकार्बन बंध सामान्य सूत्र पहला सदस्य
एल्केन एकल CₙH₂ₙ₊₂ मीथेन CH₄
एल्कीन द्वि CₙH₂ₙ एथीन C₂H₄
एल्काइन त्रि CₙH₂ₙ₋₂ एथाइन C₂H₂
साइक्लोएल्केन वलय एकल CₙH₂ₙ साइक्लोप्रोपेन

तालिका 2

अपररूप संरचना गुण उपयोग
हीरा चतुष्फलकीय, 4 बंध सबसे कठोर, कुचालक काँच काटना, आभूषण
ग्रेफाइट षट्कोणीय परतें मृदु, सुचालक पेंसिल, इलेक्ट्रोड, स्नेहक
फुलरीन बंद पिंजरा C₆₀ मध्यवर्ती नैनो तकनीक

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[कार्बन और उसके यौगिक] --> B[अपररूप]
    B --> B1[हीरा कठोर कुचालक]
    B --> B2[ग्रेफाइट मृदु सुचालक]
    B --> B3[फुलरीन C60 बकीबॉल]
    A --> C[हाइड्रोकार्बन]
    C --> C1[एल्केन एकल बंध]
    C --> C2[एल्कीन द्वि बंध]
    C --> C3[एल्काइन त्रि बंध]
    A --> D[समजात श्रेणी]
    D --> D1[CH2 की वृद्धि]
    D --> D2[समान क्रियात्मक समूह]
    A --> E[क्रियात्मक समूह]
    E --> E1[एल्कोहॉल OH]
    E --> E2[कार्बोक्सिलिक अम्ल COOH]
    A --> F[उपयोग]
    F --> F1[एथेनॉल व एथेनोइक अम्ल]
    F --> F2[साबुन सैपोनिफिकेशन]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

कार्बन के प्रमुख अपररूप हीरा चतुष्फलकीय संरचना सबसे कठोर कुचालक ग्रेफाइट षट्कोणीय परतें मृदु सुचालक स्नेहक फुलरीन बंद पिंजरा C₆₀ बकमिन्स्टर फुलरीन स्वर्ण नियम हीरा कुचालक और ग्रेफाइट सुचालक है, यह अंतर याद रखें।

साबुन की कार्यप्रणाली साबुन का अणु जल-प्रेमी सिरा जल-विरोधी लंबी शृंखला सफाई का तरीका जल-विरोधी सिरा तेल और गंदगी से जुड़ता है जल-प्रेमी सिरा जल से जुड़कर गंदगी को बहा ले जाता है कठोर जल में साबुन कम झाग देता है सैपोनिफिकेशन वसा/तेल + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल स्वर्ण नियम डिटर्जेंट कठोर जल में भी कार्य करता है, साबुन नहीं।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: हीरे को विद्युत का सुचालक बताना। हीरा कुचालक है, जबकि ग्रेफाइट सुचालक होता है।
  2. गलती: पेंसिल में 'सीसा' (lead) होता है यह मानना। पेंसिल में वास्तव में ग्रेफाइट होता है, सीसा नहीं।
  3. गलती: एल्केन और एल्कीन के सामान्य सूत्र उलट लेना। एल्केन CₙH₂ₙ₊₂ और एल्कीन CₙH₂ₙ होता है।
  4. गलती: एथीन को एथेन कह देना। एथेन (C₂H₆) एल्केन है जबकि एथीन (C₂H₄) एल्कीन है जिसमें द्वि बंध होता है।
  5. गलती: साबुन को कठोर जल में अधिक झाग देने वाला बताना। कठोर जल में साबुन कम झाग देता है, जबकि डिटर्जेंट प्रभावी रहता है।
  6. गलती: अपूर्ण दहन में CO₂ बनती है यह मानना। हवा की कमी में अपूर्ण दहन से विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तीनों हाइड्रोकार्बन के सामान्य सूत्र (एल्केन CₙH₂ₙ₊₂, एल्कीन CₙH₂ₙ, एल्काइन CₙH₂ₙ₋₂) और पहले सदस्य (मीथेन, एथीन, एथाइन) रट लें।
  2. अपररूपों की एक पंक्ति में तुलना करें—हीरा (कठोर, कुचालक, काँच काटना), ग्रेफाइट (मृदु, सुचालक, पेंसिल), फुलरीन (C₆₀, बकीबॉल, 1985)।
  3. क्रियात्मक समूहों की सूची (-OH एल्कोहॉल, -COOH कार्बोक्सिलिक अम्ल, -CHO एल्डिहाइड) स्मरण रखें, यह बार-बार पूछी जाती है।
  4. एस्टरीकरण समीकरण (अम्ल + एल्कोहॉल → एस्टर + जल) और सैपोनिफिकेशन (वसा + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल) लिखकर अभ्यास करें।
  5. मीथेन = मार्श गैस, एसिटिलीन = वेल्डिंग, एथीन = फल पकाना—इन उपयोगों को उदाहरण से जोड़कर याद रखें।
  6. समजात श्रेणी में CH₂ (14 इकाई) की वृद्धि होती है, यह परिभाषा प्रश्न में आती है।

10. निष्कर्ष

कार्बन और उसके यौगिक रसायन विज्ञान के सबसे विस्तृत अध्याय हैं, जिनसे जीवन, ऊर्जा और उद्योग के अनेक पहलू जुड़े हैं। कार्बन की चतुःसंयोजकता और कैटेनेशन ने लाखों यौगिकों को संभव बनाया है, जबकि हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन जैसे अपररूप इसकी संरचनात्मक विविधता दर्शाते हैं। एल्केन-एल्कीन-एल्काइन का वर्गीकरण, समजात श्रेणी, क्रियात्मक समूह तथा एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल, साबुन-डिटर्जेंट के उपयोग NTPC परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न-क्षेत्र हैं। सामान्य सूत्रों और समीकरणों का नियमित अभ्यास करके तथा पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करके अभ्यर्थी इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।