विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.1 तंत्रिका तंत्र
जीवों के शरीर में विभिन्न अंगों की क्रियाओं को एक साथ नियंत्रित और समन्वित करने के लिए दो मुख्य तंत्र कार्य करते हैं — तंत्रिका तंत्र और अंत:स्रावी (हार्मोन) तंत्र। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में जीव विज्ञान के अंतर्गत तंत्रिका तंत्र से संबंधित प्रश्न तंत्रिका कोशिका की संरचना, तंत्रिका आवेग के संचरण तथा तंत्रिका तंत्र के विभाजन पर प्रायः पूछे जाते हैं। तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) है, जो विद्युत-रासायनिक संकेतों के रूप में सूचनाओं का संचार करती है। मानव तंत्रिका तंत्र अरबों न्यूरॉन्स से बना होता है, जो मस्तिष्क, मेरु रज्जु और समस्त शरीर में फैले होते हैं।
तंत्रिका तंत्र का मुख्य कार्य उद्दीपन (stimulus) का संवेदन, आवेग का संचरण तथा उचित प्रतिक्रिया का उत्पादन है। जब कोई बाहरी या आंतरिक उद्दीपन शरीर को प्रभावित करता है, तो संवेदी न्यूरॉन उसे मस्तिष्क तक पहुँचाते हैं और मस्तिष्क निर्णय करने के बाद चालक न्यूरॉन के माध्यम से अंगों तक संदेश भेजता है। इस पूरी प्रक्रिया को प्रतिक्रिया कहते हैं। यह क्रिया इतनी तीव्र होती है कि कई बार हमें पता भी नहीं चलता। रेलवे तकनीकी परीक्षा के दृष्टिकोण से न्यूरॉन की संरचना, तंत्रिका आवेग की चाल तथा तंत्रिका तंत्र के विभागों का सटीक ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अध्याय में हम तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना, तंत्रिका आवेग का संचरण, सिनैप्स की कार्यविधि, तंत्रिका तंत्र का विभाजन तथा स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही हम मस्तिष्क एवं मेरु रज्जु की भूमिका को भी समझेंगे। यह अध्याय मानव शरीर क्रिया विज्ञान का आधार है, इसलिए इसके हर तथ्य को याद रखना परीक्षा में सीधे अंक दिलाता है। तंत्रिका तंत्र की समझ मस्तिष्क तथा प्रतिवर्त क्रिया जैसे आगामी विषयों को सरल बना देती है।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई है। प्रत्येक न्यूरॉन तीन मुख्य भागों से मिलकर बना होता है — कोशिका काय, डेंड्राइट और एक्सॉन।
कोशिका काय (Cell Body): यह न्यूरॉन का केंद्रीय भाग है जिसमें केंद्रक, साइटोप्लाज्म और अन्य कोशिकांग स्थित होते हैं। कोशिका काय को सोमा भी कहते हैं। यहाँ न्यूरॉन के चयापचय का नियंत्रण होता है और यहाँ से डेंड्राइट तथा एक्सॉन निकलते हैं।
डेंड्राइट (Dendrites): कोशिका काय से निकलने वाली छोटी-छोटी शाखाओं जैसी संरचनाएँ डेंड्राइट कहलाती हैं। ये उद्दीपन ग्रहण करती हैं और आवेग को कोशिका काय की ओर संचारित करती हैं। डेंड्राइट पर उपस्थित अनेक छोटी शाखाओं को डेंड्रोन कहते हैं। डेंड्राइट की दिशा हमेशा कोशिका काय की ओर होती है।
एक्सॉन (Axon): कोशिका काय से निकलने वाली एक लंबी, पतली तथा चिकनी रेशा जैसी संरचना एक्सॉन कहलाती है। एक्सॉन आवेग को कोशिका काय से दूर, अन्य कोशिका या पेशी की ओर संचारित करता है। अधिकांश एक्सॉन मायलिन आवरण (myelin sheath) से ढके होते हैं, जो संचरण की गति को बढ़ाता है। मायलिन आवरण वाले तंत्रिका तंतुओं को कृतार (medullated) और बिना आवरण वाले को अकृतार (non-medullated) तंत्रिका तंतु कहते हैं। एक्सॉन का अंतिम भाग जहाँ से यह अन्य कोशिका से मिलता है, अंतिम बटन (terminal button) कहलाता है।
तंत्रिका आवेग का संचरण: तंत्रिका कोशिका में विद्युत रासायनिक परिवर्तन के रूप में संकेत गमन करता है, जिसे तंत्रिका आवेग कहते हैं। विराम अवस्था में न्यूरॉन के भीतर और बाहर आयनों का अंतर बना रहता है, जिसे विराम विभव (resting potential) कहते हैं। उद्दीपन मिलने पर कोशिका झिल्ली में आयनों की गति बदल जाती है और क्रिया विभव (action potential) उत्पन्न होता है। इस प्रकार आवेग एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है।
सिनैप्स (Synapse): एक न्यूरॉन के एक्सॉन का अंतिम बटन तथा दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइट के बीच के स्थान को सिनैप्स कहते हैं। सिनैप्स पर आवेग रासायनिक संदेशवाहक — न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटिलकोलीन) — के माध्यम से एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पहुँचता है। सिनैप्स में संचरण केवल एक दिशा में होता है।
मानव तंत्रिका तंत्र को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है — केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS), परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS)।
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System): इसमें मस्तिष्क और मेरु रज्जु आते हैं। यह तंत्रिका तंत्र का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। मस्तिष्क सभी स्वैच्छिक क्रियाओं तथा सोच-विचार का केंद्र है, जबकि मेरु रज्जु अनेक अनैच्छिक क्रियाओं (जैसे प्रतिवर्त क्रिया) का केंद्र होती है। मस्तिष्क तथा मेरु रज्जु तीन आवरणों — मस्तिष्कावरण (meninges) — से घिरे होते हैं। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का मूल भाग न्यूरॉन के कायों से बना होता है जिसे भूरे द्रव्य तथा तंतुओं से बने भाग को श्वेत द्रव्य कहते हैं।
परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System): केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से निकलने वाली सभी तंत्रिकाएँ मिलकर परिधीय तंत्रिका तंत्र बनाती हैं। इसके अंतर्गत कपालीय तंत्रिकाएँ (मस्तिष्क से निकलने वाली 12 जोड़ी तंत्रिकाएँ) तथा मेरु तंत्रिकाएँ (मेरु रज्जु से निकलने वाली 31 जोड़ी तंत्रिकाएँ) आती हैं। यह तंत्रिकाएँ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच संदेश पहुँचाती हैं। कार्य के आधार पर इन तंत्रिकाओं को संवेदी (afferent) और चालक (efferent) तंत्रिकाओं में बाँटा जाता है। संवेदी तंत्रिका अंगों से मस्तिष्क तक तथा चालक तंत्रिका मस्तिष्क से अंगों तक संदेश पहुँचाती हैं।
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System): यह अनैच्छिक क्रियाओं — हृदय गति, श्वसन, पाचन, रक्तचाप — को नियंत्रित करता है। इसके दो उपविभाग होते हैं — सहानुभूति (sympathetic) और परासहानुभूति (parasympathetic) तंत्रिका तंत्र। सहानुभूति तंत्रिका तंत्र खतरे या तनाव की स्थिति में शरीर को सक्रिय करता है (हृदय गति बढ़ाना, पुतली फैलाना), जबकि परासहानुभूति तंत्रिका तंत्र विश्राम की स्थिति में शरीर को सामान्य अवस्था में लाता है। रेलवे परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि सहानुभूति तंत्रिका तंत्र एड्रिनेलिन के प्रभाव को बढ़ाता है।
मस्तिष्क शरीर का सबसे जटिल अंग है जो खोपड़ी के भीतर सुरक्षित रहता है। मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग होते हैं — अग्र मस्तिष्क (प्रमस्तिष्क), मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। अग्र मस्तिष्क में प्रमस्तिष्क (cerebrum) तथा अंत: मस्तिष्क (diencephalon) आते हैं। प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है जो सोच, स्मृति, भाषा तथा स्वैच्छिक गतियों को नियंत्रित करता है। मध्य मस्तिष्क दृष्टि तथा श्रवण संबंधी प्रतिवर्तों में सहायक है। पश्च मस्तिष्क में अनुमस्तिष्क (cerebellum), मेड्युला आब्लोंगेटा तथा पोंस आते हैं। अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन बनाए रखता है, जबकि मेड्युला हृदय गति, श्वसन तथा रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मेड्युला का क्षतिग्रस्त होना प्राणघातक हो सकता है।
मेरु रज्जु (Spinal Cord): यह मस्तिष्क से निकलकर मेरु दंड के भीतर तक फैली हुई लंबी संरचना है। मेरु रज्जु शरीर के विभिन्न भागों और मस्तिष्क के बीच संदेश पहुँचाने का मुख्य मार्ग है। यह अनेक प्रतिवर्त क्रियाओं का केंद्र भी है। जब कोई उद्दीपन तीव्र तथा तात्कालिक होता है, तो प्रतिक्रिया मस्तिष्क तक जाने के बजाय सीधे मेरु रज्जु के स्तर पर ही हो जाती है, इसे प्रतिवर्त क्रिया (reflex action) कहते हैं। मेरु रज्जु तथा मस्तिष्क के आसपास सुरक्षा के लिए मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid) भरा रहता है।
तंत्रिका तंत्र में ऊर्जा की आवश्यकता: न्यूरॉन्स को कार्य के लिए ग्लूकोज तथा ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति आवश्यक होती है। मस्तिष्क शरीर के कुल ऑक्सीजन का लगभग 20 प्रतिशत उपयोग करता है। ऑक्सीजन या ग्लूकोज की कमी होने पर मस्तिष्क की क्रियाएँ बाधित हो जाती हैं। रेलवे दुर्घटना जैसी स्थितियों में चोट लगने पर तंत्रिका तंत्र की क्रिया प्रभावित होती है, इसलिए प्राथमिक उपचार की समझ भी महत्वपूर्ण है।
| भाग | अंग | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| केंद्रीय तंत्रिका तंत्र | मस्तिष्क, मेरु रज्जु | नियंत्रण, विचार, प्रतिवर्त क्रिया |
| परिधीय तंत्रिका तंत्र | 12 जोड़ी कपालीय, 31 जोड़ी मेरु तंत्रिकाएँ | संदेशों का संचार |
| स्वायत्त तंत्रिका तंत्र | सहानुभूति व परासहानुभूति तंत्र | अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण |
| भाग | विशेषता | कार्य |
|---|---|---|
| कोशिका काय | केंद्रक युक्त | चयापचय का नियंत्रण |
| डेंड्राइट | छोटी शाखाएँ | आवेग को कोशिका काय की ओर लाना |
| एक्सॉन | लंबा तंतु | आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाना |
| सिनैप्स | दो न्यूरॉन का मिलन बिंदु | रासायनिक संदेशवाहक द्वारा संचरण |
flowchart TD
A[तंत्रिका तंत्र] --> B[न्यूरॉन]
A --> C[तंत्रिका तंत्र का विभाजन]
A --> D[तंत्रिका आवेग]
B --> B1[कोशिका काय]
B --> B2[डेंड्राइट]
B --> B3[एक्सॉन]
B --> B4[मायलिन आवरण]
C --> C1[केंद्रीय तंत्रिका तंत्र]
C --> C2[परिधीय तंत्रिका तंत्र]
C --> C3[स्वायत्त तंत्रिका तंत्र]
C1 --> C11[मस्तिष्क]
C1 --> C12[मेरु रज्जु]
C2 --> C21[कपालीय तंत्रिकाएँ]
C2 --> C22[मेरु तंत्रिकाएँ]
C3 --> C31[सहानुभूति]
C3 --> C32[परासहानुभूति]
D --> D1[विराम विभव]
D --> D2[क्रिया विभव]
D --> D3[सिनैप्स]
तंत्रिका तंत्र मानव शरीर का सर्वोच्च नियंत्रण तंत्र है जो प्रत्येक क्रिया को समन्वित करता है। इस अध्याय में हमने न्यूरॉन की संरचना — कोशिका काय, डेंड्राइट और एक्सॉन — को विस्तार से समझा तथा जाना कि तंत्रिका आवेग विराम विभव और क्रिया विभव के माध्यम से संचरित होता है। सिनैप्स पर रासायनिक संदेशवाहक द्वारा एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में संदेश पहुँचता है। तंत्रिका तंत्र का वर्गीकरण — केंद्रीय, परिधीय और स्वायत्त — तथा मस्तिष्क के तीन भागों का कार्यभार भी हमने सीखा। इन तथ्यों की पकड़ ही मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया जैसे आगामी विषयों की नींव है। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा में तंत्रिका तंत्र से सीधे अंक प्राप्त करने के लिए संरचनाओं के चित्र तथा संख्याओं का अभ्यास निरंतर करना चाहिए।