विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.2 कोशिकांग
कोशिकांग (Cell Organelles) वे छोटी-छोटी रचनाएँ हैं जो कोशिकाद्रव्य के अंदर स्थित होती हैं और प्रत्येक कोशिका को अपना विशेष कार्य करने में सहायता करती हैं। कोशिकांग को कोशिका के 'छोटे अंग' भी कहा जाता है, क्योंकि जिस प्रकार शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग कार्य करते हैं, उसी प्रकार कोशिका के भीतर कोशिकांग अपने-अपने विशिष्ट कार्य करते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में कोशिकांगों से संबंधित प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं, विशेषकर उनके कार्यों से संबंधित प्रश्न, जैसे कि ऊर्जा घर किसे कहते हैं, प्रोटीन संश्लेषण कहाँ होता है आदि।
कोशिकांगों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है — झिल्लीबद्ध कोशिकांग और गैर-झिल्लीबद्ध कोशिकांग। झिल्लीबद्ध कोशिकांगों में माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, अंतर्द्रव्यी जालिका, लाइसोसोम, प्लास्टिड तथा रसधानी (वेक्यूल) आते हैं। गैर-झिल्लीबद्ध कोशिकांगों में राइबोसोम, सेंट्रोसोम और सेंट्रिओल आते हैं। यूकैरियोटिक कोशिकाओं में ये सभी कोशिकांग उपस्थित होते हैं जबकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में केवल राइबोसोम ही प्रमुख कोशिकांग होता है।
इस अध्याय में हम प्रत्येक कोशिकांग की संरचना, स्थान और कार्य का विस्तार से अध्ययन करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक कोशिकांग का एक विशिष्ट कार्य होता है, जैसे माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा का निर्माण करता है, लाइसोसोम कोशिका का पाचक तंत्र है, राइबोसोम प्रोटीन का निर्माण करता है और गॉल्जीकाय पदार्थों के संचयन एवं पैकेजिंग का कार्य करता है। इन कार्यों की पकड़ ही परीक्षा में सही उत्तर चुनने की कुंजी है।
माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria): यह कोशिका का ऊर्जा घर है। इसमें खाद्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होकर एटीपी (ATP) के रूप में ऊर्जा का निर्माण होता है। माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली से बना होता है। इसकी आंतरिक झिल्ली अंदर की ओर अनेक तहें बनाती है जिन्हें क्राइस्टी (Cristae) कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में अपना स्वयं का डीएनए तथा राइबोसोम होता है, इसलिए इसे 'अर्धस्वायत्त कोशिकांग' कहा जाता है। अधिक ऊर्जा की आवश्यकता वाली कोशिकाओं, जैसे मांसपेशी और यकृत कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या अधिक होती है।
प्लास्टिड (Plastids): केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाने वाले झिल्लीबद्ध कोशिकांग हैं। इनमें क्लोरोप्लास्ट सबसे महत्वपूर्ण है जिसमें हरा वर्णक क्लोरोफिल पाया जाता है। क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण की क्रिया का स्थल है। क्लोरोप्लास्ट में थायलाकॉयड और ग्रैना जैसी संरचनाएँ होती हैं। प्लास्टिड भी अर्धस्वायत्त होते हैं क्योंकि इनमें अपना डीएनए होता है। ल्यूकोप्लास्ट (रंगहीन, भंडारण) और क्रोमोप्लास्ट (रंगीन, रंग प्रदान करने वाले) अन्य प्रकार के प्लास्टिड हैं।
राइबोसोम (Ribosome): यह छोटे गोल कण हैं जो प्रोटीन संश्लेषण का स्थल हैं। ये कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र रूप से या अंतर्द्रव्यी जालिका पर स्थित रहते हैं। इनमें झिल्ली नहीं होती, इसलिए ये गैर-झिल्लीबद्ध कोशिकांग हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिका में 70S और यूकैरियोटिक कोशिका में 80S राइबोसोम होते हैं।
अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum - ER): यह झिल्लियों से बना जाल है जो केन्द्रक से जुड़ा रहता है। यह पदार्थों के परिवहन का मार्ग बनाता है। राइबोसोम युक्त अंतर्द्रव्यी जालिका को खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) कहते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण करती है, तथा बिना राइबोसोम वाली को चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) कहते हैं जो लिपिड संश्लेषण करती है।
गॉल्जीकाय (Golgi Body): इसे कोशिका का पैकेजिंग और वितरण केंद्र कहते हैं। यह चपटी थैलियों (सिस्टर्नी) का समूह होता है। इसका कार्य प्रोटीनों को पैकेज करना, उनमें परिवर्तन करना और उन्हें कोशिका के विभिन्न भागों तक पहुँचाना है। पादप कोशिका में गॉल्जीकाय से डिक्टियोसोम भी बनते हैं।
लाइसोसोम (Lysosome): ये कोशिका का पाचक तंत्र हैं। इनमें पाचक एंजाइम होते हैं जो टूटे-फूटे पदार्थों और रोगाणुओं को पचा देते हैं। अत्यधिक सक्रियता पर ये स्वयं कोशिका को भी नष्ट कर देते हैं, इसलिए इन्हें 'आत्मघाती थैली' (Suicidal Bag) भी कहा जाता है।
रसधानी (Vacuole): यह जल, अपशिष्ट और पोषक पदार्थों के संचयन की थैली है। पादप कोशिकाओं में एक बड़ी रसधानी होती है जबकि जंतु कोशिकाओं में छोटी-छोटी अनेक रसधानियाँ होती हैं। पादप कोशिका में रसधानी परासरण द्वारा जल अवशोषण में सहायता करती है।
सेंट्रोसोम (Centrosome): केवल जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है। इसमें दो सेंट्रिओल होते हैं जो कोशिका विभाजन के समय तर्कु (Spindle) निर्माण में सहायता करते हैं। पादप कोशिकाओं में सेंट्रोसोम नहीं होता।
सेंट्रिओल: यह सूक्ष्मनलिकाओं से बना बेलनाकार कोशिकांग है जो जंतु कोशिका विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परीक्षा में प्रायः किसी कोशिकांग के 'नाम' दिए जाकर 'कार्य' पूछा जाता है या इसके विपरीत। जैसे 'कोशिका का पावर हाउस' कौन है, 'आत्मघाती थैली' कौन है, 'कोशिका का पैकेजिंग केंद्र' कौन है। इन उपनामों को याद रखना अत्यंत लाभदायक है।
| कोशिकांग | झिल्लीबद्ध | मुख्य कार्य | उपनाम |
|---|---|---|---|
| माइटोकॉन्ड्रिया | हाँ | एटीपी के रूप में ऊर्जा निर्माण | ऊर्जा घर / पावर हाउस |
| क्लोरोप्लास्ट | हाँ | प्रकाश संश्लेषण | हरा संयंत्र |
| राइबोसोम | नहीं | प्रोटीन संश्लेषण | प्रोटीन का कारखाना |
| गॉल्जीकाय | हाँ | पैकेजिंग व वितरण | पैकेजिंग केंद्र |
| लाइसोसोम | हाँ | पाचन एवं अपशिष्ट नष्ट करना | आत्मघाती थैली |
| अंतर्द्रव्यी जालिका | हाँ | परिवहन, प्रोटीन/लिपिड संश्लेषण | कोशिका का रक्त-मार्ग |
| आधार | झिल्लीबद्ध कोशिकांग | गैर-झिल्लीबद्ध कोशिकांग |
|---|---|---|
| झिल्ली | अपनी झिल्ली होती है | झिल्ली नहीं होती |
| उदाहरण | माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, ER, लाइसोसोम | राइबोसोम, सेंट्रोसोम, सेंट्रिओल |
| प्रोकैरियोट में | अनुपस्थित | केवल राइबोसोम उपस्थित |
| कार्य | जटिल कार्य जैसे ऊर्जा, पैकेजिंग | प्रोटीन संश्लेषण, कोशिका विभाजन |
flowchart TD
A[कोशिकांग] --> B[झिल्लीबद्ध]
A --> C[गैर-झिल्लीबद्ध]
B --> B1[माइटोकॉन्ड्रिया - ऊर्जा घर]
B --> B2[क्लोरोप्लास्ट - प्रकाश संश्लेषण]
B --> B3[गॉल्जीकाय - पैकेजिंग]
B --> B4[लाइसोसोम - आत्मघाती थैली]
B --> B5[अंतर्द्रव्यी जालिका - परिवहन]
B --> B6[रसधानी - संचयन]
C --> C1[राइबोसोम - प्रोटीन संश्लेषण]
C --> C2[सेंट्रोसोम - कोशिका विभाजन]
C --> C3[सेंट्रिओल - तर्कु निर्माण]
कोशिकांग कोशिका की आंतरिक कार्यशाला हैं जो जीवन की सभी आधारभूत क्रियाओं को संपन्न करते हैं। इस अध्याय में हमने माइटोकॉन्ड्रिया (ऊर्जा निर्माण), क्लोरोप्लास्ट (प्रकाश संश्लेषण), राइबोसोम (प्रोटीन संश्लेषण), गॉल्जीकाय (पैकेजिंग), लाइसोसोम (पाचन), अंतर्द्रव्यी जालिका (परिवहन), रसधानी (संचयन) तथा सेंट्रोसोम (कोशिका विभाजन) के कार्यों का अध्ययन किया। झिल्लीबद्ध और गैर-झिल्लीबद्ध कोशिकांगों का वर्गीकरण भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में कोशिकांगों के कार्यों से संबंधित प्रश्न लगभग अवश्य पूछे जाते हैं, इसलिए प्रत्येक कोशिकांग की संरचना और कार्य की पकड़ आवश्यक है। अभ्यास के दौरान कार्य-आधारित प्रश्नों को हल करने से यह अध्याय पूर्णतः आत्मसात हो जाता है।