परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या Notes

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – पदार्थ और परमाणु संरचना विषय-वस्तु: 14.7 परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या

1. परिचय

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या परमाणु की पहचान तथा संरचना निर्धारित करने वाली दो मूलभूत राशियाँ हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस अध्याय से परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने तथा समस्थानिक और समभारिक से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु संख्या कहते हैं, जिसे Z से दर्शाया जाता है। नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या का योग द्रव्यमान संख्या कहलाता है, जिसे A से दर्शाया जाता है।

परमाणु संख्या ही तत्व की पहचान होती है। प्रत्येक तत्व के परमाणु की परमाणु संख्या भिन्न होती है। उदाहरण के लिए हाइड्रोजन की परमाणु संख्या 1, कार्बन की 6, ऑक्सीजन की 8, लोहे की 26 तथा ताँबे की 29 होती है। परमाणु संख्या का प्रतीक X के रूप में नाभिक पर लिखा जाता है, जहाँ X तत्व का प्रतीक है। द्रव्यमान संख्या को प्रतीक के ऊपर तथा परमाणु संख्या को प्रतीक के नीचे लिखा जाता है।

इस अध्याय में हम परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या की परिभाषाओं, इनके बीच संबंध, न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने की विधि, आधुनिक आवर्त सारणी से इनका संबंध, समस्थानिक (आइसोटोप) और समभारिक (आइसोबार) की अवधारणा का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करना सबसे सामान्य प्रश्न है।

2. परमाणु संख्या (Atomic Number)

परमाणु संख्या किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या है। इसे Z अक्षर से दर्शाया जाता है। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है, अतः परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या (उदासीन परमाणु में)।

परमाणु संख्या का महत्व: परमाणु संख्या किसी तत्व की पहचान निर्धारित करती है। परमाणु संख्या बदलते ही तत्व बदल जाता है। आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु संख्या के आधार पर ही व्यवस्थित किया जाता है। परमाणु संख्या ही तत्व के रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसी पर निर्भर करती है।

कुछ तत्वों की परमाणु संख्या: हाइड्रोजन (H) = 1, हीलियम (He) = 2, कार्बन (C) = 6, नाइट्रोजन (N) = 7, ऑक्सीजन (O) = 8, सोडियम (Na) = 11, एलुमिनियम (Al) = 13, क्लोरीन (Cl) = 17, कैल्शियम (Ca) = 20, लोहा (Fe) = 26, ताँबा (Cu) = 29, जस्ता (Zn) = 30, चाँदी (Ag) = 47, सोना (Au) = 79, पारा (Hg) = 80, सीसा (Pb) = 82।

रेलवे संदर्भ: रेलवे की लीड-एसिड बैटरी में सीसा (Pb, Z = 82) और सीसा डाइऑक्साइड (PbO2) का उपयोग होता है। विद्युत संपर्कों में ताँबा (Cu, Z = 29) तथा ओवरहेड लाइनों में एलुमिनियम (Al, Z = 13) प्रयुक्त होता है। ब्रेक पाइप और फिटिंग्स में स्टील (लोहा Fe, Z = 26) का उपयोग होता है।

उदाहरण: यदि किसी परमाणु में 11 प्रोटॉन हैं तो उसकी परमाणु संख्या 11 है और वह सोडियम है। उदासीन सोडियम परमाणु में 11 इलेक्ट्रॉन भी होंगे।

3. द्रव्यमान संख्या (Mass Number)

द्रव्यमान संख्या किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या का योग है। इसे A अक्षर से दर्शाया जाता है। द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या। द्रव्यमान संख्या सदैव पूर्णांक होती है और पूर्णांकित द्रव्यमान के लगभग बराबर होती है।

न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या - परमाणु संख्या, अर्थात n = A - Z। उदाहरण के लिए कार्बन की द्रव्यमान संख्या 12 तथा परमाणु संख्या 6 है, अतः न्यूट्रॉनों की संख्या = 12 - 6 = 6। ऑक्सीजन की द्रव्यमान संख्या 16, परमाणु संख्या 8, अतः न्यूट्रॉन = 16 - 8 = 8। सोडियम का द्रव्यमान संख्या 23, परमाणु संख्या 11, न्यूट्रॉन = 23 - 11 = 12। क्लोरीन का द्रव्यमान संख्या 35, परमाणु संख्या 17, न्यूट्रॉन = 35 - 17 = 18।

प्रतीकात्मक निरूपण: किसी परमाणु को द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या के साथ X के रूप में लिखा जाता है, जहाँ A द्रव्यमान संख्या (ऊपर), Z परमाणु संख्या (नीचे) तथा X तत्व का प्रतीक है। जैसे ऑक्सीजन-16 के लिए: O जिसकी ऊपर 16 और नीचे 8। इसका अर्थ है द्रव्यमान संख्या 16, परमाणु संख्या 8।

द्रव्यमान संख्या का महत्व: द्रव्यमान संख्या परमाणु के द्रव्यमान को निर्धारित करती है। भिन्न परमाणुओं की द्रव्यमान संख्या भिन्न हो सकती है। द्रव्यमान संख्या से न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात की जाती है जो परमाणु की स्थिरता में योगदान देती है।

उदाहरण प्रश्न: किसी परमाणु की परमाणु संख्या 26 तथा द्रव्यमान संख्या 56 है। न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। हल: न्यूट्रॉन = 56 - 26 = 30। यह तत्व लोहा (Fe) है।

4. समस्थानिक और समभारिक

समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं। समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है। समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं, केवल भौतिक गुणों में अंतर होता है।

समस्थानिकों के उदाहरण: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं — प्रोटियम (H-1), ड्यूटेरियम (H-2, भारी जल में) और ट्राइटियम (H-3, रेडियोधर्मी)। कार्बन के समस्थानिक C-12 और C-14 हैं, जहाँ C-14 रेडियोधर्मी है तथा कार्बन डेटिंग में प्रयुक्त होता है। यूरेनियम के समस्थानिक U-235 और U-238 हैं, जिनमें U-235 विखंडनीय है। ऑक्सीजन के समस्थानिक O-16, O-17 और O-18 हैं। क्लोरीन के समस्थानिक Cl-35 और Cl-37 हैं।

समस्थानिकों के उपयोग: यूरेनियम-235 का उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में होता है। कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर उपचार में। आयोडीन-131 का उपयोग थायरॉइड उपचार में। कार्बन-14 का उपयोग पुरातात्विक वस्तुओं की आयु निर्धारण में।

समभारिक (Isobars): भिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान परंतु परमाणु संख्या भिन्न होती है, समभारिक कहलाते हैं। समभारिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है। उदाहरण के लिए आर्गन (Ar, Z = 18, A = 40) और कैल्शियम (Ca, Z = 20, A = 40) समभारिक हैं। कार्बन-14 (C, Z = 6, A = 14) और नाइट्रोजन-14 (N, Z = 7, A = 14) समभारिक हैं।

समस्थानिक बनाम समभारिक: समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान और द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, जबकि समभारिकों की द्रव्यमान संख्या समान और परमाणु संख्या भिन्न होती है। समस्थानिक एक ही तत्व के होते हैं, समभारिक भिन्न तत्वों के होते हैं।

समन्यूट्रॉनिक (Isotones): जिन परमाणुओं में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समन्यूट्रॉनिक कहते हैं। उदाहरण के लिए कार्बन-14 (6 प्रोटॉन, 8 न्यूट्रॉन) और ऑक्सीजन-16 (8 प्रोटॉन, 8 न्यूट्रॉन) समन्यूट्रॉनिक हैं।

औसत परमाणु द्रव्यमान: किसी तत्व का औसत परमाणु द्रव्यमान उसके समस्थानिकों के द्रव्यमानों का भारित औसत होता है। क्लोरीन के 75% परमाणु Cl-35 (द्रव्यमान 35) और 25% Cl-37 (द्रव्यमान 37) हैं, अतः क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 होता है। कार्बन का औसत परमाणु द्रव्यमान 12.011 होता है।

उदाहरण प्रश्न: यूरेनियम-235 में कितने न्यूट्रॉन हैं, यदि परमाणु संख्या 92 है? हल: न्यूट्रॉन = 235 - 92 = 143।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या

तत्व प्रतीक परमाणु संख्या (Z) द्रव्यमान संख्या (A) न्यूट्रॉन (A - Z)
हाइड्रोजन H 1 1 0
कार्बन C 6 12 6
ऑक्सीजन O 8 16 8
सोडियम Na 11 23 12
क्लोरीन Cl 17 35 18
लोहा Fe 26 56 30

तालिका 2: समस्थानिक और समभारिक की तुलना

आधार समस्थानिक समभारिक
परमाणु संख्या समान भिन्न
द्रव्यमान संख्या भिन्न समान
तत्व एक ही तत्व के भिन्न तत्वों के
न्यूट्रॉन भिन्न भिन्न
रासायनिक गुण समान भिन्न
उदाहरण H-1, H-2, H-3 Ar-40, Ca-40

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या] --> B[परमाणु संख्या Z]
    A --> C[द्रव्यमान संख्या A]
    A --> D[समस्थानिक]
    A --> E[समभारिक]
    B --> B1[प्रोटॉनों की संख्या]
    B --> B2[तत्व की पहचान]
    C --> C1[प्रोटॉन + न्यूट्रॉन]
    C --> C2[n = A - Z]
    D --> D1[Z समान, A भिन्न]
    D --> D2[उदाहरण: H-1, H-2, H-3]
    E --> E1[A समान, Z भिन्न]
    E --> E2[उदाहरण: Ar-40, Ca-40]
    C2 --> C21[न्यूट्रॉन ज्ञात करना]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या नाभिक 6p + 6n इलेक्ट्रॉन (6e^-) कार्बन-12 (C) परमाणु संख्या Z = 6, द्रव्यमान संख्या A = 12, न्यूट्रॉन = 6 स्वर्ण नियम न्यूट्रॉन = A - Z; उदासीन परमाणु में e = p = Z।

समस्थानिक और समभारिक समस्थानिक परमाणु संख्या समान द्रव्यमान संख्या भिन्न एक ही तत्व के H-1, H-2, H-3 C-12, C-14 U-235, U-238 समभारिक द्रव्यमान संख्या समान परमाणु संख्या भिन्न भिन्न तत्वों के Ar-40, Ca-40 C-14, N-14 S-32, P-32 स्मरण सूत्र समस्थानिक = समान स्थान (समान Z), भिन्न भार समभारिक = समान भार (समान A), भिन्न तत्व स्वर्ण नियम Z समान हो तो समस्थानिक, A समान हो तो समभारिक।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र परमाणु संख्या को द्रव्यमान संख्या समझ लेते हैं; Z प्रोटॉनों की संख्या है, A प्रोटॉन+न्यूट्रॉन का योग है।
  2. न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात करते समय A + Z कर देना, जबकि सूत्र n = A - Z है।
  3. उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या और प्रोटॉनों की संख्या को भिन्न मान लेना।
  4. समस्थानिकों में द्रव्यमान संख्या समान मान लेना; समस्थानिकों की द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
  5. समभारिकों को एक ही तत्व का रूप मान लेना; समभारिक भिन्न तत्वों के होते हैं।
  6. हाइड्रोजन में न्यूट्रॉन की संख्या 1 मान लेना, जबकि सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) में न्यूट्रॉन नहीं होता।
  7. औसत परमाणु द्रव्यमान को समस्थानिकों के भार का सरल औसत मान लेना; यह भारित औसत होता है।
  8. क्लोरीन के समस्थानिक Cl-35 और Cl-37 के अनुपात 75:25 के कारण औसत 35.5 होता है, इसे न समझना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. सूत्र n = A - Z हमेशा याद रखें, न्यूट्रॉनों की संख्या सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
  2. उदासीन परमाणु में e = p = Z लिखें, आयन में यह संबंध बदलता है।
  3. समस्थानिक और समभारिक की पहचान का स्मरण रखें: Z समान = समस्थानिक, A समान = समभारिक।
  4. प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्राइटियम (H-1, H-2, H-3) के उदाहरण याद रखें।
  5. क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 क्यों है, इसकी व्याख्या तैयार रखें।
  6. रेलवे संदर्भ: बैटरी में लेड (Pb, Z = 82), लाइन में ताँबा (Cu, Z = 29)।
  7. प्रतीक निरूपण में A ऊपर और Z नीचे लिखा जाता है, क्रम न भूलें।
  8. U-235 विखंडनीय और U-238 गैर-विखंडनीय है, यह तथ्य रखें।

10. निष्कर्ष

परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या परमाणु की पहचान की आधारशिला हैं। इस अध्याय में हमने परमाणु संख्या (Z) को नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या के रूप में तथा द्रव्यमान संख्या (A) को प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के योग के रूप में समझा। न्यूट्रॉनों की संख्या A - Z से ज्ञात करना सीखा। समस्थानिकों (समान Z, भिन्न A) और समभारिकों (समान A, भिन्न Z) की अवधारणा को उदाहरणों सहित समझा। हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक, क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 तथा यूरेनियम के समस्थानिकों के उपयोगों का अध्ययन किया। परमाणु संख्या ही तत्व की पहचान है और आवर्त सारणी की व्यवस्था भी इसी पर आधारित है। यह अध्याय संयोजकता, रासायनिक सूत्र तथा रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने की नींव है। रेलवे परीक्षा में यह उच्च स्कोरिंग विषय है, अतः सूत्र और उदाहरणों का अभ्यास आवश्यक है।