विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.2 भारत की भौतिक विशेषताएँ
भारत की भौतिक विशेषताएँ अत्यंत विविध हैं क्योंकि देश में ऊँचे-ऊँचे पर्वत, विशाल मैदान, शुष्क मरुस्थल, उपजाऊ पठार और लंबी तटरेखाएँ सभी मिलती हैं। भारत को मुख्यतः छह भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है – उत्तर का पर्वतीय प्रदेश (हिमालय), उत्तर का विशाल मैदान (सिंधु-गंगा का मैदान), प्रायद्वीपीय पठार (दक्कन का पठार), तटीय मैदान, द्वीप समूह और थार का मरुस्थल। इन भौतिक विभाजनों का सीधा संबंध जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और मानव जीवन से होता है, अतः रेलवे परीक्षा में इनके बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं।
हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और इसे नवीन वलित (नवीनतम) पर्वत कहा जाता है। हिमालय को तीन समानांतर श्रेणियों में बाँटा गया है – हिमाद्रि (बृहत हिमालय), हिमाचल (मध्य हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय)। हिमालय में विश्व की सबसे ऊँची चोटियाँ पाई जाती हैं, जैसे माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर), जो नेपाल में स्थित है। भारत में सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा (8586 मीटर) है, जो सिक्किम में स्थित है। हिमालय के दक्षिण में सिंधु-गंगा का उपजाऊ विशाल मैदान फैला है।
दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार स्थित है जो विश्व के सबसे प्राचीन भूखंडों में से एक है। यह मुख्यतः गोंडवाना भूभाग का अवशेष है तथा इसमें दक्कन का पठार, विंध्याचल, सतपुड़ा, अरावली और पश्चिमी-पूर्वी घाट जैसी पर्वत श्रृंखलाएँ शामिल हैं। पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के बीच का क्षेत्र दक्कन पठार कहलाता है। इस अध्याय में हम इन सभी भौतिक विभाजनों की प्रमुख विशेषताओं, पर्वत श्रृंखलाओं, मैदानों, पठारों, मरुस्थल और द्वीप समूहों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
हिमालय पर्वत विश्व की सबसे ऊँची और नवीनतम वलित पर्वत श्रृंखला है, जो पश्चिम में कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक लगभग 2400 किलोमीटर की लंबाई में फैली है। हिमालय की तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियाँ हैं। हिमाद्रि (बृहत हिमालय) सबसे उत्तर में है और इसमें कंचनजंगा (8586 मीटर) तथा नंदादेवी (7816 मीटर) जैसी ऊँची चोटियाँ हैं। हिमाचल (मध्य हिमालय) में पीर पंजाल, धौलाधार और मसूरी की पहाड़ियाँ आती हैं। शिवालिक (बाह्य हिमालय) सबसे दक्षिणी और नीची श्रेणी है। भारत में सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा है, जबकि सिक्किम का कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान इसी क्षेत्र में है।
हिमालय को तीन भौगोलिक खंडों में भी बाँटा जाता है – पंजाब हिमालय (सिंधु और सतलुज के बीच), कुमाऊँ हिमालय (सतलुज और काली के बीच) और नेपाल हिमालय (काली और तिस्ता के बीच)। असम हिमालय तिस्ता से दिहांग नदी तक फैला है। परीक्षा में पूछा जाता है कि माउंट एवरेस्ट किस देश में है, जिसका उत्तर नेपाल है। भारत की प्रमुख चोटियों में कंचनजंगा (सिक्किम), नंदादेवी (उत्तराखंड), नंगा पर्वत (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) और नामचा बरवा (अरुणाचल प्रदेश) प्रमुख हैं। हिमालय से भारत की प्रमुख नदियाँ गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र आदि निकलती हैं, जो सिंधु-गंगा मैदान को उपजाऊ बनाती हैं।
पंजाब के दक्षिण-पश्चिम और राजस्थान में थार का मरुस्थल स्थित है, जिसे राजस्थान का मरुस्थल भी कहा जाता है। यह विश्व का सत्रहवाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है और भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 5.5 प्रतिशत क्षेत्र इसके अंतर्गत आता है। मरुस्थल में लूनी नदी मुख्य नदी है और यहाँ मवेशियों व ऊँटों का पालन मुख्य व्यवसाय है। मरुस्थल के विस्तार को रोकने के लिए इंदिरा गांधी नहर का निर्माण किया गया है, जो पंजाब से राजस्थान तक पानी पहुँचाती है।
सिंधु-गंगा का मैदान हिमालय के दक्षिण में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित विशाल जलोढ़ मैदान है। यह दुनिया का सबसे विशाल जलोढ़ मैदान है तथा विश्व के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। यह मैदान पूर्व में असम से पश्चिम में पंजाब तक लगभग 2400 किलोमीटर लंबा है। इस मैदान में खादर (नवीन जलोढ़) और बांगर (प्राचीन जलोढ़) नामक दो प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। यहाँ गेहूँ, चावल, गन्ना, कपास और दलहन की खेती प्रमुख रूप से होती है।
प्रायद्वीपीय पठार भारत के दक्षिण में स्थित है और इसे दक्कन पठार कहा जाता है। यह विश्व का सबसे प्राचीन भूखंड है जो प्राचीन गोंडवाना महाद्वीप का भाग रहा है। इसके उत्तर में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाएँ स्थित हैं। नर्मदा नदी विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच पश्चिम की ओर बहती है। पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) प्रायद्वीप के पश्चिमी किनारे पर लगभग 1600 किलोमीटर तक फैला है और इसमें अनामुडी (2695 मीटर) चोटी स्थित है। पूर्वी घाट प्रायद्वीप के पूर्वी किनारे पर हैं तथा इनमें महेंद्रगिरि प्रमुख चोटी है। पश्चिमी घाट को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखला है, जो दिल्ली से लेकर गुजरात तक फैली है। इसका सबसे ऊँचा शिखर गुरु शिखर (1722 मीटर) है, जो माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है। नीलगिरि पहाड़ियाँ पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के संगम पर स्थित हैं और यहीं उदगमंडलम (ऊटी) नामक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। प्रायद्वीपीय पठार में काले मिट्टी (रेगुर) क्षेत्र दक्कन लावा क्षेत्र में फैला है, जहाँ कपास की खेती प्रमुख है।
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर संकीर्ण तटीय मैदान पाए जाते हैं। पश्चिमी तट को गुजरात से केरल तक कई खंडों में बाँटा गया है – काठियावाड़ तट, कोंकण तट (महाराष्ट्र-गोवा), कर्नाटक तट (कनारा) और मालाबार तट (केरल)। पूर्वी तट पर कोरोमंडल तट (तमिलनाडु) और उत्तरी सरकार तट (आंध्र प्रदेश-ओडिशा) स्थित हैं। पश्चिमी तट पर पूर्वी तट की तुलना में अधिक वर्षा होती है। केरल के मालाबार तट पर बैकवाटर तथा अघाड़ झीलें पाई जाती हैं, जिनमें वेम्बनाड झील प्रसिद्ध है। पूर्वी तट पर मछली पकड़ने और नमक बनाने का कार्य अधिक होता है।
भारत के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं – अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान-निकोबार द्वीप समूह। लक्षद्वीप में कुल 36 द्वीप हैं और इनमें से केवल दस द्वीपों पर बस्ती है। ये मूंगा (कोरल) द्वीप हैं। अंडमान-निकोबार में लगभग 572 द्वीप हैं और यहाँ विश्व का सबसे बड़ा मूंगा द्वीपसमूह का भाग है। अंडमान-निकोबार का सबसे ऊँचा बिंदु सैडल पीक है, जो उत्तरी अंडमान में स्थित है। भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट भी अंडमान-निकोबार में स्थित है। द्वीपों के अध्ययन में यह याद रखें कि लक्षद्वीप मूंगा निर्मित है जबकि अंडमान-निकोबार पहाड़ी द्वीप हैं।
| भौतिक प्रदेश | प्रमुख विशेषताएँ | उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्तर का पर्वतीय प्रदेश | नवीनतम वलित पर्वत, हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक | कंचनजंगा, नंदादेवी |
| उत्तर का विशाल मैदान | विश्व का सबसे बड़ा जलोढ़ मैदान | सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान |
| प्रायद्वीपीय पठार | प्राचीन गोंडवाना भूखंड | दक्कन पठार, अरावली |
| तटीय मैदान | पश्चिमी (कोंकण, मालाबार) व पूर्वी तट | कोरोमंडल तट |
| मरुस्थल | शुष्क क्षेत्र, थार | राजस्थान |
| द्वीप समूह | मूंगा द्वीप (लक्षद्वीप), पहाड़ी द्वीप (अंडमान) | लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार |
| पर्वत श्रृंखला | प्रकार | सबसे ऊँची चोटी (ऊँचाई) |
|---|---|---|
| बृहत हिमालय (हिमाद्रि) | नवीन वलित | कंचनजंगा 8586 मीटर |
| पश्चिमी घाट | प्राचीन पठार का किनारा | अनामुडी 2695 मीटर |
| अरावली | सबसे प्राचीन वलित | गुरु शिखर 1722 मीटर |
| नीलगिरि | पश्चिमी-पूर्वी घाट का संगम | डोड्डाबेट्टा 2637 मीटर |
| सतपुड़ा | प्रायद्वीप के उत्तर में | धूपगढ़ 1350 मीटर |
flowchart TD
A[भारत की भौतिक विशेषताएँ] --> B[हिमालय पर्वत]
A --> C[उत्तर का मैदान]
A --> D[प्रायद्वीपीय पठार]
A --> E[तटीय मैदान]
A --> F[द्वीप समूह]
A --> G[थार मरुस्थल]
B --> B1[हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक]
B --> B2[कंचनजंगा 8586 मीटर]
C --> C1[सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान]
C --> C2[खादर एवं बांगर मिट्टी]
D --> D1[दक्कन पठार, अरावली]
D --> D2[पश्चिमी व पूर्वी घाट]
E --> E1[कोंकण, मालाबार, कोरोमंडल]
F --> F1[लक्षद्वीप - मूंगा द्वीप]
F --> F2[अंडमान-निकोबार]
भारत की भौतिक विशेषताएँ देश की प्राकृतिक संरचना का प्रतिबिंब हैं। इस अध्याय में हमने हिमालय की तीन श्रेणियों (हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक), विश्व के सबसे बड़े जलोढ़ मैदान (सिंधु-गंगा मैदान), प्राचीन प्रायद्वीपीय पठार, पश्चिमी-पूर्वी घाट, अरावली, थार मरुस्थल, तटीय मैदानों तथा लक्षद्वीप-अंडमान निकोबार द्वीप समूहों की संरचना का अध्ययन किया। इन तथ्यों को तालिकाओं और माइंड मैप के माध्यम से स्मरण करने से परीक्षा में त्वरित उत्तर देना आसान होता है। भौतिक विभाजनों की पकड़ आगे के अध्यायों – नदियाँ, जलवायु, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधन – को समझने के लिए अनिवार्य आधार है।