22.1 भारतीय अर्थव्यवस्था Notes

22.1 भारतीय अर्थव्यवस्था

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – अर्थव्यवस्था खेल और विज्ञान विषय-वस्तु: 22.1 भारतीय अर्थव्यवस्था

1. परिचय

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसे विकासशील तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था की श्रेणी में रखा जाता है। स्वतंत्रता के समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर थी, किंतु आज सेवा क्षेत्र इसका सबसे बड़ा घटक बन गया है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की सामान्य जागरूकता की परीक्षा में अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्न लगभग हर बार पूछे जाते हैं, इसलिए इस अध्याय की समझ आवश्यक है। अर्थव्यवस्था का अर्थ जनसंख्या द्वारा उपभोग, उत्पादन, वितरण और विनिमय से जुड़ी गतिविधियों की व्यवस्था से है, जिसमें व्यक्ति तथा सरकार दोनों भाग लेते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य क्षेत्र हैं — प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, मत्स्यन), द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग, विनिर्माण) और तृतीयक क्षेत्र (सेवाएँ, बैंकिंग, परिवहन)। स्वतंत्रता के बाद योजना आयोग ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से अर्थव्यवस्था का विकास किया। सन् 1991 में नई आर्थिक नीति के अंतर्गत उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) नामक सुधार अपनाए गए, जिससे अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। सन् 2015 में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना की गई।

इस अध्याय में हम भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना, राष्ट्रीय आय से जुड़ी संकल्पनाएँ, योजना आयोग और नीति आयोग, आर्थिक सुधार तथा विश्व बैंक-IMF से जुड़ी तथ्यों का अध्ययन करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से राष्ट्रीय आय के सूत्र, जीडीपी-जीएनपी में अंतर, नीति आयोग के अध्यक्ष और वर्तमान आर्थिक आँकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अंत में त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाओं, माइंड मैप और चित्रों के माध्यम से संपूर्ण विषय को दोहराया जाएगा। यह अध्याय अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य अध्यायों की नींव है।

2. राष्ट्रीय आय और इसके घटक

राष्ट्रीय आय किसी देश की अर्थव्यवस्था की आर्थिक सेहत का माप होती है। परीक्षा में राष्ट्रीय आय से जुड़ी संकल्पनाओं जैसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP), शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) और प्रति व्यक्ति आय से प्रश्न पूछे जाते हैं। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की सीमा के भीतर एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग है। जीडीपी की गणना तीन विधियों से की जाती है — उत्पादन विधि, आय विधि और व्यय विधि। भारत में जीडीपी की गणना वित्तीय वर्ष के आधार पर की जाती है, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में देश की सीमा के भीतर उत्पादन के साथ-साथ विदेशों से अर्जित शुद्ध कारक आय भी जुड़ती है। इसका सूत्र है GNP = GDP + शुद्ध कारक आय (NFIA)। शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) प्राप्त करने के लिए जीएनपी में से मूल्यह्रास घटाया जाता है। बाजार कीमतों पर राष्ट्रीय आय और कारक लागत पर राष्ट्रीय आय में अंतर परोक्ष कर तथा सब्सिडी से होता है। सदैव याद रखें कि NNP फैक्टर कॉस्ट पर राष्ट्रीय आय (NI) कहलाता है, जो राष्ट्रीय आय का सही माप है। वास्तविक जीडीपी की गणना आधार वर्ष की कीमतों पर की जाती है, जबकि नाममात्र जीडीपी वर्तमान कीमतों पर होती है।

भारत में राष्ट्रीय आय की गणना केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा की जाती है, जो अब राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) का भाग है। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त होती है। प्रति व्यक्ति आय आर्थिक विकास का वास्तविक संकेतक मानी जाती है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर विश्व बैंक भारत की जीडीपी की गणना करता है। परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि सेवा क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 50-55 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, जबकि कृषि लगभग 16-18 प्रतिशत और उद्योग लगभग 27-30 प्रतिशत का योगदान देता है।

3. योजना आयोग और नीति आयोग

योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। योजना आयोग पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन करता था। भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में प्रारंभ हुई, जिसका मुख्य केंद्र कृषि था। दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) में हरित क्रांति से पूर्व औद्योगिक विकास और महालनोबिस मॉडल पर बल दिया गया। बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी, जिसके अंतर्गत तीव्र, सतत एवं समावेशी विकास लक्ष्य था। इसके पश्चात योजना आयोग को समाप्त कर दिया गया।

सन् 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) की स्थापना की गई। नीति आयोग एक गैर-संवैधानिक, सलाहकार संस्था है जो सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर कार्य करती है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और विशेषज्ञ सदस्य होते हैं। योजना आयोग टॉप-डाउन दृष्टिकोण अपनाता था जबकि नीति आयोग बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाता है। नीति आयोग की पहलों में आत्मनिर्भर भारत, नीति आयोग की एसडीजी इंडिया इंडेक्स और एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम प्रमुख हैं। हाल ही में नीति आयोग की स्थापना की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य पर कार्य किया जा रहा है।

योजना आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों में वार्षिक योजनाएँ, रोलिंग योजनाएँ और योजना के विघटन से जुड़े प्रश्न परीक्षा में आते हैं। योजना आयोग के अंतर्गत कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ बनीं। तीसरी पंचवर्षीय योजना के बीच में युद्ध के कारण योजनावकाश (1966-69) रखा गया। प्रत्येक योजना का मुख्य उद्देश्य याद रखें — पहली कृषि, दूसरी औद्योगिकीकरण, छठी योजना में गरीबी उन्मूलन, आठवीं योजना में आधुनिकीकरण और दसवीं योजना में 8 प्रतिशत विकास दर। नीति आयोग के बारे में ध्यान रखें कि यह विधायी या संवैधानिक संस्था नहीं है बल्कि एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा गठित थिंक टैंक है।

4. आर्थिक सुधार और महत्वपूर्ण संस्थाएँ

सन् 1991 के आर्थिक संकट के समय भारत में नई आर्थिक नीति (NEP) लागू की गई, जिसमें उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) शामिल थे। इस नीति के अंतर्गत लाइसेंस राज का अंत किया गया, विदेशी निवेश (FDI) के लिए सीमाएँ शिथिल की गईं और रुपये का अवमूल्यन किया गया। 1991 का सुधार तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव तथा वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में हुआ। उदारीकरण का अर्थ है सरकारी नियंत्रणों में कमी, निजीकरण का अर्थ है सार्वजनिक उपक्रमों में निजी भागीदारी और वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण। इसी नीति के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तीव्र गति से विकसित हुई।

भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषता है कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र समानांतर रूप से कार्य करते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) जैसे भारतीय रेलवे, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रेलवे भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम और देश का सबसे बड़ा नियोक्ता है। विदेशी मुद्रा भंडार, निर्यात-आयात संतुलन और चालू खाता घाटा (CAD) अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) का संस्थापक सदस्य है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की स्थापना 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में हुई थी।

भारत में मौद्रिक नीति की देखरेख भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करता है, जिसकी स्थापना 1935 में हुई थी। वित्त आयोग भारत की संवैधानिक संस्था है जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण का निर्धारण करता है। वित्त आयोग का गठन हर पाँच वर्ष में राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। भारत का बजट वित्त मंत्री संसद में प्रस्तुत करता है, जो सरकार की आय और व्यय का पूर्ण विवरण होता है। पहला बजट 1860 में जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया था। परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि भारत की जीडीपी की गणना का आधार वर्ष 2011-12 है। इन संस्थाओं की स्थापना वर्ष और भूमिकाएँ परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: राष्ट्रीय आय की प्रमुख संकल्पनाएँ

संकल्पना परिभाषा / सूत्र
जीडीपी (GDP) देश की सीमा के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं-सेवाओं का मूल्य
जीएनपी (GNP) GDP + शुद्ध कारक आय
एनएनपी (NNP) GNP - मूल्यह्रास
राष्ट्रीय आय (NI) NNP फैक्टर कॉस्ट पर = NNP - परोक्ष कर + सब्सिडी
प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
वास्तविक जीडीपी आधार वर्ष की कीमतों पर गणना
नाममात्र जीडीपी वर्तमान कीमतों पर गणना

तालिका 2: महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थाएँ

संस्था स्थापना वर्ष मुख्य भूमिका
भारतीय रिजर्व बैंक 1935 मौद्रिक नीति, मुद्रा जारी करना
योजना आयोग 1950 पंचवर्षीय योजनाएँ
विश्व बैंक / IMF 1944 ब्रेटन वुड्स संस्थाएँ
WTO 1995 वैश्विक व्यापार नियम
नीति आयोग 2015 नीति निर्माण, सलाहकार संस्था
वित्त आयोग संवैधानिक केंद्र-राज्य वित्तीय वितरण

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[भारतीय अर्थव्यवस्था] --> B[राष्ट्रीय आय]
    A --> C[योजना आयोग]
    A --> D[नीति आयोग]
    A --> E[आर्थिक सुधार]
    A --> F[संस्थाएँ]
    B --> B1[GDP = घरेलू उत्पाद]
    B --> B2[GNP = GDP + NFIA]
    B --> B3[NNP = GNP - मूल्यह्रास]
    B --> B4[प्रति व्यक्ति आय]
    C --> C1[1950 में स्थापित]
    C --> C2[12 पंचवर्षीय योजनाएँ]
    D --> D1[2015 में स्थापित]
    D --> D2[बॉटम-अप दृष्टिकोण]
    E --> E1[उदारीकरण]
    E --> E2[निजीकरण]
    E --> E3[वैश्वीकरण]
    F --> F1[RBI 1935]
    F --> F2[WTO 1995]
    F --> F3[वित्त आयोग]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र प्राथमिक क्षेत्र कृषि पशुपालन मत्स्यन योगदान लगभग 16-18 प्रतिशत द्वितीयक क्षेत्र उद्योग विनिर्माण निर्माण योगदान लगभग 27-30 प्रतिशत तृतीयक क्षेत्र सेवाएँ बैंकिंग परिवहन योगदान लगभग 50-55 प्रतिशत सेवा क्षेत्र भारत की जीडीपी में सबसे बड़ा योगदान देता है विकासशील देशों में कृषि का योगदान घटता है भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है स्वर्ण नियम जीडीपी में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र, रोजगार में सबसे बड़ा कृषि क्षेत्र।

राष्ट्रीय आय की गणना का क्रम GDP घरेलू उत्पाद + शुद्ध कारक आय विदेशों से प्राप्त GNP राष्ट्रीय उत्पाद GNP से मूल्यह्रास घटाने पर NNP प्राप्त होता है NNP - परोक्ष कर + सब्सिडी = राष्ट्रीय आय (फैक्टर कॉस्ट) प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या वास्तविक जीडीपी = आधार वर्ष (2011-12) की कीमतों पर नाममात्र जीडीपी = वर्तमान कीमतों पर स्वर्ण नियम GNP = GDP + शुद्ध कारक आय, यह सूत्र सदैव याद रखें।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. जीडीपी और जीएनपी में अंतर नहीं समझना — जीएनपी में विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय जुड़ती है।
  2. राष्ट्रीय आय को जीडीपी के बराबर मान लेना, जबकि राष्ट्रीय आय NNP फैक्टर कॉस्ट पर होती है।
  3. योजना आयोग और नीति आयोग दोनों को संवैधानिक संस्था समझना, जबकि दोनों गैर-संवैधानिक हैं।
  4. पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य केंद्र औद्योगिकीकरण मान लेना, जबकि वह कृषि था।
  5. नीति आयोग के अध्यक्ष को उपाध्यक्ष समझना — नीति आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
  6. वास्तविक जीडीपी को वर्तमान कीमतों पर तथा नाममात्र जीडीपी को आधार कीमतों पर गणना करना।
  7. 1991 के आर्थिक सुधारों को अमेरिकी प्रधानमंत्री के काल से जोड़ना, जबकि यह पी.वी. नरसिंह राव के काल में हुआ।
  8. RBI की स्थापना वर्ष को 1935 के स्थान पर गलत लिखना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. राष्ट्रीय आय के सभी सूत्र याद रखें — GDP, GNP, NNP और NI के बीच का संबंध सबसे महत्वपूर्ण है।
  2. योजना आयोग (1950) और नीति आयोग (2015) की स्थापना वर्ष सदैव साथ याद रखें।
  3. पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य याद रखें — पहली कृषि, दूसरी औद्योगिकीकरण।
  4. सेवा क्षेत्र को जीडीपी का सबसे बड़ा योगदानकर्ता याद रखें (लगभग 50-55 प्रतिशत)।
  5. LPG सुधार को 1991 और नरसिंह राव के काल से जोड़ें।
  6. वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा हर पाँच वर्ष में होता है, यह संवैधानिक है।
  7. आधार वर्ष 2011-12 को याद रखें, जो जीडीपी गणना का आधार है।
  8. विश्व बैंक और IMF की स्थापना 1944 (ब्रेटन वुड्स) तथा WTO की 1995 में हुई।

10. निष्कर्ष

भारतीय अर्थव्यवस्था की समझ सामान्य जागरूकता के लिए अनिवार्य है। इस अध्याय में हमने राष्ट्रीय आय की संकल्पनाओं, तीन क्षेत्रों की संरचना, योजना आयोग और नीति आयोग की भूमिका तथा 1991 के आर्थिक सुधारों का अध्ययन किया। GDP, GNP, NNP के सूत्र और प्रति व्यक्ति आय की गणना परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न हैं। योजना आयोग की 12 पंचवर्षीय योजनाएँ और नीति आयोग की स्थापना 2015 में हुई, यह अंतर सदैव याद रखें। संस्थाओं की स्थापना वर्ष और उनकी भूमिका को तालिकाओं के माध्यम से दोहराया गया। इन तथ्यों को माइंड मैप और चित्रों द्वारा स्मरण करने से परीक्षा में निश्चित अंक प्राप्त होते हैं। नियमित अभ्यास और त्वरित पुनरावृत्ति के साथ यह अध्याय पूर्ण रूप से तैयार किया जा सकता है।