विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – अर्थव्यस्था खेल और विज्ञान विषय-वस्तु: 22.3 बजट और कराधान
बजट किसी भी देश के वित्तीय प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें सरकार की कुल आय (प्राप्तियाँ) और व्यय का पूर्ण विवरण प्रस्तुत किया जाता है। भारत का संघीय बजट वित्त मंत्री द्वारा हर वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के प्रारंभ में संसद में प्रस्तुत किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में बजट प्रस्तुत किया जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की सामान्य जागरूकता की परीक्षा में बजट से जुड़े शब्द जैसे वित्तीय घाटा, राजकोषीय घाटा, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर तथा जीएसटी से प्रश्न पूछे जाते हैं। बजट शब्द फ्रांसीसी शब्द बुजेट (Bougette) से बना है, जिसका अर्थ छोटा थैला होता है।
भारत में पहला बजट 1860 में ईस्ट इंडिया कंपनी के वित्त सदस्य जेम्स विल्सन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। स्वतंत्र भारत का पहला बजट 1947 में वित्त मंत्री आर.के. षण्मुखम चेट्टी ने प्रस्तुत किया था। बजट का सबसे महत्वपूर्ण भाग वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) है, जो सरकार की कुल प्राप्तियों और कुल व्यय के बीच का अंतर दर्शाता है। वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ऋण लेती है। बजट के प्रकारों में संतुलित बजट, अधिशेष बजट और घाटे का बजट शामिल हैं। सन् 2017 में पारंपरिक रेल बजट को केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया था, जिससे रेलवे के बजट की पृथक व्यवस्था समाप्त हुई।
इस अध्याय में हम बजट की संरचना, राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियाँ, वित्तीय घाटे के प्रकार, कराधान के भेद और जीएसटी व्यवस्था का अध्ययन करेंगे। कराधान के अंतर्गत प्रत्यक्ष कर (आयकर, निगम कर) और अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी, सीमा शुल्क) को समझेंगे। भारत में कर सुधारों की शुरुआत सन् 1991 में राजा चेल्लैया समिति की सिफारिशों से हुई। सन् 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू करके अनेक अप्रत्यक्ष करों को एक में समाहित किया गया। अंत में तालिकाओं, माइंड मैप और चित्रों से बजट एवं कराधान की संपूर्ण पुनरावृत्ति की जाएगी।
भारत के केंद्रीय बजट को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है — राजस्व बजट और पूँजीगत बजट। राजस्व बजट में राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय शामिल होते हैं, जो कि नियमित आय और नियमित व्यय होते हैं। राजस्व प्राप्तियों में करों से प्राप्त आय (जैसे आयकर, निगम कर, सीमा शुल्क) और गैर-कर प्राप्तियाँ (जैसे ब्याज, लाभांश, जुर्माना) शामिल हैं। राजस्व व्यय में वेतन, पेंशन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान जैसे नियमित व्यय आते हैं। पूँजीगत बजट में पूँजीगत प्राप्तियाँ (जैसे ऋण, विक्रय से प्राप्त आय) और पूँजीगत व्यय (जैसे बुनियादी ढाँचे का निर्माण, संपत्ति की खरीद) शामिल होते हैं। जब राजस्व व्यय राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है तो उसे राजस्व घाटा कहते हैं।
बजट के महत्वपूर्ण संकेतकों में राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटा शामिल हैं। राजकोषीय घाटा कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर है। प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर प्राप्त होता है। वित्तीय घाटा और राजकोषीय घाटा अक्सर एक ही अर्थ में प्रयोग होते हैं, परंतु तकनीकी रूप से इनमें भेद है। राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधारी आवश्यकता को दर्शाता है। सरकार वित्तीय वर्ष के बीच में बजट में संशोधन के लिए अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) प्रस्तुत करती है। अंतरिम बजट (Interim Budget) चुनाव के समय प्रस्तुत किया जाता है, जो कुछ माह की अवधि का होता है।
बजट प्रस्तुति का क्रम इस प्रकार है — वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण, अर्थव्यवस्था सर्वेक्षण की प्रस्तुति, फिर बजट का संसद में चर्चा और अनुमोदन। अर्थव्यवस्था सर्वेक्षण बजट से कुछ दिन पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जो देश की आर्थिक स्थिति का विवरण देता है। बजट के वितरण में केंद्रीय योजनाएँ और राज्य सरकारों की योजनाएँ शामिल होती हैं। परीक्षा में बजट से जुड़े शब्द जैसे सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत में राजकोषीय घाटा, कर-जीडीपी अनुपात और व्यय की प्राथमिकताएँ पूछी जाती हैं। बजट के अंतर्गत रेलवे के लिए आवंटन, ग्रामीण विकास, रक्षा और बुनियादी ढाँचे के लिए प्रावधान भी महत्वपूर्ण होते हैं।
कर राज्य की आय का प्रमुख स्रोत है, जो नागरिकों से अनिवार्य रूप से लिया जाता है। कराधान को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है — प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो करदाता पर सीधे लगते हैं और उसे स्थानांतरित नहीं किए जा सकते, जैसे आयकर, निगम कर, संपत्ति कर और पूँजीगत लाभ कर। अप्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो किसी तीसरे पक्ष (व्यापारी) के माध्यम से अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचते हैं, जैसे जीएसटी, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क। आयकर भारत में व्यक्तिगत आय पर लगने वाला प्रत्यक्ष कर है, जिसका प्रबंधन आयकर विभाग करता है। निगम कर कंपनियों के लाभ पर लगता है। प्रत्यक्ष कर अधिक न्यायसंगत माने जाते हैं क्योंकि ये आय के अनुपात में लगते हैं।
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ, जो देश में अप्रत्यक्ष कर सुधार का सबसे बड़ा कदम था। जीएसटी को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम 2016 के माध्यम से लागू किया गया। जीएसटी की दरें मुख्यतः चार श्रेणियों में हैं — 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। कुछ आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी शून्य (0 प्रतिशत) है। जीएसटी परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, जिसमें राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं। जीएसटी के अंतर्गत केंद्रीय जीएसटी (CGST), राज्य जीएसटी (SGST) और एकीकृत जीएसटी (IGST) शामिल हैं। सेस और सरचार्ज भी कर प्रणाली के अंग हैं, जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाए जाते हैं।
कराधान से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण संकल्पनाओं में कर ढांचे में प्रगतिशील, प्रतिगामी और समानुपातिक कर शामिल हैं। प्रगतिशील कर वह है जिसमें आय बढ़ने के साथ कर दर बढ़ती है, जैसे भारत में आयकर। प्रतिगामी कर में आय के अनुपात में कर दर घटती है। समानुपातिक कर में सभी के लिए समान दर होती है। टीडीएस (TDS) का अर्थ है स्रोत पर कर कटौती, जिसमें आय का भुगतान करने वाला व्यक्ति कर काटकर सरकार को जमा करता है। कर दाता की पहचान के लिए पैन कार्ड का उपयोग होता है। भारत में व्यक्तियों के लिए नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) सन् 2020 में प्रस्तुत की गई थी। परीक्षा में कर से जुड़े प्रश्नों में टीडीएस, पैन, जीएसटी की दरें और कर के प्रकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
राजकोषीय घाटा देश की वित्तीय स्थिति का प्रमुख संकेतक है। यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर होता है। राजकोषीय घाटे का उपयोग सरकार की ऋण आवश्यकता को मापने के लिए होता है। जब सरकार का राजस्व घाटा अधिक होता है तो वह नई प्रतिभूतियाँ जारी करके या विदेशी ऋण लेकर घाटे को पूरा करती है। राजकोषीय घाटे का प्रबंधन राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) 2003 के अंतर्गत किया जाता है। इस अधिनियम के अनुसार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हाल के वर्षों में कोविड महामारी के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ा था, किंतु अब इसे नियंत्रित किया जा रहा है।
बजट का महत्व केवल आय-व्यय के हिसाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं का दर्पण होता है। बजट के माध्यम से सरकार गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढाँचा विकास, रक्षा और रेलवे जैसे क्षेत्रों में संसाधन आवंटित करती है। भारतीय रेलवे को बजट में अलग से आवंटन मिलता है, जिसमें नई रेल लाइनें, विद्युतीकरण, ट्रैक सुरक्षा और स्टेशन विकास शामिल हैं। रेलवे के बजट को 2017 में केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया, जिससे रेलवे की वित्तीय स्थिति समग्र बजट में देखी जाती है। बजट में घोषित नई योजनाएँ और उनके लिए वित्तीय प्रावधान परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बजट के अन्य प्रकारों में मध्यवर्ती बजट (Interim Budget) चुनाव से पहले प्रस्तुत किया जाता है और यह केवल अगली सरकार के गठन तक की अवधि को कवर करता है। अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) वित्तीय वर्ष के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यय के लिए प्रस्तुत होता है। शून्य आधारित बजट (Zero Based Budgeting) में पिछले वर्ष के आधार के बिना हर व्यय की नई सिरे से समीक्षा की जाती है। परीक्षा में इन बजट प्रकारों के अंतर को समझना आवश्यक है। बजट का लक्ष्य आर्थिक स्थिरता, विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। कर-जीडीपी अनुपात (Tax-GDP Ratio) बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था में करों का कितना योगदान है, जो विकसित देशों की तुलना में भारत में कम है।
| बजट का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| संतुलित बजट | आय = व्यय |
| अधिशेष बजट | आय > व्यय |
| घाटे का बजट | व्यय > आय |
| अंतरिम बजट | चुनाव के समय प्रस्तुत |
| अनुपूरक बजट | वर्ष के बीच अतिरिक्त व्यय |
| शून्य आधारित बजट | हर व्यय की नई समीक्षा |
| कर का प्रकार | उदाहरण | लक्षण |
|---|---|---|
| प्रत्यक्ष कर | आयकर, निगम कर | स्थानांतरण संभव नहीं |
| अप्रत्यक्ष कर | जीएसटी, सीमा शुल्क | उपभोक्ता तक स्थानांतरण |
| सेस/सरचार्ज | उपकर | विशिष्ट उद्देश्य |
| जीएसटी दरें | 5, 12, 18, 28% | 1 जुलाई 2017 से लागू |
flowchart TD
A[बजट और कराधान] --> B[बजट की संरचना]
A --> C[बजट के प्रकार]
A --> D[घाटा]
A --> E[कराधान]
B --> B1[राजस्व बजट]
B --> B2[पूँजीगत बजट]
C --> C1[संतुलित]
C --> C2[अधिशेष]
C --> C3[घाटे का]
C --> C4[अंतरिम/अनुपूरक]
D --> D1[राजस्व घाटा]
D --> D2[राजकोषीय घाटा]
D --> D3[प्राथमिक घाटा]
E --> E1[प्रत्यक्ष कर]
E --> E2[अप्रत्यक्ष कर]
E --> E3[जीएसटी 2017]
E1 --> E1a[आयकर]
E2 --> E2a[सीमा शुल्क]
E3 --> E3a[CGST, SGST, IGST]
बजट और कराधान भारतीय अर्थव्यवस्था के केंद्रीय विषय हैं, जिनका ज्ञान सामान्य जागरूकता के लिए अनिवार्य है। इस अध्याय में हमने बजट की संरचना, राजस्व और पूँजीगत बजट, घाटे के प्रकार और कराधान की संपूर्ण प्रणाली का अध्ययन किया। राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटे की परिभाषाएँ परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का भेद तथा जीएसटी व्यवस्था की दरों को समझना आवश्यक है। जीएसटी 2017 में 101वें संविधान संशोधन द्वारा लागू हुआ। बजट के प्रकारों — संतुलित, अधिशेष, अंतरिम और अनुपूरक — का ज्ञान भी परीक्षा में सहायक होता है। त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाओं और माइंड मैप की सहायता से इन तथ्यों को दोहराकर परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।