20.7 संगीत और नृत्य Notes

20.7 संगीत और नृत्य

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.7 संगीत और नृत्य

1. परिचय

भारतीय संगीत और नृत्य विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध कलाओं में से एक हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें सामवेद में हैं, जिसे "संगीत का जनक" कहा जाता है। भरतमुनि ने "नाट्यशास्त्र" की रचना की जिसे संगीत और नृत्य का प्राचीनतम ग्रंथ माना जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में भारतीय शास्त्रीय संगीत, वाद्ययंत्र, शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य और संगीत पुरस्कारों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

भारतीय शास्त्रीय संगीत दो मुख्य शैलियों में विभाजित है – हिन्दुस्तानी संगीत (उत्तर भारत) और कर्नाटक संगीत (दक्षिण भारत)। हिन्दुस्तानी संगीत में राग, ताल और घराने की परंपरा है। राग संगीत की मूल इकाई है और ताल समय के माप की इकाई है। प्रमुख रागों में भैरव, यमन, भूपाली, तोड़ी, केदार और मल्हार शामिल हैं। कर्नाटक संगीत में संगीतम, तालम और नादम की परंपरा है और इसके प्रमुख रचयिता त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितार और श्यामा शास्त्री हैं, जिन्हें "त्रिमूर्ति" कहा जाता है।

भारत में आठ शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ यूनेस्को और संगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं – भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथक (उत्तर भारत), कथकली (केरल), मोहिनीअट्टम (केरल), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश), ओडिसी (ओडिशा), मणिपुरी (मणिपुर) और सत्त्रिया (असम)। इसके अलावा भारत में अनेक लोक नृत्य प्रचलित हैं जिनमें भांगड़ा (पंजाब), गरबा (गुजरात), बिहू (असम), छऊ (झारखंड/पश्चिम बंगाल) और घूमर (राजस्थान) प्रमुख हैं। इस अध्याय में इन सभी का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

2. शास्त्रीय संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा नाट्यशास्त्र (लगभग 200 ई.पू.-200 ईस्वी) से प्रारंभ मानी जाती है। भरतमुनि का नाट्यशास्त्र न केवल नृत्य बल्कि संगीत का भी आधार ग्रंथ है। इसके बाद शारंगदेव ने "संगीत रत्नाकर" की रचना की। मध्यकाल में अमीर खुसरो को हिन्दुस्तानी संगीत में "क़व्वाली" और "ख़याल" का जन्मदाता माना जाता है। तानसेन अकबर के दरबार में थे और रागों के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। तानसेन को "संगीत सम्राट" कहा जाता है।

हिन्दुस्तानी संगीत: हिन्दुस्तानी संगीत के प्रमुख घरानों में ग्वालियर, आगरा, जयपुर, किराना और रामपुर घराने शामिल हैं। हिन्दुस्तानी संगीत के प्रमुख वाद्ययंत्र सितार, सरोद, बाँसुरी, तबला और सारंगी हैं। राग के मुख्य अंगों में आरोह, अवरोह और समय शामिल हैं। प्रमुख शास्त्रीय गायकों में पंडित भीमसेन जोशी (किराना घराना), पंडित रविशंकर (सितार), उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (शहनाई) और डॉ. एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी (कर्नाटक गायिका) शामिल हैं। मल्लिकार्जुन मंसूर, किशोरी अमोनकर और पंडित जसराज भी प्रसिद्ध गायक हैं।

कर्नाटक संगीत: कर्नाटक संगीत दक्षिण भारत की शास्त्रीय संगीत परंपरा है जिसमें कृतियों (संगीतम) का प्रयोग होता है। कर्नाटक संगीत के प्रमुख वाद्ययंत्र वीणा, मृदंगम, घटम और मोर्सिंग हैं। त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितार और श्यामा शास्त्री कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति हैं। पुरंदरदास को "कर्नाटक संगीत का पितामह" कहा जाता है। कर्नाटक संगीत में "रागम-तानम-पल्लवी" का स्वरूप प्रचलित है।

संगीत पुरस्कार और संस्थाएँ: भारत में संगीत के क्षेत्र में "संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार" (1953 से) सर्वोच्च सम्मान है। "तानसेन सम्मान" मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाता है। "संगीत कला अकादमी" भारत की प्रमुख संस्था है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को पंडित रविशंकर, उस्ताद अल्ला रक्खा और उस्ताद जाकिर हुसैन (तबला) ने प्रसिद्ध किया। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान शहनाई वादक थे जिन्हें भारत रत्न मिला।

3. शास्त्रीय नृत्य

भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों की मान्यता संगीत नाटक अकादमी द्वारा दी गई है। इन नृत्यों की उत्पत्ति नाट्यशास्त्र की परंपरा से हुई है।

भरतनाट्यम: भरतनाट्यम तमिलनाडु का शास्त्रीय नृत्य है जो भगवान शिव के नटराज रूप से जुड़ा है। इसे "भरत" (भाव, राग, ताल) के नाम पर भरतनाट्यम कहा जाता है। इसके प्रमुख प्रतिपादकों में रुक्मिणी देवी अरुंडेल, बालासरस्वती और पद्म सुब्रह्मण्यम हैं। इसकी मुद्राएँ और अभिनय नाट्यशास्त्र पर आधारित हैं।

कथक: कथक उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य है जो कथावाचकों (कहानी कहने वालों) से विकसित हुआ। कथक में घूमते हुए (चक्कर), तत्कार (पैरों की थाप) और अभिनय की प्रमुखता है। मुगल दरबार में कथक का संरक्षण मिला। प्रमुख कथक नर्तकियों में बिरजू महाराज, सितारा देवी और लच्छू महाराज शामिल हैं।

कथकली: कथकली केरल का शास्त्रीय नृत्य है जो पौराणिक कथाओं को मुखौटों और वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुत करता है। इसमें मुख्य रूप से "क" (कथा) और "थली" (नाटक) का समन्वय है। कथकली में आंखों की गति (नेत्राभिनय) और हाथ की मुद्राएँ (हस्तमुद्रा) महत्वपूर्ण हैं। कथकली पुरुष नर्तकों द्वारा अधिक प्रस्तुत की जाती है।

अन्य शास्त्रीय नृत्य: मोहिनीअट्टम केरल का स्त्री-प्रधान नृत्य है जो देवी विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ा है। कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का नृत्य है जो भगवान कृष्ण की कथा पर आधारित है और इसके प्रतिपादकों में वेमपट्टी चिन्ना सत्यम प्रसिद्ध हैं। ओडिसी ओडिशा का शास्त्रीय नृत्य है जिसकी विशेषता "त्रिभंगी" मुद्रा (शरीर का तीन स्थानों से मुड़ना) है। मणिपुरी मणिपुर का नृत्य है जो रासलीला पर आधारित है। सत्त्रिया असम का नृत्य है जो वैष्णव संत शंकरदेव की परंपरा से जुड़ा है।

4. लोक नृत्य और लोक संगीत

भारत का प्रत्येक क्षेत्र अपने लोक नृत्य और लोक संगीत के लिए प्रसिद्ध है। लोक नृत्य सामान्यतः फसल, विवाह, त्योहार और धार्मिक अवसरों पर किए जाते हैं।

उत्तर भारत: पंजाब में भांगड़ा (पुरुष) और गिद्दा (महिला) लोक नृत्य प्रसिद्ध हैं। हरियाणा में फाग और गूगा। उत्तर प्रदेश में रासलीला। राजस्थान में घूमर, कालबेलिया और गैर। घूमर राजस्थान का प्रसिद्ध महिला नृत्य है और कालबेलिया को यूनेस्को की अमूर्त विरासत में शामिल किया गया है। गुजरात में गरबा, डांडिया और तरंगा नृत्य होते हैं। महाराष्ट्र में लावणी और कोली।

पूर्वी भारत: असम में बिहू नृत्य प्रसिद्ध है जो फसल कटाई के समय किया जाता है। बिहार में झूमर और छऊ। झारखंड में छऊ और सामथार। पश्चिम बंगाल में संथाली और छऊ। ओडिशा में गोटीपुआ नृत्य। उत्तर-पूर्व में मिजो में चेरो, नागालैंड में चांग नृत्य और अरुणाचल में हुली।

दक्षिण भारत: कर्नाटक में यक्षगान, डोल्लुकुनिता। केरल में थिरयट्टम और ओप्पना। तमिलनाडु में करगट्टम, कोलाट्टम। आंध्र प्रदेश में कुचिपुड़ी के अलावा कोलाट्टम। तेलंगाना में बतकम्मा नृत्य। गोवा में फुगड़ी और दखनी। ये सभी लोक नृत्य भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाते हैं।

लोक संगीत: भारतीय लोक संगीत में भजन, कीर्तन, कव्वाली और ग़ज़ल की परंपराएँ हैं। राजस्थानी लोक संगीत, पंजाबी बोलियाँ, बंगाली बाउल संगीत और नागालैंड के पारंपरिक संगीत विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाउल संगीत पश्चिम बंगाल की लोक संगीत परंपरा है जिसे यूनेस्को ने अमूर्त विरासत में शामिल किया है। रेलवे परीक्षा में नृत्य और उनके राज्य का मिलान सबसे लोकप्रिय प्रश्न है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य

नृत्य राज्य मुख्य विशेषता
भरतनाट्यम तमिलनाडु मुद्राएँ, अभिनय
कथक उत्तर भारत चक्कर, तत्कार
कथकली केरल मुखौटे, नेत्राभिनय
मोहिनीअट्टम केरल स्त्री-प्रधान
कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश कृष्ण कथा
ओडिसी ओडिशा त्रिभंगी मुद्रा
मणिपुरी मणिपुर रासलीला
सत्त्रिया असम वैष्णव परंपरा

तालिका 2: प्रमुख लोक नृत्य और राज्य

लोक नृत्य राज्य
भांगड़ा पंजाब
गरबा गुजरात
बिहू असम
घूमर राजस्थान
लावणी महाराष्ट्र
यक्षगान कर्नाटक

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[संगीत और नृत्य] --> B[शास्त्रीय संगीत]
    A --> C[शास्त्रीय नृत्य]
    A --> D[लोक नृत्य]
    A --> E[वाद्ययंत्र]
    B --> B1[हिन्दुस्तानी संगीत]
    B --> B2[कर्नाटक संगीत]
    C --> C1[भरतनाट्यम - तमिलनाडु]
    C --> C2[कथक - उत्तर भारत]
    C --> C3[कथकली - केरल]
    C --> C4[ओडिसी - ओडिशा]
    D --> D1[भांगड़ा - पंजाब]
    D --> D2[बिहू - असम]
    E --> E1[सितार, तबला]
    E --> E2[वीणा, मृदंगम]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम तमिलनाडु कथक उत्तर भारत कथकली केरल मोहिनीअट्टम केरल कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश ओडिसी ओडिशा मणिपुरी मणिपुर सत्त्रिया असम संगीत नाटक अकादमी से मान्यता प्राप्त स्वर्ण नियम नृत्य और उसके राज्य का मिलान अनिवार्य रूप से याद रखें।

प्रमुख वाद्ययंत्र सितार तंतुवाद्य - रविशंकर तबला अवनद्ध वाद्य - जाकिर हुसैन वीणा कर्नाटक - सरस्वती शहनाई बिस्मिल्लाह खान बाँसुरी पन्नालाल घोष मृदंगम कर्नाटक संगीत नाट्यशास्त्र - भरतमुनि का संगीत एवं नृत्य ग्रंथ स्वर्ण नियम वाद्ययंत्र और उसके प्रसिद्ध वादक का मिलान याद रखें।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. भरतनाट्यम तमिलनाडु का नृत्य है, इसे कभी-कभी केरल से जोड़ा जाता है जो गलत है; केरल में कथकली और मोहिनीअट्टम होते हैं।
  2. ओडिसी ओडिशा का नृत्य है, इसे उत्तर प्रदेश से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
  3. कथक उत्तर भारत का नृत्य है, इसे दक्षिण भारतीय नृत्य नहीं समझना चाहिए।
  4. सामवेद को संगीत का जनक कहा जाता है, जबकि कुछ विद्यार्थी इसका श्रेय अथर्ववेद को देते हैं।
  5. भरतमुनि का ग्रंथ 'नाट्यशास्त्र' है, इसे 'संगीत रत्नाकर' (शारंगदेव) से भ्रमित न करें।
  6. तानसेन अकबर के दरबार के संगीतज्ञ थे; इसे जहाँगीर या शाहजहाँ से जोड़ना गलत है।
  7. कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का नृत्य है, इसे कर्नाटक से नहीं जोड़ना चाहिए।
  8. सत्त्रिया असम का नृत्य है, जबकि मणिपुरी मणिपुर का; इन दोनों को आपस में मिलाना आम गलती है।
  9. बिस्मिल्लाह खान शहनाई वादक थे, इन्हें सितार वादक (रविशंकर) समझ लिया जाता है।
  10. भांगड़ा पंजाब का नृत्य है, इसे गुजरात (गरबा) या असम (बिहू) से नहीं मिलाना चाहिए।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. आठ शास्त्रीय नृत्यों और उनके राज्यों की तालिका रटें - यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
  2. वाद्ययंत्र और प्रसिद्ध वादकों का मिलान करते हुए अभ्यास करें।
  3. हिन्दुस्तानी और कर्नाटक संगीत की विशेषताओं में अंतर स्पष्ट रूप से समझें।
  4. लोक नृत्यों को क्षेत्रवार सूचीबद्ध करें और राज्य से मिलान करें।
  5. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1953), तानसेन सम्मान जैसे पुरस्कारों का वर्ष और क्षेत्र याद रखें।
  6. अमीर खुसरो, तानसेन, भरतमुनि, पुरंदरदास जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के योगदान को संक्षेप में रटें।
  7. पिछले वर्षों के प्रश्नों में नृत्य-राज्य और वाद्य-वादक मिलान वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।

10. निष्कर्ष

भारतीय संगीत और नृत्य की परंपरा नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक काल तक विकसित होती रही है। हिन्दुस्तानी और कर्नाटक दोनों शैलियों ने राग, ताल और घरानों के माध्यम से अद्वितीय योगदान दिया। भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य – भरतनाट्यम, कथक, कथकली, मोहिनीअट्टम, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी और सत्त्रिया – प्रत्येक क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान हैं। लोक नृत्यों और लोक संगीत ने इन्हें और समृद्ध किया। इस अध्याय में हमने संगीत शैलियों, वाद्ययंत्रों, शास्त्रीय और लोक नृत्यों का विस्तृत अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा के लिए नृत्य-राज्य और वाद्य-वादक के मिलान वाले प्रश्नों की तालिकाबद्ध पुनरावृत्ति आवश्यक है।