ऊष्मा संचरण Notes

ऊष्मा संचरण

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.3 ऊष्मा संचरण

1. परिचय

ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान तक तीन विधियों से संचरित होती है — चालन, संवहन और विकिरण। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ऊष्मा संचरण से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें तीनों विधियों की पहचान, किस पदार्थ में कौन-सी विधि प्रबल होती है, चालक-कुचालक पदार्थ, तापीय चालकता तथा प्रत्येक विधि के व्यावहारिक उदाहरणों पर प्रश्न आते हैं। इसके अलावा दैनिक जीवन की घटनाओं को किस विधि से जोड़ा जाए, इस पर आधारित प्रश्न बहुत सामान्य हैं।

चालन वह विधि है जिसमें ऊष्मा माध्यम के कणों के टकराव द्वारा एक कण से दूसरे कण तक पहुँचती है, परंतु कण स्वयं अपने स्थान से हिलते नहीं हैं। यह मुख्यतः ठोस पदार्थों में होती है। संवहन में ऊष्मा द्रव या गैस के गरम कणों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से विस्थापित होने से संचरित होती है। विकिरण में ऊष्मा विद्युतचुंबकीय तरंगों (अवरक्त किरणों) के रूप में बिना किसी माध्यम के भी संचरित होती है, जैसे सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा। यही कारण है कि सूर्य की ऊष्मा खाली अंतरिक्ष के माध्यम से भी हम तक पहुँचती है।

इस विषय में हम चालन का नियम, तापीय चालकता (thermal conductivity) की अवधारणा, संवहन धाराओं का सिद्धांत, विकिरण के नियम तथा कृष्णिका (black body) की अवधारणा का अध्ययन करेंगे। हम समुद्री हवा, थर्मस फ्लास्क, ग्रीनहाउस प्रभाव और वायु की कुचालकता जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी सूत्रों के साथ समझेंगे। रेलवे परीक्षा में चालन के सूत्र, तापीय चालकता की इकाई और विधियों की तुलना पर आधारित प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण हैं।

2. चालन और तापीय चालकता

चालन में ऊष्मा किसी ठोस के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अणुओं के कंपन और इलेक्ट्रॉनों की गति द्वारा संचरित होती है। धातुएँ उत्तम चालक होती हैं क्योंकि उनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। लोहा, ताँबा, अल्युमिनियम, चाँदी उत्तम चालक हैं, जबकि लकड़ी, काँच, प्लास्टिक, रबर और हवा कुचालक (insulator) हैं। तापीय चालकता गुणांक k किसी पदार्थ की ऊष्मा चालन की क्षमता का माप है। चालन का नियम निम्न है:

Q/t = k A (T1 - T2)/d

जहाँ Q/t = ऊष्मा प्रवाह की दर (W), k = तापीय चालकता (W/mK), A = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, T1 - T2 = तापमान अंतर, d = मोटाई। चाँदी की तापीय चालकता सर्वाधिक (लगभग 406 W/mK) होती है, उसके बाद ताँबे की।

तापीय चालकता की SI इकाई W/mK होती है। चालन में ऊष्मा सदैव उच्च तापमान वाले सिरे से निम्न तापमान वाले सिरे की ओर प्रवाहित होती है। चालन का सबसे अच्छा उदाहरण गरम तवे पर धातु का चम्मच गरम होना है। रसोई के बर्तनों के हैंडल लकड़ी या प्लास्टिक के बनाए जाते हैं क्योंकि वे कुचालक होते हैं और ऊष्मा का संचालन नहीं करते। सर्दियों में ऊनी कपड़े पहनने से शरीर की ऊष्मा बाहर नहीं निकलती, क्योंकि ऊन के रेशों के बीच वायु भरी रहती है जो कुचालक है।

उदाहरण 1: 0.05 m मोटाई की एक दीवार का क्षेत्रफल 10 m^2 है। दीवार के भीतरी और बाहरी तापमान क्रमशः 30°C और 10°C हैं। यदि ईंट की तापीय चालकता 0.6 W/mK हो तो ऊष्मा प्रवाह की दर ज्ञात कीजिए।

हल: Q/t = k A (T1 - T2)/d = 0.6 × 10 × (30 - 10)/0.05 = 0.6 × 10 × 20/0.05 = 0.6 × 200 × 2 = 2400 W। अतः ऊष्मा प्रवाह की दर 2400 वाट होगी।

उदाहरण 2: एक लोहे की छड़ का अनुप्रस्थ काट 0.002 m^2 और लंबाई 1 m है। सिरों पर तापमान अंतर 100°C है। लोहे की तापीय चालकता 80 W/mK हो तो ऊष्मा प्रवाह ज्ञात कीजिए।

हल: Q/t = k A ΔT/d = 80 × 0.002 × 100/1 = 16 W। अतः ऊष्मा प्रवाह की दर 16 वाट होगी।

3. संवहन

संवहन वह विधि है जिसमें ऊष्मा का संचरण द्रव या गैस के वास्तविक कणों के स्थानांतरण द्वारा होता है। जब द्रव या गैस के निचले भाग को गर्म किया जाता है, तो वह कण गरम होकर हल्का हो जाता है और ऊपर उठता है, जबकि ऊपर का ठंडा और भारी कण नीचे आ जाता है। इस चक्रीय गति को संवहन धारा कहते हैं। इस प्रकार ऊष्मा का संचरण द्रवों और गैसों में संवहन द्वारा होता है। संवहन केवल उन्हीं माध्यमों में होता है जिनमें गुरुत्वाकर्षण मौजूद हो और जो प्रवाहित हो सकते हैं।

संवहन के व्यावहारिक उदाहरण: किसी कमरे में हीटर या अग्नि से गरम हवा ऊपर उठती है, जिससे पूरा कमरा गरम हो जाता है। समुद्री और स्थलीय हवाएँ संवहन धाराओं के कारण ही चलती हैं। दिन में जमीन समुद्र से पहले गरम होती है, अतः गरम हवा ऊपर उठती है और समुद्र से जमीन की ओर ठंडी हवा बहती है (समुद्री हवा)। रात में विपरीत होता है (स्थलीय हवा)। चिमनी में धुआँ ऊपर उठना, पानी का गरम होना और वातानुकूलन में ठंडी हवा का नीचे आना संवहन के उदाहरण हैं।

विशेष तथ्य: ऊपर की ओर गर्म होने पर ऊष्मा स्रोत के ऊपर का द्रव पहले गरम होता है। यदि ऊष्मा ऊपर से दी जाए, तो संवहन संभव नहीं होता क्योंकि गरम द्रव ऊपर ही रहता है। वायु भी संवहन द्वारा गर्म होती है। ग्रीनहाउस में पौधों को उगाने के लिए काँच का उपयोग होता है, जो सूर्य के विकिरण को अंदर तो आने देता है परंतु अंदर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देता, इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं। थर्मस फ्लास्क में दोहरी दीवार के बीच का निर्वात चालन और संवहन दोनों को रोकता है।

उदाहरण 3: एक कमरे में कोयले की अंगीठी जलाने पर पूरा कमरा किस विधि से गरम होता है?

हल: अंगीठी से गरम हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। इस चक्रीय संवहन धारा से पूरा कमरा गरम हो जाता है। अतः संवहन से।

4. विकिरण और कृष्णिका

विकिरण में ऊष्मा विद्युतचुंबकीय तरंगों (मुख्यतः अवरक्त किरणों) के रूप में संचरित होती है। इसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, यही कारण है कि सूर्य से आने वाली ऊष्मा निर्वात (अंतरिक्ष) में से गुजरकर पृथ्वी तक पहुँचती है। विकिरण की गति प्रकाश की गति (3 × 10^8 m/s) के बराबर होती है। गरम पिंड से विकिरण सभी दिशाओं में संचरित होता है। विकिरण की तीव्रता पिंड के तापमान की चौथी घात के अनुपाती होती है, जिसे स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम कहते हैं:

E ∝ T^4

अर्थात E = σ T^4, जहाँ σ = 5.67 × 10^-8 W/m^2K^4 और T परम तापमान है।

कृष्णिका (black body) वह पिंड है जो उस पर पड़ने वाले सभी विकिरण को अवशोषित कर लेता है। कृष्णिका सर्वोत्तम उत्सर्जक भी होती है। अच्छे अवशोषक अच्छे उत्सर्जक होते हैं। यही कारण है कि गर्मियों में हल्के (सफेद) कपड़े पहनने चाहिए क्योंकि वे विकिरण को परावर्तित कर देते हैं, जबकि सर्दियों में काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए क्योंकि वे ऊष्मा का अवशोषण करते हैं। धूप वाले दिनों में ट्रेन की बोगियों को सफेद रंग में रंगा जाता है ताकि विकिरण परावर्तित हो और अंदर का तापमान कम रहे।

उदाहरण 4: सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक किस विधि से पहुँचती है?

हल: सूर्य और पृथ्वी के बीच निर्वात है। चालन और संवहन के लिए माध्यम आवश्यक है। अतः सूर्य की ऊष्मा विकिरण द्वारा पृथ्वी तक पहुँचती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ

विधि माध्यम की आवश्यकता माध्यम उदाहरण
चालन हाँ ठोस लोहे की छड़ का गरम होना
संवहन हाँ द्रव और गैस पानी उबालना, समुद्री हवा
विकिरण नहीं निर्वात में भी सूर्य से ऊष्मा

तालिका 2: चालक और कुचालक पदार्थ

चालक कुचालक तापीय चालकता k (W/mK)
चाँदी (सर्वोत्तम) लकड़ी चाँदी ~ 406
ताँबा काँच ताँबा ~ 385
अल्युमिनियम रबर अल्युमिनियम ~ 205
लोहा वायु लोहा ~ 80

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ऊष्मा संचरण] --> B[चालन]
    A --> C[संवहन]
    A --> D[विकिरण]
    B --> B1[ठोस में, Q/t = k A ΔT/d]
    B --> B2[चाँदी सर्वोत्तम चालक]
    B --> B3[कुचालक - लकड़ी, वायु]
    C --> C1[द्रव और गैस]
    C --> C2[संवहन धारा]
    C --> C3[समुद्री व स्थलीय हवा]
    D --> D1[माध्यम आवश्यक नहीं]
    D --> D2[अवरक्त किरणें, गति 3×10^8 m/s]
    D --> D3[स्टीफन नियम E ∝ T^4]
    D --> D4[कृष्णिका]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

चालन, संवहन और विकिरण चालन (ठोस) संवहन (द्रव-गैस) विकिरण (निर्वात) चालन: Q/t = k A (T1 - T2)/d कण टकराव से ऊष्मा, चाँदी सर्वोत्तम चालक संवहन: गरम कण ऊपर, ठंडे कण नीचे समुद्री हवा दिन में, स्थलीय हवा रात में विकिरण: E = σ T^4, सूर्य से ऊष्मा अवरक्त किरणें, गति 3 × 10^8 m/s स्वर्ण नियम ठोस-चालन, द्रव/गैस-संवहन, निर्वात-विकिरण — यह क्रम रटें।

संवहन धारा का चक्र पानी का बर्तन गर्म करना गरम कण ऊपर ठंडे कण नीचे ऊष्मा संवहन धारा = गरम कणों का ऊपर उठना तथा ठंडे कणों का नीचे आना स्वर्ण नियम संवहन केवल गुरुत्वाकर्षण वाले माध्यम में होता है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र विकिरण में माध्यम की आवश्यकता मान लेते हैं, जबकि विकिरण निर्वात में भी संचरित होता है।
  2. चालन को केवल धातुओं में ही संभव मानना; वास्तव में सभी ठोसों में (कम-अधिक मात्रा में) चालन होता है।
  3. संवहन को द्रव और गैस के स्थान पर ठोस में भी लागू करना, जो गलत है।
  4. सूर्य की ऊष्मा को संवहन या चालन से आना मानना; सही विधि विकिरण है।
  5. तापीय चालकता की इकाई W/mK के स्थान पर W/m लिखना।
  6. चाँदी के स्थान पर लोहे को सर्वोत्तम चालक मानना; चाँदी की चालकता सर्वाधिक है।
  7. विकिरण की तीव्रता को T (तापमान) के अनुपाती मानना, जबकि यह T^4 के अनुपाती होती है।
  8. ग्रीनहाउस प्रभाव को संवहन का परिणाम समझना; यह विकिरण पर आधारित है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. ऊष्मा संचरण की तीनों विधियों का माध्यम, उदाहरण और नियम रटें, यह सबसे अधिक पूछा जाता है।
  2. चालन के सूत्र Q/t = k A ΔT/d में इकाइयों की संगति जाँचें — k की इकाई W/mK है।
  3. चाँदी सर्वोत्तम तापीय चालक और वायु सर्वोत्तम कुचालक है, इसे याद रखें।
  4. सूर्य की ऊष्मा = विकिरण, ऊनी कपड़े = वायु की कुचालकता, चिमनी का धुआँ = संवहन।
  5. गर्मियों में सफेद कपड़े विकिरण परावर्तित करते हैं, सर्दियों में काले कपड़े अवशोषित करते हैं।
  6. स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम E = σT^4 का तथ्य याद रखें, प्रश्न में आ सकता है।
  7. थर्मस फ्लास्क में निर्वात चालन और संवहन रोकता है; विकिरण चमकीली दीवारों से परावर्तित होता है।
  8. हवा व काँच कुचालक हैं — दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़ने वाले प्रश्नों को सहजता से हल करें।

10. निष्कर्ष

ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ — चालन, संवहन और विकिरण — ऊष्मा के व्यवहार को समझने की कुंजी हैं। इस अध्याय में हमने चालन के नियम और तापीय चालकता, संवहन धाराओं का सिद्धांत तथा विकिरण के स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम और कृष्णिका की अवधारणा का अध्ययन किया। हमने दैनिक जीवन के अनेक उदाहरणों — ऊनी कपड़े, समुद्री हवा, ग्रीनहाउस प्रभाव, थर्मस फ्लास्क — को इन विधियों से जोड़ा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। विधियों के बीच स्पष्ट अंतर, सूत्रों की सटीक पकड़ और व्यावहारिक उदाहरणों की जानकारी से विद्यार्थी इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकता है। यह अवधारणा आगे ध्वनि और प्रकाश के अध्यायों की समझ को भी गहरा करती है।