विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.9 अपवर्तन और लेंस
जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछा प्रवेश करता है, तो उसकी दिशा बदल जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन (refraction) कहते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में अपवर्तन और लेंस से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें अपवर्तन के नियम, स्नेल का नियम, अपवर्तनांक, पूर्ण आंतरिक परावर्तन, लेंस सूत्र, आवर्धन तथा उत्तल-अवतल लेंस के उपयोगों पर प्रश्न आते हैं। इसके अलावा लेंस सूत्र से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं।
अपवर्तन का कारण विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की गति का भिन्न होना है। प्रकाश की गति निर्वात में सर्वाधिक (3 × 10^8 m/s) होती है, तथा वायु, काँच, जल आदि में क्रमशः कम होती जाती है। अपवर्तनांक (refractive index) किसी माध्यम में प्रकाश की गति का निर्वात में प्रकाश की गति से अनुपात है। यह मापता है कि प्रकाश माध्यम में कितना धीमा हो जाता है। जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है तो वह अभिलंब की ओर झुकता है, और जब सघन से विरल में जाता है तो अभिलंब से दूर झुकता है। पानी में रखी छड़ टेढ़ी दिखने का यही कारण है।
इस विषय में हम अपवर्तन के नियमों, स्नेल के नियम (sin i / sin r = स्थिरांक = μ), अपवर्तनांक की अवधारणा, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और क्रांतिक कोण, उत्तल और अवतल लेंस की संरचना, लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f तथा आवर्धन का अध्ययन करेंगे। हम संख्यात्मक उदाहरणों के माध्यम से फोकस दूरी, प्रतिबिंब दूरी और आवर्धन की गणना सीखेंगे। रेलवे परीक्षा में लेंस सूत्र, अपवर्तनांक और लेंस के उपयोग सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
अपवर्तन के दो नियम हैं। प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब सदैव एक ही तल में होते हैं। द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): किसी दिए गए रंग के प्रकाश तथा दिए गए माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या (sin i) और अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात स्थिर रहता है:
sin i / sin r = n12
इस स्थिरांक को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं। यदि प्रकाश निर्वात से किसी माध्यम में जाता है, तो उसे उस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं।
किसी माध्यम का अपवर्तनांक μ = c/v होता है, जहाँ c निर्वात में प्रकाश की गति और v माध्यम में प्रकाश की गति है। जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33, काँच का लगभग 1.5 और हीरे का सबसे अधिक लगभग 2.42 होता है। अपवर्तनांक जितना अधिक होता है, प्रकाश उतना अधिक झुकता है। जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश पूर्ण रूप से वापस लौट जाता है, इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। क्रांतिक कोण θc का सूत्र sin θc = 1/μ होता है।
उदाहरण 1: काँच में प्रकाश की गति 2 × 10^8 m/s है। काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। (निर्वात में प्रकाश की गति = 3 × 10^8 m/s)
हल: μ = c/v = (3 × 10^8)/(2 × 10^8) = 1.5। अतः काँच का अपवर्तनांक 1.5 है।
उदाहरण 2: जल का अपवर्तनांक 1.33 है। यदि आपतन कोण 45° है तो अपवर्तन कोण की गणना कीजिए। (sin 45° = 0.707)
हल: sin i / sin r = μ से sin r = sin i/μ = 0.707/1.33 = 0.5316, अतः r ≈ 32°। अपवर्तन कोण लगभग 32° होगा।
लेंस एक पारदर्शी माध्यम (सामान्यतः काँच) का टुकड़ा है जो दो गोलीय सतहों या एक गोलीय और एक समतल सतह से घिरा होता है। उत्तल लेंस मध्य में मोटा और किनारों पर पतला होता है, इसे अभिसारी (converging) लेंस भी कहते हैं। अवतल लेंस मध्य में पतला और किनारों पर मोटा होता है, इसे अपसारी (diverging) लेंस कहते हैं। उत्तल लेंस समांतर प्रकाश को फोकस पर एकत्र करता है जबकि अवतल लेंस प्रकाश को बिखेरता है। उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक तथा अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
लेंस के लिए लेंस सूत्र निम्न है:
1/v - 1/u = 1/f
जहाँ u = वस्तु दूरी, v = प्रतिबिंब दूरी, f = फोकस दूरी। रेखीय आवर्धन m = h'/h = v/u होता है। लेंस की क्षमता (power) P = 1/f होती है, जिसकी इकाई डाइऑप्टर (D) है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। चिह्न परिपाटी के अनुसार लेंस के सामने की दूरियाँ ऋणात्मक और पीछे की दूरियाँ धनात्मक होती हैं। उत्तल लेंस के सामने (बायीं ओर) वस्तु रखने पर u सदैव ऋणात्मक होती है।
उदाहरण 3: उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 cm है। लेंस से 40 cm दूर वस्तु रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
हल: f = +20 cm, u = -40 cm। 1/v = 1/f + 1/u = 1/20 - 1/40 = (2 - 1)/40 = 1/40, अतः v = 40 cm। प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 40 cm पर बनेगा (वास्तविक)।
उदाहरण 4: 5 cm ऊँची वस्तु को अवतल लेंस से 30 cm दूर रखा गया है। f = 15 cm है। प्रतिबिंब की स्थिति और ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
हल: f = -15 cm, u = -30 cm। 1/v = 1/f + 1/u = -1/15 - 1/30 = (-2 - 1)/30 = -3/30 = -1/10, अतः v = -10 cm। प्रतिबिंब वस्तु की ओर 10 cm पर बनता है। आवर्धन m = v/u = -10/-30 = 1/3, अतः ऊँचाई = 5 × 1/3 = 1.67 cm। प्रतिबिंब सीधा और छोटा है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन तब होता है जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होता है। क्रांतिक कोण वह आपतन कोण है जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर प्रकाश पूर्णतः वापस परावर्तित हो जाता है। इसी सिद्धांत पर ऑप्टिकल फाइबर, प्रिज्म, हीरे की चमक, मरीचिका (mirage) और मोतियों की चमक आधारित होती हैं। ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा लंबी दूरी तय करता है, जिसका उपयोग दूरसंचार में होता है।
लेंस के व्यावहारिक उपयोग: उत्तल लेंस का उपयोग सूक्ष्मदर्शी, आवर्धक लेंस, कैमरा, प्रोजेक्टर, दूरबीन और आँख के लेंस के रूप में होता है। अवतल लेंस का उपयोग निकट दृष्टि दोष (myopia) के चश्मे, दरवाजे की झाँकने वाली छेद में तथा दूरबीन के आइपिस में होता है। प्रकाश के अपवर्तन से ही प्रिज्म में सफेद प्रकाश का सात रंगों में विभाजन (विक्षेपण) होता है, और इंद्रधनुष का निर्माण होता है। अपवर्तन के कारण ही तालाब की गहराई कम दिखती है और तारे टिमटिमाते प्रतीत होते हैं।
उदाहरण 5: काँच का क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए। (काँच का अपवर्तनांक = 1.5)
हल: sin θc = 1/μ = 1/1.5 = 0.6667, अतः θc = arcsin(0.6667) ≈ 41.8°। काँग का क्रांतिक कोण लगभग 41.8° होता है।
| गुण | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|
| आकार | मध्य मोटा | मध्य पतला |
| प्रकृति | अभिसारी | अपसारी |
| फोकस दूरी | धनात्मक | ऋणात्मक |
| क्षमता | धनात्मक | ऋणात्मक |
| प्रतिबिंब | वस्तु स्थिति पर निर्भर | सदैव छोटा, सीधा |
| माध्यम | अपवर्तनांक |
|---|---|
| वायु | लगभग 1 |
| जल | 1.33 |
| काँच | 1.5 |
| हीरा | 2.42 (सबसे अधिक) |
flowchart TD
A[अपवर्तन और लेंस] --> B[अपवर्तन]
A --> C[अपवर्तनांक]
A --> D[लेंस]
A --> E[पूर्ण आंतरिक परावर्तन]
B --> B1[स्नेल का नियम sin i/sin r = μ]
B --> B2[सघन में झुकाव अभिलंब की ओर]
C --> C1[μ = c/v]
C --> C2[हीरा 2.42 सबसे अधिक]
D --> D1[उत्तल - अभिसारी]
D --> D2[अवतल - अपसारी]
D --> D3[1/v - 1/u = 1/f]
D --> D4[P = 1/f डाइऑप्टर]
E --> E1[sin θc = 1/μ]
E --> E2[ऑप्टिकल फाइबर]
अपवर्तन और लेंस प्रकाशिकी के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। इस अध्याय में हमने अपवर्तन के नियमों, स्नेल के नियम, अपवर्तनांक μ = c/v, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और क्रांतिक कोण का अध्ययन किया। हमने उत्तल और अवतल लेंस की संरचना, लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f, आवर्धन और लेंस की क्षमता को सूत्रों और संख्यात्मक उदाहरणों के साथ समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। लेंस सूत्र की सटीक पकड़, अपवर्तनांक के मान और लेंसों के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी से विद्यार्थी इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकता है। यह अध्याय आगे मानव नेत्र और प्रकाशीय उपकरणों के अध्याय की नींव है।