विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.10 मोटर जनित्र और अनुप्रयोग
विद्युत मोटर और जनित्र विद्युत ऊर्जा और यांत्रिक ऊर्जा के बीच परिवर्तन करने वाले सबसे महत्वपूर्ण उपकरण हैं। विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है, जबकि जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। मोटर का सिद्धांत चुंबकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर लगने वाले बल (फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम) पर आधारित है। जनित्र का सिद्धांत विद्युतचुंबकीय प्रेरण (फैराडे का नियम) पर आधारित है। दोनों उपकरण रेलवे के विद्युत इंजनों और विद्युत आपूर्ति प्रणालियों के केंद्र में हैं।
रेलवे में विद्युत मोटर का सबसे बड़ा उपयोग ट्रैक्शन प्रणाली में होता है। विद्युत इंजन के पहियों को घुमाने के लिए शक्तिशाली ट्रैक्शन मोटर लगाई जाती हैं, जो विद्युत ऊर्जा को पहियों की यांत्रिक गति में बदलती हैं। इन मोटरों में गति नियंत्रण के लिए स्पीड कंट्रोल उपकरण और दिशा बदलने के लिए विशेष परिपथ उपयोग होते हैं। वहीं जनित्र विद्युत संयंत्रों में विद्युत उत्पादन के लिए उपयोग होते हैं, जिनसे उत्पादित विद्युत ओवरहेड तारों के माध्यम से ट्रेनों तक पहुँचती है।
इस अध्याय में हम विद्युत मोटर की संरचना, उसके कार्य सिद्धांत, DC और AC मोटर में अंतर, जनित्र के प्रकार, ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत, फ्यूज और MCB जैसे सुरक्षा उपकरणों तथा घरेलू वायरिंग में विद्युतचुंबकीय उपकरणों के अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे। रेलवे तकनीशियन के लिए इन उपकरणों का रखरखाव, दोष निवारण और सुरक्षित संचालन उनके दैनिक कार्य का अभिन्न अंग है।
विद्युत मोटर के प्रमुख भाग: आर्मेचर (धारावाही कुंडली), फील्ड चुंबक (स्थायी या विद्युत चुंबक), कम्यूटेटर (विभाजित रिंग) और ब्रश, तथा शक्ति का अक्ष (शाफ्ट)। DC मोटर में कम्यूटेटर और DC विद्युत आपूर्ति उपयोग होती है, जबकि AC मोटर में AC आपूर्ति होती है।
कार्य सिद्धांत: जब कुंडली में धारा प्रवाहित होती है और कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में स्थित होती है, तो कुंडली के दोनों भुजाओं पर परस्पर विपरीत दिशाओं में चुंबकीय बल लगता है (क्योंकि दोनों भुजाओं में धारा विपरीत दिशा में बहती है)। इन दो विपरीत बलों से एक युग्म बनता है, जिससे कुंडली घूर्णन करती है। कुंडली के आधे चक्र के बाद कम्यूटेटर धारा की दिशा उलट देता है, जिससे घूर्णन निरंतर बना रहता है। यही सिद्धांत ट्रैक्शन मोटर में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण 1: एक ट्रैक्शन मोटर 600 वोल्ट पर कार्य करती है और 200 एम्पियर धारा लेती है। मोटर की शक्ति ज्ञात कीजिए।
हल: P = VI = 600 × 200 = 120000 वाट = 120 किलोवाट।
मोटर में बलाघूर्ण (Torque): मोटर द्वारा उत्पन्न घूर्णन बल को बलाघूर्ण कहते हैं। मोटर का बलाघूर्ण धारा और चुंबकीय क्षेत्र के अनुक्रमानुपाती होता है। DC मोटर में बलाघूर्ण नियंत्रित करने के लिए धारा को समायोजित किया जाता है। रेलवे इंजनों में प्रारंभ के समय अधिक बलाघूर्ण की आवश्यकता होती है, इसलिए ट्रैक्शन मोटर को उच्च प्रारंभिक बलाघूर्ण के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
जनित्र (Generator): जनित्र विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब आर्मेचर कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती है, तो उसमें प्रेरित EMF उत्पन्न होता है। उत्पन्न धारा के प्रकार के आधार पर जनित्र दो प्रकार के होते हैं:
AC जनित्र (प्रत्यावर्तित्र): इसमें स्लिप रिंग और ब्रश होते हैं, और यह प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करता है। विद्युत संयंत्रों में अधिकांश जनित्र AC प्रकार के होते हैं, क्योंकि AC को उच्च वोल्टता पर संचारित करना आसान और किफायती होता है।
DC जनित्र (दिष्ट जनित्र): इसमें कम्यूटेटर होता है, जो प्रेरित धारा को एक ही दिशा में बदलकर दिष्ट धारा प्रदान करता है। रेलवे की बैटरी चार्जिंग प्रणालियों और DC विद्युत प्रणालियों में DC जनित्र उपयोग होते हैं।
ट्रांसफॉर्मर: ट्रांसफॉर्मर विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह AC वोल्टता को बढ़ाता या घटाता है, परंतु आवृत्ति को अपरिवर्तित रखता है। ट्रांसफॉर्मर में दो कुंडलियाँ होती हैं — प्राथमिक कुंडली और द्वितीयक कुंडली — जो लोहे के क्रोड पर लिपटी होती हैं। वोल्टता और फेरों का संबंध:
Vₚ/Vₛ = Nₚ/Nₛ
जहाँ Vₚ प्राथमिक वोल्टता, Vₛ द्वितीयक वोल्टता, Nₚ प्राथमिक फेरे और Nₛ द्वितीयक फेरे हैं। यदि Nₛ > Nₚ, तो वोल्टता बढ़ती है (स्टेप-अप) और यदि Nₛ < Nₚ, तो वोल्टता घटती है (स्टेप-डाउन)। ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर कार्य करता है, DC पर नहीं, क्योंकि DC में फ्लक्स परिवर्तन नहीं होता। आदर्श ट्रांसफॉर्मर में VₚIₚ = VₛIₛ होता है।
उदाहरण 2: एक ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक कुंडली में 2000 फेरे और द्वितीयक में 100 फेरे हैं। प्राथमिक वोल्टता 1000 वोल्ट है। द्वितीयक वोल्टता ज्ञात कीजिए।
हल: Vₛ = Vₚ × Nₛ/Nₚ = 1000 × 100/2000 = 50 वोल्ट। यह स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर है।
ट्रैक्शन प्रणाली: रेलवे विद्युत इंजन में ओवरहेड तार से पैंटोग्राफ द्वारा विद्युत ली जाती है, जिसे स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर द्वारा मोटर के लिए उपयुक्त वोल्टता में बदला जाता है। फिर शक्तिशाली ट्रैक्शन मोटर पहियों को घुमाती हैं। गति नियंत्रण के लिए रिओस्टैट या थाइरिस्टर नियंत्रण उपयोग होता है। ब्रेकिंग के दौरान मोटर जनित्र की भाँति कार्य करती है, जिससे उत्पन्न विद्युत का पुनः उपयोग होता है — इसे पुनर्योजी ब्रेकिंग कहते हैं।
फ्यूज (Fuse): फ्यूज तार निम्न गलनांक वाली मिश्रधातु का बना होता है। जब परिपथ में अधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार में जूल की ऊष्मा से तार पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है, जिससे उपकरण और वायरिंग सुरक्षित रहते हैं। फ्यूज को मुख्य परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर): MCB एक सुरक्षा स्विच है जो अधिक धारा या लघु परिपथ की स्थिति में स्वचालित रूप से परिपथ को बंद कर देता है। फ्यूज की तुलना में MCB का लाभ यह है कि इसे बदलने की आवश्यकता नहीं होती, केवल रीसेट करना होता है। रेलवे स्टेशनों और सिग्नल प्रणालियों में MCB का व्यापक उपयोग होता है।
घरेलू वायरिंग में विद्युतचुंबकीय उपकरण: घरेलू वायरिंग में उपकरण समानांतर में जोड़े जाते हैं। ऊर्जा मीटर खपत मापता है, मुख्य स्विच और फ्यूज सुरक्षा प्रदान करते हैं, तथा प्रत्येक परिपथ में तीन तार होते हैं — लाइव, न्यूट्रल और अर्थ। अर्थ तार उपकरणों की धातु बॉडी को भूमि से जोड़ता है, जिससे विद्युत झटकों से सुरक्षा मिलती है।
| गुण | मोटर | जनित्र | ट्रांसफॉर्मर |
|---|---|---|---|
| ऊर्जा परिवर्तन | विद्युत → यांत्रिक | यांत्रिक → विद्युत | वोल्टता परिवर्तन |
| सिद्धांत | चुंबकीय बल | प्रेरण | प्रेरण |
| धारा प्रकार | DC या AC | DC या AC | केवल AC |
| नियम | वाम हस्त | दक्षिण हस्त | Vₚ/Vₛ = Nₚ/Nₛ |
| प्रकार | फेरों का संबंध | वोल्टता | उपयोग |
|---|---|---|---|
| स्टेप-अप | Nₛ > Nₚ | बढ़ती है | विद्युत संचरण |
| स्टेप-डाउन | Nₛ < Nₚ | घटती है | वितरण, उपभोक्ता |
| आदर्श | VₚIₚ = VₛIₛ | - | शक्ति स्थिर |
flowchart TD
A[मोटर जनित्र और अनुप्रयोग] --> B[विद्युत मोटर]
A --> C[जनित्र]
A --> D[ट्रांसफॉर्मर]
A --> E[सुरक्षा उपकरण]
A --> F[रेलवे अनुप्रयोग]
B --> B1[विद्युत से यांत्रिक]
B --> B2[कम्यूटेटर, ब्रश]
C --> C1[AC जनित्र]
C --> C2[DC जनित्र]
D --> D1[स्टेप-अप]
D --> D2[स्टेप-डाउन]
E --> E1[फ्यूज]
E --> E2[MCB]
F --> F1[ट्रैक्शन मोटर]
F --> F2[पुनर्योजी ब्रेकिंग]
Vₚ/Vₛ = Nₚ/Nₛ क्रम को गलत करना।Vₚ/Vₛ = Nₚ/Nₛ से वोल्टता और फेरों के प्रश्न हल करने का अभ्यास करें।मोटर, जनित्र और ट्रांसफॉर्मर विद्युतचुंबकत्व के व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। इस अध्याय में हमने विद्युत मोटर की संरचना और उसके कार्य सिद्धांत को समझा, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल युग्म के कारण घूर्णन होता है। जनित्र के AC और DC प्रकारों तथा विद्युतचुंबकीय प्रेरण द्वारा विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया का अध्ययन किया। ट्रांसफॉर्मर के स्टेप-अप और स्टेप-डाउन प्रकारों तथा Vₚ/Vₛ = Nₚ/Nₛ सूत्र की सहायता से वोल्टता परिवर्तन की गणना सीखी। फ्यूज और MCB जैसे सुरक्षा उपकरणों तथा घरेलू वायरिंग की सुरक्षा व्यवस्था को समझा। रेलवे की ट्रैक्शन प्रणाली, विद्युत इंजनों और सिग्नलिंग में इन सभी उपकरणों का व्यापक उपयोग है। इन अवधारणाओं की गहरी समझ रेलवे तकनीशियन के लिए उपकरणों के सही संचालन, रखरखाव और दोष निवारण में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।